ब्यूरो। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। हुगली जिले में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद कल्याण बैनर्जी को विरोध का सामना करना पड़ा, जहां उनके सामने लोगों ने "चोर-चोर" के नारे लगाए। घटना के दौरान धक्का-मुक्की के साथ किसी चीज से हमला कर दिया गया जिसके बाद सांसद कल्याण बैनर्जी जमीन पर गिर गए और हंगामे की स्थिति बन गई, जिसके बाद सुरक्षा कर्मियों को हस्तक्षेप करना पड़ा।
यह घटना ऐसे समय हुई है जब एक दिन पहले ही TMC के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर सोनारपुर में कथित हमला हुआ था। अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि उन पर पत्थर, अंडे और अन्य वस्तुएं फेंकी गईं तथा यह हमला पूर्व नियोजित था।
सूत्रों के अनुसार, हुगली में कल्याण बनर्जी के कार्यक्रम के दौरान विरोध कर रहे लोगों ने जोरदार नारेबाजी की। "चोर-चोर" के नारों के बीच माहौल तनावपूर्ण हो गया और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।
लगातार दो दिनों में TMC के शीर्ष नेताओं के साथ हुई इन घटनाओं ने बंगाल की राजनीति में बढ़ते ध्रुवीकरण और चुनाव बाद तनाव को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। TMC इन घटनाओं को विपक्षी दलों की साजिश बता रही है, जबकि विपक्ष आरोपों को खारिज कर रहा है।
रांची । झारखंड कांग्रेस प्रभारी के राजू को मंत्री दीपिका पाण्डेय सिंह ने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) 2026 मे क्षेत्रीय भाषाओं में मगही अंगिका भोजपुरी को शामिल किए जाने संबंधी विस्तृत लिखित सुझाव सौंपा गया। इस दौरान मांग की गई कि राज्य की भाषाई एवं सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखते हुए सभी प्रमुख क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं को परीक्षा में उचित स्थान दिया जाए।
ज्ञापन में कहा गया कि वर्ष 2008, 2012 और 2016 में आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षाओं में अंगिका, भोजपुरी और मगही जैसी भाषाओं को क्षेत्रीय भाषाओं के रूप में शामिल किया गया था, लेकिन JTET 2026 की वर्तमान अधिसूचना में इन भाषाओं को स्थान नहीं दिया गया है। इसके अलावा मैथिली जैसी महत्वपूर्ण भाषा को भी परीक्षा से बाहर रखा गया है, जिससे लाखों अभ्यर्थियों में निराशा है।
मांगकर्ताओं का कहना है कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और पहचान को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है। आज की युवा पीढ़ी को अपनी मातृभाषा और क्षेत्रीय-जनजातीय भाषाओं को पढ़ने, लिखने और बोलने का अवसर मिलना चाहिए। ऐसे में प्रतियोगी परीक्षाओं में इन भाषाओं के विकल्पों का विस्तार आवश्यक है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि जनजातीय भाषाओं की सूची में असुर, बिरहोर और माल्तो जैसी महत्वपूर्ण जनजातीय भाषाओं को शामिल नहीं किया गया है, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। साथ ही संथाल परगना क्षेत्र के किसी भी जिले में कुरमाली भाषा को क्षेत्रीय भाषा के रूप में शामिल नहीं किया गया है, जबकि इस भाषा को बोलने वालों की संख्या लाखों में है।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि झारखंड की समृद्ध भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए सभी जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को समान अवसर और सम्मान मिलना चाहिए। किसी भी भाषा की उपेक्षा राज्य की सांस्कृतिक पहचान और विरासत के साथ अन्याय है।
