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मानसून सत्र में PESA लागू किया जाए- झारखंड जनाधिकार महासभा
July 24, 2025 | 585 Views
 मानसून सत्र में PESA लागू किया जाए- झारखंड जनाधिकार महासभा

रांची।  मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में झारखंड सरकार के कैबिनेट की बैठक होनी है. बैठक के पूर्व झारखंड जनाधिकार महासभा ने मुख्यमंत्री के नाम एक सार्वजानिक पत्र जारी करके मांग किया है कि विधान सभा के आगामी मानसून सत्र में PESA पूर्ण रूप से लागू किया जाये.

पत्र के माध्यम से महासभा ने मुख्यमंत्री को याद दिलाया है कि 2024 विधान सभा चुनाव में राज्य के आदिवासी-मूलवासियों ने अबुआ राज की स्थापना के लिए INDIA गठबंधन को स्पष्ट बहुमत दिया था. लेकिन सरकार ने अबुआ राज की स्थापना के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण PESA को अभी तक पूर्ण रूप से लागू नहीं किया है. महासभा समेत राज्य के कई संगठन पिछले कुछ सालों से लगातार PESA लागू करने की मांग करते रहे हैं. गठबंधन दलों ने चुनाव में वादा भी किया था. लेकिन इस ओर राज्य सरकार अत्यंत उदासीन है जो झारखंडियों के भावनाओं के साथ धोखा है.

महासभा ने पत्र में PESA लागू करने की प्रक्रिया पर भी ध्यान केन्द्रित किया है. संवैधानिक व्यवस्था अनुसार PESA के प्रावधान राज्य के पंचायत राज कानून से ही लागू हो सकते हैं, लेकिन झारखंड पंचायत राज अधिनियम, 2001 (JPRA) में PESA के अधिकांश प्रावधान सम्मिलित नहीं है. इसलिए PESA को पूर्ण रूप से लागू करने के लिए सबसे पहले PESA के सभी अपवादों और उपान्तरणों अनुरूप JPRA को संशोधित कर सभी प्रावधानों को जोड़ने की ज़रूरत है. इसके बाद ही, इन प्रावधानों अनुरूप PESA नियमावली का गठन किया जाना है. लगातार जन दबाव के बाद सरकार द्वारा 9 मई 2025 को PESA नियमावली का ड्राफ्ट सार्वजनिक किया गया और एक महीने में सुझाव आमंत्रित किये गए. महासभा ने JPRA में आवश्यक संशोधनों व प्रस्तावित नियमावली में संशोधनों के सुझावों को विभागीय मंत्री, अन्य  मंत्रियों व विभाग को कई बार दिया है. अन्य कई संगठनों ने भी सुझाव दिया है. 

महासभा ने मुख्यमंत्री को वर्तमान स्थिति को भी याद दिलाया है. JPRA में संशोधन और PESA विषयक नियमावली में विलम्ब से पारंपरिक स्वशासन और ग्राम सभा अधिकार अति सीमित बने रहेंगे.  नौकरशाहों के हाथों में शक्तियां सिमटी रहेंगी. राज्य के नौकरशाही का मूल रवैया झारखंडी जनों और हितों के प्रति असंवेदनशील है. अगर इसे बदला न जाये, तो जनाकांक्षाओं के अनुकूल कार्यों की उपेक्षा होती रहेगी और जन असंतोष गहराता जाएगा. 

इस परिप्रेक्ष में महासभा मुख्यमंत्री से मांग की है कि PESA को पूर्ण रूप से लागू करने के लिए 2025 मानसून सत्र में JPRA को संशोधित किया जाये एवं PESA नियमावली को सभी प्राप्त जन सुझावों को सम्मिलित करते हुए अधिसूचित किया जाये. इसके बाद अगले 6 महीने में अन्य सम्बंधित कानूनों जैसे Jharkhand Rights to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Rules, 2015, झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 आदि में PESA अनुरूप संशोधन किया जाये.

_महासभा की ओर से पत्र जारी करने वालों की सूचि - अफज़ल अनीस, अलोका कुजूर, अमन मरांडी, अम्बिका यादव, अम्बिता किस्कू, अपूर्वा, अशोक वर्मा, बासिंग हस्सा, भरत भूषण चौधरी, बिरसिंग महतो, चार्लेस मुर्मू, चंद्रदेव हेम्ब्रम, डेमका सॉय, दिनेश मुर्मू, एलिना होरो, जेम्स हेरेंज, जॉर्ज मोनिपल्ली, ज्यां द्रेज़, ज्योति बहन, ज्योति कुजूर, कुमार चन्द्र मार्डी, लीना,  मंथन, मनोज भुइयां, मेरी हंसदा, मुन्नी देवी, मीना मुर्मू, नरेश पहाड़िया, प्रवीर पीटर, प्रेम बबलू सोरेन, पी एम टोनी, प्रियाशीला बेसरा, नन्द किशोर गंझू, परन, प्रवीर पीटर, रिया तुलिका पिंगुआ, राजा भाई, रंजीत किंडो, रमेश जेराई, रोज खाखा, रोज मधु तिर्की, रमेश मलतो, रेजिना इन्द्वर, रेशमी देवी, राम कविन्द्र, संदीप प्रधान, संगीता बेक, सिराज दत्ता, शशि कुमार, संतोषी लकड़ा, सिसिलिया लकड़ा, शंकर मलतो, टॉम कावला, टिमोथी मलतो, विनोद कुमार, विवेक कुमार सहित अन्य।


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