रांची। विगत दिनों रांची कोकर के भाभा नगर में आदिवासी महिलाओं से कथित रूप से कालिख पोत कर पूरे मोहल्ले में घूमाने दुर्व्यवहार पर जनजाति सुरक्षा मंच ने कड़ा विरोध किया मामले को लेकर मंच के प्रदेश मिडिया प्रभारी सोमा उरांव ने कहा कि इस मामले की जितनी भी निंदा की जाए कम है मानवता को शर्मसार करने वाला यह हरकत है , कानून को हाथ में लेने के लिए किसी को भी खुली छूट नही मिलन चाहिए तत्काल आरोपियों की गिरफ्तारी हो और कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो , सभी आरोपितों का सामाजिक बहिष्कार हो तब जाकर समझ में आएगा कि इस तरीका का हरकत लोग ना करें सन्नी टोप्पो ने कहा की यह मामला के सामने आने से पूरे आदिवासी समाज को शर्मिंदगी महसूस कराने वाली स्थिति पैदा की गई है हेमंत सोरेन के राज में लगातार आदिवासियों के साथ शोषण अत्याचार बढ़ रहा है ,सरकारी तंत्र फेल है ।
रांची। हर वर्ष के भांति इस वर्ष भी चैत पूर्णिमा 2 अप्रैल 2026 को महाराजा मदरा मुंडा सेवा संस्थान न्यास ट्रस्ट की ओर से सुतियांबे गढ़ पिठोरिया( परगना)में महाराजा मदरा मुंडा के जन्म जयंती के शुभ अवसर पर प्रदीप पहान के नेतृत्व में विधि विधान बाजे गाजे के साथ कंपार्ट में भेड़ा ,मुड़हर पहाड़ मरांगबुरू में बकरा एवं नव मुर्गे की बली जिसमें से एक रंगीली मुर्गी का बली लूटकुम हड़ाम, लूटकूम बुढ़ही/ पिलचु हड़ाम,पिलचु बुढ़ही में दिया । और सभी पूजा स्थलों पर विधि-विधान से पूजा की जाएगी। गढ़बारी मैं स्थापित महाराजा मदरा मुंडा की प्रतिमा पर बाजे गाजे के साथ प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। साथी साथ मुड़हर पहाड़ के नीचे स्थापित भगवान बिरसा मुंडा , महाराजा मदरा मुंडा,रिसा मुंडा एवं सुतिया मुंडा की प्रतिमाओं पर पूजा एवं माला अर्पण की गई। इस कार्यक्रम में अगल-बगल गांव के अलावा दूर-दराज से भी समाज की अगुवागण सभी जनजाति एवं मूलवासी शामिल हुए एवं प्रसाद ग्रहण कर महादेव का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस शुभ अवसर पर समाज के कई गन्य मान्य एवं बुद्धिजीवी गण उपस्थित रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्था के अध्यक्ष वीणा मुंडा, सर्रक्षक पहलवान मुंडा, सोमा उरांव, महेश्वर पहान, रवि पहान, विमल पहान, प्रेम पहान, मोहित पहान, सुनील पहान, रोहित पहान, विश्वकर्मा पहान,परना उराँव, शेखर पहान, झालो मुंडा, बीना देवी, रुक्मिणी देवी, व अन्य गन्य मान्य उपस्थित थे।
रांची। वित्तीय वर्ष 2025-26 का समापन हो गया है. इस वित्तीय वर्ष के आखिरी दिन सरकारी खजाने से करीब 3,616 करोड़ रुपये की निकासी हुई, जबकि पूरे मार्च महीने में करीब 19 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए.
हालांकि सरकार के विभाग राजस्व वसूली में लक्ष्य से काफी पीछे रहे. जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार अपने कुल बजट का सिर्फ 80 प्रतिशत ही खर्च कर सकी, जिसके चलते करीब 29 हजार करोड़ रुपये सरेंडर करने पड़े. हालांकि खर्च और राजस्व संग्रह का विभागवार आकलन किया जा रहा है, जो जल्द ही वित्त विभाग द्वारा जारी किया जाएगा.
