रांची । झारखंड सरकार ने नगर विकास एवं आवास, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के मंत्री सुदिव्य कुमार के निधन पर राज्य में दो दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की है।
कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से 6 सितंबर 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, दिवंगत मंत्री के सम्मान में 6 और 7 सितंबर 2026 को दो दिवसीय राजकीय शोक मनाया जाएगा।
सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि 7 सितंबर 2026 (सोमवार) को झारखंड सरकार के अधीन सभी कार्यालय कार्यपालक आदेश के तहत बंद रहेंगे।
अधिसूचना में कहा गया है कि यह निर्णय मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग द्वारा जारी सूचना के आलोक में लिया गया है। झारखंड के राज्यपाल के आदेश से सरकार के अवर सचिव दिलीप कुमार साह द्वारा यह अधिसूचना जारी की गई है।
सरकार की ओर से संबंधित सभी विभागों, विभागाध्यक्षों, प्रमंडलीय आयुक्तों, उपायुक्तों सहित विभिन्न संवैधानिक एवं प्रशासनिक संस्थानों को आवश्यक कार्रवाई और सूचना के लिए आदेश की प्रति भेजी गई है।
एक दिन बंद रहेंगे सरकारी कार्यालय
➡️ 6 सितंबर: राजकीय शोक
➡️ 7 सितंबर: राजकीय शोक और सभी सरकारी कार्यालय बंद
➡️ 8 सितंबर से: कार्यालयों के सामान्य रूप से खुलने की संभावना
साहिबगंज। झारखंड सरकार के मंत्री एवं गिरिडीह विधायक स्वर्गीय सुदिव्य कुमार के असामयिक निधन पर साहिबगंज जिला प्रशासन की ओर से समाहरणालय सभागार में शोक सभा आयोजित की गई। इस दौरान जिला प्रशासन के अधिकारियों एवं समाहरणालय कर्मियों ने दिवंगत मंत्री के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और उनके निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की।
शोक सभा में उपायुक्त दीपक कुमार दूबे, पुलिस अधीक्षक अमित कुमार सिंह, वन प्रमंडल पदाधिकारी प्रबल गर्ग, उप विकास आयुक्त सतीश चंद्रा, अपर समाहर्ता विजय कुमार, मुख्यालय डीएसपी सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारी एवं समाहरणालय के कर्मी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने स्वर्गीय सुदिव्य कुमार के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। इसके बाद सभी उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
जनसेवा और विकास में योगदान को किया याद
शोक सभा में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि स्वर्गीय सुदिव्य कुमार का असामयिक निधन झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने जनसेवा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई तथा राज्य के विकास से जुड़े विभिन्न कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके निधन से राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में एक बड़ी क्षति हुई है।
अधिकारियों ने कहा कि स्वर्गीय सुदिव्य कुमार के कार्यों और जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को लंबे समय तक याद किया जाएगा। उनके निधन से उनके सहयोगियों, समर्थकों और आम लोगों में गहरा शोक है।
परिवार के प्रति जताई संवेदना
शोक सभा के दौरान जिला प्रशासन के पदाधिकारियों एवं कर्मियों ने दिवंगत मंत्री के शोक-संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। सभी ने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को शांति मिले तथा परिजनों को इस कठिन और दुखद घड़ी में अपार दुःख सहन करने की शक्ति और संबल प्राप्त हो।
