साहिबगंज के बाढ़ प्रभावित स्कूल दो दिन रहेंगे बंद
साहिबगंज। जिले में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा निर्णय लिया है। गंगा नदी के किनारे स्थित और बाढ़ से प्रभावित सरकारी एवं निजी विद्यालयों को 9 और 10 सितंबर 2026 को बंद रखने का आदेश जारी किया गया है।
उपायुक्त-सह-अध्यक्ष, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, साहिबगंज की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि केंद्रीय जल आयोग, निचली गंगा मंडल-2, पटना की रिपोर्ट के अनुसार साहिबगंज जिले में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से लगभग 1.25 मीटर ऊपर बह रहा है। वहीं 9 सितंबर की सुबह 6 बजे तक जलस्तर में करीब 13 सेंटीमीटर और वृद्धि होने की संभावना जताई गई है।
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने गंगा नदी के किनारे स्थित उन विद्यालयों को बंद रखने का निर्णय लिया है, जो बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रशासन का कहना है कि यह कदम विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं तथा शिक्षक-शिक्षिकाओं की जान-माल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
प्रधानाध्यापकों को आदेश का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश
जारी आदेश में सभी बाढ़ प्रभावित विद्यालयों के प्रधानाध्यापक एवं प्रभारी प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया गया है कि वे आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करें।
साथ ही आदेश की प्रतिलिपि संबंधित शिक्षा अधिकारियों, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी, अपर समाहर्ता एवं उप विकास आयुक्त सहित संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच स्कूलों को दो दिनों के लिए बंद करने का यह फैसला प्रशासन की ओर से एहतियाती कदम माना जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
साहिबगंज। गंगा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर और जिले में उत्पन्न बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को आवश्यक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनकी समस्याओं की लगातार निगरानी की जा रही है।
इसी क्रम में साहिबगंज के अनुमंडल पदाधिकारी अमर जॉन आईन्द एवं अंचलाधिकारी बासुकीनाथ टुडू ने बाढ़ प्रभावित बड़ा रामपुर दियारा, टोपरा दियारा, रामनगर दियारा एवं बलुआटोली दियारा का भ्रमण कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं और आवश्यकताओं की जानकारी ली तथा जरूरतमंद परिवारों के बीच खाद्य सामग्री का वितरण किया।
इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने लोगों को भरोसा दिलाया कि बाढ़ की चुनौतीपूर्ण स्थिति में जिला प्रशासन प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा है। लोगों की आवश्यकताओं के अनुरूप राहत सामग्री उपलब्ध कराने का प्रयास लगातार जारी रहेगा।
अनुमंडल पदाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मियों को निर्देश दिया कि राहत एवं बचाव कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही या शिथिलता नहीं होनी चाहिए। प्रभावित क्षेत्रों में नियमित भ्रमण कर स्थिति का आकलन करने और जरूरतमंद परिवारों तक समय पर खाद्य सामग्री एवं अन्य आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाने को कहा गया।
उन्होंने कहा कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन प्रभावित इलाकों की लगातार निगरानी कर रहा है। लोगों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। आवश्यकता पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
वहीं, प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से अपील की गई है कि वे प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल स्थानीय प्रशासन को सूचना दें।
अंचलाधिकारी बासुकीनाथ टुडू ने भी संबंधित कर्मियों को प्रभावित इलाकों में नियमित रूप से भ्रमण कर स्थिति की जानकारी लेने तथा जरूरतमंद परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
बाढ़ से जुड़ी किसी भी आपात स्थिति में साहिबगंज जिला नियंत्रण कक्ष के हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है:
???? 9006963963, 9631155933, 9065370630
☎️ 06436-356485, 06436-222101, 06436-222202
