रांची। झारखंड में बंद हो रही कोयला खदानों को नई उपयोगिता देने की दिशा में राज्य सरकार ने अहम कदम उठाया है। गिरिडीह ओपन कास्ट प्रोजेक्ट (OCP) और रामगढ़ जिले की करमा OCP को पायलट परियोजना के लिए चयनित किया गया है। दोनों खदानों के लिए भारत सरकार को अनुशंसा भेजने पर सहमति बनी है।
यह पहल भारत सरकार के कोयला मंत्रालय और जर्मनी की संस्था GIZ के सहयोग से चल रही Technical Cooperation on To-be-Closed Coal Mines (TCCM) परियोजना के तहत की जा रही है। रांची में हुई उच्चस्तरीय बैठक में खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव अरवा राजकमल समेत राज्य सरकार, GIZ, कोल कंट्रोलर ऑर्गनाइजेशन, CCL और CMPDI के अधिकारी मौजूद रहे।
बंद खदानों को बनाया जाएगा उपयोगी
परियोजना के तहत दोनों खदानों के लिए Final Mine Closure and Repurposing Plan तैयार किया जाएगा। इसमें खदान बंद होने के बाद जमीन, जल संसाधन, पर्यावरण, आधारभूत संरचना और स्थानीय अर्थव्यवस्था के पुनर्पयोग की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य खदान बंदी को केवल खनन गतिविधि खत्म होने तक सीमित रखना नहीं, बल्कि इन क्षेत्रों को पर्यावरणीय रूप से सुरक्षित, सामाजिक रूप से समावेशी और आर्थिक रूप से उत्पादक बनाना है।
नवीकरणीय ऊर्जा से पर्यटन तक खुलेंगे नए रास्ते
बंद खदानों की भूमि का उपयोग भविष्य में नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यटन, कृषि, बागवानी, मत्स्य पालन, कौशल विकास केंद्र समेत अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए किया जा सकता है। इससे खनन प्रभावित इलाकों में पर्यावरण सुधार के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
करमा OCP के 8 गांवों पर विशेष फोकस
करमा OCP के पांच किलोमीटर के प्रभाव क्षेत्र में आने वाले सुगिया, मरार, बोंगाबार, करमा, कैथा, कंडेर, लोढ़मा और पैंकी गांवों को चिन्हित किया गया है। इन गांवों में सामाजिक-आर्थिक स्थिति, कमजोर वर्गों और आजीविका के अवसरों का आकलन किया जा रहा है।
स्थानीय स्तर पर समन्वय के लिए Mine Closure Advisory Committee का भी गठन किया गया है।
मार्च 2030 तक चलेगी परियोजना
परियोजना के तहत विस्तृत DPR तैयार की जाएगी, जिसमें पर्यावरणीय पुनर्स्थापन, भूमि उपयोग, जल प्रबंधन, माइन वॉइड मैनेजमेंट और आधारभूत संरचना के पुनर्पयोग को शामिल किया जाएगा। उपयुक्त स्थानों पर नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं और अन्य निवेश की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी।
TCCM परियोजना मार्च 2030 तक संचालित होगी। इसके अनुभवों के आधार पर तैयार मॉडल को देश की अन्य बंद हो रही कोयला खदानों में भी लागू करने की योजना है। राज्य सरकार के अनुसार, यह पहल झारखंड में सस्टेनेबल पोस्ट-माइनिंग डेवलपमेंट की दिशा में महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।
साहिबगंज। बाढ़ का पानी उतरने के बाद साहिबगंज के प्रभावित इलाकों में अब संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ने लगा है। जगह-जगह जमा गंदगी, जलजमाव और बढ़ते मच्छरों के प्रकोप के कारण ग्रामीणों में मलेरिया, डेंगू, डायरिया, टाइफाइड और त्वचा संबंधी बीमारियों को लेकर चिंता बढ़ गई है। इस बीच कोर्दाजनना गांव में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार करीब 10 हजार की आबादी वाले कोर्दाजनना गांव में संचालित आयुष्मान आरोग्य मंदिर में लंबे समय से सीएचओ और एएनएम की नियमित उपलब्धता नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां पदस्थापित सीएचओ राजेश कुमार यादव आयुष्मान आरोग्य मंदिर के बजाय सदर अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में प्रतिनियुक्ति पर कार्य कर रहे हैं। वहीं, केंद्र में पदस्थापित एएनएम से भी मुख्यालय अस्पताल में कार्य लिए जाने की बात ग्रामीणों ने कही है। इसके कारण गांव के स्वास्थ्य केंद्र में नियमित स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने का आरोप लगाया जा रहा है।
बाढ़ के बाद बढ़ी बीमारी की आशंका