गिरिडीह। झारखंड सरकार के दिवंगत मंत्री एवं गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का रविवार को गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। हरसिंहरायडीह स्थित उनके आवास से निकली अंतिम यात्रा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने दिवंगत मंत्री के पार्थिव शरीर को कंधा दिया और श्मशान घाट तक पहुंचकर उन्हें अंतिम विदाई दी। राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रविवार को हरसिंहरायडीह स्थित स्वर्गीय सुदिव्य कुमार सोनू के आवास पहुंचे। यहां उन्होंने पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने शोक-संतप्त परिजनों से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिजनों को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
दिवंगत मंत्री की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े। मंत्रिमंडल के सदस्य, विधायक, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक और आम नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। लोगों ने नम आंखों से अपने लोकप्रिय जनप्रतिनिधि को अंतिम विदाई दी।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी अंतिम यात्रा में पैदल शामिल हुए और पार्थिव शरीर को कंधा देकर श्मशान घाट तक पहुंचे। इस दौरान पूरा माहौल गमगीन रहा। बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर शोक व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने कहा—झारखंड ने खोया कर्मठ जनप्रतिनिधि
मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि देर रात हृदयाघात के कारण सुदिव्य कुमार सोनू का आकस्मिक निधन हो गया। यह सरकार और पूरे झारखंड के लिए अत्यंत दुखद और पीड़ादायक घटना है। उन्होंने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे और गंभीरता एवं परिपक्वता के साथ उन्होंने विकास कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुदिव्य कुमार का इतनी कम उम्र में असमय चले जाना बेहद पीड़ादायक है। उनके निधन से राज्य ने एक कर्मठ जनप्रतिनिधि, समर्पित मंत्री और युवा नेतृत्व को खो दिया है। उन्होंने कहा कि सुदिव्य कुमार के योगदान को झारखंड हमेशा याद रखेगा।
सरकार परिवार के साथ खड़ी—हेमंत सोरेन
मुख्यमंत्री ने कहा कि दुख की इस घड़ी में राज्य सरकार दिवंगत मंत्री के परिवार के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। सरकार की ओर से परिवार को हर संभव सहयोग और संबल दिया जाएगा। उन्होंने ईश्वर से शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में धैर्य और शक्ति प्रदान करने की कामना की।
कल्पना सोरेन ने भी दी श्रद्धांजलि
विधायक कल्पना सोरेन ने भी दिवंगत सुदिव्य कुमार सोनू के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात की और अपनी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
सुदिव्य कुमार सोनू का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया। अंतिम यात्रा में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, राज्य सरकार के वरिष्ठ पदाधिकारी, गिरिडीह जिला प्रशासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, मंत्रिमंडल के सदस्य और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
अंतिम यात्रा के दौरान लोगों में अपने प्रिय नेता को खोने का गहरा दुख दिखाई दिया। हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय रहने वाले सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से पूरे गिरिडीह सहित झारखंड के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर है।
दिवंगत मंत्री के निधन को मुख्यमंत्री ने झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि उनका योगदान और जनसेवा के प्रति समर्पण हमेशा याद किया जाएगा।
गिरिडीह । झारखंड सरकार में नगर विकास एवं आवास, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य मंत्री तथा गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार के आकस्मिक निधन से पूरे झारखंड में शोक की लहर है। युवा और सक्रिय जनप्रतिनिधि के असामयिक निधन से राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक क्षेत्र में गहरा दुख व्याप्त है।
दिवंगत मंत्री सुदिव्य कुमार को श्रद्धांजलि देने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रविवार को गिरिडीह पहुंचे। मुख्यमंत्री हरसिंहरायडीह स्थित स्वर्गीय सुदिव्य कुमार के आवास पहुंचे, जहां उन्होंने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान मुख्यमंत्री काफी भावुक नजर आए और उन्होंने शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सुदिव्य कुमार का आकस्मिक निधन अत्यंत पीड़ादायक है। उनका निधन केवल उनके परिवार और समर्थकों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि सुदिव्य कुमार ने एक कर्मठ जनप्रतिनिधि, समर्पित मंत्री और युवा नेतृत्व के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई थी।
‘राज्य ने एक कर्मठ जनप्रतिनिधि और युवा नेतृत्व खो दिया’
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुदिव्य कुमार के निधन से झारखंड ने एक ऐसे जनप्रतिनिधि को खो दिया है, जो लगातार जनता से जुड़े मुद्दों और राज्य के विकास के लिए सक्रिय रहते थे। सरकार में मंत्री के रूप में भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके योगदान, सेवाओं और जनहित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को हमेशा याद किया जाएगा।
उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। साथ ही शोकाकुल परिवार को इस कठिन और दुख की घड़ी में धैर्य एवं संबल प्रदान करने की कामना की।
कल्पना सोरेन ने भी दी श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री के साथ विधायक कल्पना सोरेन भी दिवंगत मंत्री के आवास पहुंचीं। उन्होंने सुदिव्य कुमार के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और परिवार के सदस्यों से मुलाकात कर अपनी संवेदना व्यक्त की।
सुदिव्य कुमार के निधन की खबर सामने आने के बाद बड़ी संख्या में राजनीतिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि, समर्थक और आम लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। गिरिडीह में उनके आवास पर लोगों की भीड़ जुट रही है और हर कोई अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई देने के लिए पहुंच रहा है।
दो दिवसीय राजकीय शोक, 7 सितंबर को सरकारी कार्यालय बंद
दिवंगत मंत्री के सम्मान में झारखंड सरकार ने 6 और 7 सितंबर को दो दिवसीय राजकीय शोक घोषित किया है। वहीं 7 सितंबर 2026 को झारखंड सरकार के अधीन सभी सरकारी कार्यालय कार्यपालक आदेश के तहत बंद रहेंगे।
सुदिव्य कुमार के आकस्मिक निधन ने झारखंड की राजनीति में एक बड़ी रिक्तता पैदा कर दी है। उनके निधन पर मुख्यमंत्री सहित सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।
रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंत्री एवं गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक भावुक संदेश में मुख्यमंत्री ने सुदिव्य कुमार सोनू को केवल वरिष्ठ राजनीतिक साथी और सहकर्मी नहीं, बल्कि “बड़े भाई” के समान बताया।
हेमंत सोरेन ने लिखा कि देर रात उन्हें अपने बड़े भाई और प्रिय सुदिव्य कुमार सोनू के निधन की दुखद खबर मिली। उन्होंने कहा कि इस खबर को स्वीकार कर पाना उनके लिए बेहद कठिन है। सोनू भैया के जाने से उनके जीवन में ऐसी रिक्तता पैदा हुई है, जिसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं है।
