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सोनाहातू में बच्चों के निवाले पर डाका! मध्याह्न भोजन की जगह थमाया जा रहा 5 रुपये का मिक्चर पैकेट
July 1, 2026 | 1045 Views
सोनाहातू में बच्चों के निवाले पर डाका! मध्याह्न भोजन की जगह थमाया जा रहा 5 रुपये का मिक्चर पैकेट

सोनाहातू: सरकार की महत्वाकांक्षी मध्याह्न भोजन योजना का उद्देश्य सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराकर कुपोषण दूर करना और स्कूलों में उनकी नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना है। लेकिन सोनाहातू प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय कुदाडीह से सामने आई तस्वीरें इस योजना की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।

आरोप है कि विद्यालय में बच्चों को निर्धारित मेन्यू के अनुसार गर्म और ताजा भोजन देने के बजाय मात्र 5 रुपये का मिक्चर (नमकीन) का पैकेट वितरित किया जा रहा है। जिस योजना के तहत बच्चों को दाल, चावल, हरी सब्जियां, दाल, अंडा एवं अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ मिलने चाहिए, वहां बच्चों के हाथों में सिर्फ एक छोटा सा पैकेट थमा दिया जा रहा है।

विद्यालय के कई बच्चों ने बताया कि दोपहर में मिलने वाला यह मिक्चर उनके पेट की भूख नहीं मिटा पाता। बच्चों का कहना है कि उन्हें घर लौटकर फिर से खाना खाना पड़ता है। मासूम बच्चों की यह पीड़ा इस योजना के उद्देश्य पर ही सवाल खड़ा करती है।

दूसरी ओर, अभिभावकों और ग्रामीणों में इस मामले को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि सरकार बच्चों के पोषण पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन विद्यालय स्तर पर लापरवाही और कथित अनियमितताओं के कारण बच्चों को उनका अधिकार नहीं मिल रहा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यदि वास्तव में मध्याह्न भोजन के लिए राशि जारी हो रही है, तो उसका उपयोग आखिर कहां हो रहा है?

ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी बच्चे के अधिकारों के साथ खिलवाड़ न हो।

गौरतलब है कि मध्याह्न भोजन योजना के नियमों के अनुसार बच्चों को प्रतिदिन गर्म, ताजा और पौष्टिक पका हुआ भोजन उपलब्ध कराना अनिवार्य है। किसी भी परिस्थिति में नियमित भोजन के स्थान पर नमकीन या मिक्चर का पैकेट वितरित करना योजना की भावना और निर्धारित मानकों के विपरीत माना जाता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बच्चों के पोषण के नाम पर चल रही सरकारी योजना सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएगी? क्या मासूमों के हिस्से का भोजन इसी तरह गायब होता रहेगा? और आखिर बच्चों के निवाले पर डाका डालने वालों पर कार्रवाई कब होगी?

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग से इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने और विद्यालय में नियमित रूप से गुणवत्तापूर्ण मध्याह्न भोजन सुनिश्चित करने की मांग की है।


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