बाढ़ का पानी घटने के बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में कई स्थानों पर गंदगी और जलजमाव बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी कम होने के साथ ही मच्छरों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में मलेरिया और डेंगू के अलावा दूषित पानी से डायरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। बाढ़ के पानी के संपर्क में रहने के कारण त्वचा संबंधी संक्रमण की आशंका भी बनी हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे समय में स्वास्थ्यकर्मियों की नियमित मौजूदगी बेहद जरूरी है, ताकि बीमारियों के लक्षण सामने आने पर तत्काल जांच और उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
उपायुक्त और सिविल सर्जन से की जा चुकी है मांग
ग्रामीणों के मुताबिक, गांव के मुखिया, वार्ड सदस्य और अन्य ग्रामीणों ने कुछ दिन पूर्व उपायुक्त एवं सिविल सर्जन को लिखित आवेदन देकर कोर्दाजनना आयुष्मान आरोग्य मंदिर में पदस्थापित सीएचओ को वापस केंद्र पर भेजने की मांग की थी। साथ ही एएनएम को भी नियमित रूप से आयुष्मान आरोग्य मंदिर में सेवा देने की मांग की गई थी।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार आवेदन दिए जाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। उनका कहना है कि यदि बाढ़ के बाद किसी संक्रामक बीमारी का प्रकोप बढ़ता है तो स्वास्थ्यकर्मियों की कमी के कारण ग्रामीणों को इलाज के लिए परेशान होना पड़ सकता है।
स्वास्थ्य शिविर, दवा छिड़काव और स्वच्छ पेयजल की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से कोर्दाजनना आयुष्मान आरोग्य मंदिर में सीएचओ और एएनएम की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने की मांग की है। इसके अलावा बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में विशेष स्वास्थ्य जांच शिविर लगाने, मलेरिया-डेंगू समेत अन्य संभावित बीमारियों की जांच कराने और जरूरतमंदों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
ग्रामीणों ने गांव में साफ-सफाई, मच्छररोधी दवा का छिड़काव और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था कराने की भी मांग की है। उनका कहना है कि बीमारी फैलने का इंतजार करने के बजाय स्वास्थ्य विभाग को अभी से प्रभावित क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ानी चाहिए, ताकि संभावित संक्रमण को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।
रांची। सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड मुख्यालय, रांची में एक भव्य एवं गरिमामय सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अगस्त, 2026 में मुख्यालय से सेवानिवृत्त होने वाले 06 कर्मियों को सम्मानपूर्वक विदाई दी गई। इसके साथ ही, सीसीएल के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत सेवानिवृत्त कर्मियों को भी उनके-अपने क्षेत्रों में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से ससम्मान विदा किया गया। इस प्रकार, आज सीसीएल मुख्यालय एवं विभिन्न क्षेत्रों से सेवानिवृत्त हुए कुल 132 कर्मियों को गरिमापूर्ण विदाई दी गई।
समारोह के दौरान सीसीएल मुख्यालय में एक लघु फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया, जिसमें सेवानिवृत्त कर्मियों ने अपने सेवाकाल के अनुभव, भावनाएं एवं स्मृतियां साझा कीं।
मुख्यालय से सेवानिवृत्त होने वाले कर्मियों के नाम इस प्रकार हैं- राजेश मोहन, महाप्रबंधक(सिविल), वेलफेयर एंड सर्विसेज/सिविल विभाग; डॉ राजीव कुमार जायसवाल, सीएमओ, दरभंगा हाउस डिस्पेंसरी; सुनीता रवि, मैट्रन ए-1, गांधी नगर अस्पताल; अबनिधर मुखर्जी, ड्राइवर, उत्खनन विभाग; गोवर्धन राम, डुप्लीकेट/जेरॉक्स ऑपरेटर, वित्त (वेतन प्रकोष्ठ) एवं तुलसी केरकेट्टा, वार्ड परिचारक, गांधी नगर अस्पताल।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में निदेशक(मानव संसाधन) श्री हर्ष नाथ मिश्र एवं मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) श्री पंकज कुमार उपस्थित रहे।
इस अवसर पर निदेशक (मानव संसाधन) हर्ष नाथ मिश्र ने सेवानिवृत्त हो रहे कर्मियों को उनके दीर्घकालीन सेवाकाल और कंपनी के प्रति समर्पण के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सीसीएल की प्रगति में प्रत्येक कर्मी का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। सेवानिवृत्ति सेवा का अंत नहीं, बल्कि जीवन के एक नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने सभी सेवानिवृत्त कर्मियों के स्वस्थ, सुखद एवं समृद्ध भविष्य की कामना की।