मंत्री राधाकृष्ण किशोर और बीजेपी प्रवक्ता का बयान
योजना मद की करीब 80 प्रतिशत राशि खर्च
इन सबके बीच वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने उम्मीद जताते हुए कहा है कि योजना मद की करीब 80 प्रतिशत राशि खर्च हुई है और यदि केंद्र सरकार सहयोग करती तो हम बजट के अनुरूप खर्च कर लेते. उन्होंने कहा कि बजट में राजस्व संग्रह अनुमान आधारित होते हैं, जिसमें केंद्रांश और राज्य मद शामिल है. हमें करीब 13,000 करोड़ अनुदान और टैक्स में राज्य का हिस्सा मद में नहीं प्राप्त हुआ है.
बीजेपी ने उठाए सवाल
इधर, बजट के अनुरूप राशि खर्च नहीं होने पर प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि भारी-भरकम बजट बनाकर जनता को भ्रमित करने का काम यह सरकार करती रही है. पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा ने कहा कि बजट बनाने से पहले सरकार को सोचना चाहिए कि राजस्व कहां से आएगा और कितना हम खर्च कर पाएंगे. केंद्र से मिली राशि को भी राज्य सरकार खर्च नहीं कर पा रही है, इस वजह से राज्य में विकास का काम ठप पड़ा हुआ है, जिसका सीधा असर जनता पर पड़ रहा है.
सेस की वजह से खान विभाग में रिकॉर्ड राजस्व प्राप्ति
वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान राजस्व वसूली में राज्य सरकार के कुछ विभागों ने बेहतरीन काम किया है. माइंस एरिया में सेस और कोयले की कमर्शियल दर पर रॉयल्टी से खान विभाग ने 2025-26 में रिकॉर्ड 18,508 करोड़ रुपये की वसूली की है, जो संयुक्त बिहार और झारखंड गठन से लेकर अब तक का सर्वाधिक राजस्व है. अकेले राज्य सरकार को सेस से 7,454.30 करोड़ रुपये मिले हैं, वहीं खनिजों पर रॉयल्टी से 11,054.27 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं.
शराब से भी भरपूर कमाई
खान विभाग के बाद राज्य सरकार को शराब से भी भरपूर कमाई हुई है. जानकारी के मुताबिक उत्पाद विभाग ने पिछले वर्ष की तुलना में राजस्व में 1,310 करोड़ से अधिक की बढ़ोतरी की है. इसके तहत विभाग को 30 मार्च तक 4,020 करोड़ रुपये राजस्व मिला है, जो लक्ष्य से 135 करोड़ अधिक है.
बात यदि परिवहन विभाग की करें तो इस विभाग ने 2,196.66 करोड़ रुपये राजस्व वसूली की है, जो पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 से 282 करोड़ अधिक है.
वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए एक लाख 45 हजार 400 करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया था, जिसमें महिला एवं बाल विकास पर सबसे अधिक 22 हजार 23 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे. राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई मैया सम्मान योजना के लिए 13 हजार 363 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे.
साहिबगंज (तीनपहाड़): विकास के दावों की पोल खोलती एक गंभीर तस्वीर तेतुलिया गांव से सामने आई है। किसानों की सुविधा के लिए बनाई गई तेतुलिया पुलिया महज एक वर्ष के भीतर ही जर्जर होकर ‘सफेद हाथी’ साबित हो रही है। घटिया निर्माण सामग्री और प्रशासनिक लापरवाही के कारण यह पुलिया अब बड़े हादसे को निमंत्रण देती दिख रही है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
भ्रष्टाचार की दरारें और गायब सुरक्षा
करीब एक वर्ष पहले बनी यह पुलिया क्षेत्र के किसानों के लिए जीवनरेखा मानी जा रही थी, लेकिन अब इसकी स्थिति बेहद खराब हो चुकी है।
- पुलिया में जगह-जगह गहरी दरारें उभर आई हैं।
- सुरक्षा के लिए लगाए गए लोहे के बैरियर (पाइप) रहस्यमय तरीके से गायब हो चुके हैं।
- ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में भारी वित्तीय अनियमितता हुई है और प्रशासन इस पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए है।
ग्रामीणों की तीखी प्रतिक्रिया
ग्रामीणों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ रहा है:
- अनंत साह: “यह साफ तौर पर घोटाला है, उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।”
- बाबूराम सोरेन: “सरकारी संपत्ति की चोरी हो रही है, पुलिस को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।”
- किशन साह (किसान): “एक साल में पुलिया का जर्जर होना हमारे जीवन के साथ मजाक है, खेती के लिए जान जोखिम में डालनी पड़ रही है।”
मुआवजे का विवाद भी बना मुद्दा
मामला केवल भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं है।
- स्थानीय निवासी बबलू सोरेन का दावा है कि पुलिया उनकी निजी जमीन पर बनाई गई।
- निर्माण के बावजूद अब तक उन्हें कोई मुआवजा नहीं मिला, जिससे विवाद और गहरा गया है।
- प्रशासन से ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन होगा। उनकी मांगें:
- पुलिया की निष्पक्ष तकनीकी जांच
- दोषियों पर कड़ी कार्रवाई
- क्षतिग्रस्त पुलिया की तुरंत मरम्मत
- चोरी हुए लोहे के पाइप की बरामदगी और दोषियों की गिरफ्तारी
- प्रभावित जमीन का उचित मुआवजा भुगतान
रांची। संयुक्त ट्रेड यूनियन मंच, झारखंड (रांची) के आह्वान पर आज 1 अप्रैल 2026 को रांची में मजदूर विरोधी चार श्रम संहिताओं के खिलाफ “काला दिवस” कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। कार्यक्रम को संयुक्त किसान मोर्चा का समर्थन भी प्राप्त था।
आज शाम 5 बजे अल्बर्ट एक्का चौक, रांची में बड़ी संख्या में मजदूरों, कर्मचारियों, ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने एकत्र होकर केंद्र सरकार की श्रम-विरोधी नीतियों के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने काले बैज और काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया तथा नारेबाजी और सभा के माध्यम से चारों श्रम संहिताओं को वापस लेने की मांग उठाई।
सभा को संबोधित करते हुए विभिन्न ट्रेड यूनियन नेताओं ने कहा कि ये श्रम संहिताएँ श्रमिकों के वर्षों के संघर्ष से हासिल अधिकारों को कमजोर करती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कानूनों के माध्यम से कार्य समय को बढ़ाने, यूनियन बनाने के अधिकार को सीमित करने, हड़ताल के अधिकार को समाप्त करने, परमानेंट काम में ठेका आउटसोर्सिंग को बढ़ावा देने एवं वेतन तथा सामाजिक सुरक्षा को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार द्वारा इन संहिताओं को लागू करने की जल्दबाजी कॉरपोरेट के हित में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और श्रमिक हितों की अनदेखी को दर्शाती है। उन्होंने मांग की कि चारों श्रम संहिताओं को तत्काल वापस लिया जाए और श्रमिक संगठनों के साथ व्यापक परामर्श किया जाए।
इसके साथ ही वक्ताओं ने किसानों और खेत मजदूरों से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने बिजली संशोधन विधेयक और बीज विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि ये कानून किसानों को कॉरपोरेट कंपनियों पर निर्भर बनाने और कृषि पर उनका नियंत्रण कमजोर करने की दिशा में उठाए गए कदम हैं। साथ ही उन्होंने मनरेगा (MGNREGS) में काम की गारंटी को कमजोर करने और ग्रामीण रोजगार के अवसरों में कटौती पर गंभीर चिंता व्यक्त की, जिससे खेत मजदूरों की आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉमरेड शुभेंदु सेन ने की। सभा को एटक के पंकज कुमार और सरिता देवी, एआईसीसीटीयू के भीम साहू, अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के गोपाल शरण सिंह, आईसा से त्रिलोकी नाथ, बेफ के एम एल सिंह, किसान सभा के मदुआ कच्छप, खेत मजदूर यूनियन के बीरेंद्र कुमार तथा सीटू के प्रतीक मिश्रा, हरेंद्र यादव और भवन सिंह ने संबोधित किया।
