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JTET 2026 में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल करने की मांग तेज
May 29, 2026 | 361 Views
JTET 2026 में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल करने की मांग तेज

 रांची । झारखंड कांग्रेस प्रभारी के राजू  को मंत्री दीपिका पाण्डेय सिंह ने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) 2026 मे क्षेत्रीय भाषाओं में मगही अंगिका भोजपुरी को शामिल किए जाने संबंधी विस्तृत लिखित सुझाव सौंपा गया। इस दौरान मांग की गई कि राज्य की भाषाई एवं सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखते हुए सभी प्रमुख क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं को परीक्षा में उचित स्थान दिया जाए।

ज्ञापन में कहा गया कि वर्ष 2008, 2012 और 2016 में आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में अंगिका, भोजपुरी और मगही जैसी भाषाओं को क्षेत्रीय भाषाओं के रूप में शामिल किया गया था, लेकिन JTET 2026 की वर्तमान अधिसूचना में इन भाषाओं को स्थान नहीं दिया गया है। इसके अलावा मैथिली जैसी महत्वपूर्ण भाषा को भी परीक्षा से बाहर रखा गया है, जिससे लाखों अभ्यर्थियों में निराशा है।

मांगकर्ताओं का कहना है कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और पहचान को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है। आज की युवा पीढ़ी को अपनी मातृभाषा और क्षेत्रीय-जनजातीय भाषाओं को पढ़ने, लिखने और बोलने का अवसर मिलना चाहिए। ऐसे में प्रतियोगी परीक्षाओं में इन भाषाओं के विकल्पों का विस्तार आवश्यक है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि जनजातीय भाषाओं की सूची में असुर, बिरहोर और माल्तो जैसी महत्वपूर्ण जनजातीय भाषाओं को शामिल नहीं किया गया है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। साथ ही संथाल परगना क्षेत्र के किसी भी जिले में कुरमाली भाषा को क्षेत्रीय भाषा के रूप में शामिल नहीं किया गया है, जबकि इस भाषा को बोलने वालों की संख्या लाखों में है।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि झारखंड की समृद्ध भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए सभी जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को समान अवसर और सम्मान मिलना चाहिए। किसी भी भाषा की उपेक्षा राज्य की सांस्कृतिक पहचान और विरासत के साथ अन्याय है।

ज्ञापन के माध्यम से मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने आग्रह किया गया कि JTET 2026 की अधिसूचना पर पुनर्विचार करते हुए अंगिका, भोजपुरी, मगही, मैथिली, कुरमाली, असुर, बिरहोर, माल्तो सहित अन्य जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को परीक्षा में शामिल किया जाए, ताकि राज्य के सभी वर्गों के अभ्यर्थियों को समान अवसर मिल सके और झारखंड की भाषाई विविधता को उचित प्रतिनिधित्व प्राप्त हो।


May 29, 2026 | 362 Views
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