सिल्ली-मुरी: शिक्षक दिवस के अवसर पर आदर्श हाई स्कूल मुरी में शुक्रवार को भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत के पूर्व राष्ट्रपति एवं महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इस दौरान शिक्षकों एवं अतिथियों ने उनके शिक्षा जगत में दिए गए योगदान को स्मरण करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए।विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भाषण, कविता, समूह एवं एकल नृत्य, युगल गीत, नाटक, चुटकुले और विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के माध्यम से गुरु के प्रति सम्मान और शिक्षा के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। आकर्षक प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया और पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।कार्यक्रम में विशेष आकर्षण मुरी ओपी में पदस्थापित सत्येंद्र पासवान रहे। उन्होंने फिल्मी गीतों और लोकप्रिय संवादों की प्रस्तुति देकर समारोह में मनोरंजन का रंग भर दिया।इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. अनिल कुमार ने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जीवन शिक्षकों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान का प्रसार ही नहीं करते, बल्कि राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण भी करते हैं।समारोह के दौरान विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों को उपहार भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम का सफल संचालन कनिज एवं नेहा ने किया।इस मौके पर प्रभारी प्राचार्य पुष्पा महतो, राकेश कुमार महतो, सविता कुमारी, प्राण नाथ, लक्ष्मी कुमारी, प्रतिमा महतो, रुना कुमारी सहित विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
सिल्ली /मुरी: संत माईकल +2 स्कूल, मुरी में मंगलवार को स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण अभियान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए विद्यालय परिसर की साफ-सफाई की तथा पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।विद्यार्थियों ने पोस्टर, चित्रकला और भाषण के माध्यम से स्वच्छता, स्वच्छ विद्यालय एवं स्वच्छ भारत अभियान के प्रति जागरूकता फैलायी। साथ ही सही तरीके से हाथ धोने का प्रदर्शन करते हुए व्यक्तिगत स्वच्छता के महत्व पर प्रकाश डाला।प्रधानाचार्य श्री सी. एल. प्रजापति ने विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना करते हुए स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।इस अवसर पर शिक्षिका सीमा झा, डोली महतो तथा शिक्षक अजय चिक बराईक, जयंत कुमार महतो सहित विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित थे।
साहिबगंज। भादी अमावस्या के पावन अवसर पर मारवाड़ी युवा मंच, शाखा साहिबगंज की ओर से 10 सितंबर 2026, गुरुवार को श्री रानी सती दादी मंदिर में मंगल पाठ का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 10 बजे से होगी।
इस धार्मिक आयोजन में श्रद्धालु श्री रानी सती दादी का मंगल पाठ कर उनकी आराधना करेंगे और दादी का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। आयोजन को लेकर मारवाड़ी युवा मंच की ओर से तैयारियां की जा रही हैं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।
मारवाड़ी युवा मंच, शाखा साहिबगंज ने शहरवासियों एवं सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है। श्रद्धालुओं से मंगल पाठ में सहभागी बनने के साथ ही प्रसाद ग्रहण करने का भी आग्रह किया गया है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष गोकुल टिबड़ेवाल, सचिव श्वेता चौधरी, कोषाध्यक्ष ऋषभ खुडानिया तथा संयोजक रोशन कानोडिया एवं सैलजा भरतीया की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
मोबाइल, हिसाब की तीन डायरी समेत चांदी की चेन, गोल्ड पॉलिश चेन और अन्य आभूषण बरामद; पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर भेजा न्यायिक प्रक्रिया में
रांची। नामकुम थाना क्षेत्र में ज्वैलरी दुकान में हुई चोरी के मामले का पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उद्भेदन कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों के पास से चोरी किए गए मोबाइल फोन, दुकान का हिसाब-किताब लिखी तीन डायरी समेत बड़ी मात्रा में आभूषण बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, नामकुम थाना क्षेत्र के चाय बगान, सदाबहार चौक निवासी शम्मू सोनी के आवेदन पर ज्वैलरी दुकान में चोरी को लेकर नामकुम थाना कांड संख्या 50/2026 दर्ज किया गया था। शिकायत के अनुसार 4 सितंबर की सुबह दुकान से मोबाइल फोन, तीन डायरी, चांदी की चेन, गोल्ड पॉलिश की चेन, चांदी की अंगूठियां, सोने की नथिया, सोने की अंगूठी और करीब सात हजार रुपये नकद चोरी कर लिए गए थे।