कार्यक्रम में यह संकल्प लिया गया कि यदि सरकार इन मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो आने वाले समय में संघर्ष को और तेज किया जाएगा। जरूरत पड़ी तो कई दिनों की हड़ताल का आह्वान किया जाएगा।
रांची। 23 मार्च को शहीद भगत सिंह के शहादत दिवस और डॉ. राममनोहर लोहिया के जयंती के अवसर पर झारखंड प्रदेश वैश्य मोर्चा द्वारा आरक्षण बढ़ाओ-रोजगार दो सम्मेलन का आयोजन किया गया. सम्मेलन रांची के रेडियम रोड़ स्थित आलोका सभागार में किया गया. इस सम्मेलन में रांची, हजारीबाग, रामगढ़, चतरा, लोहरदगा, लातेहार एवं खूंटी जिला के लोग शामिल हुए. इस सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय अध्यक्ष महेश्वर साहु ने किया, जबकि संचालन प्रधान महासचिव बीरेन्द्र कुमार एवं उप प्रधान महासचिव अशोक गुप्ता ने संयुक्त रूप से किया. सर्वप्रथम केंद्रीय अध्यक्ष महेश्वर साहु, वरीय उपाध्यक्ष अश्विनी कुमार साहु आदि ने दीप जला कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया. फिर सभी लोगों दोनों महापुरुषों के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी. तत्पश्चात सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय अध्यक्ष महेश्वर साहु ने कहा कि दोनों महान सपूत वैश्य मोर्चा के आदर्श हैं और उनके विचारों को ही आत्मसात कर आगे बढ़ा जा रहा है. शहीद भगत सिंह ने जहाँ देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी, वहीं डॉ. राममनोहर लोहिया ने ओबीसी, पिछड़े वर्ग के लिए देश की संसद में आवाज बुलंद किया था. 'पिछड़ा पावे सौ में साठ' का नारा डॉ. लोहिया ने ही लगाया था. श्री साहु ने कहा कि झारखंड में भी वैचारिक एवं धरातल की लड़ाई की जरूरत है. हमें अपनी मांगों को लेकर धारदार आंदोलन करना है, इसके लिए तैयारी की जा रही है. जब तक वैश्य-ओबीसी को हक और मान सम्मान नहीं मिल जाता है, वैश्य मोर्चा चुप नहीं बैठेगा.
इस सम्मेलन को झारखंड प्रदेश वैश्य मोर्चा के वरीय उपाध्यक्ष अश्विनी कुमार साहु, संजीव चौधरी, केंद्रीय उपाध्यक्ष लक्ष्मण साहु, लखन अग्रवाल, केंद्रीय महासचिव चतुर साहु, मनोज कुमार मानू, शिव प्रसाद साहु, संगठन महासचिव कृष्णा साहु, अनिल वैश्य, जगदीश साहु, मुख्य प्रवक्ता रोहित कुमार साहु, केंद्रीय सचिव राजेन्द्र साहु, जिलाध्यक्ष कृष्णदेव साहु (रांची), राजकुमार केशरी (रामगढ़), महेंद्र प्रसाद साहु (हजारीबाग), युवा मोर्चा के अध्यक्ष हलधर साहु, सचिव आदित्य पोद्दार, छात्र मोर्चा के उपाध्यक्ष मनोज चौरसिया आदि ने भी संबोधित किया.
सम्मेलन में दो प्रस्ताव भी पारित किए गए. पहले प्रस्ताव में कहा गया कि अप्रैल माह के प्रथम सप्ताह में एक बार फिर मुख्यमंत्री, मंत्रियों एवं सभी सांसदों, विधायकों को मांग पत्र सौंप कर अपनी बात रखी जायेगी. दूसरे प्रस्ताव में कहा गया कि आगामी 23 अप्रैल को रामगढ़ में वैश्य कार्यकर्ता महासम्मेलन आयोजित की जायेगी और आगे की रणनीति एवं कार्यक्रम घोषित किए जाएंगे.
इस संगठन केंद्रीय महासचिव रामाशंकर राजन, सचिव बसंत प्रसाद साहु, नंदकिशोर साहु, प्रयाग साव, परितोष पोद्दार, बद्री साव, दिवाकर प्रसाद, दिलीप प्रसाद, भगवान साहु, बलराम प्रजापति, सूरज मोदी, रतनलाल साहु, सुशेन पाल, कौशल्या देवी, मुक्ता देवी, अनु कुमारी, अंजलि देवी, बबीता देवी, रूबी देवी आदि सैकड़ों लोग उपस्थित थे.