ज्ञापन के माध्यम से मंत्री दीपिका पांडे सिंह ने आग्रह किया गया कि JTET 2026 की अधिसूचना पर पुनर्विचार करते हुए अंगिका, भोजपुरी, मगही, मैथिली, कुरमाली, असुर, बिरहोर, माल्तो सहित अन्य जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं को परीक्षा में शामिल किया जाए, ताकि राज्य के सभी वर्गों के अभ्यर्थियों को समान अवसर मिल सके और झारखंड की भाषाई विविधता को उचित प्रतिनिधित्व प्राप्त हो।
ब्यूरो। तेल कंपनी द्वारा हफ़्ते से भी कम समय में चौथी बार पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी करने के बाद रांची, लखनऊ और पटना के लोगों ने बढ़ते आर्थिक बोझ पर चिंता जताई। लोगों का कहना है कि ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है और इससे महंगाई और बढ़ेगी।
सोमवार को जारी ताज़ा दरों के अनुसार, झारखंड में पेट्रोल की औसत कीमत 103.28 रु प्रति लीटर और डीज़ल 98.23 रु प्रति लीटर पहुंच गया है, जबकि उत्तर प्रदेश में पेट्रोल 99.20 रु और डीज़ल 92.56 रु प्रति लीटर तथा बिहार में पेट्रोल 112.18 रु और डीज़ल 98.24 रु प्रति लीटर दर्ज किया गया।
लोगों ने कहा कि ईंधन की कीमतों में हालिया बदलाव से न सिर्फ़ आना-जाना महंगा होगा, बल्कि ट्रांसपोर्टेशन की लागत बढ़ने से सब्ज़ियों, अनाज और दूसरी ज़रूरी चीज़ों की कीमतें भी बढ़ जाएंगी।
रांची में आने-जाने वाले लोगों ने कहा कि बढ़ती ईंधन कीमतों का असर घर के हर खर्च पर पड़ रहा है। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “इसका असर बहुत ज़्यादा है। सब कुछ महंगा हो गया है। अगर डीज़ल और पेट्रोल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर आने-जाने और खाने-पीने की चीज़ों की कीमतों पर पड़ता है। टमाटर की कीमतें पहले से ही ज़्यादा हैं। जब ईंधन की कीमतें बढ़ती हैं, तो आलू और प्याज़ जैसी सब्ज़ियों से लेकर आटा और चावल तक सब कुछ महंगा हो जाता है। आम लोगों को कोई राहत नहीं मिल रही है।”
कुछ लोगों ने सरकार पर महंगाई को नियंत्रित करने में विफल रहने का आरोप लगाते हुए नाराज़गी भी जताई। उनका कहना था कि लगातार बढ़ती कीमतों के कारण मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों के लिए घरेलू बजट संभालना मुश्किल होता जा रहा है।
रांची। झारखंड में लंबे समय से सड़क निर्माण का काम पूर्ण नहीं करने वाली एजेंसी या संवेदकों को अब नया काम मिलना आसान नहीं होगा । ग्रामीण कार्य विभाग राज्य भर में ऐसे सभी सड़कों की सूची तैयार कर डिबार की प्रक्रिया तेज करेगी । इतना ही नहीं काम में देरी कर रेट रिवीजन की चालाकी को भी विभाग ने गंभीरता से लिया है । हाल के महीनों में रेट रिवीजन होनी वाली योजनाओं को विभाग खंगालने का काम करेगी । ये निर्देश राज्य की ग्रामीण विकास , ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने रांची स्थित झारखंड सिविल सर्विस ऑफिसर्स इंस्टीच्यूट के सभागार में ग्रामीण विकास एवं ग्रामीण कार्य विभाग की समीक्षा बैठक में दिया है ।
समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने ग्रामीण कार्य विभाग से जुड़ी सड़क और पुल निर्माण योजना की जिलावार जानकारी ली । मैराथन समीक्षा के दौरान ये बात स्पष्ट तौर पर सामने आई कि लंबे समय से कई जिलों में सड़क की निर्माण की योजना लंबित है । समय अवधि के अंदर काम पूरा नहीं करने के बावजूद ऐसी एजेंसी या संवेदकों के द्वारा सड़क निर्माण से जुड़ी दूसरी योजनाएं ली जा रही है । ऐसे में एक ही एजेंसी या संवेदकों के नाम कई काम लंबित है । विभागीय मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि राज्य भर में ऐसी एजेंसी और संवेदकों की सूची तैयार कर उन्हें डिबार करने की प्रक्रिया बढ़ाई जाए । दरअसल कई बार रेट रिवीजन का लाभ लेने के उद्देश्य से ही काम को लंबित रखने की बात सामने आ चुकी है । समीक्षा बैठक में विभाग के अधिकारियों को ये निर्देशित किया गया कि ऐसी एजेंसी और संवेदकों को नया काम नहीं दिया जाएगा ।
