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सरकार की नाकामी के बीच ग्रामीणों ने दिखाई अनोखी मिसाल, 8 करोड़ का पुल टूटा तो खुद बनाया मिट्टी का पुल
November 21, 2025 | 723 Views
सरकार की नाकामी के बीच ग्रामीणों ने दिखाई अनोखी मिसाल, 8 करोड़ का पुल टूटा तो खुद बनाया मिट्टी का पुल

सोनाहातू।तामाड़ विधानसभा और सिल्ली विधानसभा को जोड़ने वाला लगभग 8 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित महत्वपूर्ण पुल अब पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। यह पुल सोनाहातू, गोमियाडीह, डिम्बुजार्दा, तामाड़ सहित कई गांवों के लिए जीवन रेखा जैसा था, क्योंकि यही मार्ग ग्रामीणों को मुख्य बाजार, सरकारी सेवाओं, अस्पताल और स्कूलों तक जोड़ता था।

पुल के अचानक टूट जाने के बाद इन गांवों के हजारों लोगों की दिनचर्या मानो रुक-सी गई। लोगों को काम पर जाने, बच्चों को स्कूल पहुंचाने और मरीजों को इलाज के लिए ले जाने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कई बार लोगों को अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए 14-16 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ा, जिससे समय, पैसा और ऊर्जा – तीनों की भारी बर्बादी हुई।

ग्रामीणों का आरोप है कि पुल ध्वस्त होने के बाद प्रशासन और सरकार ने स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया। कई बार शिकायतें और निवेदन किए गए, परंतु पुल की मरम्मत या पुनर्निर्माण की कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। सरकारी विभागों की इस लगातार नाकामी और उदासीनता ने ग्रामीणों की परेशानियों को और बढ़ा दिया।

इसी कठिन परिस्थिति के बीच गांववालों ने एकजुट होकर वह कर दिखाया जिसकी किसी ने उम्मीद नहीं की थी। आपसी सहयोग और श्रमदान की मिसाल पेश करते हुए ग्रामीणों ने मात्र 2 लाख रुपये की लागत में एक मिट्टी का पुल तैयार कर दिया। इस पुल के निर्माण में बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक—सभी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

10 दिनों की अथक मेहनत के बाद तैयार हुआ यह अस्थायी मिट्टी का पुल अब एक बार फिर से लोगों की राह आसान कर रहा है। आवागमन शुरू हो गया है, जिससे स्कूल, अस्पताल और बाजार तक पहुंचना पहले की तुलना में बेहद सरल हो गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि अगर उन्होंने खुद पहल न की होती, तो शायद कई और महीनों तक मुश्किलें झेलनी पड़तीं। उन्होंने यह भी मांग की है कि सरकार जल्द से जल्द स्थायी और मजबूत पुल का निर्माण कराए, ताकि भविष्य में ऐसी समस्या न आए।


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