बनडीह घाट पर दो हाइवा और एक जेसीबी पकड़े जाने के बाद चाबी लौटाने का आरोप, प्रशासन की कार्रवाई पर ग्रामीणों ने जताई नाराजगी
सोनाहातू/बुंडू। रांची जिले के सोनाहातू प्रखंड स्थित बनडीह घाट में कथित अवैध बालू खनन को लेकर प्रशासन की कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि एसडीएम बुंडू और अंचल अधिकारी (सीओ) सोनाहातू ने मौके पर पहुंचकर दो हाइवा और एक जेसीबी को पकड़ा, लेकिन कुछ ही देर बाद वाहनों की चाबी उनके मालिकों को लौटा दी गई। आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारियों के लौटते ही बालू का उठाव फिर शुरू हो गया।
ग्रामीणों ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
वन क्षेत्र में खनन को लेकर पहले भी विवाद
ग्रामीणों के अनुसार, बनडीह घाट वन संरक्षित क्षेत्र में आता है, जहां खनन की अनुमति नहीं दी जा सकती। उनका दावा है कि वर्ष 2018 में घाट की नीलामी के बाद तत्कालीन रांची उपायुक्त ने खनन पर रोक लगा दी थी। आरोप है कि एक कारोबारी की जमा राशि का 40 प्रतिशत काटकर शेष रकम भी वापस कर दी गई थी।
इसके बावजूद ग्रामीणों का दावा है कि घाट से बड़े पैमाने पर बालू का उठाव जारी है। हालांकि, इन आरोपों और पूर्व में जारी आदेशों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
कार्रवाई के बाद फिर शुरू हुआ बालू उठाव
ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों ने मौके पर वाहनों को पकड़ा, लेकिन उन्हें जब्त कर थाने ले जाने के बजाय चाबी वापस कर दी। ग्रामीणों के मुताबिक, प्रशासनिक टीम के जाने के पांच मिनट के भीतर ही हाइवा में दोबारा बालू लोड किया जाने लगा।
इस घटनाक्रम के बाद ग्रामीणों ने कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि यदि वाहन अवैध खनन में इस्तेमाल हो रहे थे, तो उन्हें विधिवत जब्त क्यों नहीं किया गया? वहीं, यदि वाहन वैध थे, तो उन्हें पकड़े जाने का आधार क्या था?
प्रशासन से जवाब और जांच की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मामले में जवाब मांगा है। उनकी प्रमुख मांगें हैं:
- पकड़े गए हाइवा और जेसीबी को तत्काल जब्त किया जाए।
- एसडीएम बुंडू और सीओ सोनाहातू की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
- बनडीह घाट पर कथित अवैध खनन करने वालों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए।
- वन क्षेत्र में खनन और परिवहन से जुड़े सभी मामलों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों और खनन कारोबारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।