वहीं, सीवीओ पंकज कुमार ने कहा कि सेवानिवृत्त हो रहे कर्मियों ने अपने अनुभव, मेहनत और प्रतिबद्धता से सीसीएल को निरंतर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके योगदान और अनुभव कंपनी की अमूल्य धरोहर हैं। उन्होंने सभी सेवानिवृत्त कर्मियों एवं उनके परिवारजनों को उज्ज्वल, स्वस्थ एवं खुशहाल भविष्य के लिए शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
समारोह में विभिन्न विभागों के महाप्रबंधक, विभागाध्यक्ष, अधिकारीगण, कर्मचारी तथा सेवानिवृत्त कर्मियों के परिजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इस अवसर पर सभी सेवानिवृत्त कर्मियों को शॉल, पुष्पगुच्छ एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानपूर्वक विदाई दी गई।
रांची। राज्य में H1N1 (स्वाइन फ्लू) को लेकर झारखंड सरकार का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने शनिवार, 29 अगस्त 2026 को राज्यभर में स्वाइन फ्लू की स्थिति की समीक्षा करते हुए सभी सिविल सर्जन, मेडिकल कॉलेजों के अधीक्षक/प्राचार्य एवं जिला सर्विलेंस पदाधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने तथा सतत् निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
स्वास्थ्य मंत्री ने संभावित मामलों की समय पर पहचान, जांच, उपचार, निगरानी एवं आवश्यकता पड़ने पर त्वरित रेफरल की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर एवं प्रतिबद्ध है।
*“स्वाइन फ्लू से किसी भी व्यक्ति की जान नहीं जाने दी जाएगी”*
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने स्पष्ट कहा—
*“स्वाइन फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट है। राज्य में किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित की जा रही हैं। संदिग्ध मरीजों की समय पर पहचान से लेकर जांच, उपचार और आवश्यकता पड़ने पर रेफरल तक हर स्तर पर व्यवस्था को मजबूत किया गया है। हमारा संकल्प है कि स्वाइन फ्लू से किसी भी व्यक्ति की जान नहीं जाने दी जाएगी।”*
स्वास्थ्य मंत्री ने अपर मुख्य सचिव श्री अजय कुमार सहित स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारियों एवं राज्य के विभिन्न जिलों के सिविल सर्जनों से संवाद कर तैयारियों की समीक्षा की तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
*सभी जिलों में सर्विलेंस मजबूत करने का निर्देश*
स्वास्थ्य मंत्री ने सभी जिलों में Influenza Like Illness (ILI) एवं Severe Acute Respiratory Infection (SARI) के मामलों की निगरानी और रिपोर्टिंग को और प्रभावी बनाने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि संभावित एवं गंभीर मामलों की पहचान शुरुआती स्तर पर हो, ताकि मरीजों को समय पर उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
जिला सर्विलेंस पदाधिकारियों को संक्रमण की स्थिति पर लगातार नजर रखने तथा आवश्यकता के अनुसार तत्काल स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं।
*अस्पतालों में अतिरिक्त बेड एवं आवश्यक संसाधन सुरक्षित रखने के निर्देश*
स्वास्थ्य मंत्री ने RIMS, रांची सहित सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों एवं सदर अस्पतालों में अतिरिक्त 10 बेड सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है।
इसके साथ ही अस्पतालों में—
- ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता,
- आवश्यक दवाइयों एवं चिकित्सा सामग्री का पर्याप्त स्टॉक,
- जांच की सुविधा,
- ICU/HDU की तैयारी,
- प्रशिक्षित चिकित्सकीय एवं पैरामेडिकल टीम
की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने सभी अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिया कि संभावित मरीजों के उपचार में किसी भी स्तर पर संसाधनों की कमी नहीं होनी चाहिए।
*एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन एवं बस स्टैंड पर विशेष निगरानी*
राज्य के एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड तथा अन्य प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर भी स्वास्थ्य विभाग को विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया है।
बुखार, खांसी, गले में दर्द, सर्दी-जुकाम अथवा सांस संबंधी परेशानी जैसे लक्षण वाले व्यक्तियों का आवश्यकतानुसार Clinical Assessment किया जाएगा। चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार Influenza/H1N1 की जांच कराई जाएगी तथा गंभीर मरीजों को तत्काल उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
