सिल्ली: झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी का गुरुवार को सिल्ली आगमन पर प्रखंड कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कार्तिक चंद्र महतो के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं के साथ उनका अभिनंदन कर क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की मांग रखी।स्वागत समारोह के बाद स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सिल्ली स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं, उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं एवं मरीजों को दी जा रही सेवाओं की जानकारी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी एवं संबंधित अधिकारियों से प्राप्त की। साथ ही आवश्यक सुधार एवं बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।
इस अवसर पर रांची जिला ग्रामीण कांग्रेस उपाध्यक्ष नगेंद्र नाथ गोस्वामी, सिल्ली प्रखंड कांग्रेस महासचिव मंजूर मोमिन, सैय्यद कमर आलम, भर्गीरथ महतो, शमशेर आलम, मो. कलाम, सिल्ली पश्चिमी मंडल अध्यक्ष गुहीराम महतो, सिल्ली विधानसभा युवा कांग्रेस अध्यक्ष विकास रजक, पंचायत अध्यक्ष बिंदेश्वर महतो, मो. खलील, सदानंद सोनार सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता एवं स्थानीय गणमान्य लोग उपस्थित थे।
टंडवा। टंडवा प्रखंड के बड़गांव में नाबालिग दलित युवती से जुड़े गंभीर मामले को लेकर सिमरिया विधायक उज्जवल कुमार दास ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, नई दिल्ली को पत्र लिखकर पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं गहन जांच कराने की मांग की है।
विधायक उज्जवल कुमार दास ने आयोग को भेजे पत्र में कहा है कि मामले की जांच सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष तरीके से की जानी चाहिए, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके और किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय न हो।
उन्होंने प्राथमिकी में नामजद व्यक्तियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने का आग्रह किया है। विधायक ने कहा कि यदि जांच में किसी व्यक्ति की संलिप्तता नहीं पाई जाती है तो उसे अनावश्यक कानूनी कार्रवाई से बचाया जाए। वहीं, जांच के दौरान जो भी वास्तविक दोषी सामने आएं, उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
विधायक उज्जवल कुमार दास ने कहा कि न्याय का मूल उद्देश्य पीड़िता को न्याय दिलाने के साथ-साथ निर्दोष लोगों के अधिकारों की रक्षा करना भी है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि किसी निर्दोष को झूठे आरोप या अनावश्यक कार्रवाई का सामना न करना पड़े।
उन्होंने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को निष्पक्ष एवं गहन जांच के निर्देश देने की मांग की है।
विधायक ने स्पष्ट कहा कि पीड़िता को न्याय मिले और किसी निर्दोष के साथ अन्याय न हो—यही उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने वास्तविक दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और निर्दोष लोगों को राहत दिलाने की मांग दोहराई।
साहिबगंज । देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत भारतीय जनता पार्टी साहिबगंज जिला के तत्वावधान में गुरुवार को जिला मुख्यालय में भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। जिला अध्यक्ष गौतम यादव के नेतृत्व में आयोजित इस यात्रा में हजारों की संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं, मातृशक्ति, विद्यार्थियों और आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व विधायक अनंत ओझा, पूर्व विधायक लोबिन हेम्ब्रम, प्रदेश मंत्री कृष्णा महतो, किसान मोर्चा के राष्ट्रीय मंत्री बजरंगी प्रसाद यादव तथा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य गणेश प्रसाद, कृपानाथ मंडल और धर्मेंद्र कुमार सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
