साहिबगंज । गंगा मां पर हमला करने वालों के खिलाफ आज एनजीटी कोलकाता में जारी जंग पर सुनवाई होगा. झारखंड की एकमात्र गंगा तटीय जिला साहिबगंज से उठी एक चिंगारी आज नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के ईस्टर्न जोन में आग बनकर दहकेगी.चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण योद्धा सैयद अरशद नसर ने गंगा नदी,दुर्लभ जलीय जीव डॉल्फिन और पूरे इको-सिस्टम को बचाने के लिए जो बिगुल फूंका था,उसकी सुनवाई आज गुरुवार सुबह 10:30 बजे एनजीटी कोलकाता में होगी.अरशद सुनवाई में शिरकत करने कोलकाता पहुंच चुके हैं.अरशद द्वारा दायर याचिका संख्या -162/23 में सीधा आरोप है कि साहिबगंज में गंगा नदी और उसके किनारों से स्टोन बोल्डर,चिप्स और मेटल का अवैध परिवहन और भंडारण धड़ल्ले से हो रहा है. इससे न सिर्फ गंगा प्रदूषित हो रही है,बल्कि संरक्षित गंगा,दुर्लभ डॉल्फिन और अन्य जलीय जीवों का अस्तित्व भी खतरे में है.याचिका में मांग है कि गंगा नदी और उसके आसपास से खनिजों के उठाव,परिवहन और स्टॉकयार्ड पर तत्काल रोक लगाएं व पर्यावरणीय बहाली के लिए भारी पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति जुर्माना लगाएं.जस्टिस अरुण कुमार त्यागी एक्सपर्ट मेंबर डॉ.ए.संथिल वेल और ईश्वर सिंह की बेंच आज इस मामले को सुनेगी.एनजीटी ने पहले ही राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन,नई दिल्ली के निदेशक,झारखंड के खान सचिव व निदेशक,
झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव,
साहिबगंज के डीसी, डीएमओ और डीटीओ व स्टोन बोल्डर सप्लायर
जीके इंटरप्राइजेज,मालदा और मां तारा एंटरप्राइजेज कंस्ट्रक्शन कंपनी,मुजफ्फरपुर से काउंटर एफिडेविट और स्थलीय जांच रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दे रखा है.इसके बाद अरशद की ओर से प्रतिउत्तर दिया जाएगा.साहिबगंज से लेकर कोलकाता तक इस सुनवाई को लेकर हड़कंप है.एक तरफ पर्यावरण प्रेमी इसे "गंगा बचाओ आंदोलन" की जीत मान रहे हैं तो दूसरी तरफ पत्थर माफिया से लेकर पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी तक की धड़कनें बढ़ी हुई हैं.स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर एनजीटी ने अरशद के पक्ष में फैसला दिया तो साहिबगंज में चल रहा अवैध खनन और परिवहन का पूरा नेटवर्क ध्वस्त हो जाएगा.अरशद ने कहा यह लड़ाई सिर्फ साहिबगंज की नहीं है,यह गंगा मां और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है.एनजीटी से हमें न्याय की उम्मीद है.अब सबकी निगाहें कोलकाता की उस अदालत एनजीटी पर टिकी हैं जहां से गंगा को बचाने का आदेश निकल सकता है.