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बाबा मेंस वियर दुकान बेदखली मामला: बुंडू CO से हाईकोर्ट ने मांगा जवाब, मिलीभगत की जताई आशंका
October 13, 2026 | 167 Views
बाबा मेंस वियर दुकान बेदखली मामला: बुंडू CO से हाईकोर्ट ने मांगा जवाब, मिलीभगत की जताई आशंका

21 अगस्त को जारी बेदखली नोटिस तीन दिन बाद लिया गया था वापस; CO हंस हेम्ब्रम को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश, DC रांची से भी जवाब तलब

बुंडू (रांची): बुंडू मेन रोड स्थित बाबा मेंस वियर (Baba Mens Wear) दुकान के बेदखली मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने बुंडू के अंचल अधिकारी (CO) हंस हेम्ब्रम की भूमिका पर प्रथम दृष्टया सवाल उठाए हैं। मीना देवी की ओर से दायर W.P.(C) No. 7845 of 2026 की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राजेश शंकर की अदालत ने अंचल अधिकारी और किरायेदार मुकेश कुमार के बीच मिलीभगत की आशंका जताते हुए CO से तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले में रांची के उपायुक्त (DC) से भी जवाब मांगा गया है। अगली सुनवाई 5 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

बेदखली आदेश के बाद नोटिस वापस लेने पर सवाल

मामले के अनुसार, मकान किराया नियंत्रक-सह-अनुमंडल पदाधिकारी, बुंडू ने 11 मई 2026 को J.B.C. Case No. 02/2026 में मीना देवी के पक्ष में आदेश पारित करते हुए किरायेदार मुकेश कुमार को 15 दिनों के भीतर दुकान खाली कर शांतिपूर्ण दखल सौंपने का निर्देश दिया था। आदेश में यह भी कहा गया था कि निर्धारित अवधि में दुकान खाली नहीं होने पर अंचल अधिकारी, बुंडू पुलिस के सहयोग से बेदखली की कार्रवाई सुनिश्चित करें।

उक्त आदेश के अनुपालन में अंचल अधिकारी ने 21 अगस्त 2026 को Memo No. 567(ii) के माध्यम से दुकान खाली कराने का नोटिस जारी किया। हालांकि, महज तीन दिन बाद 24 अगस्त 2026 को Memo No. 571(ii) जारी कर पहले के नोटिस को वापस ले लिया गया। इसी कार्रवाई को मीना देवी ने झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी।

8 अक्टूबर को भी कोर्ट ने उठाए थे सवाल

याचिका पर 8 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने टिप्पणी की थी कि 21 अगस्त के बेदखली नोटिस को 24 अगस्त के दूसरे नोटिस से वापस लेना प्रथम दृष्टया अवैध प्रतीत होता है, विशेषकर तब, जब अपील में कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं हुआ था।

इसके बाद 12 अक्टूबर 2026 को हुई सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ स्थायी अधिवक्ता अशोक कुमार यादव ने अदालत को बताया कि रांची के उपायुक्त ने 25 अगस्त 2026 को J.B.C. Appeal No. 23R 15/2026-27 में अंतरिम आदेश पारित किया था। साथ ही, सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि विधि शाखा ने 27 अगस्त 2026 को पत्रांक 3640(ii) के जरिए अंचल अधिकारी को इसकी सूचना दी थी।

वहीं, याचिकाकर्ता मीना देवी के अधिवक्ता अभय प्रकाश ने अदालत के समक्ष दलील दी कि अंचल अधिकारी ने 24 अगस्त को ही बेदखली नोटिस वापस ले लिया था, जबकि उपायुक्त का अंतरिम आदेश अगले दिन, यानी 25 अगस्त को पारित हुआ। याचिकाकर्ता की ओर से इसी समय-क्रम के आधार पर अंचल अधिकारी की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए।

कोर्ट ने प्रथम दृष्टया मिलीभगत की आशंका जताई

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बेदखली नोटिस वापस लेने का आदेश 24 अगस्त को पारित हुआ था, जबकि उपायुक्त का अंतरिम आदेश 25 अगस्त को आया। अदालत ने प्रथम दृष्टया अंचल अधिकारी और किरायेदार के बीच मिलीभगत की आशंका व्यक्त की।

अदालत ने इस मामले में अंचल अधिकारी हंस हेम्ब्रम को तीन सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। किरायेदार मुकेश कुमार को भी नोटिस जारी करने का आदेश दिया गया। इसके अलावा, उपायुक्त, रांची को अगली सुनवाई से पहले काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

किरायेदारी को लेकर भी हुआ था विवाद

मूल बेदखली मामले में मीना देवी ने दावा किया था कि मुकेश कुमार के साथ दुकान को लेकर किरायेदारी का समझौता था और किराया बकाया होने के साथ दुकान की वास्तविक आवश्यकता के आधार पर बेदखली की मांग की गई थी।

दूसरी ओर, मुकेश कुमार ने संपत्ति को पैतृक बताते हुए मकान-मालिक और किरायेदार के संबंध से इनकार किया था। उन्होंने किरायानामा समाप्त होने, दुकान खाली करने और दो लाख रुपये अग्रिम राशि वापस नहीं मिलने की बात भी कही थी।

मूल मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और पक्षकारों की दलीलों पर विचार करने के बाद सक्षम प्राधिकारी ने मकान-मालिक और किरायेदार के बीच संबंध स्थापित मानते हुए बेदखली का आदेश पारित किया था।

5 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने मामले में संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। अब इस प्रकरण की अगली सुनवाई 5 नवंबर 2026 को For Orders के तहत होगी।

 


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