वरीय अधिकारियों के निर्देश पर गठित हुई टीम
कांड के उद्भेदन के लिए वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक, ग्रामीण रांची के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया। गठित टीम ने मामले की जांच तेज करते हुए तकनीकी एवं अन्य सुरागों के आधार पर अनुसंधान शुरू किया।
जांच के क्रम में पुलिस ने चोरी गए सामानों की बरामदगी करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार दोनों आरोपियों ने पूछताछ के दौरान घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है।
चोरी का अधिकांश सामान बरामद
पुलिस ने आरोपियों के पास से एक ओपो कंपनी का मोबाइल फोन, हिसाब-किताब लिखी तीन डायरी, करीब 100 ग्राम वजन की चांदी की चेन, करीब 35 ग्राम की गोल्ड पॉलिश चेन, दो चांदी की अंगूठियां और करीब आधा ग्राम की सोने की नथिया बरामद की है।
बरामद सामानों को विधिवत जब्ती सूची तैयार कर पुलिस ने जब्त कर लिया है। चोरी में शामिल अन्य सामानों और नकद राशि की बरामदगी को लेकर भी पुलिस की जांच जारी है।
दो आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में अशोक लोहरा, उम्र करीब 18 वर्ष, पिता स्वर्गीय संजय लोहरा, निवासी नामकुम थाना क्षेत्र, रांची तथा क्षितिज कच्छप, उम्र करीब 19 वर्ष, पिता स्वर्गीय सुधीर अविनाश कच्छप, निवासी कुसई कॉलोनी, थाना डोरंडा, रांची को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी अशोक लोहरा का पूर्व में भी आपराधिक इतिहास रहा है। दोनों आरोपियों से पूछताछ के आधार पर घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।
पुलिस टीम की त्वरित कार्रवाई
ज्वैलरी दुकान में चोरी की घटना के बाद पुलिस ने जिस तेजी से अनुसंधान करते हुए आरोपियों तक पहुंच बनाई और चोरी का सामान बरामद किया, उससे मामले का जल्द उद्भेदन संभव हो सका।
छापेमारी एवं अनुसंधान टीम में वरीय पुलिस उपाधीक्षक अमर कुमार पाण्डेय, नामकुम थाना के पु०नि० सह थाना प्रभारी राम नारायण सिंह, पु०अ०नि० सोनु कुमार दास, प्रवीण कुमार, स०अ०नि० उज्जवल कुमार सिंह, सत्येन्द्र सिंह, बिपुल चन्द्र मंडल तथा नामकुम थाना के सशस्त्र बल शामिल थे।
काले रंग की स्कॉर्पियो से पहुंचे थे कुछ लोग, मारपीट कर जबरन गाड़ी में बैठाने का आरोप; सूचना मिलते ही रांची पुलिस ने शहर में चलाया सघन एंटी क्राइम चेकिंग अभियान
रांची। राजधानी रांची में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एमिटी यूनिवर्सिटी के गेट के सामने से चतरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक जनार्दन पासवान के बेटे सौरभ को कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से मारपीट कर जबरन गाड़ी में बैठाकर अपहरण करने का प्रयास करने की सूचना पुलिस को मिली। घटना की जानकारी मिलते ही रांची पुलिस तत्काल हरकत में आ गई और पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था को सक्रिय कर दिया गया।
पुलिस को 7 सितंबर 2026 को सूचना प्राप्त हुई कि कुछ व्यक्ति काले रंग की स्कॉर्पियो से एमिटी यूनिवर्सिटी के गेट के सामने पहुंचे। आरोप है कि इन लोगों ने विधायक के बेटे सौरभ के साथ मारपीट की और इसके बाद उन्हें जबरन अपनी गाड़ी में बैठाकर वहां से ले गए।
सूचना मिलते ही शहर में शुरू हुई नाकेबंदी
घटना की गंभीरता को देखते हुए रांची पुलिस ने बिना समय गंवाए शहर के विभिन्न हिस्सों में एंटी क्राइम चेकिंग शुरू कर दी। प्रमुख मार्गों और संभावित रास्तों पर पुलिस की गतिविधियां बढ़ा दी गईं। विभिन्न स्थानों पर वाहनों की जांच की गई और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी गई।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई के साथ स्थानीय विधानसभा थाना की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और पूरे मामले की छानबीन शुरू कर दी।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई से सकुशल बरामद हुए सौरभ
रांची पुलिस के अनुसार, मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए अत्यल्प समय में विधायक जनार्दन पासवान के पुत्र सौरभ को सकुशल बरामद कर लिया।