तिरंगा यात्रा के संयोजक जिला महामंत्री साखलू सोरेन तथा सह-संयोजक जिला महामंत्री धनंजय कुमार मंडल रहे। कार्यक्रम में युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष धर्मेंद्र मंडल समेत जिले के वरिष्ठ पदाधिकारी, मंडल अध्यक्ष, कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में महिला एवं युवा कार्यकर्ता शामिल हुए।
यात्रा की शुरुआत शहीद चौक पर शहीदों को माल्यार्पण कर की गई। इसके बाद तिरंगा यात्रा शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा तक पहुंची, जहां माल्यार्पण के साथ यात्रा का समापन हुआ। यात्रा के दौरान मार्ग में स्थापित विभिन्न महापुरुषों की प्रतिमाओं पर भी माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
तिरंगा यात्रा में एनसीसी की टीम के साथ जिले के सभी मंडलों के अध्यक्ष एवं पदाधिकारी, वरिष्ठ एवं कनिष्ठ कार्यकर्ता, मातृशक्ति तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं हाथों में तिरंगा लेकर शामिल हुए। पूरे यात्रा मार्ग पर ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ के नारों से वातावरण देशभक्तिमय बना रहा।
तिरंगा लहराते हुए कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि तिरंगा केवल एक ध्वज नहीं, बल्कि भारत की आन, बान और शान का प्रतीक है।
भाजपा की इस तिरंगा यात्रा के माध्यम से राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता और देश के प्रति सम्मान का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
रांची । झारखंड प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के मामलों को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला है । मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा है कि शिक्षा माफियाओं को बचाने के लिए बीजेपी जानबूझ कर CBI जांच का दांव खेलना चाहती है । जबकि इतिहास गवाह है कि CBI ने जांच के नाम पर अब सभी मामलों में लटकाने और भटकाने के सिवाय कुछ भी नहीं किया ।
मंत्री ने कहा कि 2015 से अब तक देश में 152 पेपर लीक की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। यह देश की परीक्षा व्यवस्था की गंभीर स्थिति को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अब तक कम से कम 17 परीक्षा में गड़बड़ी के मामलों की जांच CBI को सौंपी गई, लेकिन 2015 के बाद CBI जांच में अब तक एक भी मामले में दोषसिद्ध नहीं हुआ , मतलब CBI जांच का नतीजा शून्य है । उन्होंने कहा कि CBI ने NEET UG 2024, UGC-NET 2024, SSC CGL 2017, JEE Main 2021, WB SSC 2016, HP Police Constable 2022, Army CEE 2017 और Karnataka PSI 2021 सहित कम से कम नौ अन्य परीक्षा गड़बड़ी के मामलों की जांच की है।
मंत्री ने कहा कि NEET-UG 2024 मामले में CBI 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने की समय-सीमा से चूक गई, जिसके चलते मुख्य आरोपी को डिफॉल्ट जमानत मिलने का अवसर मिला। वहीं, UGC-NET 2024 में कथित पेपर लीक की जांच के बाद CBI ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करते हुए कहा कि संबंधित सबूत एक छेड़छाड़ किया हुआ स्क्रीनशॉट था। उन्होंने यह भी कहा कि जुलाई 2026 में जिस फास्ट-ट्रैक कोर्ट को लेकर खूब प्रचार किया गया, उसके पहले ही दिन CBI का वकील अदालत में उपस्थित नहीं हुआ।
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि 2015 से अब तक इन सभी मामलों में केवल एक दोषसिद्धि हुई है, वह भी हरियाणा न्यायिक सेवा 2017 का मामला है । इस मामले में फैसला अगस्त 2024 में दिल्ली की एक अदालत ने सुनाया था, जबकि इसकी जांच CBI ने नहीं, बल्कि चंडीगढ़ SIT ने की थी। मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि झारखंड में गठबंधन सरकार द्वारा परीक्षा में गड़बड़ी के खिलाफ कार्रवाई शुरू किए जाने के बाद छात्रों का आंदोलन सामने आया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस आंदोलन को राजनीतिक हवा देने और CBI के नाम पर वास्तविक गड़बड़ियों को छिपाने का प्रयास कर रही है।