राजनीतिक साथी से बढ़कर था भाई जैसा रिश्ता
मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में सुदिव्य कुमार सोनू के साथ अपने रिश्ते को याद करते हुए कहा कि सोनू भैया उनके लिए केवल एक वरिष्ठ साथी या राजनीतिक सहकर्मी नहीं थे। वे स्नेह देने वाले, मार्गदर्शन करने वाले और कठिन समय में मजबूती से साथ खड़े रहने वाले बड़े भाई की तरह थे।
उन्होंने कहा कि सोनू कुमार के साथ बिताए पल और उनसे मिली सीख हमेशा उनके साथ रहेगी।
झारखंड आंदोलन से जुड़ा रहा संघर्ष
हेमंत सोरेन ने सुदिव्य कुमार सोनू के राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष को भी याद किया। उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलन के दौर से ही सोनू स्मृति-शेष बाबा दिशोम गुरु के साथ पूरी निष्ठा और मजबूती से खड़े रहे।
मुख्यमंत्री के अनुसार, झारखंड मुक्ति मोर्चा के एक समर्पित सिपाही के रूप में सुदिव्य कुमार सोनू ने अपना पूरा जीवन झारखंड की अस्मिता, अधिकार और स्वाभिमान की लड़ाई को समर्पित किया।
उन्होंने कहा कि झारखंडियत के प्रति सोनू की प्रतिबद्धता और जुड़ाव की भावना हमेशा याद की जाएगी।
“जिंदगी कितनी क्षणभंगुर है”—हेमंत सोरेन
सुदिव्य कुमार सोनू को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने जीवन की क्षणभंगुरता पर भी भावुक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कल तक जो आवाज उनके बीच थी, वह आज सिर्फ स्मृतियों में रह गई है।
हेमंत सोरेन ने कहा कि सोनू भैया का जाना उनके लिए व्यक्तिगत क्षति है और उनकी कमी उन्हें हमेशा महसूस होगी।
“आपका स्नेह और संघर्ष जीवनभर साथ लेकर चलूंगा”
मुख्यमंत्री ने दिवंगत सुदिव्य कुमार सोनू को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनके स्नेह, संघर्ष और झारखंड के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को वे जीवनभर अपने साथ लेकर चलेंगे।
अपने संदेश के अंत में हेमंत सोरेन ने बेहद भावुक शब्दों में लिखा—“आप हमेशा याद आएंगे भैया…”
कोलकाता / मालदा। मालदा रेल मंडल के न्यू फरक्का क्षेत्र में जमीन धंसने (Land Subsidence) की घटना के कारण रेल परिचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूर्व रेलवे ने कई ट्रेनों को रद्द करने के साथ-साथ लंबी दूरी की कई महत्वपूर्ण ट्रेनों के मार्ग में बदलाव किया है।वही पूर्व रेलवे जीएम गीतिका पांडे ने घटना स्थल पर पहुंच कर निरीक्षण किया है।
पूर्व रेलवे की ओर से जारी सूचना के अनुसार, 5 सितंबर 2026 से शुरू होने वाली कुछ ट्रेन सेवाओं को रद्द किया गया है, जबकि कई ट्रेनों को वैकल्पिक मार्ग से चलाया जा रहा है।
ये ट्रेनें रहेंगी रद्द
5 सितंबर को यात्रा शुरू करने वाली निम्नलिखित ट्रेनें रद्द रहेंगी—
- 53028 मालदा टाउन–आजिमगंज पैसेंजर
- 63402 मालदा टाउन–साहिबगंज मेमू
- 63422 साहिबगंज–आजिमगंज मेमू
- 53030 भागलपुर–आजिमगंज पैसेंजर
- 63401 साहिबगंज–मालदा टाउन मेमू
- 63421 आजिमगंज–साहिबगंज मेमू
- 53433 आजिमगंज–बरहरवा पैसेंजर
- 53029 आजिमगंज–भागलपुर पैसेंजर
कटिहार-मांसी-मुंगेर-किऊल होकर चलेंगी ट्रेनें
न्यू फरक्का की स्थिति के कारण कुछ ट्रेनों को कटिहार–मांसी–मुंगेर–किऊल के रास्ते डायवर्ट किया गया है। इनमें—
- 14003 मालदा टाउन–नई दिल्ली एक्सप्रेस — 5 सितंबर से
- 15744 भटिंडा–बालुरघाट फरक्का एक्सप्रेस — 3 सितंबर से
- 09033 उधना–मालदा टाउन स्पेशल — 3 सितंबर से
शामिल हैं।
न्यू फरक्का–आजिमगंज–कटवा–बंडेल होकर चलेंगी ट्रेनें