सौरभ के सकुशल बरामद होने के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली। हालांकि, उन्हें किन लोगों ने जबरन गाड़ी में बैठाया, घटना के पीछे क्या कारण था और मारपीट क्यों की गई—इन सवालों का जवाब पुलिस की आगे की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
आरोपियों की तलाश और पूछताछ पर नजर
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस द्वारा आगे की विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस घटनास्थल से मिले संभावित सुरागों, प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।
काले रंग की स्कॉर्पियो से पहुंचे लोगों की पहचान और घटना में उनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि सौरभ को कहां ले जाया गया था और इस पूरी घटना के पीछे वास्तविक वजह क्या थी।
त्वरित पुलिस कार्रवाई बनी चर्चा का विषय
राजधानी में विधायक के बेटे को कथित रूप से जबरन ले जाने की सूचना ने पुलिस महकमे में भी तत्काल सक्रियता बढ़ा दी। सूचना मिलते ही शहर में चेकिंग अभियान शुरू करना और बेहद कम समय में सौरभ को सकुशल बरामद कर लेना रांची पुलिस की त्वरित कार्रवाई को दर्शाता है।
अब पूरे मामले में पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह घटना वास्तव में अपहरण थी या इसके पीछे कोई अन्य विवाद अथवा कारण था। फिलहाल पुलिस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है और विधि-सम्मत कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
सिल्ली/मुरी: लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे सामाजिक एवं धार्मिक कार्यकर्ता कुणाल चौधरी का सोमवार को 38 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके असामयिक निधन की खबर से सिल्ली एवं आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।स्वर्गीय कुणाल चौधरी धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। वे आदि दुर्गा पूजा समिति तथा गणेश पूजा समिति के सक्रिय सदस्य थे और विभिन्न धार्मिक आयोजनों एवं समाजसेवा के कार्यों में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती थी। उनके निधन से क्षेत्र ने एक सक्रिय एवं समर्पित सामाजिक कार्यकर्ता को खो दिया है।सोमवार को उनका अंतिम संस्कार मुरी स्थित स्वर्णरेखा नदी तट पर पूरे विधि-विधान के साथ किया गया, जहां बड़ी संख्या में परिजन, शुभचिंतक, मित्र एवं क्षेत्र के गणमान्य लोग उपस्थित होकर उन्हें अंतिम विदाई दी।कुणाल चौधरी के निधन पर अनेक सामाजिक एवं राजनीतिक हस्तियों ने गहरा शोक व्यक्त किया। शोक व्यक्त करने वालों में राजा पुष्पेंद्र नाथ सिंह देव, आजसू पार्टी के केंद्रीय सचिव संजय सिद्धार्थ, देव सोनी उर्फ देबू, नंदकिशोर साय, विंध्याचल राय, भोला गोराई, सौरभ आश, मनोज विश्वकर्मा सहित अन्य लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिवार को इस दुख की घड़ी में संबल प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की। समाज सेवा और धार्मिक कार्यों में उनके योगदान को क्षेत्रवासी हमेशा याद रखेंगे।
पटवर टोला में 56 वर्षीय जीछु राम की डूबने से मौत, कृष्ण प्रसाद दियारा में कंचन कुमारी की तलाश जारी; आयुष्मान आरोग्य मंदिर में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी पर ग्रामीणों में आक्रोश
साहिबगंज। जिले में गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ की स्थिति लगातार विकराल होती जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ अब शहरी इलाकों में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। बड़ी कोदरजन्ना में बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। पिछले 24 घंटे में बाढ़ के पानी में डूबने की दो घटनाओं ने इलाके में दहशत पैदा कर दी है। एक घटना में 56 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दूसरी घटना में छह वर्षीय बच्ची लापता है।
पटवर टोला में 56 वर्षीय व्यक्ति की मौत
सदर प्रखंड के बड़ी कोदरजन्ना स्थित पटवर टोला में सोमवार सुबह 56 वर्षीय जीछु राम, पिता धन्नी राम, की बाढ़ के पानी में डूबने से मौत हो गई। परिजनों के अनुसार गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण घर के चारों ओर पानी भर गया था। परिवार के सदस्य घर का सामान सुरक्षित स्थान पर निकालने में जुटे थे। इसके बाद जीछु राम देर शाम घर में सोने चले गए।