मंत्री ने बताया कि मामले में अब तक करीब 20 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं। राहुल गांधी को लेकर भाजपा की राजनीति पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि जो कल तक “राहुल गांधी कौन कहते थे , उनके सपने में सुबह-शाम राहुल गांधी ही आ रहे है । उनके खिलाफ फैलाया जा रहा षड्यंत्र अब ताश के पत्तों की तरह भरभरा चुका है।”
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि जंतर-मंतर और रांची के छात्र आंदोलन के बीच बहुत बड़ा अंतर है । रांची में दिल्ली के जंतर मंतर की तरह छात्रों पर बर्बर लाठीचार्ज नहीं किया गया , उन्हें सड़कों पर बेरहमी से नहीं पीटा गया और न ही छात्राओं के साथ किसी तरह का कोई अभद्र व्यवहार किया गया। छात्रों की भीड़ में शामिल उपद्रवियों को खदेड़ने का प्रयास स्थानीय पुलिस ने जरूर किया है । सरकार छात्रों के साथ संवाद के माध्यम से समाधान निकालने के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि वार्ता के दौरान भी सरकार आंदोलनरत छात्रों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर चिंतित है। सरकार का उद्देश्य छात्रों की समस्याओं का समाधान करना है, न कि उनके आंदोलन को राजनीतिक रंग देना।
पत्रकार वार्ता में वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की सहित झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी एवं अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेता मौजूद रहे।
रांची। झारखंड आदिवासी सरना विकास समिति, धुर्वा के अध्यक्ष मेघा उरांव ने आदिवासी पहचान, पारंपरिक आस्था और धार्मिक गतिविधियों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान केवल जल, जंगल और जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि उसकी अपनी पारंपरिक आस्था, पूजा-पद्धति, सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक संस्थाओं से भी जुड़ी हुई है।
मेघा उरांव ने आरोप लगाया कि पुरुलिया रोड स्थित बिशप हाउस, एसडीसी सभागार और नामकुम बगीचा में बैठकर आदिवासी एवं जनजातीय समाज की पहचान, संरक्षण, संवर्धन और विस्तार की बातें करना विरोधाभासी है। उन्होंने इसे ‘दूध की रखवाली बिल्ली से कराने’ वाली कहावत से जोड़ते हुए सवाल उठाया कि जिन लोगों की विचारधारा आदिवासी समाज की पारंपरिक आस्था और पहचान से अलग है, वे आदिवासी पहचान के संरक्षण की बात किस आधार पर कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरना, मसना, चाला, जाहेरथान, मांझीथान, पाहन, पुजार, नायके, अखड़ा, धुमकुड़िया और पड़हा जैसी परंपराएं आदिवासी समाज की सामाजिक एवं सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनके अनुसार आदिवासी समुदाय की पहचान उसकी प्रथागत परंपराओं, सामाजिक संगठन, सामुदायिक जीवन और पारंपरिक संस्थाओं से भी निर्धारित होती है।
मेघा उरांव ने आरोप लगाया कि एक ओर आदिवासी समाज की पारंपरिक आस्था, विश्वास और पूजा-पद्धति को प्रभावित करने की कोशिशें हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर आदिवासी समाज की पहचान और उसके संरक्षण-संवर्धन की बात की जा रही है। उन्होंने इसे दोहरी नीति करार देते हुए कहा कि आदिवासी समाज अपनी पहचान, परंपरा और धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत के सवाल पर किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं करेगा।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान और अस्तित्व को लेकर स्पष्ट नीति और गंभीर पहल की आवश्यकता है। पारंपरिक आस्था, सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित किए बिना केवल आदिवासी हितों की बात करना अधूरा प्रयास है।
