सोनाहातु(अजय स्वर्णकार): प्रखंड क्षेत्र के बारुहातु पंचायत अंतर्गत चिरगालडीह गांव में प्रकृति का महापर्व सरहुल पारंपरिक रीति-रिवाज और आदिवासी संस्कृति की गरिमा के साथ धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला और ग्रामीणों ने पूरे उत्साह के साथ इस पर्व में भाग लिया।
सरहुल पर्व के अवसर पर गांव के सरना स्थल पर विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई। पुजारी पूजा के दौरान साल वृक्ष की आराधना की गई, जो इस पर्व का मुख्य प्रतीक माना जाता है। ग्रामीणों ने पूर्वजों की परंपराओं का पालन करते हुए प्रकृति से सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा और भरपूर फसल की कामना की।
इस अवसर पर गांव के महिला, पुरुष और बच्चे पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। महिलाओं ने पारंपरिक गीत गाए, वहीं पुरुषों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर नृत्य कर वातावरण को उत्सवमय बना दिया। सरहुल केवल एक धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि यह प्रकृति के प्रति आस्था और आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक भी है।
पूजा-अर्चना के उपरांत सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया। पंचमुखी कलाकारों द्वारा पारंपरिक नृत्य और लोकगीत प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम में डोमन आहिर, सोमरा मुंडा, वीरेंद्र लोहरा, प्रेमचंद पातर मुंडा, सैयनाथ पातर मुंडा, राजेंद्र पातर मुंडा, उत्तर पातर मुंडा, भुनेश्वर पातर मुंडा और संजय लोहरा ने अपनी कला का प्रदर्शन कर कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
इस अवसर पर कई गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पूर्व प्रमुख रमेश चंद्र लोहार, मुकेश कुमार लोहार, ग्राम प्रधान जुगल किशोर सिंह मुंडा, अध्यक्ष लोचन सिंह मुंडा तथा सचिव गौतम सिंह मुंडा ने भाग लिया। सभी ने ग्रामीणों को सरहुल पर्व की शुभकामनाएं देते हुए इस पर्व के महत्व पर प्रकाश डाला और प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया।