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भाजपा पहले अपनी दोहरी नीति, परिवारवाद और सत्ता के दुरुपयोग पर जवाब दे -JMM
January 20, 2026 | 135 Views
भाजपा पहले अपनी दोहरी नीति, परिवारवाद और सत्ता के दुरुपयोग पर जवाब दे -JMM

रांची। जेएमएम महासचिव विनोद पांडेय ने प्रेस रिलीज जारी कर कहा भाजपा नेता का बयान न सिर्फ़ तथ्यों से परे है, बल्कि भाजपा की दोहरे मापदंड वाली राजनीति को भी बेनकाब करता है। जब झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन वैश्विक मंच पर राज्य के लिए निवेश लाने जाते हैं, तो भाजपा को वह “पर्यटन यात्रा” दिखती है। लेकिन जब भाजपा शासित राज्यों के मंत्री और उनके परिवार दावोस में समझौते करते हैं, तब वही काम “विकास का मॉडल” बन जाता है।

भाजपा को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि महाराष्ट्र की भाजपा सरकार ने दावोस में लोढ़ा डेवलपर्स लिमिटेड के साथ निवेश का जो प्रारंभिक समझौता किया है, उस पर उनकी क्या राय है? यही नहीं, चार महीने पहले इसी कंपनी के साथ एक एमओयू भी साइन किया गया था।

अब ज़रा सच्चाई पर भी नज़र डालिए—
लोढ़ा डेवलपर्स के मालिक मंगल प्रभात लोढ़ा, महाराष्ट्र सरकार में भाजपा के मंत्री हैं (कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय)। और दावोस में महाराष्ट्र सरकार के साथ एमओयू पर दस्तखत कर रहे हैं उनके बेटे अभिषेक लोढ़ा।
तो सवाल यह है—
क्या यह पर्यटन नहीं है?
क्या यह हितों का टकराव नहीं है?
या फिर भाजपा के लिए दावोस केवल तब गलत होता है जब वहां गैर-भाजपा मुख्यमंत्री मौजूद हो?

भाजपा नेता टाटा और इंफोसिस के पते गिनाने से पहले यह भी बताएं कि क्या वैश्विक कंपनियों के फैसले आज सिर्फ़ गली-मोहल्ले की बैठकों में होते हैं? दावोस जैसे मंच पर निवेश का मतलब होता है ग्लोबल स्ट्रैटेजी, सप्लाई चेन, इंटरनेशनल कमिटमेंट और लॉन्ग टर्म पार्टनरशिप—जिसे भाजपा या तो समझना नहीं चाहती, या जानबूझकर नजरअंदाज कर रही है।

उन्होंने कहा कि -  जब झारखंड के मुख्यमंत्री दुनिया के सामने राज्य की संभावनाएं रखते हैं, तो भाजपा को जलन होती है। लेकिन जब उनके अपने मंत्री का परिवार दावोस में समझौता करते हैं, तब भाजपा को न नैतिकता याद आती है, न सिद्धांत।

महासचिव पांडेय ने कहा जहां तक एमएसएमई और स्थानीय उद्योगों की बात है—झामुमो सरकार ने ही पहली बार नीतिगत सुधार, निवेश नीति और औद्योगिक प्रोत्साहन को जमीनी स्तर तक पहुंचाया है। और यही कारण है कि आज झारखंड वैश्विक निवेश मानचित्र पर दिखाई दे रहा है।

अंत में भाजपा से बस इतना सवाल है—
अगर दावोस में झारखंड का जाना अपराध है,
तो दावोस में महाराष्ट्र का जाना पुण्य कैसे हो गया?

भाजपा पहले अपनी दोहरी नीति, परिवारवाद और सत्ता के दुरुपयोग पर जवाब दे, फिर झारखंड के मुख्यमंत्री पर उंगली उठाए। झारखंड को अब ट्रोल नहीं, वैश्विक पहचान चाहिए—और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन वही कर रहे हैं।


January 20, 2026 | 136 Views
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