15 अगस्त 2026. 80 वाँ स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर सभी झारखंड वासियों सहित देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं - सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड रांची मुख्यालय
15 अगस्त 2026. 80 वां स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सभी रांची जिलावासियों सहित सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं- वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग रांची
80 वाँ स्वतंत्रता दिवस 2026 के शुभ अवसर पर सभी झारखंड वासियों सहित सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं - बंधु तिर्की, पूर्व मंत्री सह कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष झरखंड कांग्रेस
भारत की आजादी में मदरसा से उपजे चार जलेमाओं नें पूरे विश्व को यह संदेश दिया कि "हमको मिटा सके यह जमाने में दम नहीं, हमसे जमाना खुद है जमाने से हम नहीं" इन चार स्तभो में मौलाना शौकत अली, मौलाना जफर अली, मौलाना हसरत मोहानी और मौलाना अबुल कलाम आजाद जिन्हें ब्रिटिश हुकूमत देखना पसंद नहीं करती थी मौलाना अब्दुल कलाम आजाद और मौलाना हसरत मोहानी को उर्दू पत्रिका निकाले जाने पर जेल की यातना भी सहनी पड़ी मौलाना हसरत मोहानी ने 1921 में स्वतंत्रता सेनानियों को गुलामी की बेड़ियों को उखाड़ फेंकने का इंकलाब जिंदाबाद का नारा दिया जिसे 1929 में भगत सिंह और उनके साथी बटुकेश्वर दत्त ने दिल्ली के केंद्रीय विधानसभा पर बमबारी करने के समय इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगाया था और जून 1929 में दिल्ली उच्च न्यायालय में अपने बयान देते समय भी खुले न्यायालय में इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगाया यह नारा उस समय इतना प्रचलित हुआ की बच्चे बच्चे की जुबान पर इंकलाब जिंदाबाद की आवाज गूंजती थी आज भी अपनी मांगों को लेकर समाज के कार्यकर्ता,ट्रेड यूनियन और राजनीतिक आंदोलनकारी तथा न्याय के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने में इसका उपयोग करते हैं मदरसे की उपज मौलाना हसरत मोहानी में सपनें में भी नहीं सोचा होगा कि जिस मदरसे में वतन परस्ती की शिक्षा दी जाती है उसे मदरसे को कुछ सरफिरे बदनाम कर मुसलमान के वतन परस्ती पर उंगली उठायेगे।
भारत की आजादी में मदरसा से उपजे चार जलेमाओं नें पूरे विश्व को यह संदेश दिया कि "हमको मिटा सके यह जमाने में दम नहीं, हमसे जमाना खुद है जमाने से हम नहीं" इन चार स्तभो में मौलाना शौकत अली, मौलाना जफर अली, मौलाना हसरत मोहानी और मौलाना अबुल कलाम आजाद जिन्हें ब्रिटिश हुकूमत देखना पसंद नहीं करती थी मौलाना अब्दुल कलाम आजाद और मौलाना हसरत मोहानी को उर्दू पत्रिका निकाले जाने पर जेल की यातना भी सहनी पड़ी मौलाना हसरत मोहानी ने 1921 में स्वतंत्रता सेनानियों को गुलामी की बेड़ियों को उखाड़ फेंकने का इंकलाब जिंदाबाद का नारा दिया जिसे 1929 में भगत सिंह और उनके साथी बटुकेश्वर दत्त ने दिल्ली के केंद्रीय विधानसभा पर बमबारी करने के समय इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगाया था और जून 1929 में दिल्ली उच्च न्यायालय में अपने बयान देते समय भी खुले न्यायालय में इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगाया यह नारा उस समय इतना प्रचलित हुआ की बच्चे बच्चे की जुबान पर इंकलाब जिंदाबाद की आवाज गूंजती थी आज भी अपनी मांगों को लेकर समाज के कार्यकर्ता,ट्रेड यूनियन और राजनीतिक आंदोलनकारी तथा न्याय के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने में इसका उपयोग करते हैं मदरसे की उपज मौलाना हसरत मोहानी में सपनें में भी नहीं सोचा होगा कि जिस मदरसे में वतन परस्ती की शिक्षा दी जाती है उसे मदरसे को कुछ सरफिरे बदनाम कर मुसलमान के वतन परस्ती पर उंगली उठायेगे।