*समय पर जांच और उपचार पर विशेष जोर*
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि H1N1 एक Respiratory Viral Infection है और समय पर पहचान एवं उचित चिकित्सकीय उपचार मिलने पर अधिकांश मरीज स्वस्थ हो जाते हैं। इसलिए लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि सतर्क रहते हुए लक्षण दिखाई देने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
उन्होंने आम लोगों से अपील की कि बुखार, खांसी, गले में दर्द, सर्दी-जुकाम या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण होने पर स्वयं दवा लेने से बचें और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र अथवा अस्पताल में चिकित्सकीय परामर्श लें।
*“सतर्क रहें, घबराएं नहीं”*
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने राज्यवासियों से अपील करते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। सभी संबंधित अधिकारियों एवं स्वास्थ्य संस्थानों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं और किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग की पूरी मशीनरी को सक्रिय रखा गया है।
उन्होंने कहा—
झारखंड सरकार अपने नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। स्वास्थ्य विभाग की सभी इकाइयां अलर्ट मोड में हैं और स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है। लोगों से अपील है कि सतर्क रहें, सावधानी बरतें और लक्षण होने पर समय पर चिकित्सकीय परामर्श लें।
कोलकाता भागलपुर। श्रावणी मेला एवं आगामी पूजा के दौरान यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए रेलवे ने यात्रियों को बड़ी राहत दी है। रेलवे ने ट्रेन संख्या 03407/03408 भागलपुर–कटिहार–भागलपुर अनारक्षित स्पेशल ट्रेन के परिचालन को 30 नवंबर 2026 तक जारी रखने का निर्णय लिया है।
रेलवे के अनुसार, यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस विशेष ट्रेन का परिचालन वर्तमान समय-सारणी और निर्धारित ठहराव के साथ जारी रहेगा। इससे भागलपुर, मुंगेर और कटिहार समेत मार्ग के विभिन्न स्टेशनों के यात्रियों को अतिरिक्त सुविधा मिलेगी।
ट्रेन संख्या 03407 भागलपुर–कटिहार अनारक्षित स्पेशल प्रतिदिन भागलपुर से सुबह 7:00 बजे रवाना होगी और उसी दिन दोपहर 1:00 बजे कटिहार जंक्शन पहुंचेगी।
वहीं वापसी में ट्रेन संख्या 03408 कटिहार–भागलपुर अनारक्षित स्पेशल प्रतिदिन कटिहार जंक्शन से दोपहर 2:10 बजे रवाना होगी और उसी दिन रात 8:20 बजे भागलपुर पहुंचेगी।
रेलवे के अनुसार, दोनों दिशाओं में यह ट्रेन अकबरनगर, सुल्तानगंज, कल्याणपुर रोड, बरियारपुर, रतनपुर और मुंगेर सहित निर्धारित स्टेशनों पर रुकेगी। रेलवे के इस निर्णय से श्रावणी मेला एवं आगामी पूजा के दौरान यात्रियों की बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करने और आवागमन को सुगम बनाने में मदद मिलेगी।
रांची/धनबाद। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने रिश्वतखोरी के मामले में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के तीन अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई गुरुवार को रांची और धनबाद में पांच ठिकानों पर की गई छापेमारी के दौरान हुई। अधिकारियों पर कुल 48,400 रुपये की रिश्वत मांगने और स्वीकार करने का आरोप है।
बताया जा रहा है कि मामला CISF के Pay and Accounts Office से जुड़ा है। CBI ने शिकायत और प्रारंभिक जांच के आधार पर कार्रवाई करते हुए ट्रैप ऑपरेशन चलाया। इसी दौरान कथित तौर पर रिश्वत की रकम लेते हुए अधिकारियों को पकड़ा गया।
CBI की टीम ने कार्रवाई के दौरान संबंधित दस्तावेजों और अन्य सामग्रियों की भी जांच की। रांची और धनबाद स्थित कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि रिश्वतखोरी के इस मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा भ्रष्टाचार का नेटवर्क कितना बड़ा है।
गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। मामले में CBI की जांच आगे जारी है।
रांची, 25 अगस्त। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को झारखंड मंत्रालय में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पुलिस व्यवस्था और प्रशासन से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में 100 नए विद्यालयों को मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय के रूप में विकसित करने, मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस एवं पीजी सीटें बढ़ाने तथा राज्य के 606 पुलिस थानों में 9,006 CCTV कैमरे लगाने समेत कई अहम फैसले लिए गए।