सुबह तक जब वह बाहर नहीं निकले तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान उनका शव पानी में मिला। घटना की सूचना मिलने पर मुफस्सिल थाना प्रभारी अनीश कुमार पाण्डेय, एएसआई उमाकांत ओझा और एएसआई केशव मालाकार मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मृतक अपने पीछे दो पुत्र और एक पुत्री छोड़ गए हैं।
नहाने के दौरान छह वर्षीय बच्ची बाढ़ के पानी में डूबी
वहीं, मुफस्सिल थाना क्षेत्र के कृष्ण प्रसाद दियारा में रविवार को नहाने के दौरान छह वर्षीय कंचन कुमारी बाढ़ के पानी में डूब गई। हादसे के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने बच्ची की काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका।
सोमवार पूर्वाह्न करीब 10 बजे तक गोताखोरों और मुफस्सिल थाना पुलिस की टीम बाढ़ के पानी में बच्ची की तलाश में जुटी रही। बच्ची के लापता होने के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
बाढ़ के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
बड़ी कोदरजन्ना में बाढ़ की स्थिति गंभीर होने के बावजूद स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव का आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्वास्थ्यकर्मियों की कमी से जूझ रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक केंद्र में सीएचओ नियमित रूप से उपलब्ध नहीं हैं और एएनएम की भी पर्याप्त मौजूदगी नहीं है। ग्रामीणों का दावा है कि यहां पदस्थापित सीएचओ को सदर अस्पताल में प्रतिनियुक्त किया गया है। वहीं, सूत्रों के हवाले से यह भी बताया जा रहा है कि बड़ी कोदरजन्ना में पदस्थापित छह एएनएम को जिला मुख्यालय में कार्य लिया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस समय पूरा गांव बाढ़ की चपेट में है और लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे अधिक जरूरत है, उस समय स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में पर्याप्त स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है।
बीमारी फैलने का बढ़ा खतरा
बाढ़ के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया, डेंगू, डायरिया, टाइफाइड और त्वचा संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी स्थिति में स्वास्थ्यकर्मियों की अनुपस्थिति लोगों की परेशानी को और बढ़ा सकती है।
ग्रामीणों, वार्ड सदस्य और मुखिया की ओर से स्वास्थ्य व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग को लेकर उपायुक्त और सिविल सर्जन को लिखित आवेदन दिए जाने की बात कही गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि आवेदन दिए जाने के बावजूद अब तक पर्याप्त स्वास्थ्यकर्मियों की व्यवस्था नहीं की गई है।
ग्रामीणों ने तत्काल मेडिकल टीम भेजने की मांग की
ग्रामीणों ने बड़ी कोदरजन्ना आयुष्मान आरोग्य मंदिर में तत्काल सीएचओ और एएनएम की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही बाढ़ प्रभावित इलाकों में विशेष मेडिकल टीम भेजने, पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध कराने और आवश्यक स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था करने की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के कारण जब लोगों के सामने जीवन बचाने की चुनौती है और बीमारी फैलने का खतरा लगातार बढ़ रहा है, तब स्वास्थ्य केंद्र में कर्मियों की कमी दूर करना प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए।
बड़ी कोदरजन्ना में बाढ़ के पानी में डूबने से हुई मौत और बच्ची के लापता होने की घटना ने राहत एवं बचाव व्यवस्था के सामने भी गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। अब ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की त्वरित कार्रवाई पर है।
नई दिल्ली/रांची। खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर देशभर में चर्चा के बीच राजनीतिक रूप से बहस छिड़ी हुई है साथ ही राज्यों के अधिकार, खनिज राजस्व और जमीन के नियंत्रण को लेकर कई सवाल और भ्रांतियां सामने आ रही हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह संशोधन खनिज क्षेत्र में कराधान और नियमन से जुड़े प्रावधानों को अधिक स्पष्ट, पारदर्शी और एकरूप बनाने पर केंद्रित है। दस्तावेज के अनुसार, 13 अगस्त 2026 को संसद ने MMDR संशोधन विधेयक, 2026 को पारित किया।
क्या राज्यों के अधिकार खत्म हो जाएंगे?
सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या इस संशोधन के बाद खनिज संपदा से जुड़े राज्यों के अधिकार कम हो जाएंगे। दस्तावेज के अनुसार ऐसा नहीं है। राज्यों की जमीन पर उनका अधिकार बना रहेगा और खनन से प्राप्त राजस्व में राज्यों का हिस्सा भी जारी रहेगा। इसके अलावा गौण खनिजों के नियमन और नियंत्रण की जिम्मेदारी भी राज्यों के पास ही रहेगी।
विधेयक के सेक्शन 9(घ) के तहत खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर कर, उपकर अथवा अन्य शुल्क लगाने का अधिकार राज्यों के पास रहेगा। हालांकि, ऐसे कराधान को केंद्र सरकार द्वारा विनियमित किया जा सकता है।
राज्यों के राजस्व में कटौती नहीं
खनिज क्षेत्र से राज्यों को मिलने वाले राजस्व को लेकर भी महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया गया है। दस्तावेज में कहा गया है कि संशोधन का उद्देश्य राज्यों की आय कम करना नहीं है। इसमें राज्यों का हिस्सा लगभग 90 प्रतिशत के स्तर पर बनाए रखने की बात कही गई है।
इसका अर्थ यह है कि खनिज क्षेत्र में कराधान और नियमन की व्यवस्था को स्पष्ट करने के साथ राज्यों के आर्थिक हितों को सुरक्षित रखने का प्रयास किया गया है।
राज्यों की जमीन पर नहीं होगा कोई असर?
खनिज-युक्त जमीन को लेकर भी कई तरह की आशंकाएं सामने आती रही हैं। दस्तावेज के मुताबिक MMDR संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य जमीन के मालिकाना हक को बदलना नहीं है।
जिस जमीन पर राज्य का अधिकार है, वह अधिकार इस संशोधन के कारण समाप्त नहीं होता। विधेयक का संबंध मुख्य रूप से खनिज-युक्त भूमि पर कराधान से जुड़े विषयों को स्पष्ट और व्यवस्थित करने से है।
यानी जमीन का मालिकाना हक और खनिज से संबंधित कराधान दो अलग-अलग विषय हैं। इन्हें एक-दूसरे से जोड़कर देखना सही नहीं होगा।
रेत, बजरी, बोल्डर और मोरम पर राज्यों का नियंत्रण बरकरार
गौण खनिजों यानी Minor Minerals को लेकर भी विधेयक में राज्यों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है। दस्तावेज के अनुसार करीब 50 गौण खनिज राज्यों के नियंत्रण में ही रहेंगे।
रेत, बजरी, बोल्डर और मोरम जैसे खनिजों के नियमन एवं प्रशासन में राज्यों की भूमिका पहले की तरह बनी रहेगी। इन खनिजों का सीधा संबंध स्थानीय निर्माण कार्यों, सड़क, मकान और बुनियादी ढांचे से है। इसलिए इनके प्रशासन में राज्यों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
रॉयल्टी से लेकर DMF और GST तक राज्यों का हिस्सा सुरक्षित
खनन से राज्यों को कई माध्यमों से राजस्व प्राप्त होता है। इनमें रॉयल्टी, ऑक्शन प्रीमियम, जिला खनिज फाउंडेशन यानी DMF और GST में राज्यों का हिस्सा प्रमुख हैं।
दस्तावेज में स्पष्ट किया गया है कि इन राजस्व स्रोतों में राज्यों के हिस्से को सुरक्षित रखा गया है। रॉयल्टी से मिलने वाला राजस्व जारी रहेगा, ऑक्शन प्रीमियम से राज्यों को मिलने वाला हिस्सा बना रहेगा और DMF के माध्यम से मिलने वाले लाभ भी जारी रहेंगे। इसके अलावा GST में राज्यों का हिस्सा भी सुरक्षित बताया गया है।
आखिर संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी?
अब सवाल यह है कि यदि राज्यों के अधिकार और राजस्व में कटौती नहीं की जा रही है तो फिर MMDR कानून में संशोधन की आवश्यकता क्यों महसूस हुई?
