रांची : झारखंड की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन में ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर विभागीय योजनाओं एवं कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान विभिन्न योजनाओं की प्रगति, बजटीय प्रावधान के विरुद्ध व्यय, भुगतान की स्थिति और योजनाओं के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक में मनरेगा एवं जेएसएलपीएस कर्मियों के लंबित वेतन का भुगतान 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भविष्य में प्रत्येक माह के वेतन का बिल 25 तारीख तक ट्रेजरी में अनिवार्य रूप से भेज दिया जाए, ताकि सभी कर्मियों को प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह में वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने मनरेगा में लेबर एवं मटेरियल भुगतान में आ रही तकनीकी समस्याओं को भारत सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर यथाशीघ्र दूर करने का निर्देश दिया, ताकि श्रमिकों एवं संबंधित एजेंसियों का भुगतान निर्धारित समय-सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने मनरेगा के अंतर्गत नवाचार आधारित योजनाओं को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। इसी क्रम में ड्राई बोरवेल को सीपेज वाटर टैंक के रूप में विकसित करने की योजना को मनरेगा से जोड़ने की दिशा में कार्य करने का निर्देश दिया गया, ताकि जल संरक्षण एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जल संचयन को बढ़ावा मिल सके।
साथ ही मनरेगा के अंतर्गत ग्रामीण सड़कों का निर्माण नई तकनीक के माध्यम से कार्य शुरू करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। मंत्री ने कहा कि मनरेगा की योजनाओं में ऐसे नवाचारों को प्राथमिकता दी जाए, जिनसे रोजगार सृजन के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ एवं उपयोगी परिसंपत्तियों का निर्माण हो।
बैठक में जेएसएलपीएस के अंतर्गत संचालित आजीविका एवं ग्रामीण महिलाओं से जुड़ी योजनाओं की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने जोहार -2 एवं जायका जैसी योजनाओं को जल्द शुरू करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अवसरों को और मजबूत किया जा सके तथा स्वयं सहायता समूहों एवं ग्रामीण परिवारों को इन योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके।
बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना एवं अबुआ आवास योजना की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि दोनों आवास योजनाओं के लाभुकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए तथा योजनाओं की नियमित समीक्षा करते हुए निर्माण कार्यों की प्रगति पर लगातार निगरानी रखी जाए। पेसा कानून के धरातलीय क्रियान्वयन को लेकर मंत्री ने पारंपरिक ग्राम सभाओं के गठन की प्रक्रिया यथाशीघ्र पूर्ण करने का निर्देश दिया। साथ ही पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित अन्य विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने को कहा गया।
ग्रामीण कार्य विभाग की समीक्षा के दौरान नई योजनाओं की स्वीकृति की प्रक्रिया यथाशीघ्र पूरी करने और पूर्व से चल रही निविदाओं का निष्पादन इसी माह के भीतर पूर्ण करने का निर्देश दिया गया। बैठक में विभाग के अंतर्गत प्राप्त बजटीय प्रावधानों के विरुद्ध हुए व्यय की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को योजनाओं के क्रियान्वयन में गति लाने, वित्तीय अनुशासन बनाए रखने तथा जनता से जुड़ी योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से लाभुकों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।
इस दौरान ग्रामीण विकास विभाग के सचिव मनोज कुमार, पंचायती राज निदेशक बी. राजेश्वरी, मनरेगा आयुक्त मृत्युंजय वर्णवाल, जेएसएलपीएस के सीईओ श्री अनन्य मित्तल, अभियंता प्रमुख सहित विभाग के वरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
रांची। टंडवा प्रखंड के बड़गांव में घटित घटना को लेकर सिमरिया विधायक उज्जवल कुमार दास ने झारखंड के मुख्य सचिव से मुलाकात कर निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच की मांग की। विधायक ने घटना से संबंधित तथ्यों और दस्तावेजों को मुख्य सचिव के समक्ष रखते हुए निर्दोष व्यक्तियों को मामले में नामजद अभियुक्त बनाए जाने पर चिंता जताई और उन्हें न्याय दिलाने की मांग की।
