साहिबगंज। जिले में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राशनकार्डधारी लाभुकों के बीच सितंबर 2026 माह का खाद्यान्न वितरण सुनिश्चित कराया है। तालझारी समेत अन्य बाढ़ प्रभावित प्रखंडों में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (NFSA) के तहत पात्र लाभुकों को निर्धारित खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है।
जिला प्रशासन ने संबंधित जन वितरण प्रणाली (PDS) विक्रेताओं को निर्देश दिया है कि शेष सभी पात्र लाभुकों के बीच अधिकतम दो दिनों के अंदर खाद्यान्न का वितरण सुनिश्चित करें, ताकि बाढ़ की विषम परिस्थितियों में कोई भी पात्र परिवार राशन से वंचित न रहे।
बिना राशन कार्ड वाले पात्र परिवारों की भी होगी पहचान
प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ऐसे परिवारों और व्यक्तियों की पहचान कर सूची तैयार करने का निर्देश दिया है, जो पात्र होने के बावजूद अब तक राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ नहीं ले सके हैं या जिनके पास राशन कार्ड उपलब्ध नहीं है।
संबंधित पदाधिकारियों एवं कर्मियों को पात्र परिवारों और व्यक्तियों की सूची तत्काल प्रखंड कार्यालय को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। इसके बाद नियमानुसार पात्र लोगों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि उन्हें आवश्यक खाद्य सुरक्षा का लाभ मिल सके।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बाढ़ प्रभावित एवं पात्र परिवारों तक समय पर खाद्यान्न पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है। प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों और कर्मियों को वितरण प्रक्रिया की निगरानी करते हुए पात्र लाभुकों को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होने देने का निर्देश दिया है।
रांची। आगामी दुर्गा पूजा 2026 को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए रांची जिला प्रशासन ने पूजा समितियों एवं आयोजकों के लिए 28 सूत्री विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किया है। जिला प्रशासन ने सभी पूजा समितियों से निर्देशों का अक्षरशः पालन करने तथा प्रशासन एवं पुलिस को आवश्यक सहयोग देने की अपील की है।
जिला प्रशासन की ओर से जारी गाइडलाइन में पंडाल निर्माण, अग्नि सुरक्षा, विद्युत सुरक्षा, श्रद्धालुओं की आवाजाही, CCTV निगरानी, स्वयंसेवकों की नियुक्ति, ध्वनि विस्तारक यंत्र, सोशल मीडिया, फूड स्टॉल और विसर्जन सहित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया गया है।
सुरक्षित स्थान पर ही बनेगा पंडाल
प्रशासन ने निर्देश दिया है कि पंडाल और गेट का निर्माण मकान, गैस गोदाम, ट्रांसफॉर्मर, विद्युत तार, रेलवे लाइन और हाईटेंशन तार से सुरक्षित दूरी पर किया जाए। पंडाल निर्माण में ज्वलनशील एवं सिंथेटिक कपड़ों का इस्तेमाल नहीं करने को कहा गया है।
महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग प्रवेश एवं निकास मार्ग बनाने, महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष दर्शन व्यवस्था करने तथा आपात स्थिति में निकासी के लिए अलग रास्ता रखने का निर्देश दिया गया है। पंडाल की मजबूती को लेकर संबंधित अभियंता से प्रमाण-पत्र प्राप्त करना भी अनिवार्य किया गया है।
विद्युत सुरक्षा पर विशेष जोर
पंडाल में सुरक्षित वायरिंग और उचित अर्थिंग की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। सभी विद्युत उपकरणों एवं धातु निर्मित स्ट्रक्चर की अर्थिंग सुनिश्चित करनी होगी। विद्युत नियंत्रण कक्ष ऐसी जगह बनाने को कहा गया है, जहां विद्युतकर्मी आसानी से पहुंच सकें।
पंडालों के लिए स्वीकृत विद्युत भार के अनुसार ही कनेक्शन लेने और विद्युत सजावट करने का निर्देश है। अस्थायी विद्युत वायरिंग के लिए संबंधित विद्युत अभियंता से सुरक्षा संबंधी प्रमाण-पत्र प्राप्त करना होगा। पंडाल से सुरक्षित दूरी पर पर्याप्त क्षमता वाला जेनरेटर रखने को भी कहा गया है।
आग से बचाव के लिए जरूरी इंतजाम