इस मार्ग से डायवर्ट की गई ट्रेनों में—
- 12042 न्यू जलपाईगुड़ी–हावड़ा शताब्दी एक्सप्रेस
- 12346 गुवाहाटी–हावड़ा सरायघाट एक्सप्रेस
- 22301 हावड़ा–न्यू जलपाईगुड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस
- 13053 हावड़ा–राधिकापुर कुलिक एक्सप्रेस
- 12363 कोलकाता–हल्दीबाड़ी सुपरफास्ट एक्सप्रेस
शामिल हैं। इनमें संबंधित ट्रेनों की यात्रा तिथि के अनुसार मार्ग परिवर्तन लागू किया गया है।
न्यू फरक्का–आजिमगंज–नलहाटी मार्ग से भी डायवर्जन
कुछ लंबी दूरी की ट्रेनों को न्यू फरक्का–आजिमगंज–नलहाटी के रास्ते चलाया जा रहा है। इनमें—
- 16524 बालुरघाट–एसएमवीबी बेंगलुरु एक्सप्रेस
- 17032 अगरतला–चारलापल्ली एक्सप्रेस
- 13175 सियालदह–सिलचर कंचनजंघा एक्सप्रेस
- 16223 एसएमवीबी बेंगलुरु–राधिकापुर एक्सप्रेस
- 15929 तांबरम–न्यू तिनसुकिया एक्सप्रेस
शामिल हैं।
यात्रियों से अपील
न्यू फरक्का में जमीन धंसने की स्थिति को देखते हुए रेल प्रशासन द्वारा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह कदम उठाया गया है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि यात्रा से पहले अपनी ट्रेन के नवीनतम परिचालन, रद्दीकरण या मार्ग परिवर्तन की जानकारी अवश्य जांच लें, ताकि स्टेशन पहुंचने के बाद किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
रांची: बिजली विभाग की लापरवाही का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। पिठौरिया प्रखंड की कोकोदरो पंचायत में राजमिस्त्री का काम करने वाले कैलाश के तीन कमरों के मकान का अगस्त महीने का बिजली बिल करीब 29 लाख 88 हजार रुपये पहुंच गया। हैरानी की बात यह है कि घर में सिर्फ तीन बल्ब और तीन पंखे हैं।
कैलाश के घर का बिजली कनेक्शन उनकी मां रूपन देवी के नाम पर है। इतना भारी-भरकम बिल देखकर परिवार के लोग भी सकते में आ गए और बिजली विभाग से शिकायत की।
बताया जा रहा है कि कोकोदरो पंचायत के कई अन्य उपभोक्ताओं को भी लाखों रुपये के गलत बिजली बिल भेजे गए हैं। मामले की जांच में विभाग ने माना कि मीटर रीडिंग के दौरान ऊर्जा मित्र से दशमलव दर्ज करने में गलती हुई, जिसके कारण बिजली की खपत वास्तविक खपत से कई गुना अधिक दर्ज हो गई।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, कैलाश के बिजली बिल में सुधार कर दिया गया है। वहीं, पंचायत के अन्य प्रभावित उपभोक्ताओं के बिलों की भी जांच कर उन्हें दुरुस्त करने की प्रक्रिया जारी है।
इस घटना ने बिजली बिल की मीटर रीडिंग और उसकी निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि भविष्य में ऐसी गंभीर गलतियों से बचने के लिए बिल जारी करने से पहले रीडिंग की उचित जांच की जाए।
मालदा। मालदा मंडल में न्यू फरक्का के पास जमीन धंसने की घटना के बाद रेलवे ने ट्रेनों के परिचालन में बड़ा बदलाव किया है। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए 4 सितंबर 2026 को यात्रा शुरू करने वाली कई ट्रेनों को रद्द किया गया है, जबकि कई ट्रेनों के मार्ग में परिवर्तन किया गया है।
रद्द की गई ट्रेनें:
4 सितंबर को यात्रा शुरू करने वाली 53433/53434 आजीमगंज–बरहरवा–आजीमगंज पैसेंजर, 63421/63422 आजीमगंज–साहिबगंज–आजीमगंज मेमू, 53027 आजीमगंज–मालदा टाउन पैसेंजर और 53029 आजीमगंज–भागलपुर पैसेंजर को रद्द कर दिया गया है।
इन ट्रेनों के मार्ग में बदलाव:
न्यू फरक्का–आजीमगंज–कटवा–बंडेल होकर 13054 राधिकापुर–हावड़ा एक्सप्रेस और 13162 बालुरघाट–कोलकाता एक्सप्रेस का परिचालन किया जाएगा। दोनों ट्रेनें 4 सितंबर को अपनी यात्रा शुरू करेंगी।