मुलाकात के दौरान विधायक उज्जवल कुमार दास ने मुख्य सचिव को घटना से जुड़े विभिन्न प्रपत्र, दस्तावेज और उपलब्ध तथ्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसी भी घटना की जांच निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए, ताकि वास्तविक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो और किसी निर्दोष व्यक्ति को बेवजह कानूनी कार्रवाई का सामना न करना पड़े।
विधायक ने मांग की कि बड़गांव की घटना की पूरी जांच तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर कराई जाए। साथ ही जिन लोगों को बिना पर्याप्त आधार के नामजद अभियुक्त बनाया गया है, उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष समीक्षा की जाए और यदि वे निर्दोष पाए जाते हैं तो उन्हें मामले से मुक्त किया जाए।
मुख्य सचिव ने विधायक द्वारा उठाए गए मामले को गंभीरता से सुना और आश्वस्त किया कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच सुनिश्चित किए जाने का भरोसा भी दिलाया।
विधायक उज्जवल कुमार दास ने कहा कि न्याय की लड़ाई में निर्दोषों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी मांग किसी दोषी को संरक्षण देने की नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच के माध्यम से वास्तविक दोषियों की पहचान और निर्दोष लोगों को न्याय दिलाने की है।
बड़गांव की घटना को लेकर विधायक द्वारा सीधे मुख्य सचिव के समक्ष मामला उठाए जाने के बाद अब पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच को लेकर उम्मीद जगी है। विधायक ने कहा कि मामले में सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए कानून के अनुरूप कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि किसी भी निर्दोष व्यक्ति के अधिकारों का हनन न हो।
रांची । झारखंड प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के मामलों को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला है । मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा है कि शिक्षा माफियाओं को बचाने के लिए बीजेपी जानबूझ कर CBI जांच का दांव खेलना चाहती है । जबकि इतिहास गवाह है कि CBI ने जांच के नाम पर अब सभी मामलों में लटकाने और भटकाने के सिवाय कुछ भी नहीं किया ।
मंत्री ने कहा कि 2015 से अब तक देश में 152 पेपर लीक की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। यह देश की परीक्षा व्यवस्था की गंभीर स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अब तक कम से कम 17 परीक्षा में गड़बड़ी के मामलों की जांच CBI को सौंपी गई, लेकिन 2015 के बाद CBI जांच में अब तक एक भी मामले में दोषसिद्ध नहीं हुआ , मतलब CBI जांच का नतीजा शून्य है । उन्होंने कहा कि CBI ने NEET UG 2024, UGC-NET 2024, SSC CGL 2017, JEE Main 2021, WB SSC 2016, HP Police Constable 2022, Army CEE 2017 और Karnataka PSI 2021 सहित कम से कम नौ अन्य परीक्षा गड़बड़ी के मामलों की जांच की है।
मंत्री ने कहा कि NEET-UG 2024 मामले में CBI 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने की समय-सीमा से चूक गई, जिसके चलते मुख्य आरोपी को डिफॉल्ट जमानत मिलने का अवसर मिला। वहीं, UGC-NET 2024 में कथित पेपर लीक की जांच के बाद CBI ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करते हुए कहा कि संबंधित सबूत एक छेड़छाड़ किया हुआ स्क्रीनशॉट था। उन्होंने यह भी कहा कि जुलाई 2026 में जिस फास्ट-ट्रैक कोर्ट को लेकर खूब प्रचार किया गया, उसके पहले ही दिन CBI का वकील अदालत में उपस्थित नहीं हुआ।
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि 2015 से अब तक इन सभी मामलों में केवल एक दोषसिद्धि हुई है, वह भी हरियाणा न्यायिक सेवा 2017 का मामला है । इस मामले में फैसला अगस्त 2024 में दिल्ली की एक अदालत ने सुनाया था, जबकि इसकी जांच CBI ने नहीं, बल्कि चंडीगढ़ SIT ने की थी। मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि झारखंड में गठबंधन सरकार द्वारा परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद छात्रों का आंदोलन सामने आया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस आंदोलन को राजनीतिक हवा देने और CBI के नाम पर वास्तविक गड़बड़ियों को छिपाने का प्रयास कर रही है।