प्रशासन ने पंडाल के अंदर अथवा आसपास ज्वलनशील पदार्थ जमा नहीं करने का निर्देश दिया है। प्रत्येक पंडाल में अग्निशमन यंत्र, पानी और सूखी बालू से भरी बाल्टियां तथा रबर हैंड ग्लव्स जैसी आवश्यक सामग्री रखने को कहा गया है। संबंधित अग्निशमन पदाधिकारी के निर्देशों का पालन करते हुए अग्नि सुरक्षा संबंधी अनापत्ति प्रमाण-पत्र लेने का भी निर्देश दिया गया है। साथ ही पंडाल में प्राथमिक उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी।
रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर पर रोक
ध्वनि प्रदूषण को लेकर भी प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी किया है। उच्च न्यायालय के आदेश एवं ध्वनि प्रदूषण नियमों के तहत रात्रि 10 बजे से सुबह 6 बजे तक साउंड लाउडस्पीकर का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन द्वारा जारी निर्देश के अनुसार तेज ध्वनि विस्तारक यंत्र के उपयोग पर भी रोक रहेगी।
CCTV और स्वयंसेवकों की रहेगी व्यवस्था
पंडाल के अंदर-बाहर तथा आवागमन के रास्तों में पर्याप्त संख्या में CCTV कैमरे लगाने और उनकी लगातार मॉनिटरिंग की व्यवस्था करने को कहा गया है। पंडाल के बाहर पूजा समिति के पदाधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों और आपातकालीन सेवाओं के मोबाइल नंबर प्रदर्शित करने का निर्देश दिया गया है।
पूजा समितियों को स्वयंसेवकों की नियुक्ति कर उन्हें परिचय पत्र जारी करने तथा स्वयंसेवकों की सूची संबंधित थाना प्रभारी को उपलब्ध कराने को कहा गया है।
फूड स्टॉल और दुकानों को लेकर भी निर्देश
फूड स्टॉल एवं मेले का आयोजन पंडाल से पर्याप्त दूरी पर सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से ही करने को कहा गया है। सफाई व्यवस्था बनाए रखने और रांची नगर निगम के कर्मियों को सहयोग देने का निर्देश भी दिया गया है। पूजा पंडाल तक पहुंचने वाले मार्ग पर दुकानदारों द्वारा आवागमन बाधित नहीं करने देने की जिम्मेदारी समितियों को दी गई है।
प्रशासन ने पूजा समिति के सदस्यों को श्रद्धालुओं के साथ किसी भी परिस्थिति में दुर्व्यवहार नहीं करने की हिदायत दी है। भीड़ में छिनतई या पॉकेटमारी करते किसी व्यक्ति के पकड़े जाने पर उसे कानून अपने हाथ में लेने के बजाय मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों के हवाले करने को कहा गया है।
सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर नजर
जिला प्रशासन ने पूजा समितियों को WhatsApp ग्रुप और सोशल मीडिया पर संदिग्ध या आपत्तिजनक पोस्ट अपलोड नहीं करने तथा ऐसी अफवाहों को प्रोत्साहित नहीं करने का निर्देश दिया है। किसी संवेदनशील या आपत्तिजनक पोस्ट की जानकारी तत्काल निकटतम प्रशासनिक या पुलिस पदाधिकारी अथवा थाना प्रभारी को देने को कहा गया है।
निर्धारित मार्ग और घाट से ही होगा विसर्जन
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिमा विसर्जन पूर्व निर्धारित तिथि, समय और मार्ग के अनुसार ही किया जाएगा। विसर्जन के लिए प्रशासन द्वारा चिन्हित स्थल या घाट का ही इस्तेमाल करना होगा।
इसके अलावा त्योहारों और शोभायात्राओं के दौरान सुरक्षित विद्युत आपूर्ति को लेकर न्यायालय के आदेश के आलोक में जारी SOP का पालन करने का निर्देश दिया गया है। बसों एवं बड़े वाहनों की छत पर किसी व्यक्ति के बैठने पर रोक रहेगी तथा वाहनों पर ऐसी ऊंची सामग्री या झंडा नहीं लगाया जा सकेगा जिससे वाहन की कुल ऊंचाई 4 मीटर (13 फीट) से अधिक हो।
जिला प्रशासन ने अंत में पूजा समितियों से अपील की है कि प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी किए जाने वाले सभी निर्देशों का पालन करें और प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस पदाधिकारियों एवं पुलिस बल के साथ समन्वय बनाकर शांति, सुरक्षा और विधि-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।