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि सड़क निर्माण में लापरवाही और गुणवत्ता से कही कोई समझौता नहीं होगा । सड़क निर्माण और पुल निर्माण से संबंधित किसी भी तरह की कोई अनियमितता की शिकायत नहीं आनी चाहिए । उन्होंने झारखंड के माननीय विधायकों के द्वारा विभाग को भेजे गए लिखित शिकायत को गंभीरता से लेते हुए , उस पर अविलंब कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया है । उन्होंने कहा कि चाहे सड़क निर्माण में अनियमितता से संबंधित आवेदन हो या नई सड़क के निर्माण की मांग हो , माननीय विधायकों के आवेदन पर समय सीमा के अंदर पहल की जाए । शिकायतों पर पत्राचार की खानापूर्ति के बजाय आवश्यक जांच करने की जरूरत है । मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि बारिश से पहले राज्य के क्षतिग्रस्त पुलों की सूची तैयार कर , उसे दुरुस्त करने का काम तेज किया जाए । उन्होंने इसके लिए विभागीय अधिकारियों को ऐसे पुल का निरीक्षण करने का निर्देश भी दिया ।
ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा बैठक में राज्य के 6 जिलों में पलाश मार्ट निर्माण की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया गया है । इसके लिए जिलों में जमीन चिन्हितिकरण का काम जिला प्रशासन की मदद से पूर्ण किया जाएगा । हाल के दिनों में पलाश ब्रांड के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ने के साथ बाजार में मांग भी बढ़ी है । समीक्षा के दौरान मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि राज्य की दीदियों को रोजगार से जोड़ने का मतलब सिर्फ उन्हें किराना की दुकान तक सीमित रखना नहीं है , बल्कि महिलाएं कैसे उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़े इस रणनीति के साथ कार्य योजना तैयार करने की जरूरत है । इसके लिए भी जिला प्रशासन के सहयोग से संयुक्त पहल कर ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने का निर्देश दिया गया है । राज्य में अबुआ आवास के लाभुकों को उनका अंतिम किस्त दे कर उनके आशियाना का सपना साकार करने पर जोर दिया गया । अबुआ आवास के लिए इस बजट में 41 सौ करोड़ का बजटीय प्रावधान किया गया है । समीक्षा बैठक के दौरान ये बात सामने आई की राज्य में अब बहुत कम घर ही ऐसे बचे है जहां SHG से जुड़ी कोई महिला सदस्य ना हो । राज्य भर में SHG ग्रुप की संख्या 3 लाख 19 हजार के करीब तक पहुंच चुकी है । जो ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के स्वावलंबन के नजरिए से बेहतर संकेत है । मंत्री दीपिका पांडेय सिंह समीक्षा बैठक के क्रम में JSLPS के काम से संतुष्ट नजर नहीं आई । उन्होंने इसके लिए अधिकारियों को कार्य संस्कृति में सुधार लाने के साथ - साथ JSLPS के उद्देश्य को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाने का निर्देश दिया है । मनरेगा की योजनाओं की समीक्षा के क्रम में ये बात सामने आई की वी बी ग्राम जी योजना के लागू होने से झारखंड पर 1700 करोड़ का अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ेगा ।
समीक्षा बैठक में ग्रामीण विकास , ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज सचिव मनोज कुमार ने कहा कि एक से डेढ़ साल तक सड़क निर्माण का कार्य पूर्ण नहीं करने वालों की सूची जिला स्तर से मुख्यालय को भेजी जाए । इसके साथ ही रेट रिवीजन को लेकर भी एक SOP तैयार किया जाएगा , ताकि काम में देरी कर लाभ लेने वालों को रोका जा सके । सचिव ने विभागीय अधिकारियों को काम का स्थल निरीक्षण करने को भी कहा है । समीक्षा बैठक में मनरेगा आयुक्त मृत्युंजय बरनवाल सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहें ।
