रांची : झारखंड में ऊर्जा ट्रांजिशन और हरित विकास को नई दिशा देने की पहल के तहत राज्य सरकार एवं सस्टेनेबल स्टार्ट ट्रांजिशन टास्क फोर्स की ओर से ‘ग्रीन गोल्ड : अनलॉकिंग ग्रेफिन इन झारखंड’ रिपोर्ट का विमोचन किया गया। यह रिपोर्ट झारखंड में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों, विशेषकर ग्रेफिन की संभावनाओं और उससे जुड़े औद्योगिक नवाचारों को लेकर तैयार की गई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्रेफिन एक उन्नत कार्बन मैटेरियल है, जिसका उपयोग स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी स्टोरेज, हेल्थ टेक्नोलॉजी और सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहा है। झारखंड में इसके प्रमुख स्रोतों के रूप में अग्रेड, कोल्डेड मेथन और लाख आधारित प्राकृतिक संसाधनों की पहचान की गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड भविष्य में करीब 5,500 टन ग्रेफिन उत्पादन क्षमता विकसित कर सकता है, जिससे राज्य को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिल सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लाख आधारित ‘ग्रीन ग्रेफिन’ उत्पादन से ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण और आदिवासी समुदायों के लिए बड़े आर्थिक अवसर पैदा होंगे।
कार्यक्रम में वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीकी ने कहा कि झारखंड के पास प्राकृतिक संसाधनों की अपार क्षमता है और ग्रेफिन जैसे नवाचार राज्य को हरित औद्योगिक विकास की दिशा में आगे ले जा सकते हैं।
वहीं प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार ने कहा कि लाख और अन्य जैव-आधारित संसाधनों के माध्यम से ग्रेफिन उत्पादन सामुदायिक उद्यमशीलता को बढ़ावा देगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा।
तकनीकी सत्र में शामिल विशेषज्ञों ने कहा कि झारखंड में रिसर्च, इंडस्ट्री और सरकार के बीच मजबूत साझेदारी बनाकर ग्रेफिन इकोसिस्टम विकसित किया जा सकता है। इसके लिए नीति समर्थन, निवेश आकर्षण और कौशल विकास पर विशेष जोर देने की आवश्यकता है।
इस मौके पर विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, शोधकर्ता, तकनीकी विशेषज्ञ और सामुदायिक प्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम में झारखंड को ग्रीन ग्रेफिन के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में सामूहिक संकल्प दोहराया गया।