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झारखंड में बंद कोयला खदानों के पुनर्पयोग की बड़ी पहल, गिरिडीह और करमा OCP पायलट प्रोजेक्ट के लिए चयनित
September 2, 2026 | 124 Views
झारखंड में बंद कोयला खदानों के पुनर्पयोग की बड़ी पहल, गिरिडीह और करमा OCP पायलट प्रोजेक्ट के लिए चयनित

रांची।  झारखंड में बंद हो रही कोयला खदानों को नई उपयोगिता देने की दिशा में राज्य सरकार ने अहम कदम उठाया है। गिरिडीह ओपन कास्ट प्रोजेक्ट (OCP) और रामगढ़ जिले की करमा OCP को पायलट परियोजना के लिए चयनित किया गया है। दोनों खदानों के लिए भारत सरकार को अनुशंसा भेजने पर सहमति बनी है।

यह पहल भारत सरकार के कोयला मंत्रालय और जर्मनी की संस्था GIZ के सहयोग से चल रही Technical Cooperation on To-be-Closed Coal Mines (TCCM) परियोजना के तहत की जा रही है। रांची में हुई उच्चस्तरीय बैठक में खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव अरवा राजकमल समेत राज्य सरकार, GIZ, कोल कंट्रोलर ऑर्गनाइजेशन, CCL और CMPDI के अधिकारी मौजूद रहे।

बंद खदानों को बनाया जाएगा उपयोगी

परियोजना के तहत दोनों खदानों के लिए Final Mine Closure and Repurposing Plan तैयार किया जाएगा। इसमें खदान बंद होने के बाद जमीन, जल संसाधन, पर्यावरण, आधारभूत संरचना और स्थानीय अर्थव्यवस्था के पुनर्पयोग की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा।

सरकार का लक्ष्य खदान बंदी को केवल खनन गतिविधि खत्म होने तक सीमित रखना नहीं, बल्कि इन क्षेत्रों को पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित, सामाजिक रूप से समावेशी और आर्थिक रूप से उत्पादक बनाना है।

नवीकरणीय ऊर्जा से पर्यटन तक खुलेंगे नए रास्ते

बंद खदानों की भूमि का उपयोग भविष्य में नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यटन, कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन, कौशल विकास केंद्र समेत अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। इससे खनन प्रभावित इलाकों में पर्यावरण सुधार के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

करमा OCP के 8 गांवों पर विशेष फोकस

करमा OCP के पांच किलोमीटर के प्रभाव क्षेत्र में आने वाले सुगिया, मरार, बोंगाबार, करमा, कैथा, कंडेर, लोढ़मा और पैंकी गांवों को चिन्हित किया गया है। इन गांवों में सामाजिक-आर्थिक स्थिति, कमजोर वर्गों और आजीविका के अवसरों का आकलन किया जा रहा है।

स्थानीय स्तर पर समन्वय के लिए Mine Closure Advisory Committee का भी गठन किया गया है।

मार्च 2030 तक चलेगी परियोजना

परियोजना के तहत विस्तृत DPR तैयार की जाएगी, जिसमें पर्यावरणीय पुनर्स्थापन, भूमि उपयोग, जल प्रबंधन, माइन वॉइड मैनेजमेंट और आधारभूत संरचना के पुनर्पयोग को शामिल किया जाएगा। उपयुक्त स्थानों पर नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और अन्य निवेश की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी।

TCCM परियोजना मार्च 2030 तक संचालित होगी। इसके अनुभवों के आधार पर तैयार मॉडल को देश की अन्य बंद हो रही कोयला खदानों में भी लागू करने की योजना है। राज्य सरकार के अनुसार, यह पहल झारखंड में सस्टेनेबल पोस्ट-माइनिंग डेवलपमेंट की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।


September 2, 2026 | 125 Views
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