रांची/गोड्डा। झारखंड सरकार की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री एवं महागामा की विधायक दीपिका पांडेय सिंह ने आज दिनांक 22.03.2026 को मेहरमा एवं महागामा प्रखंड में विभिन्न महत्वपूर्ण विकास योजनाओं का शिलान्यास कर क्षेत्र के समग्र विकास की दिशा में एक मजबूत और प्रतिबद्ध कदम उठाया।
मेहरमा प्रखंड में प्रातः 10:00 बजे ब्लॉक परिसर में पार्क एवं पीसीसी सड़क निर्माण कार्य (प्राक्कलित राशि 1.85 करोड़ रुपये) का शिलान्यास किया गया। इसके पश्चात 10:30 बजे ब्लॉक परिसर के चहारदीवारी निर्माण कार्य (प्राक्कलित राशि 1.57 करोड़ रुपये) की आधारशिला रखी गई। इन योजनाओं से प्रशासनिक व्यवस्था सुदृढ़ होने के साथ-साथ आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
इसके बाद महागामा प्रखंड के अंतर्गत कार्यक्रमों की श्रृंखला में 11:00 बजे ग्राम पंचायत कुशमहारा में झारखंड में YHO पंचायत सशक्तिकरण ढांचा का उद्घाटन किया गया, जो पंचायत स्तर पर सशक्त शासन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
दोपहर 12:00 बजे ग्राम पंचायत लट्ठी में उन्नत सरकारी उच्च विद्यालय की चहारदीवारी निर्माण कार्य (प्राक्कलित राशि 64 लाख रुपये) का शिलान्यास किया गया, जिससे विद्यार्थियों की सुरक्षा एवं शैक्षणिक वातावरण को बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी।
इसके उपरांत 01:00 बजे ग्राम पंचायत महादेवस्थान में नए पंचायत भवन निर्माण कार्य (प्राक्कलित राशि 99.89 लाख रुपये) की आधारशिला रखी गई। यह भवन स्थानीय प्रशासनिक गतिविधियों को सुचारू बनाने के साथ ग्रामीणों के लिए एक सशक्त केंद्र के रूप में कार्य करेगा।
इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मंत्री श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि विकास केवल योजनाओं की घोषणा से नहीं, बल्कि उनके धरातल पर क्रियान्वयन से साकार होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता है कि गांव-गांव तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचे और हर नागरिक को सम्मानजनक जीवन मिले।
उन्होंने आगे कहा कि जल, सड़क, शिक्षा और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करना ही सच्चे अर्थों में ग्रामीण विकास का आधार है, और इसी संकल्प के साथ लगातार कार्य किया जा रहा है।
कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे, जिनमें विकास कार्यों को लेकर उत्साह और विश्वास स्पष्ट रूप से देखा गया।
रांची । जिले के सिल्ली प्रखंड अंतर्गत कोकालागाम गांव से एक बेहद मार्मिक और सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। कोकालगम गांव निवासी रंजीत मुंडा की सड़क दुर्घटना में मौत के लगभग दो साल बीत जाने के बाद भी उनके परिवार को अब तक किसी प्रकार की मुआवजा राशि नहीं मिल सकी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 8 अप्रैल 2024 को सिल्ली में हुए एक सड़क हादसे में रंजीत मुंडा गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए रांची स्थित RIMS अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 11 अप्रैल 2024 को इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद से परिजन लगातार न्याय और मुआवजे की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है।
मृतक के परिवार की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है। रंजीत मुंडा के दो छोटे बच्चे हैं, जिनका पालन-पोषण उनकी पत्नी सविता देवी किसी तरह दिहाड़ी मजदूरी कर कर रही हैं। परिवार के पास आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं है, जिससे रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल हो गया है।
परिजनों का आरोप है कि दुर्घटना में शामिल बोलेरो (नंबर JH05CB8989) पूर्व विधायक Sudesh Kumar Mahto की बताई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि घटना के इतने समय बाद भी न तो उन्होंने और न ही किसी अन्य जनप्रतिनिधि ने परिवार से मुलाकात की है।
इस मामले में क्षेत्र के सांसद Sanjay Seth और वर्तमान विधायक Amit Mahto पर भी परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि किसी ने न तो आर्थिक मदद दी और न ही हालचाल जानने की कोशिश की।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि 8 अप्रैल 2024 को जब वे न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे, तब सिल्ली पुलिस द्वारा उन पर लाठीचार्ज किया गया। इसके बावजूद अब तक न तो किसी पर ठोस कार्रवाई हुई और न ही परिवार को न्याय मिला।
गांव के लोगों और परिजनों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि नेता केवल चुनाव के समय वोट मांगने आते हैं, लेकिन मुश्किल की घड़ी में जनता को अकेला छोड़ देते हैं।
मृतक रंजीत मुंडा की धर्मपत्नी सविता देवी ने भावुक होकर कहा, “अगर यही घटना किसी मंत्री या नेता के परिवार के साथ होती, तो क्या उनके साथ भी ऐसा ही व्यवहार किया जाता? हम सिर्फ न्याय और अपने बच्चों के भविष्य के लिए मदद मांग रहे हैं।”
अब बड़ा सवाल यही है कि क्या आम जनता को न्याय के लिए यूं ही दर-दर भटकना पड़ेगा, या प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस मामले में कोई ठोस पहल करेंगे?