मंत्री ने बताया कि मामले में अब तक करीब 20 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं। राहुल गांधी को लेकर भाजपा की राजनीति पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि जो कल तक “राहुल गांधी कौन कहते थे , उनके सपने में सुबह-शाम राहुल गांधी ही आ रहे है । उनके खिलाफ फैलाया जा रहा षड्यंत्र अब ताश के पत्तों की तरह भरभरा चुका है।”
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि जंतर-मंतर और रांची के छात्र आंदोलन के बीच बहुत बड़ा अंतर है । रांची में दिल्ली के जंतर मंतर की तरह छात्रों पर बर्बर लाठीचार्ज नहीं किया गया , उन्हें सड़कों पर बेरहमी से नहीं पीटा गया और न ही छात्राओं के साथ किसी तरह का कोई अभद्र व्यवहार किया गया। छात्रों की भीड़ में शामिल उपद्रवियों को खदेड़ने का प्रयास स्थानीय पुलिस ने जरूर किया है । सरकार छात्रों के साथ संवाद के माध्यम से समाधान निकालने के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि वार्ता के दौरान भी सरकार आंदोलनरत छात्रों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर चिंतित है। सरकार का उद्देश्य छात्रों की समस्याओं का समाधान करना है, न कि उनके आंदोलन को राजनीतिक रंग देना।
पत्रकार वार्ता में वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की सहित झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी एवं अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेता मौजूद रहे।
रांची। झारखंड आदिवासी सरना विकास समिति, धुर्वा के अध्यक्ष मेघा उरांव ने आदिवासी पहचान, पारंपरिक आस्था और धार्मिक गतिविधियों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान केवल जल, जंगल और जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी अपनी पारंपरिक आस्था, पूजा-पद्धति, सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक संस्थाओं से भी जुड़ी हुई है।
मेघा उरांव ने आरोप लगाया कि पुरुलिया रोड स्थित बिशप हाउस, एसडीसी सभागार और नामकुम बगीचा में बैठकर आदिवासी एवं जनजातीय समाज की पहचान, संरक्षण, संवर्धन और विस्तार की बातें करना विरोधाभासी है। उन्होंने इसे ‘दूध की रखवाली बिल्ली से कराने’ वाली कहावत से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि जिन लोगों की विचारधारा आदिवासी समाज की पारंपरिक आस्था और पहचान से अलग है, वे आदिवासी पहचान के संरक्षण की बात किस आधार पर कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरना, मसना, चाला, जाहेरथान, मांझीथान, पाहन, पुजार, नायके, अखड़ा, धुमकुड़िया और पड़हा जैसी परंपराएं आदिवासी समाज की सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनके अनुसार आदिवासी समुदाय की पहचान उसकी प्रथागत परंपराओं, सामाजिक संगठन, सामुदायिक जीवन और पारंपरिक संस्थाओं से भी निर्धारित होती है।
मेघा उरांव ने आरोप लगाया कि एक ओर आदिवासी समाज की पारंपरिक आस्था, विश्वास और पूजा-पद्धति को प्रभावित करने की कोशिशें हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर आदिवासी समाज की पहचान और उसके संरक्षण-संवर्धन की बात की जा रही है। उन्होंने इसे दोहरी नीति करार देते हुए कहा कि आदिवासी समाज अपनी पहचान, परंपरा और धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत के सवाल पर किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं करेगा।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान और अस्तित्व को लेकर स्पष्ट नीति और गंभीर पहल की आवश्यकता है। पारंपरिक आस्था, सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित किए बिना केवल आदिवासी हितों की बात करना अधूरा प्रयास है।
मेघा उरांव ने कहा कि आदिवासी समाज अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए लगातार आवाज उठाता रहेगा। उन्होंने संबंधित संगठनों और संस्थाओं से आदिवासी समाज की पारंपरिक पहचान, सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक मूल्यों को समझने तथा उनके संरक्षण की दिशा में ठोस पहल करने की मांग की।