रांची। राजधानी रांची के हटिया स्थित मौजा कल्याणपुर सरना स्थल, सोलंकी चौक में उलगुलान परिवर्तन यात्रा एवं सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से आदिवासी-मूलवासी समाज के जल, जंगल, जमीन, शिक्षा, रोजगार, स्थानीय नीति और सम्मान से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाते हुए सरकार, प्रशासन और सभी राजनीतिक दलों से जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की गई।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि झारखंड अलग राज्य के गठन के 78 वर्ष बाद भी आदिवासी-मूलवासी समाज के कई मूल सवाल पूरी तरह हल नहीं हुए हैं। जिस एकजुटता और संघर्ष की भावना से झारखंड अलग राज्य के आंदोलन को मजबूती मिली थी, उसी एकता और संघर्ष की भावना को फिर से मजबूत करने की आवश्यकता है।
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि उलगुलान का अर्थ हिंसा नहीं, बल्कि संवैधानिक, लोकतांत्रिक और कानूनी अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण एवं संगठित संघर्ष है। उन्होंने कहा कि झारखंड में अब तक बनी विभिन्न सरकारों से यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि राज्य निर्माण के जिन मूल उद्देश्यों और अधिकारों के लिए संघर्ष किया गया था, वे आज भी अधूरे क्यों हैं।
चुनाव के समय ही जनता की याद क्यों?
उलगुलान परिवर्तन यात्रा के माध्यम से राजनीतिक दलों से सवाल करते हुए कहा गया कि क्या आदिवासी-मूलवासी समाज को केवल चुनाव के समय ही याद किया जाएगा? जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की जनता के प्रति जवाबदेही क्यों सुनिश्चित नहीं होनी चाहिए।
वक्ताओं ने सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार, लापरवाही और अनियमितताओं के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि सरकारें अस्थायी होती हैं, लेकिन सरकारी विभाग और प्रशासनिक व्यवस्था स्थायी होती है। ऐसे में जनता के कार्यों और अधिकारों के प्रति अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
आयोजकों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी एक राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में खड़ा होना नहीं है, बल्कि जनता के संवैधानिक अधिकारों और झारखंड के हित में जवाबदेही की मांग करना है।
भूमि और राजस्व व्यवस्था में जवाबदेही की मांग
सभा में झारखंड भूमि संरक्षण एवं राजस्व जवाबदेही आयोग के गठन की मांग प्रमुखता से उठाई गई। आयोजकों के अनुसार आयोग को भूमि संबंधी अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच, अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रभावी शक्ति दी जानी चाहिए।
इसके साथ ही राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की शिकायतों की समयबद्ध एवं निष्पक्ष जांच की मांग की गई। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई तथा भ्रष्टाचार से अर्जित अवैध संपत्ति की कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्ती की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही गई।
विशेष भूमि फास्ट-ट्रैक न्यायालय की मांग
भूमि विवादों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष भूमि फास्ट-ट्रैक न्यायालय अथवा विशेष न्यायिक व्यवस्था स्थापित करने की मांग भी की गई। इसमें अवैध कब्जा, फर्जी जमाबंदी, फर्जी म्यूटेशन, भूमि अभिलेखों में हेराफेरी, आदिवासी भूमि के अवैध हस्तांतरण तथा भूमि रिकॉर्ड में अनियमितताओं से जुड़े मामलों का समयबद्ध और निष्पक्ष निपटारा सुनिश्चित करने की मांग रखी गई।
विस्थापितों के लिए आयोग और पुनर्वास की मांग
कार्यक्रम में राज्य विस्थापन एवं पुनर्वास आयोग के गठन की मांग भी उठाई गई। आयोजकों ने कहा कि विकास परियोजनाओं से प्रभावित आदिवासी और मूलवासी परिवारों को न्याय, उचित पुनर्वास और उनके वैधानिक अधिकार दिलाने के लिए आयोग को पूर्ण रूप से कार्यशील बनाया जाना चाहिए।
प्राथमिक शिक्षा में स्थानीय जनजातीय भाषाओं को मिले स्थान
सभा में प्राथमिक शिक्षा में स्थानीय जनजातीय भाषाओं को उचित एवं प्रभावी स्थान देने की मांग की गई। कक्षा एक से पांच तक बच्चों को उनकी स्थानीय अथवा मातृ जनजातीय भाषा में शिक्षा उपलब्ध कराने तथा आवश्यकता के अनुसार स्थानीय भाषा के शिक्षकों की नियुक्ति की मांग रखी गई।
इसके अलावा स्थानीय नीति, नियोजन नीति, विस्थापन एवं पुनर्वास नीति, रोजगार नीति, शिक्षा नीति, कृषि नीति तथा जल-जंगल-जमीन के अधिकारों को लेकर व्यापक जनसंवाद और ठोस नीति बनाने की मांग की गई।
