मालदा । प्रतिदिन लाखों यात्री अपने सपनों, जिम्मेदारियों और उम्मीदों के साथ रेल यात्रा करते हैं। कोई अपने घर लौट रहा होता है, कोई रोजगार के लिए शहर की ओर अग्रसर होता है, तो कोई शिक्षा, उपचार अथवा जीवन के नए अवसरों की तलाश में सफर करता है। *रेल केवल पटरियों पर दौड़ती एक परिवहन सेवा नहीं, बल्कि हमारे परिवारों, पड़ोसियों, मित्रों और समाज को जोड़ने वाली जीवनरेखा है।
हर डिब्बे में बैठा यात्री किसी का बेटा, बेटी, माता, पिता या मित्र होता है। स्टेशन की भीड़ में उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी घर की आशा और प्रतीक्षा का केंद्र होता है। ऐसे में उसकी सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना केवल रेलवे प्रशासन का ही नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक सजग नागरिक का भी सामूहिक दायित्व है। सुरक्षा, अनुशासन और जागरूकता ही रेल यात्रा को सुरक्षित एवं सुगम बनाते हैं; एक क्षण की असावधानी जहाँ गंभीर परिणाम ला सकती है, वहीं नियमों का पालन और सतर्क व्यवहार हजारों जीवनों की रक्षा सुनिश्चित करता है।
इसी उद्देश्य से, मालदा मंडल के मंडल रेल प्रबंधक मनीष कुमार गुप्ता के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में तथा मंडल सुरक्षा आयुक्त असीम कुमार कुल्लू के सतत पर्यवेक्षण में पूर्व रेलवे के मालदा मंडल द्वारा दिनांक 01 अप्रैल 2025 से 31 जनवरी 2026 तक रेल सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने हेतु व्यापक जन-जागरूकता अभियान संचालित किया गया।*
मंडल के विभिन्न स्टेशनों, ट्रैक से सटे गांवों, विद्यालयों, कोचिंग संस्थानों एवं बाजार क्षेत्रों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर नागरिकों को सुरक्षित यात्रा हेतु सावधानियां अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।* अभियान के अंतर्गत रेलवे सुरक्षा बल (RPF), वाणिज्य एवं परिचालन विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा संयुक्त रूप से नुक्कड़ सभाएं, माइक्रोफोन उद्घोषणाएं, पंपलेट वितरण तथा जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं विद्यालय प्रशासन का सक्रिय सहयोग भी प्राप्त हुआ।
अभियान के दौरान यात्रियों, छात्रों एवं स्थानीय नागरिकों को रेलवे ट्रैक पार करने के जोखिम, अनधिकृत रूप से पटरियों पर चलने के खतरे तथा चलती ट्रेन के समीप जाने से होने वाली गंभीर दुर्घटनाओं (ह्यूमन रन ओवर) के बारे में जागरूक किया गया। यह भी बताया गया कि ट्रैक के किनारे मवेशियों को चराना अथवा उन्हें खुले रूप से छोड़ देना “कैटल रन ओवर” जैसी घटनाओं को जन्म देता है, जिससे न केवल पशुहानि होती है बल्कि रेल संचालन बाधित होता है और यात्रियों की सुरक्षा भी प्रभावित होती है। साथ ही चलती ट्रेन के समीप सेल्फी लेने के खतरे, फुटबोर्ड पर यात्रा की असुरक्षा, अलार्म चेन पुलिंग (ACP) की दंडनीयता, पत्थरबाजी की गंभीरता, सिग्नल उपकरणों से छेड़छाड़ के दुष्परिणाम, रेलवे संपत्ति की सुरक्षा तथा यात्रा के दौरान सामान की चोरी, नशाखुरानी या अन्य प्रकार के अपराध से बचाव हेतु सावधानियों के महत्व के संबंध में भी विस्तार से अवगत कराया गया।*
यह स्पष्ट किया गया कि रेलवे ट्रैक सड़क नहीं है तथा एक क्षण की लापरवाही गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। रेलवे अधिनियम के अंतर्गत ट्रैक पर अतिक्रमण, अलार्म चेन पुलिंग, पत्थरबाजी अथवा रेलवे संपत्ति को क्षति पहुंचाना दंडनीय अपराध है। विशेष रूप से युवाओं एवं छात्रों को संबोधित करते हुए यह संदेश दिया गया कि चलती ट्रेन के समीप स्टंट करना या सेल्फी लेना साहस नहीं, बल्कि असावधानी है। सुरक्षित व्यवहार ही जिम्मेदार नागरिक होने का वास्तविक परिचायक है।
मानव तस्करी की रोकथाम के संबंध में भी नागरिकों से अपील की गई कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति अथवा अकेले एवं भयभीत अवस्था में दिखाई देने वाले बच्चे या महिला की सूचना तत्काल रेलवे सुरक्षा बल को दें।
अभियान की अवधि में मालदा मंडल द्वारा प्रमुख उपलब्धियाँ (01 अप्रैल 2025 – 31 जनवरी 2026)
आयोजित कुल जागरूकता कार्यक्रम: 432
जागरूक किए गए नागरिक/यात्री (लगभग): 10,000
कवर किए गए विद्यालय/संस्थान: 12
ट्रैक किनारे गांव/क्षेत्र: 80
अलार्म चेन पुलिंग (ACP) के विरुद्ध कार्रवाई: 1269 व्यक्ति
अन्य रेलवे अधिनियम उल्लंघन के मामले: 10110 व्यक्ति गिरफ्ता
कुल वसूला गया जुर्माना: ₹ 20,96,500/-
एक पल की लापरवाही जीवन भर का पश्चाताप बन सकती है। अतः रेलवे ट्रैक से सुरक्षित दूरी बनाए रखना, केवल निर्धारित एवं अधिकृत स्थानों से ही आवागमन करना तथा सभी नियमों का पालन करना प्रत्येक नागरिक की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
मालदा मंडल द्वारा यह अभियान एक निरंतर प्रक्रिया के रूप में आगे भी जारी रखा जाएगा, ताकि रेल सुरक्षा के प्रति जागरूकता को जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान किया जा सके। मंडल ने यात्रियों एवं आमजन से अपील की है कि वे रेल परिसर में नियमों का पालन करें, अधिकृत मार्गों का ही उपयोग करें तथा सुरक्षा मानकों के प्रति सदैव सजग एवं उत्तरदायी बने रहें।