शेखपुरा।चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता सह पशु व पर्यावरण प्रेमी सैयद अरशद नसर ने मंगलवार को जिले के जिला पदाधिकारी शेखर आनन्द, पुलिस अधीक्षक बलिराम कुमार चौधरी,अनुमंडल पदाधिकारी प्रियंका कुमारी, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी डाँ.राकेश कुमार,शेखपुरा थाना प्रभारी धर्मेंद्र कुमार व अन्य को आवेदन देकर असमाजिक तत्वों द्वारा किए जा रहे गौ तस्करी,गौ वध व आगामी बकरीद पर्व पर संभावित गौ वध पर सख्ती के साथ रोक लगाने व ऐसे तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ़ कड़ी से कड़ी दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की मांग की है.अरशद ने कहा कि बिहार सरकार ने पशु संरक्षण व सुधार अधिनियम -1955 के तहत पुरे राज्य मे गौ वध पर पुर्ण रूप से प्रतिबन्ध लागू करते हुए इसे संज्ञेय अपराध के श्रेणी में रखा है.अरशद ने बहुसंख्यक समुदाय की धार्मिक भावनाओं को देखते हुए व कानून रोक के चलते तथा देश के सभी मुस्लिम धार्मिक व सामाजिक संस्थाएं व इरादे की अपील व फतवे के मद्देनजर मुस्लिम समुदाय से आगामी बकरीद पर्व पर गाय की कुर्बानी से अलग रहने का आह्वान करते हुए आपसी भाईचारा व सौहार्द बनाएं रखनें की अपील की है तथा आगे भी गौ वध से बचने की सलाह दी है. अरशद के इस पहल से गौ तस्करों में हड़कंप व खलबली मच गया है तो दूसरी तरफ़ गौ भक्तों व पशु प्रेमियों ने अरशद के इस कदम की सरहाना की है.अब देखने की बात होगी की जिला पुलिस-प्रशासन अरशद के आवेदन पर गौ वध के रोक थाम के लिए किया कदम उठाती है.विदित हो कि अरशद ने इससे पुर्व भी गौ वध व तस्करी पर रोक को लेकर अभियान चलाया था।
रांची । 14 महीने पर जेल से बाहर आने के बाद चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता सह पर्यावरण प्रेमी सैयद अरशद नसर सोमवार को राज्य की राजधानी रांची पहुंच कर भ्रष्ट पुलिस-प्रशासनिक पदाधिकारियों,पत्थर कारोबारियों,माफियाओं व असामाजिक तत्वों के खिलाफ़ अभियान छेड़ दिया.अरशद ने सोमवार को हाईकोर्ट, लोकायुक्त,सीबीआई,ईडी, एसीबी,जेल आईजी,प्रदुषण बोर्ड,सूचना आयोग, मानवाधिकार आयोग का दौरा कर भ्रष्ट पुलिस-प्रशासनिक पदाधिकारियों,पत्थर कारोबारियों,माफियाओं व असामाजिक तत्वों के खिलाफ़ जेल जाने से पुर्व व जेल से निकलने के बाद स्पीड पोस्ट से भेजे व दिए आवेदन पर अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी लेने के साथ ही साथ नये तथ्यों से भी अवगत कराया,जहां अरशद को ठोस कार्रवाई का आश्वासन मिला.विदित हो कि साहिबगंज जिला के खनन पदाधिकारी कृष्ण कुमार किस्कू के द्वारा अरशद के खिलाफ़ सरकारी काम में बाधा,रंगदारी, भयादोहन,ब्लैकमेल व एससी-एसटी एक्ट के तहत जिरवाबड़ी थाना मे कांड संख्या -104/24 तथा 204/24 दर्ज कराया था,जिसके पश्चात पुलिस ने अरशद को आनन-फानन में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था,जहां से अरशद हाल ही में नियमित जमानत पर बाहर आएं हैंं.जेल अवधि के दौरान साहिबगंज व मधुपुर जेल में भ्रष्ट जेल-प्रशासन के खिलाफ़ अरशद द्वारा किए गए आंदोलन भी चर्चा का विषय बना रहा,जिस को लेकर अरशद ने करीब 94 बिंदु पर जेल आईजी से सुचना की मांग की है साथ ही झुठा केस दर्ज कराने वाले डीएमओ कृष्ण कुमार किस्कू,झुठा केस को अनुसंधान व पर्यवेक्षण में सत्य करार देने वाले केस के अनुसंधानकर्ता दीपक दीपक क्रिएशन,लव कुमार व पर्यवेक्षण पदाधिकारी सह साहिबगंज अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी किशोर तिर्की व अन्य के खिलाफ़ प्राथमिकी दर्ज करने व विभागीय कार्रवाई करने की मांग की है साथ ही जिले में व्याप्त अवैध खनन,परिवहन व स्टोन क्रशर के खिलाफ़ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की भी मांग की है.