जनता के अधिकारों के लिए एकजुट होने का आह्वान
कार्यक्रम में नीरजंना हरेंज, अजय टोप्पो, पूर्ण चंद्र मुंडा, आशुतोष चेरो, मनोज केरकेटाह, तेजस, निर्मल खाखा, मदन मुंडा, उज्जवल टोप्पो, छोटू मुंडा सहित वार्ड पार्षद सुनीता तिग्गा समेत अन्य लोगों ने जनता को अधिकारों के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।
आयोजकों ने कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति, अधिकारी या राजनीतिक दल के खिलाफ व्यक्तिगत संघर्ष नहीं है। यह भ्रष्टाचार, अन्याय, प्रशासनिक लापरवाही और जनता के अधिकारों की अनदेखी के खिलाफ लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक संघर्ष है।
PMNRF से विशेष राहत पैकेज जारी करने की मांग, प्रभावित परिवारों को भोजन, पेयजल, दवाइयां और तिरपाल उपलब्ध कराने पर जोर
रांची/साहिबगंज। झारखंड के साहिबगंज जिले में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर से उत्पन्न गंभीर बाढ़ की स्थिति को लेकर पूर्व विधायक एवं झारखंड विधानसभा जामा विधानसभा से पूर्व विधायक सीता मुर्मू सोरेन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर तत्काल केंद्रीय सहायता की मांग की है।
12 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री के नाम भेजे गए पत्र में सीता मुर्मू सोरेन ने कहा है कि साहिबगंज जिला इस समय गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और लगातार बारिश के कारण भयावह बाढ़ की चपेट में है। बाढ़ के कारण जिले के दर्जनों गांव पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं। बड़ी संख्या में परिवार बेघर हो गए हैं और उनके सामने रहने तथा भोजन की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है।
किसानों और पशुधन को भी भारी नुकसान
पत्र में उन्होंने बताया कि बाढ़ की वजह से किसानों की फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर पशुधन को भी नुकसान पहुंचने की बात कही गई है। स्थानीय प्रशासन अपने स्तर से राहत एवं बचाव कार्य में जुटा हुआ है, लेकिन आपदा की भयावहता को देखते हुए उपलब्ध संसाधन नाकाफी साबित हो रहे हैं।
सीता मुर्मू सोरेन ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि साहिबगंज के बाढ़ प्रभावित लोगों की विकट स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से तत्काल विशेष राहत पैकेज एवं वित्तीय सहायता जारी की जाए।
भोजन, शुद्ध पेयजल और दवाइयां उपलब्ध कराने की मांग
उन्होंने कहा कि राहत राशि से बाढ़ प्रभावित परिवारों को भोजन, शुद्ध पेयजल, दवाइयां और तिरपाल जैसी आवश्यक सामग्री तत्काल उपलब्ध कराई जा सकेगी। इससे इस कठिन समय में प्रभावित परिवारों को काफी राहत मिलेगी और वे सुरक्षित तरीके से इस आपदा का सामना कर सकेंगे।
सीता मुर्मू सोरेन ने प्रधानमंत्री से संवेदनशीलता के साथ मामले में त्वरित निर्णय लेने का अनुरोध करते हुए विश्वास जताया कि केंद्र सरकार की सहायता से साहिबगंज की जनता को इस गंभीर आपदा से उबरने में बड़ी मदद मिलेगी।
सिल्ली मुरी :हिंडाल्को पूजा समिति के तत्वावधान में जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आयोजित छठियारी उत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के माहौल में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।समारोह की शुरुआत नन्हीं बालिकाओं द्वारा राधा-कृष्ण के स्वरूप में सजे-धजे आकर्षक नृत्य से हुई। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के संवाद पर आधारित श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों की भावपूर्ण नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की गई, जिसे उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा।कार्यक्रम के समापन पर छठियारी की परंपरा के अनुसार फूलों की होली खेली गई। श्रद्धालुओं ने पुष्पों की वर्षा के बीच भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का उल्लासपूर्वक उत्सव मनाया। पूरा पूजा पंडाल भक्ति गीतों और जयघोष से गुंजायमान रहा।हिंडाल्को पूजा समिति द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु एवं दर्शक उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन की भव्यता, अनुशासन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