रांची। छात्र आंदोलन को लेकर झारखंड की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। झारखंड सरकार की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने भाजपा पर छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा की कोशिश अब पूरी तरह बेनकाब हो गई है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने छात्रों के मुद्दे को लेकर बंद का आह्वान किया, लेकिन आंदोलनरत छात्रों ने खुद को इस बंद से अलग रखा। इससे स्पष्ट है कि छात्र अपनी मांगों और अधिकारों की लड़ाई को किसी राजनीतिक दल के एजेंडे का हिस्सा नहीं बनाना चाहते।
मंत्री ने कहा कि छात्रों ने भाजपा के राजनीतिक आह्वान से दूरी बनाकर साफ संदेश दिया है कि उनका आंदोलन किसी पार्टी के समर्थन या विरोध में नहीं, बल्कि अपनी जायज मांगों को लेकर है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों की लड़ाई को अपने राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनाने की कोशिश को स्वयं छात्रों ने नकार दिया है।
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि कांग्रेस और झारखंड की महागठबंधन सरकार छात्रों के साथ खड़ी है। सरकार की प्राथमिकता आंदोलन को राजनीति का अखाड़ा बनाना नहीं, बल्कि छात्रों की जायज मांगों का समाधान निकालना है। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से ले रही है और बातचीत तथा संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के रुख का भी उल्लेख करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने छात्रों के मुद्दे पर अपनी स्पष्ट बात रखी है। वर्तमान में संसद का सत्र चल रहा है और उन्हें विश्वास है कि छात्रों के हित में आगे भी ठोस पहल की जाएगी।
मंत्री ने कहा कि छात्रों की आवाज को दबाया नहीं जाएगा, बल्कि उनकी बात सुनी जाएगी। सरकार का प्रयास रहेगा कि आंदोलन की स्थिति को टकराव में बदलने के बजाय संवाद के जरिए समाधान तक पहुंचाया जाए।
दीपिका पांडेय सिंह ने भरोसा दिलाया कि छात्रों की आवाज सुनी जाएगी और उनकी जायज मांगों के समाधान के लिए हरसंभव पहल की जाएगी।
सिल्ली: सिल्ली प्रखंड अंतर्गत एसएस+2 विद्यालय सिल्ली में मंगलवार को विद्यालय प्रबंधन समिति का पुनर्गठन विद्यालय के प्राचार्य पवन कुमार पांडे के नेतृत्व में किया गया। सर्वसम्मति से हरिपद कुम्हार को समिति का अध्यक्ष एवं किरण देवी को उपाध्यक्ष चुना गया। वहीं समिति के लिए कुल 25 सदस्यों का भी चयन किया गया।पुनर्गठन के दौरान सीआरपी अपर्णा कुंडू ने विद्यालय प्रबंधन समिति के गठन की प्रक्रिया, समिति के अधिकार एवं कर्तव्यों की विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान विद्यालय के विकास एवं विद्यार्थियों की शैक्षणिक उन्नति को लेकर भी चर्चा की गई।विद्यालय के प्राचार्य पवन कुमार पांडे नियमानुसार समिति के सचिव होंगे। उन्होंने कहा कि विद्यालय प्रबंधन समिति विद्यालय और अभिभावकों के बीच एक मजबूत कड़ी का कार्य करती है। समिति की सक्रियता से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, विद्यालय की सुविधाओं में बढ़ोतरी तथा बेहतर शैक्षणिक वातावरण तैयार करने में मदद मिलती है।मौके पर ओम प्रकाश, रामानुज प्रसाद अनुज, आदित्यनाथ झा, अनिल कुमार, मोना कुमारी, उषा कुमारी, सरिता कुमारी, धीरज कुमार रजक समेत विद्यालय के शिक्षक उपस्थित थे।
मुरी। सिल्ली-मुरी ऑन द स्पॉट 24 के संवाददाता देव सोनी उर्फ देबू पर मंगलवार को मुरी बस स्टैंड स्थित उनकी दवा दुकान में कथित रूप से जानलेवा हमला किए जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई।
जानकारी के अनुसार, राहुल देव बर्मन और उनकी पत्नी स्वीटी बर्मन पर आरोप है कि वे दवा दुकान में पहुंचे और धारदार हथियार से देव सोनी पर हमला किया। आरोप है कि हमलावरों ने उनके सिर को निशाना बनाकर वार किया, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट लगी और कट गया।
घटना के बाद मौके पर पहुंची स्थानीय प्रशासन की टीम ने घायल देव सोनी को उपचार के लिए सिंगपुर नर्सिंग होम पहुंचाया, जहां उनका इलाज कराया गया।
घटना के संबंध में मुरी ओपी में प्रारंभिक आवेदन दिया गया है। आवेदन के आधार पर पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। पुलिस घटना के कारणों, हमले में शामिल लोगों और पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही है।
पीड़ित पक्ष ने पुलिस से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