वहीं, 15743 बालुरघाट–भटिंडा फरक्का एक्सप्रेस और 15657 दिल्ली–कामाख्या ब्रह्मपुत्र मेल को कटिहार–मुंगेर–किऊल मार्ग से चलाया जाएगा। ब्रह्मपुत्र मेल 3 सितंबर को यात्रा शुरू कर चुकी है।
इसके अलावा 15227 एसएमवीबी बेंगलुरु–मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस, जिसकी यात्रा 3 सितंबर से शुरू हुई है, को पहले निर्धारित बरहरवा–साहिबगंज–मुंगेर मार्ग के बजाय नलहाटी–आजीमगंज–न्यू फरक्का होकर डायवर्ट किया गया है।
साहिबगंज से शुरू होगी पटना एक्सप्रेस
रेलवे ने 13415 मालदा टाउन–पटना एक्सप्रेस के परिचालन में भी बदलाव किया है। 4 सितंबर को यात्रा शुरू करने वाली यह ट्रेन मालदा टाउन के बजाय साहिबगंज से शॉर्ट ओरिजिनेट होगी।
साहिबगंज। बाढ़ का पानी उतरने के बाद साहिबगंज के प्रभावित इलाकों में अब संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ने लगा है। जगह-जगह जमा गंदगी, जलजमाव और बढ़ते मच्छरों के प्रकोप के कारण ग्रामीणों में मलेरिया, डेंगू, डायरिया, टाइफाइड और त्वचा संबंधी बीमारियों को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस बीच कोर्दाजनना गांव में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार करीब 10 हजार की आबादी वाले कोर्दाजनना गांव में संचालित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में लंबे समय से सीएचओ और एएनएम की नियमित उपलब्धता नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां पदस्थापित सीएचओ राजेश कुमार यादव आयुष्मान आरोग्य मंदिर के बजाय सदर अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में प्रतिनियुक्ति पर कार्य कर रहे हैं। वहीं, केंद्र में पदस्थापित एएनएम से भी मुख्यालय अस्पताल में कार्य लिए जाने की बात ग्रामीणों ने कही है। इसके कारण गांव के स्वास्थ्य केंद्र में नियमित स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने का आरोप लगाया जा रहा है।
बाढ़ के बाद बढ़ी बीमारी की आशंका
बाढ़ का पानी घटने के बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में कई स्थानों पर गंदगी और जलजमाव बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी कम होने के साथ ही मच्छरों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में मलेरिया और डेंगू के अलावा दूषित पानी से डायरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। बाढ़ के पानी के संपर्क में रहने के कारण त्वचा संबंधी संक्रमण की आशंका भी बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे समय में स्वास्थ्यकर्मियों की नियमित मौजूदगी बेहद जरूरी है, ताकि बीमारियों के लक्षण सामने आने पर तत्काल जांच और उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
उपायुक्त और सिविल सर्जन से की जा चुकी है मांग
ग्रामीणों के मुताबिक, गांव के मुखिया, वार्ड सदस्य और अन्य ग्रामीणों ने कुछ दिन पूर्व उपायुक्त एवं सिविल सर्जन को लिखित आवेदन देकर कोर्दाजनना आयुष्मान आरोग्य मंदिर में पदस्थापित सीएचओ को वापस केंद्र पर भेजने की मांग की थी। साथ ही एएनएम को भी नियमित रूप से आयुष्मान आरोग्य मंदिर में सेवा देने की मांग की गई थी।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार आवेदन दिए जाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। उनका कहना है कि यदि बाढ़ के बाद किसी संक्रामक बीमारी का प्रकोप बढ़ता है तो स्वास्थ्यकर्मियों की कमी के कारण ग्रामीणों को इलाज के लिए परेशान होना पड़ सकता है।