कल्याणचक (साहिबगंज): जिले के कल्याणचक क्षेत्र स्थित सबडरा में रेलवे की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहाँ कभी रेलवे फाटक हुआ करता था, जिसे हटाकर रेलवे ने यातायात सुगम बनाने के लिए अंडरपास (रेलवे पुल) का निर्माण किया। लेकिन यह अंडरपास अब स्थानीय लोगों के लिए सुविधा कम और मुसीबत ज्यादा साबित हो रहा है।
अंडरपास या स्विमिंग पूल?
अंडरपास में जलजमाव की स्थिति ऐसी है कि लोग इसे अब मजाक में 'छोटी गंगा' कहने लगे हैं। पानी निकासी की कोई व्यवस्था न होने के कारण यहाँ हमेशा घुटनों तक पानी भरा रहता है। आलम यह है कि राहगीरों को मजबूरन इसी गंदे पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी के कारण यह पुल अब केवल नहाने और जलक्रीड़ा के काम आ रहा है।
राजमहल सांसद विजय कुमार हांसदा का आश्वासन: "जल्द निकलेगा समाधान"
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब राजमहल लोकसभा क्षेत्र के माननीय सांसद विजय कुमार हांसदा तक यह सूचना पहुँची, तो उन्होंने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। सांसद विजय कुमार हांसदा ने कहा है कि:
वे इस समस्या को लेकर रेलवे के उच्च अधिकारियों से निरंतर संपर्क में हैं।प्राथमिकता इस बात को दी जा रही है कि जलजमाव का स्थायी समाधान जल्द से जल्द निकाला जाए।उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि वर्तमान ढाँचे में सुधार संभव नहीं हुआ, तो अन्य विकल्पों पर विचार किया जाएगा।जनता के मन में संशय सांसद ने 'दूसरे उपाय' की बात तो की है, लेकिन वह विकल्प क्या होगा, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ग्रामीणों का सवाल है कि क्या इस समस्या का अंत होगा या उन्हें इसी 'छोटी गंगा' को पार कर अपना सफर तय करना होगा? फिलहाल, जलजमाव ने आम जनता की नाक में दम कर रखा है और लोग ठोस कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के झारखंड दौरे की संभावना जताई जा रही है। शुक्रवार को दिल्ली स्थित पंचशील भवन में अबुआ अधिकार मंच के फाउंडर वेदांत कौस्तव ने उनसे शिष्टाचार मुलाकात की।
इस दौरान रांची में प्रस्तावित पर्यावरण संरक्षण समिट को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। वेदांत कौस्तव ने केंद्रीय मंत्री को इस समिट में शामिल होने के लिए औपचारिक निमंत्रण भी दिया। बैठक में झारखंड से जुड़े क्षेत्रीय मुद्दों, पर्यावरणीय चुनौतियों और जनभागीदारी बढ़ाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।
मुलाकात के दौरान राज्य की राजनीति में युवाओं की भूमिका पर भी गंभीर चर्चा हुई। वेदांत कौस्तव ने कहा कि झारखंड जैसे युवा राज्य में नई पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी से सकारात्मक बदलाव संभव है।
वहीं, चिराग पासवान ने युवाओं को राजनीति और सामाजिक सरोकारों से जुड़ने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश के विकास में युवाओं की ऊर्जा और नई सोच अहम भूमिका निभाती है।
यदि मंत्री का कार्यक्रम तय होता है, तो रांची में होने वाला यह समिट राज्य में पर्यावरण और युवा भागीदारी के मुद्दों को नई दिशा दे सकता है।