रांची । झारखंड विधानसभा परिसर में मंगलवार को 77वें राज्यव्यापी वन महोत्सव 2026 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने विधानसभा परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि जल, जंगल, पहाड़ और नदियां झारखंड की पहचान हैं और प्रकृति एवं पर्यावरण का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है।
सिर्फ पौधा लगाना नहीं, उसकी देखभाल भी जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन महोत्सव को केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। पौधा लगाने के साथ उसकी नियमित देखभाल, खाद-पानी और संरक्षण भी सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने कहा कि आज लगाया गया एक पौधा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा, जीवन और सुरक्षित पर्यावरण का उपहार है।
उन्होंने आम लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उन्हें संरक्षित करने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि हर व्यक्ति व्यक्तिगत रूप से पर्यावरण संरक्षण की मुहिम से जुड़े, तो जैव-विविधता और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना आसान होगा।
विकास के साथ पर्यावरण का संतुलन जरूरी
हेमंत सोरेन ने कहा कि विकास की प्रक्रिया में कई बार पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, जिससे प्रकृति का संतुलन बिगड़ता है और इसका असर मनुष्य से लेकर पशु-पक्षियों तक पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि पेड़ों की कटाई, खनिज संसाधनों का दोहन, भू-जल का अत्यधिक इस्तेमाल और नदियों के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा जैसे विषयों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि यदि प्राकृतिक संसाधनों का इसी तरह लगातार दोहन होता रहा तो आने वाली पीढ़ियों के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। इसलिए पर्यावरण संरक्षण के लिए सजगता के साथ ठोस और सक्रिय कदम उठाने की आवश्यकता है।
आने वाले समय में जल संकट बड़ी चुनौती
मुख्यमंत्री ने भविष्य में जल संकट को बड़ी चुनौती बताते हुए वर्षा जल संचयन और जल को धरती में समाहित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि छोटे-बड़े शहरों में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने और लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है।
उन्होंने वन विभाग को निर्देश दिया कि पौधारोपण के बाद पौधों की देखभाल के लिए भी विशेष अभियान चलाया जाए और खाद-पानी एवं पोषण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
विधायकों के आवासीय परिसर में भी लगाए जाएंगे फलदार पौधे
मुख्यमंत्री ने वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि विधायकों के आवासीय परिसरों में भी फलदार पौधे लगाए जाएं। इसके लिए सभी विधायकों को फलदार पौधे उपलब्ध कराने की बात कही गई, ताकि राजधानी समेत पूरे राज्य में हरियाली को बढ़ावा दिया जा सके।
कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो ने वन महोत्सव के उद्देश्य और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की महत्ता पर प्रकाश डाला। प्रधान मुख्य वन संरक्षक संजीव कुमार ने स्वागत संबोधन किया।
इस अवसर पर मंत्री राधा कृष्ण किशोर, मंत्री हफीजुल हसन, मंत्री इरफान अंसारी, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, विधायकगण, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
रांची: झारखंड की सियासत में भूचाल लाने वाली खबर सामने आई है। जहां गिरिडीह के सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी और हटिया के चर्चित विधायक नवीन जायसवाल की अकूत संपत्ति और जमीन के खेल का कच्चा-चिट्ठा अब एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के टेबल पर पहुंच गया है।
शिकायतकर्ता हिमांशु कुमार ने सीधे ACB के DG को हलफनामा और जमीन के दस्तावेज सौंपकर बम फोड़ा है - *घोषित दाम कुछ और, बाजार में कीमत कई गुना ज्यादा, पैसा आया कहां से?
बरियातू से बड़गाईं तक चौधरी जी की संपत्ति पर सवाल
शिकायत में आरोप है कि सांसद चौधरी ने रांची के पॉश इलाके बरियातू में जो मकान दिखाया है, उसका सरकारी कागज पर दाम कुछ लाख है, लेकिन बाजार में उसकी कीमत करोड़ों में है - लगभग 6 गुना का खेल!
