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संरक्षित वन क्षेत्र का एक किमी दायरा इको सेंसिटिव जोन, निर्माण व खनन पर रोक
January 19, 2026 | 231 Views
संरक्षित वन क्षेत्र का एक किमी दायरा इको सेंसिटिव जोन, निर्माण व खनन पर रोक

(रांची ऋषभ राजा) झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस एसएन प्रसाद की खंडपीठ में वन्य अभ्यारण्य के आसपास खनन की दूरी कम के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई

 झारखंड हाई कोर्ट का आदेश

सुनवाई के बाद अदालत ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया है कि वह संरक्षित वन की सीमा से एक किलोमीटर के दायरे में पत्थर खदानों और क्रशर के लिए कोई नई अनुमति न दें.

यदि ऐसी कोई सहमति पहले ही दे दी गई है, तो प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को तत्काल इसका सर्वे करके पहले से दी गई अनुमतियों की सूची कोर्ट में पेश करनी होगी, ताकि कोर्ट आगे के आदेश पर विचार कर सके.

प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को एक किलोमीटर के बफर जोन में अवैध खनन या क्रशर संचालन पर लगातार नजर रखने का भी निर्देश दिया गया है. मामले में अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी. इसको लेकर पूर्व वन अधिकारी आनंद कुमार ने हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है.

सुनवाई के दौरान कहा गया कि दिसंबर 2015 को जारी एक अधिसूचना संरक्षित वन के आसपास पत्थर खदान और क्रशर लगाने की न्यूनतम दूरी को 500 मीटर से घटाकर 250 मीटर कर दिया है .

बोर्ड ने अदालत को बताया कि 2015 की अधिसूचना अब पुरानी हो चुकी है और 18 अक्टूबर 2017 की अधिसूचना में संरक्षित या आरक्षित वन से न्यूनतम दूरी 250 मीटर ही निर्धारित है .

इसके बाद पीठ ने गौर किया कि प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड का यह नियम सुप्रीम कोर्ट के टीएन गोदावर्मन थिरुमुलपद बनाम भारत सरकार के निर्णय से सीधे टकराता है. सुप्रीम कोर्ट ने उस मामले में निर्देश दिया था कि प्रत्येक संरक्षित वन राष्ट्रीय उद्यान या वन्यजीव अभयारण्य के लिए उसकी सीमा से कम से कम एक किलोमीटर का इको- सेंसिटिव जोन होना चाहिए . 

पीठ ने कहा कि प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड का संरक्षित वन की सीमा से केवल 250 मीटर की दूरी तय करना प्रथम दृष्टया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन प्रतीत होता है .

बोर्ड यह समझाने में असमर्थ रहा है कि एक किलोमीटर के बफर जोन के मानदंड को दरकिनार करके केवल 250 मीटर की दूरी पर सहमति कैसे दी जा सकती है. इसके बाद कोर्ट ने कहा कि झारखंड राज्य में किसी भी संरक्षित वन की सीमा से एक किलोमीटर के दायरे में पत्थर खनन या स्टोन क्रशर के लिए कोई नई सहमति नहीं दी जाएगी.

अदालत ने कहा कि प्रदूषण कंट्रोल के सदस्य सचिव को इस आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने होंगे .

 

 


January 19, 2026 | 232 Views
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