सिल्ली-मुरी। राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक संघ की एक आपात बैठक बुधवार को सिल्ली स्थित सुंदर कुंज लॉज में नागेन्द्र नाथ गोस्वामी की अध्यक्षता में आयोजित हुई। दोपहर 12 बजे शुरू हुई बैठक में संगठन की मजबूती, वरिष्ठ नागरिकों के अधिकारों और क्षेत्रीय विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर प्रदेश अध्यक्ष राधेश्याम साहू और रघुनाथ महतो को संगठन को और अधिक सशक्त बनाने तथा विकास कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। साथ ही वरिष्ठ नागरिकों को रेलवे एवं हवाई यात्रा में मिलने वाली रियायतों को प्रभावी ढंग से लागू कराने के लिए संबंधित विभागों के समक्ष मुद्दा उठाने का निर्णय लिया गया।बैठक में क्षेत्र के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया। उपस्थित सदस्यों ने जनहित के कार्यों में संगठन की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का संकल्प लिया।बैठक में राधेश्याम साहू, नागेन्द्र नाथ गोस्वामी, भगवत सोनार, कार्तिक मांझी, रघुनाथ महतो, हरिनाथ महतो सहित राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक संघ के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।
साहिबगंज के बाढ़ प्रभावित स्कूल दो दिन रहेंगे बंद
साहिबगंज। जिले में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा निर्णय लिया है। गंगा नदी के किनारे स्थित और बाढ़ से प्रभावित सरकारी एवं निजी विद्यालयों को 9 और 10 सितंबर 2026 को बंद रखने का आदेश जारी किया गया है।
उपायुक्त-सह-अध्यक्ष, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, साहिबगंज की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि केंद्रीय जल आयोग, निचली गंगा मंडल-2, पटना की रिपोर्ट के अनुसार साहिबगंज जिले में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से लगभग 1.25 मीटर ऊपर बह रहा है। वहीं 9 सितंबर की सुबह 6 बजे तक जलस्तर में करीब 13 सेंटीमीटर और वृद्धि होने की संभावना जताई गई है।
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने गंगा नदी के किनारे स्थित उन विद्यालयों को बंद रखने का निर्णय लिया है, जो बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रशासन का कहना है कि यह कदम विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं तथा शिक्षक-शिक्षिकाओं की जान-माल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
प्रधानाध्यापकों को आदेश का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश
जारी आदेश में सभी बाढ़ प्रभावित विद्यालयों के प्रधानाध्यापक एवं प्रभारी प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया गया है कि वे आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करें।
साथ ही आदेश की प्रतिलिपि संबंधित शिक्षा अधिकारियों, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी, अपर समाहर्ता एवं उप विकास आयुक्त सहित संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच स्कूलों को दो दिनों के लिए बंद करने का यह फैसला प्रशासन की ओर से एहतियाती कदम माना जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
साहिबगंज। गंगा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर और जिले में उत्पन्न बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को आवश्यक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनकी समस्याओं की लगातार निगरानी की जा रही है।
इसी क्रम में साहिबगंज के अनुमंडल पदाधिकारी अमर जॉन आईन्द एवं अंचलाधिकारी बासुकीनाथ टुडू ने बाढ़ प्रभावित बड़ा रामपुर दियारा, टोपरा दियारा, रामनगर दियारा एवं बलुआटोली दियारा का भ्रमण कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं और आवश्यकताओं की जानकारी ली तथा जरूरतमंद परिवारों के बीच खाद्य सामग्री का वितरण किया।
इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने लोगों को भरोसा दिलाया कि बाढ़ की चुनौतीपूर्ण स्थिति में जिला प्रशासन प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा है। लोगों की आवश्यकताओं के अनुरूप राहत सामग्री उपलब्ध कराने का प्रयास लगातार जारी रहेगा।
अनुमंडल पदाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मियों को निर्देश दिया कि राहत एवं बचाव कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही या शिथिलता नहीं होनी चाहिए। प्रभावित क्षेत्रों में नियमित भ्रमण कर स्थिति का आकलन करने और जरूरतमंद परिवारों तक समय पर खाद्य सामग्री एवं अन्य आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाने को कहा गया।
उन्होंने कहा कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन प्रभावित इलाकों की लगातार निगरानी कर रहा है। लोगों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। आवश्यकता पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
वहीं, प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से अपील की गई है कि वे प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल स्थानीय प्रशासन को सूचना दें।
अंचलाधिकारी बासुकीनाथ टुडू ने भी संबंधित कर्मियों को प्रभावित इलाकों में नियमित रूप से भ्रमण कर स्थिति की जानकारी लेने तथा जरूरतमंद परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
बाढ़ से जुड़ी किसी भी आपात स्थिति में साहिबगंज जिला नियंत्रण कक्ष के हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है:
???? 9006963963, 9631155933, 9065370630
☎️ 06436-356485, 06436-222101, 06436-222202
सिल्ली-मुरी: शिक्षक दिवस के अवसर पर आदर्श हाई स्कूल मुरी में शुक्रवार को भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस दौरान शिक्षकों एवं अतिथियों ने उनके शिक्षा जगत में दिए गए योगदान को स्मरण करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए।विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भाषण, कविता, समूह एवं एकल नृत्य, युगल गीत, नाटक, चुटकुले और विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से गुरु के प्रति सम्मान और शिक्षा के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। आकर्षक प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया और पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।कार्यक्रम में विशेष आकर्षण मुरी ओपी में पदस्थापित सत्येंद्र पासवान रहे। उन्होंने फिल्मी गीतों और लोकप्रिय संवादों की प्रस्तुति देकर समारोह में मनोरंजन का रंग भर दिया।इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. अनिल कुमार ने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जीवन शिक्षकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान का प्रसार ही नहीं करते, बल्कि राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण भी करते हैं।समारोह के दौरान विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों को उपहार भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का सफल संचालन कनिज एवं नेहा ने किया।इस मौके पर प्रभारी प्राचार्य पुष्पा महतो, राकेश कुमार महतो, सविता कुमारी, प्राण नाथ, लक्ष्मी कुमारी, प्रतिमा महतो, रुना कुमारी सहित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
सिल्ली /मुरी: संत माईकल +2 स्कूल, मुरी में मंगलवार को स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए विद्यालय परिसर की साफ-सफाई की तथा पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।विद्यार्थियों ने पोस्टर, चित्रकला और भाषण के माध्यम से स्वच्छता, स्वच्छ विद्यालय एवं स्वच्छ भारत अभियान के प्रति जागरूकता फैलायी। साथ ही सही तरीके से हाथ धोने का प्रदर्शन करते हुए व्यक्तिगत स्वच्छता के महत्व पर प्रकाश डाला।प्रधानाचार्य श्री सी. एल. प्रजापति ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।इस अवसर पर शिक्षिका सीमा झा, डोली महतो तथा शिक्षक अजय चिक बराईक, जयंत कुमार महतो सहित विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित थे।