100 और स्कूल बनेंगे मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय
मंत्रिपरिषद ने आदर्श विद्यालय योजना के तहत पहले से संचालित 80 विद्यालयों के अतिरिक्त राज्य के 100 और विद्यालयों को मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय (CM School of Excellence) के रूप में विकसित करने की स्वीकृति दी। इसके लिए 721 करोड़ 43 लाख 25 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।
एमजीएम और एसएनएमएमसीएच में बढ़ेंगी मेडिकल सीटें
जमशेदपुर स्थित एमजीएम मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़ाने तथा नए स्नातकोत्तर विषय शुरू करने और पीजी सीटों में वृद्धि के लिए करीब 393.91 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी गई।
वहीं, धनबाद के शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SNMMCH) के विस्तार के लिए करीब 495.03 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई। इसके अतिरिक्त जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट की राशि से मेडिकल कॉलेज एवं शिक्षण अस्पताल के व्यापक उन्नयन के लिए करीब 275.18 करोड़ रुपये की योजना को भी मंजूरी मिली है।
606 थानों में लगेंगे 9,006 CCTV कैमरे
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में राज्य के 606 पुलिस थानों में कुल 9,006 CCTV कैमरे लगाए जाएंगे। इसके लिए 90 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। योजना का उद्देश्य पुलिस थानों में निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना और पारदर्शिता बढ़ाना है।
सरकारी डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति आयु 67 से घटकर 65 वर्ष
कैबिनेट ने झारखंड स्वास्थ्य सेवा के गैर-शैक्षणिक चिकित्सकों एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति आयु 67 वर्ष से घटाकर 65 वर्ष करने की स्वीकृति दी है।
इसके साथ ही सरकारी अस्पतालों एवं स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सक और विशेषज्ञ चिकित्सकों के रिक्त पदों पर संविदा आधारित नियुक्ति के लिए नियमावली-2026 के गठन को भी मंजूरी दी गई।
सरकारी स्कूलों की छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी नैपकिन
राज्य के सरकारी विद्यालयों में कक्षा 6 से 12 तक पढ़ने वाली छात्राओं को हर माह अधिकतम 10 ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल सैनिटरी नैपकिन नि:शुल्क उपलब्ध कराने की योजना को मंजूरी दी गई। इसके लिए 124.38 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है।
बिजली गिरने और हीट वेव को लेकर बड़ा बदलाव
कैबिनेट ने वज्रपात और ग्रीष्म लहर को गृह मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा प्राकृतिक आपदाओं की सूची में शामिल किए जाने के बाद इन्हें झारखंड की विशिष्ट स्थानीय आपदा की सूची से हटाने की स्वीकृति दी। साथ ही प्राकृतिक एवं विशिष्ट स्थानीय आपदाओं से जुड़े पुराने प्रावधानों में आवश्यक संशोधन को मंजूरी दी गई।
शिक्षा क्षेत्र में कई अहम फैसले
मंत्रिपरिषद ने झारखंड छात्र अनुसंधान और नवाचार नीति-2026 के गठन को मंजूरी दी। वहीं, राज्य के सरकारी एवं सहायता प्राप्त विद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए ज्ञानोदय योजना के तहत Bilingual Parental Calendar और कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों के लिए Student Diary उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति मिली।
इसके अलावा राज्य के पांच नवसृजित प्रखंडों में झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय स्थापित करने और भवन निर्माण के लिए करीब 49.99 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई।
बालिकाओं के लिए आवासीय विद्यालय और शिक्षा व्यवस्था को मजबूती
अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग द्वारा संचालित आवासीय विद्यालयों में शिक्षण कार्य के लिए अंशकालीन शिक्षकों से सेवा लेने की अवधि बढ़ाने को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी।
सड़क और पुल परियोजनाओं को भी मिली मंजूरी
