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चुनाव तक चुप्पी, चुनाव बाद त्याग का उपदेश, मोदी सरकार की सच्चाई अब सामने है : विनोद पांडेय
May 11, 2026 | 110 Views
चुनाव तक चुप्पी, चुनाव बाद त्याग का उपदेश, मोदी सरकार की सच्चाई अब सामने है : विनोद पांडेय

रांची। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज देशवासियों को पेट्रोल बचाने, सोना नहीं खरीदने, विदेश यात्राएँ रोकने, विदेशी सामान छोड़ने और घर से काम करने की सलाह दे रहे हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय संकट आज बताया जा रहा है, उसकी शुरुआत आज नहीं हुई है। युद्ध और वैश्विक तनाव की स्थिति पहले दिन से बनी हुई थी। तब प्रधानमंत्री ने देश से त्याग और कटौती की अपील क्यों नहीं की?

देश की जनता यह अच्छी तरह समझ रही थी कि उस समय पांच राज्यों के चुनाव सामने थे, इसलिए सरकार सच्चाई छिपा रही थी। चुनाव खत्म होते ही अब जनता को “कम खर्च करो, कम घूमो, कम खरीदो” का ज्ञान दिया जा रहा है। इससे साफ जाहिर होता है कि सरकार ने राजनीतिक लाभ के लिए देश की वास्तविक आर्थिक स्थिति को छिपाया।

आज प्रधानमंत्री की बातों और सरकार की नीतियों से स्पष्ट हो गया है कि भारत की विदेश नीति हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही है। जिन देशों को कभी भारत का सबसे भरोसेमंद “मित्र” बताया जाता था, वही देश आज भारत से दूरी बनाते दिखाई दे रहे हैं। सरकार अमेरिका के दबाव के आगे झुकती नजर आ रही है और उसका असर सीधे देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता की जिंदगी पर पड़ रहा है।

मोदी सरकार ने “विश्वगुरु”, “न्यू इंडिया” और “5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी” जैसे बड़े-बड़े सपने दिखाए, लेकिन हकीकत यह है कि आज आम आदमी की कमर टूट चुकी है। महँगाई लगातार बढ़ रही है, बेरोज़गारी रिकॉर्ड स्तर पर है, रुपये की कीमत कमजोर हो रही है और पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाकर जनता को निचोड़ा जा रहा है। आर्थिक नीति पहले ही आम लोगों को तोड़ चुकी थी, अब सरकार खुलकर जनता से त्याग मांग रही है।

विडंबना यह है कि एक तरफ जनता को विदेश यात्राएँ और डेस्टिनेशन वेडिंग रोकने की सलाह दी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री खुद यूरोप दौरों पर निकल जाते हैं। अगर वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन मीटिंग इतनी जरूरी और प्रभावी हैं, तो क्या सरकार खुद उसका पालन नहीं कर सकती?

देश की जनता से कभी थाली बजवाई गई, कभी मोमबत्ती जलवाई गई, कभी प्याज-टमाटर छोड़ने की सलाह दी गई और अब कहा जा रहा है कि कम चलो, कम खरीदो और कम जियो। आखिर 12 वर्षों की सरकार के बाद अगर समाधान सिर्फ जनता के त्याग में ही बचा है, तो फिर विकास हुआ कहाँ?

झारखंड मुक्ति मार्च मानता है कि देश को भाषण नहीं, जवाब चाहिए। जनता टैक्स भी दे, महँगाई भी सहे, बेरोज़गारी भी झेले और अंत में उपदेश भी सुने, यह लोकतंत्र नहीं, जनता के साथ अन्याय है।

 


May 11, 2026 | 111 Views
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