स्वास्थ्य शिविर, दवा छिड़काव और स्वच्छ पेयजल की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से कोर्दाजनना आयुष्मान आरोग्य मंदिर में सीएचओ और एएनएम की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की मांग की है। इसके अलावा बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर लगाने, मलेरिया-डेंगू समेत अन्य संभावित बीमारियों की जांच कराने और जरूरतमंदों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
ग्रामीणों ने गांव में साफ-सफाई, मच्छररोधी दवा का छिड़काव और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि बीमारी फैलने का इंतजार करने के बजाय स्वास्थ्य विभाग को अभी से प्रभावित क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ानी चाहिए, ताकि संभावित संक्रमण को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
रांची। झारखंड में बंद हो रही कोयला खदानों को नई उपयोगिता देने की दिशा में राज्य सरकार ने अहम कदम उठाया है। गिरिडीह ओपन कास्ट प्रोजेक्ट (OCP) और रामगढ़ जिले की करमा OCP को पायलट परियोजना के लिए चयनित किया गया है। दोनों खदानों के लिए भारत सरकार को अनुशंसा भेजने पर सहमति बनी है।
यह पहल भारत सरकार के कोयला मंत्रालय और जर्मनी की संस्था GIZ के सहयोग से चल रही Technical Cooperation on To-be-Closed Coal Mines (TCCM) परियोजना के तहत की जा रही है। रांची में हुई उच्चस्तरीय बैठक में खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव अरवा राजकमल समेत राज्य सरकार, GIZ, कोल कंट्रोलर ऑर्गनाइजेशन, CCL और CMPDI के अधिकारी मौजूद रहे।
बंद खदानों को बनाया जाएगा उपयोगी
परियोजना के तहत दोनों खदानों के लिए Final Mine Closure and Repurposing Plan तैयार किया जाएगा। इसमें खदान बंद होने के बाद जमीन, जल संसाधन, पर्यावरण, आधारभूत संरचना और स्थानीय अर्थव्यवस्था के पुनर्पयोग की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य खदान बंदी को केवल खनन गतिविधि खत्म होने तक सीमित रखना नहीं, बल्कि इन क्षेत्रों को पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित, सामाजिक रूप से समावेशी और आर्थिक रूप से उत्पादक बनाना है।
नवीकरणीय ऊर्जा से पर्यटन तक खुलेंगे नए रास्ते
बंद खदानों की भूमि का उपयोग भविष्य में नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यटन, कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन, कौशल विकास केंद्र समेत अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। इससे खनन प्रभावित इलाकों में पर्यावरण सुधार के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
करमा OCP के 8 गांवों पर विशेष फोकस
करमा OCP के पांच किलोमीटर के प्रभाव क्षेत्र में आने वाले सुगिया, मरार, बोंगाबार, करमा, कैथा, कंडेर, लोढ़मा और पैंकी गांवों को चिन्हित किया गया है। इन गांवों में सामाजिक-आर्थिक स्थिति, कमजोर वर्गों और आजीविका के अवसरों का आकलन किया जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर समन्वय के लिए Mine Closure Advisory Committee का भी गठन किया गया है।
मार्च 2030 तक चलेगी परियोजना
परियोजना के तहत विस्तृत DPR तैयार की जाएगी, जिसमें पर्यावरणीय पुनर्स्थापन, भूमि उपयोग, जल प्रबंधन, माइन वॉइड मैनेजमेंट और आधारभूत संरचना के पुनर्पयोग को शामिल किया जाएगा। उपयुक्त स्थानों पर नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और अन्य निवेश की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी।
TCCM परियोजना मार्च 2030 तक संचालित होगी। इसके अनुभवों के आधार पर तैयार मॉडल को देश की अन्य बंद हो रही कोयला खदानों में भी लागू करने की योजना है। राज्य सरकार के अनुसार, यह पहल झारखंड में सस्टेनेबल पोस्ट-माइनिंग डेवलपमेंट की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।