कैबिनेट ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में सड़क निर्माण, मजबूतीकरण एवं चौड़ीकरण की कई योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति दी। इनमें चाईबासा क्षेत्र की करीब 38.65 किलोमीटर सड़क के लिए 29.87 करोड़ रुपये, चतरा क्षेत्र की 24.80 किलोमीटर सड़क के लिए 25.53 करोड़ रुपये, मनोहरपुर क्षेत्र की 19.149 किलोमीटर सड़क के लिए करीब 114.01 करोड़ रुपये और रामगढ़ में बरलंगा-गोला-मुरी पथ के लिए करीब 56.85 करोड़ रुपये की स्वीकृति शामिल है।
गिरिडीह में बरगंडा चौक से कॉलेज मोड़ तक सड़क के चौड़ीकरण एवं मजबूतीकरण के लिए भी करीब 30.46 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई।
तोपचांची झील के सौंदर्यीकरण को हरी झंडी
धनबाद की तोपचांची झील एवं आसपास के क्षेत्र के सौंदर्यीकरण के लिए Public Private Partnership (PPP) के DBFOT मॉडल पर करीब 184.29 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी गई।
जेलों में बनेंगे Open/Semi Open Barrack
सुप्रीम कोर्ट के न्यायादेश के आलोक में रांची के बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, दुमका केंद्रीय कारा, घाघीडीह केंद्रीय कारा जमशेदपुर और हजारीबाग के लोकनायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा में Open/Semi Open Barrack स्थापित करने की स्वीकृति दी गई।
ग्रामीण पुलों के रखरखाव के लिए नई नीति
ग्रामीण कार्य विभाग के अंतर्गत निर्मित पुलों के रखरखाव एवं अनुरक्षण के लिए झारखंड ग्रामीण पुल अनुरक्षण नीति-2025 को मंजूरी दी गई है।
रोजगार और प्रशासन से जुड़े फैसले
कैबिनेट ने विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) योजना को झारखंड में लागू करने की स्वीकृति दी। वित्त विभाग के Project Monitoring Unit को मजबूत करने के लिए पूर्व में सृजित 37 पदों को प्रत्यर्पित करते हुए संविदा/बाह्यस्रोत के आधार पर 76 नए पदों पर मानव बल की सेवा लेने की अनुमति दी गई।
12 संविदा कनिष्ठ अभियंताओं के नियमितीकरण को मंजूरी
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के आलोक में कृषि अभियंत्रण से जुड़े पूर्व संविदा आधारित 12 कनिष्ठ अभियंताओं के सेवा नियमितीकरण को भी मंत्रिपरिषद ने स्वीकृति दी।
जल जीवन मिशन और जलवायु कार्ययोजना पर भी निर्णय
जल शक्ति मंत्रालय के राष्ट्रीय जल मिशन के तहत झारखंड के लिए State Specific Action Plan (SSAP) तैयार करने हेतु NIH रुड़की के साथ संशोधित MoU करने की मंजूरी दी गई। वहीं, जल जीवन मिशन 2.0 के तहत केंद्र सरकार के साथ किए गए MoU को घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की गई।
अन्य महत्वपूर्ण फैसले
कैबिनेट ने झारखंड न्यायालय शुल्क विधेयक-2026 के प्रारूप को मंजूरी देते हुए राज्य में Court Fees Act, 1870 को निरस्त करने की स्वीकृति दी। झारखंड अधिवक्ता लिपिक कल्याण निधि (संशोधन) विधेयक-2026 को अधिनियमित करने की भी मंजूरी दी गई।
इसके अलावा झारखंड ग्रासरूट्स इनोवेशन इंटर्नशिप योजना में संशोधन, गुरूजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना की मार्गदर्शिका में संशोधन, झारखंड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम-2024 से पहले जमा आवेदन शुल्क एवं Endowment Fund की राशि लौटाने तथा चतरा में NDPS Act के तहत गठित विशेष न्यायालय के लिए जिला न्यायाधीश स्तर के एक पद के सृजन को भी मंजूरी दी गई।
कैबिनेट के फैसलों में विभिन्न विभागों में सेवा नियमितीकरण, पदोन्नति, लंबित वेतन एवं वित्तीय लाभ के भुगतान, भूमि हस्तांतरण और पुनर्वास से जुड़े प्रस्ताव भी शामिल रहे।
धनबाद। जेएलकेएम प्रमुख और डुमरी विधायक जयराम महतो का बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार से कथित गाली-गलौज का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद धनबाद में पुलिस और विधायक समर्थकों के बीच विवाद गहरा गया है। वायरल ऑडियो-वीडियो की onthespot24 पुष्टि नहीं करता है। बताया जा रहा है कि यह व्हाट्सऐप कॉल की रिकॉर्डिंग है, जिसे दूसरे मोबाइल से रिकॉर्ड किया गया।
मामले को लेकर बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार ने विधायक जयराम महतो समेत अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी है। यह मामला इसी थाने में पहले से दर्ज एक प्राथमिकी में जोड़ा गया है, जिसमें पहले से 50 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है।