दस्तावेज के अनुसार खनिज क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उद्योग, निर्माण, ऊर्जा, सड़क, रेलवे और बुनियादी ढांचे की अनेक परियोजनाएं खनिज संसाधनों पर निर्भर हैं। समय के साथ इस क्षेत्र में नई परिस्थितियां और चुनौतियां सामने आई हैं। ऐसे में कराधान और नियमन से जुड़े नियमों में स्पष्टता और एकरूपता की आवश्यकता महसूस हुई।
14 तरह की मौजूदा लेवी से व्यवस्था हुई जटिल
खनिज क्षेत्र में अलग-अलग स्तरों पर कई प्रकार के कर और शुल्क पहले से लागू रहे हैं। दस्तावेज के अनुसार राज्यों की ओर से 14 मौजूदा लेवी लगाए जाने की स्थिति में कराधान की व्यवस्था कई बार जटिल हो सकती है।
इसी वजह से स्पष्ट और समान कर व्यवस्था की जरूरत बताई गई है, ताकि सरकार, उद्योग और अन्य हितधारकों के बीच नियमों को लेकर भ्रम की स्थिति कम हो और सभी पक्ष अपने अधिकारों एवं दायित्वों को बेहतर तरीके से समझ सकें।
MMDR संशोधन विधेयक के पीछे एक महत्वपूर्ण तर्क यह है कि खनिज क्षेत्र में विकास, निवेश और बेहतर व्यवस्था के साथ राज्यों के अधिकार एवं राजस्व भी सुरक्षित रहें।
दस्तावेज में कहा गया है कि राज्यों के अधिकार बने रहें, उनका राजस्व बना रहे और साथ ही खनिज क्षेत्र में सुधार हो—इसी संतुलन को इस व्यवस्था की महत्वपूर्ण विशेषता के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
झारखंड जैसे खनिज संपन्न राज्यों के लिए मुद्दा अहम
खनिज संसाधनों से जुड़े राज्यों के लिए यह विषय विशेष महत्व रखता है, क्योंकि खनन से प्राप्त राजस्व राज्य की आर्थिक गतिविधियों और स्थानीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दस्तावेज में स्पष्ट किया गया है कि राज्यों की जमीन नहीं ली जा रही है, गौण खनिज राज्यों के नियंत्रण में रहेंगे और खनन क्षेत्र से मिलने वाले राजस्व में राज्यों का हिस्सा सुरक्षित रहेगा।
लगभग 90 प्रतिशत खनन क्षेत्र के राजस्व हिस्से को राज्यों के पास बनाए रखने तथा रॉयल्टी, ऑक्शन प्रीमियम, DMF और GST जैसे स्रोतों में राज्यों के हिस्से को सुरक्षित रखने की बात कही गई है।
विकास की रफ्तार बढ़ने से राज्यों को भी लाभ
देश में एक्सप्रेस-वे, रेलवे लाइन, उद्योग, आवास और ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार हो रहा है। इन सभी के लिए बड़ी मात्रा में खनिज संसाधनों की आवश्यकता होती है।
यदि खनिज क्षेत्र में नियम सरल और स्पष्ट होते हैं, निवेश का वातावरण बेहतर होता है और परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ती हैं, तो इसका लाभ केवल केंद्र तक सीमित नहीं रहेगा। दस्तावेज के अनुसार इससे रोजगार, स्थानीय कारोबार और राज्यों के लिए आर्थिक अवसर बढ़ सकते हैं।
MMRD का क्या है निष्कर्ष
MMDR संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि राज्यों की जमीन का मालिकाना हक समाप्त नहीं किया जा रहा है, गौण खनिजों पर राज्यों का नियंत्रण बरकरार है और खनन से जुड़े प्रमुख राजस्व स्रोतों में राज्यों के हिस्से को सुरक्षित रखने की बात कही गई है।
ऐसे में इस संशोधन को केवल केंद्र बनाम राज्य के नजरिए से देखने के बजाय खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता, स्पष्ट कर व्यवस्था, निवेश, विकास और राज्यों के आर्थिक हितों के बीच संतुलन के रूप में समझने की जरूरत है।
दस्तावेज में केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच सहयोग और समन्वय बनाए रखते हुए ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश भी दिया गया है।