अरशद द्वारा सोमवार को उपरोक्त केंद्रीय व राज्य जांच एजेंसी के साथ ही हाईकोर्ट,लोकायुक्त व अन्य राज्य स्तरीय विभाग का दौरा करने से भ्रष्ट पुलिस प्रशासनिक पदाधिकारियों,पत्थर कारोबारियों,माफियाओं व असामाजिक तत्वों में हड़कंप मच गया है तो दूसरी तरफ़ सामाजिक कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर देखी जा रही है.अरशद ने दहाड़ते हुए कहा है कि जेल जाने से उनका मनोबल गिरने के बजाय और ऊपर उठा है व भ्रष्ट पुलिस-प्रशासनिक पदाधिकारियों,पत्थर कारोबारियों,माफियाओं व असामाजिक तत्वों के खिलाफ़ उनका आंदोलन व संघर्ष अब और तेज़ होगा व न रोकें हैं न रोकेंग न झुकें हैं न झुकेंगे न डरें हैं न डरेंगे बल्कि उनका संघर्ष अनवरत बिना किसी डर-भय के आगे भी ज़ारी रहेगा.
नई दिल्ली/रांची: झारखंड के पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता आलमगीर आलम को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने पीएमएलए एक्ट के तहत दर्ज मामले में उन्हें जमानत दे दी है। उनके साथ उनके निजी सचिव संजीव लाल को भी बेल मिली है।
करीब दो साल से जेल में बंद आलमगीर आलम के लिए यह फैसला बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है। सुप्रीम Court के आदेश के बाद अब उनके जल्द जेल से बाहर आने की संभावना जताई जा रही है।
इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
छापेमारी में मिले थे 32.2 करोड़ रुपये कैश
गौरतलब है कि 6 मई 2024 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रांची में बड़े पैमाने पर छापेमारी की थी। इस दौरान आलमगीर आलम के निजी सचिव संजीव लाल के सहायक जहांगीर आलम के आवास से करीब 32.2 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे। इस बरामदगी ने पूरे राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया था।
15 मई 2024 को हुई थी गिरफ्तारी
छापेमारी और शुरुआती जांच के बाद 15 मई 2024 को ईडी ने आलमगीर आलम को गिरफ्तार कर लिया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी टेंडर आवंटन के बदले कमीशन वसूलने के लिए एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। इसी कथित नेटवर्क के जरिए अवैध धन लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम दिया गया।
ईडी के अनुसार, यह पूरा मामला सरकारी योजनाओं और टेंडरों में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है, जिसकी जांच लंबे समय से चल रही थी।
राजनीतिक हलचल तेज
सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद झारखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस इसे कानूनी राहत और न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रही है, जबकि विपक्ष इसे गंभीर आरोपों से जुड़ा मामला बताते हुए सवाल उठा रहा है।
ब्यूरो। आसनसोल से अजीब मामला सामने आया है जहां आस्था जब राजनीति से जुड़ जाती है, तो नजारे कुछ अलग ही देखने को मिलते हैं। ऐसा ही एक अनोखा दृश्य पश्चिम बंगाल के आसनसोल दक्षिण में देखने को मिला, जहां स्थानीय निवासी सोमू भंडारी इन दिनों चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।
9 मई को सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद सोमू भंडारी ने अपनी वर्षों पुरानी मन्नत पूरी करने के लिए करीब 2 किलोमीटर तक दंडवत प्रणाम करते हुए घाघर बूढ़ी काली मंदिर तक यात्रा की और मां काली के चरणों में माथा टेककर आशीर्वाद लिया।
क्या थी सोमू भंडारी की मन्नत?
सोमू भंडारी ने बताया कि राज्य में बढ़ती हिंसा, भ्रष्टाचार और दबंगई से वे बेहद परेशान थे। उन्होंने कहा,
"कुछ समय पहले मैं बाराबनी में अपने रिश्तेदार के घर गया था। वहां का माहौल देखकर मन काफी आहत हुआ। तभी मैंने ठान लिया कि बंगाल में बदलाव जरूरी है।"
इसके बाद उन्होंने घाघर बूढ़ी काली मंदिर पहुंचकर मां से चार शर्तों वाली मन्नत मांगी थी—
- बंगाल में सत्ता परिवर्तन हो
- बीजेपी की सरकार बने
- सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बनें
- बाराबनी से अर्जित राय बीजेपी विधायक बनें
4 मई को पूरी हुई मन्नत
4 मई को आए चुनाव परिणामों में बीजेपी को 207 सीटें मिलीं। सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बने और बाराबनी सीट से अर्जित राय ने जीत दर्ज की।
चारों शर्तें पूरी होते ही सोमू भंडारी ने अपना प्रण निभाने की तैयारी शुरू कर दी।
2 किलोमीटर की दंडवत यात्रा
रविवार सुबह सोमू भंडारी अपने घर से दंडवत यात्रा पर निकले। करीब 2 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए वे घाघर बूढ़ी काली मंदिर पहुंचे। इस दौरान रास्ते में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी उनके साथ जुड़ते गए।
मंदिर पहुंचकर उन्होंने विशेष पूजा-अर्चना की और मां काली का आशीर्वाद लिया।
"यह आस्था और विश्वास की जीत है"
सोमू भंडारी ने कहा,
"यह सिर्फ राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास की जीत है। मां काली ने मेरी पुकार सुन ली। अब बंगाल बदलेगा।"
मंदिर के पुजारी ने भी कहा कि इतनी लंबी दंडवत यात्रा उन्होंने वर्षों बाद देखी है।
चर्चा का विषय बना संकल्प
सोमू भंडारी की श्रद्धा और संकल्प अब आसनसोल से लेकर बाराबनी तक चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोग इसे आस्था, राजनीति और व्यक्तिगत विश्वास का अनोखा संगम बता रहे हैं।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। राज्यपाल आर एन रवि द्वारा पश्चिम बंगाल मंत्रिमंडल को भंग किए जाने के बाद राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कार्यकाल समाप्त हो गया है और अब राज्य में नई सरकार के गठन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को बंगाल की राजनीति का बड़ा मोड़ माना जा रहा है। राज्यपाल के इस कदम के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर कई अहम बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, नई सरकार के गठन को लेकर जल्द ही भाजपा राजनीतिक दल की बैठकों का दौर शुरू होने वाला है जहां 8 मई को विधायक दल का नेता चुना जाना है। भाजपा इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
रांची। जनजाति सुरक्षा मंच के मीडिया प्रभारी सोमा रउरांव ने मुख्यमंत्री झारखंड सरकार, एवं उपायुक्त रांची को शहीद बिरसा मुंडा को न्याय दिलाने हेतु पत्र लिखा है ।हाल ही में 24 अप्रैल 2026 को जगन्नाथपुर मंदिर परिसर में ड्यूटी के दौरान सुरक्षा कर्मी बिरसा मुंडा की दुखद हत्या की घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। इस अमानवीय घटना से उनके परिवार पर गहरा दुख एवं आर्थिक संकट आ पड़ा है। विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं प्रतिनिधिमंडलों द्वारा भी इस मामले में न्याय एवं सहयोग की मांग की गई है।
अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि—
1. शहीद बिरसा मुंडा के परिवार के कम से कम दो सदस्यों को सरकारी नौकरी प्रदान की जाए, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके।
2. परिवार की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए 50 लाख (पचास लाख रुपये) का मुआवजा तत्काल प्रदान किया जाए।
3. दोषियों को शीघ्र एवं कठोरतम सजा दिलाने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
4. मंदिर परिसर के आसपास झोपड़ी में रह रहे सभी गरीब परिवारों को साहू ग्रुप के माध्यम से पक्का मकान उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन जी सकें।महोदय, यह सहायता न केवल पीड़ित परिवार को संबल देगी, बल्कि समाज में न्याय और विश्वास को भी मजबूत करेगी तथा क्षेत्र के गरीब परिवारों के जीवन स्तर में भी सुधार लाएगी।अतः आपसे पुनः निवेदन है कि इस विषय में सहानुभूतिपूर्वक एवं शीघ्र निर्णय लेने की कृपा करें।