थाना प्रभारी की शिकायत के अनुसार, 22 अगस्त की रात करीब 8:09 बजे वह थाना परिसर में सरकारी कार्य कर रहे थे। इसी दौरान विधायक जयराम महतो का व्हाट्सऐप कॉल आया। आरोप है कि विधायक ने अपने समर्थक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किये जाने और उसकी गिरफ्तारी को लेकर नाराजगी जतायी। थाना प्रभारी द्वारा मामले की जानकारी देने का प्रयास किये जाने के दौरान कथित तौर पर गाली-गलौज की गयी।
शिकायत में विधायक पर वर्दी उतरवाने और सरकार बदलने के बाद देख लेने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है। साथ ही ऑफ ड्यूटी मिलने पर कार्रवाई करने की बात कहने का आरोप है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।
एफआईआर में जयराम महतो के अलावा सुशील मंडल, दिलीप चौधरी, राजकुमार मंडल, जीतेंद्र हजारी, अजय दास, गोलक कुमार महतो, रंजीत कुमार साव, राजेश महतो, महेंद्र साव और त्रिपुरी पांडेय को नामजद किया गया है। इनके साथ 50 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।
फर्जी प्रमाण पत्र के आरोप से शुरू हुआ विवाद
पूरा विवाद बड़ापिछरी पंचायत की मुखिया यशोदा देवी के कथित फर्जी पैड, मुहर और हस्ताक्षर से प्रमाण पत्र तैयार करने के आरोप में जेएलकेएम नेता गणेश दास को हिरासत में लिये जाने के बाद शुरू हुआ। इसके बाद शुक्रवार की रात बरवाअड्डा थाने में पुलिस और विधायक समर्थकों के बीच विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गयी और झड़प की भी बात सामने आयी।
पुलिस मेंस एसोसिएशन ने जताया आक्रोश
मामले को लेकर धनबाद पुलिस मेंस एसोसिएशन भी बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार के समर्थन में सामने आया है। एसोसिएशन ने मामले में कार्रवाई की मांग करते हुए कहा है कि पुलिसकर्मियों के साथ कथित दुर्व्यवहार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एसोसिएशन की ओर से यह भी कहा गया कि यदि मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो धनबाद में पुलिसकर्मी काम नहीं करेंगे।
एसोसिएशन का कहना है कि पुलिसकर्मी माननीयों की सुरक्षा में बॉडीगार्ड के रूप में तैनात रहते हैं, लेकिन जब वे किसी गलत कार्य का समर्थन नहीं करते हैं तो उन्हें ही अपशब्द सुनने पड़ते हैं।
साहिबगंज। गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए साहिबगंज जिला प्रशासन ने आम लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की है। प्रशासन ने कहा है कि लोग घबराएं नहीं, बल्कि अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
जिला प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी में लोगों को बाढ़ की आशंका से पहले जरूरी तैयारियां पूरी करने की सलाह दी गई है। जरूरी दस्तावेज, दवाइयां, मोबाइल, टॉर्च, पीने का पानी, सूखा भोजन और अन्य आवश्यक सामान सुरक्षित एवं ऊंचे स्थान पर रखने को कहा गया है।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को ऊंचे स्थान पर रखें
प्रशासन ने सलाह दी है कि बाढ़ की आशंका होने पर फ्रिज, वाटर पंप, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और बिजली के पैनल को ऊंचे स्थान पर रखा जाए। घर की नालियों में बाढ़ का पानी प्रवेश करने से रोकने के लिए मोटी जाली या सीवर ट्रैप लगाने की भी सलाह दी गई है।
लोगों से अपने अंचल और प्रखंड के अधिकारियों से संपर्क कर बांध, तटबंध और फ्लड वाल आदि की जानकारी पहले से रखने को कहा गया है। बेसमेंट में पानी के रिसाव को रोकने के लिए उसे वाटरप्रूफ कम्पाउंड से सुरक्षित करने की सलाह भी दी गई है।
अचानक आ सकती है बाढ़, सुरक्षित स्थान पर जाएं
प्रशासन ने कहा है कि बाढ़ की स्थिति में रेडियो, टीवी और प्रशासनिक माध्यमों से जारी सूचनाओं पर लगातार ध्यान दें। अचानक बाढ़ आने की स्थिति में किसी निर्देश की प्रतीक्षा किए बिना ऊंचे और सुरक्षित स्थान पर चले जाएं।
नदी, नाले, घाट और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा तेज बहाव वाले पानी को पार करने का प्रयास नहीं करने की अपील की गई है। करीब छह इंच या उससे अधिक बहते पानी में पैदल चलने से बचने की सलाह दी गई है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में वाहन नहीं चलाने और वाहन पानी में फंसने पर सुरक्षित अवसर मिलते ही उसे छोड़कर ऊंचे स्थान पर जाने को कहा गया है।
बिजली के उपकरणों से रहें दूर
बाढ़ के पानी में बिजली के उपकरणों को नहीं छूने की चेतावनी दी गई है। प्रशासन ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति गीला है या पानी में खड़ा है, तो उसे विद्युत उपकरणों से पूरी तरह दूर रहना चाहिए।