इतना ही नहीं, बड़गाईं के खाता नंबर 112, प्लॉट 2592 और 1221 वाली जमीन किसके पैसे से खरीदी गई, कौन काबिज है? इसकी भी परतें खोलने की मांग की गई है।
नगड़ी की 25 एकड़ आदिवासी जमीन, जायसवाल के रिश्तेदारों के नाम?
दूसरी तरफ हटिया विधायक नवीन जायसवाल पर तो और भी सनसनीखेज आरोप है।
शिकायत के मुताबिक, नगड़ी के खाता नंबर 230 के प्लॉट 908A, B, C, D की कीमत कागज में कम और हकीकत में आसमान पर है।
सबसे बड़ा धमाका - *नगड़ी में 25 एकड़ से ज्यादा आदिवासी जमीन को CNT/SPT Act को ताक पर रखकर रिश्तेदारों के नाम कराने का आरोप!* क्या आदिवासियों की जमीन पर कब्जे का नया फॉर्मूला निकला है? ACB से इसी की तह तक जाने की मांग हुई है।
सरकार भी हरकत में!
मामला सिर्फ शिकायत तक नहीं है। 22 जून 2026 को मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग ने खुद इस मामले में दो अलग-अलग चिट्ठी अपर सचिव अखिलेश कुमार सिंह को भेजी है, जिसमें शपथ पत्र लगे होने का जिक्र है। मतलब साफ है - मामला अब सरकारी फाइलों में दौड़ रहा है।
अब सबकी निगाहें ACB पर टिकी हैं - क्या होगा अगला एक्शन? क्या होगी छापेमारी? क्या खुलेगा संपत्ति के काले-सफेद का हिसाब?
रांची। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी देर रात बिना किसी प्रोटोकॉल और सुरक्षा घेरे के सदर अस्पताल पहुंचे। वे बिना बॉडीगार्ड के अस्पताल पहुंचे, जिसके कारण वहां मौजूद कई लोग उन्हें पहचान भी नहीं पाए। बाद में जब लोगों को जानकारी हुई कि स्वयं स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल पहुंचे हैं, तो अस्पताल प्रशासन भी सक्रिय हो गया।
सदर अस्पताल पहुंचने के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने आंदोलनकारी देवेंद्र नाथ महतो समेत अन्य युवाओं से मुलाकात की और उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली। अनशन के कारण देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी जांच कर रही है। उनकी निगरानी और आवश्यक उपचार के लिए मेडिकल बोर्ड का भी गठन किया गया है। चिकित्सकों के अनुसार फिलहाल उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है।
इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री ने सदर अस्पताल के विभिन्न वार्डों का निरीक्षण किया। उन्होंने मरीजों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, दवा, जांच और इलाज की व्यवस्था के बारे में जानकारी ली। कई मरीजों ने मंत्री को अपनी समस्याओं और इलाज से जुड़े अनुभवों से भी अवगत कराया।
मरीजों से बातचीत के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। बेहतर चिकित्सा सुविधा और मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं को देखकर उन्होंने संतोष व्यक्त किया तथा चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की सराहना की। उन्होंने अस्पताल कर्मियों को मरीजों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने और इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने का निर्देश दिया।
स्वास्थ्य मंत्री का यह दौरा ऐसे समय में हुआ, जब रांची में छात्र आंदोलन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस बल की तैनाती चर्चा में है। ऐसे माहौल के बीच डॉ. इरफान अंसारी का बिना सुरक्षा घेरे के सदर अस्पताल पहुंचना, आंदोलनकारी युवाओं से मिलकर उनकी स्वास्थ्य स्थिति जानना और फिर अस्पताल के विभिन्न वार्डों में जाकर मरीजों की समस्याएं सुनना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों ने मंत्री के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि जब प्रोटोकॉल से ऊपर उठकर सीधे मरीजों और आम लोगों के बीच पहुंचते हैं, तो इससे जनता के बीच भरोसा मजबूत होता है। लोगों के बीच यह चर्चा भी रही कि स्वास्थ्य मंत्री ने इस दौरे के दौरान प्रोटोकॉल से अधिक मरीजों की सेवा और मानवीय संवेदना को प्राथमिकता दी।