मछुआरों और नाविकों से विशेष अपील
गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने मछुआरों और छोटी नावों के नाविकों से नदी से दूरी बनाए रखने की अपील की है। नदी, घाट और तेज जलधारा वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से जाने से बचने को कहा गया है।
जिला प्रशासन ने लोगों से अपील करते हुए कहा, “बाढ़ से डरें नहीं, तैयार रहें—सुरक्षित रहें।” साथ ही लोगों से सतर्क रहने, सुरक्षित रहने और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थान पर जाने की अपील की गई है।
बाढ़ की स्थिति में संपर्क करें
साहिबगंज जिला नियंत्रण कक्ष के हेल्पलाइन नंबर:
9006963963, 9631155933, 9065370630
06436-356485, 06436-222101, 06436-222202
रांची। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में सोमवार को झारखंड मंत्रालय में झारखंड राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण की पहली बैठक हुई। बैठक में राज्य की आर्द्रभूमियों के संरक्षण, सीमांकन, दस्तावेजीकरण और वैज्ञानिक प्रबंधन को लेकर कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि वेटलैंड राज्य की जैव विविधता, पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय पारिस्थितिकी का महत्वपूर्ण आधार हैं। इनके संरक्षण को सरकार प्राथमिकता दे रही है।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि इसरो से प्राप्त एटलस के आधार पर झारखंड में 2119 संभावित वेटलैंड की सूची मिली है। अब जिला स्तरीय आर्द्रभूमि समितियों के माध्यम से इन स्थलों का भौतिक एवं तथ्यात्मक सत्यापन कराया जाएगा। इसके बाद चिन्हित वेटलैंड का सीमांकन और नोटिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप राज्य की सभी आर्द्रभूमियों की पहचान, गहन अध्ययन और व्यवस्थित दस्तावेजीकरण कराने का निर्देश दिया। उन्होंने वेटलैंड की सूची नियमित रूप से अपडेट करने तथा उनका व्यापक डेटाबेस तैयार कर संधारित करने को कहा।
अतिक्रमण और अनियमित गतिविधियों पर रहेगी नजर
बैठक में तय किया गया कि संभावित वेटलैंड के सत्यापन के दौरान आर्द्रभूमि नियमों के अनुपालन, अतिक्रमण की स्थिति और वहां संचालित गतिविधियों की भी जांच की जाएगी। जिला स्तरीय समितियां अपनी रिपोर्ट राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण को देंगी। इसके आधार पर राज्य स्तरीय समिति वेटलैंड की पहचान और सीमांकन की प्रक्रिया को अंतिम रूप देगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक महत्वपूर्ण वेटलैंड के लिए उसकी आवश्यकता के अनुसार मैनेजमेंट प्लान तैयार किया जाए। इसमें जल स्रोत, आसपास की गतिविधियों, वर्तमान स्थिति और समय के साथ हुए बदलावों का व्यवस्थित रिकॉर्ड शामिल किया जाएगा।
जल संकट से निपटने में अहम भूमिका
बैठक में कहा गया कि प्राकृतिक जल निकायों और आर्द्रभूमियों का संरक्षण राज्य के पारिस्थितिक तंत्र को मजबूत करने के साथ-साथ जल संकट से निपटने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसलिए वेटलैंड के संरक्षण के लिए उपलब्ध आंकड़ों और वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर प्रभावी प्रबंधन योजना तैयार करने पर जोर दिया गया।
प्राधिकरण के संचालन को लेकर भी चर्चा
बैठक में झारखंड राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण के प्रभावी संचालन से जुड़े कई प्रस्तावों पर भी विचार किया गया। टेंडर एवं प्रोक्योरमेंट दस्तावेजों की स्क्रीनिंग और टेंडर अनुमोदन के लिए समिति गठित करने, तकनीकी समिति बनाने तथा जनता से प्राप्त शिकायतों की सुनवाई कर अनुशंसा के साथ मामलों को प्राधिकरण के समक्ष भेजने के लिए समिति गठन पर चर्चा हुई।
इसके अलावा प्राधिकरण के कार्यालय संचालन के लिए आवश्यक राशि, पर्याप्त बजट और मानव संसाधन उपलब्ध कराने तथा आर्द्रभूमि संरक्षण एवं प्रबंधन नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने पर भी विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, प्रधान मुख्य वन संरक्षक-सह-वन बल प्रमुख संजीव कुमार, वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीकी पी., राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव चंद्रशेखर, वित्त विभाग के सचिव प्रशांत कुमार समेत विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।