मेघा उरांव ने कहा कि आदिवासी समाज अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए लगातार आवाज उठाता रहेगा। उन्होंने संबंधित संगठनों और संस्थाओं से आदिवासी समाज की पारंपरिक पहचान, सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक मूल्यों को समझने तथा उनके संरक्षण की दिशा में ठोस पहल करने की मांग की।
रांची। छात्र आंदोलन को लेकर झारखंड की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। झारखंड सरकार की मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने भाजपा पर छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा की कोशिश अब पूरी तरह बेनकाब हो गई है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने छात्रों के मुद्दे को लेकर बंद का आह्वान किया, लेकिन आंदोलनरत छात्रों ने खुद को इस बंद से अलग रखा। इससे स्पष्ट है कि छात्र अपनी मांगों और अधिकारों की लड़ाई को किसी राजनीतिक दल के एजेंडे का हिस्सा नहीं बनाना चाहते।
मंत्री ने कहा कि छात्रों ने भाजपा के राजनीतिक आह्वान से दूरी बनाकर साफ संदेश दिया है कि उनका आंदोलन किसी पार्टी के समर्थन या विरोध में नहीं, बल्कि अपनी जायज मांगों को लेकर है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि छात्रों की लड़ाई को अपने राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बनाने की कोशिश को स्वयं छात्रों ने नकार दिया है।
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि कांग्रेस और झारखंड की महागठबंधन सरकार छात्रों के साथ खड़ी है। सरकार की प्राथमिकता आंदोलन को राजनीति का अखाड़ा बनाना नहीं, बल्कि छात्रों की जायज मांगों का समाधान निकालना है। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं को गंभीरता से ले रही है और बातचीत तथा संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के रुख का भी उल्लेख करते हुए कहा कि राहुल गांधी ने छात्रों के मुद्दे पर अपनी स्पष्ट बात रखी है। वर्तमान में संसद का सत्र चल रहा है और उन्हें विश्वास है कि छात्रों के हित में आगे भी ठोस पहल की जाएगी।
मंत्री ने कहा कि छात्रों की आवाज को दबाया नहीं जाएगा, बल्कि उनकी बात सुनी जाएगी। सरकार का प्रयास रहेगा कि आंदोलन की स्थिति को टकराव में बदलने के बजाय संवाद के जरिए समाधान तक पहुंचाया जाए।
दीपिका पांडेय सिंह ने भरोसा दिलाया कि छात्रों की आवाज सुनी जाएगी और उनकी जायज मांगों के समाधान के लिए हरसंभव पहल की जाएगी।
रांची: झारखंड की सियासत में भूचाल लाने वाली खबर सामने आई है। जहां गिरिडीह के सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी और हटिया के चर्चित विधायक नवीन जायसवाल की अकूत संपत्ति और जमीन के खेल का कच्चा-चिट्ठा अब एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) के टेबल पर पहुंच गया है।
शिकायतकर्ता हिमांशु कुमार ने सीधे ACB के DG को हलफनामा और जमीन के दस्तावेज सौंपकर बम फोड़ा है - *घोषित दाम कुछ और, बाजार में कीमत कई गुना ज्यादा, पैसा आया कहां से?
बरियातू से बड़गाईं तक चौधरी जी की संपत्ति पर सवाल
शिकायत में आरोप है कि सांसद चौधरी ने रांची के पॉश इलाके बरियातू में जो मकान दिखाया है, उसका सरकारी कागज पर दाम कुछ लाख है, लेकिन बाजार में उसकी कीमत करोड़ों में है - लगभग 6 गुना का खेल!
इतना ही नहीं, बड़गाईं के खाता नंबर 112, प्लॉट 2592 और 1221 वाली जमीन किसके पैसे से खरीदी गई, कौन काबिज है? इसकी भी परतें खोलने की मांग की गई है।
नगड़ी की 25 एकड़ आदिवासी जमीन, जायसवाल के रिश्तेदारों के नाम?
दूसरी तरफ हटिया विधायक नवीन जायसवाल पर तो और भी सनसनीखेज आरोप है।
शिकायत के मुताबिक, नगड़ी के खाता नंबर 230 के प्लॉट 908A, B, C, D की कीमत कागज में कम और हकीकत में आसमान पर है।
सबसे बड़ा धमाका - *नगड़ी में 25 एकड़ से ज्यादा आदिवासी जमीन को CNT/SPT Act को ताक पर रखकर रिश्तेदारों के नाम कराने का आरोप!* क्या आदिवासियों की जमीन पर कब्जे का नया फॉर्मूला निकला है? ACB से इसी की तह तक जाने की मांग हुई है।
सरकार भी हरकत में!
मामला सिर्फ शिकायत तक नहीं है। 22 जून 2026 को मंत्रिमंडल सचिवालय एवं निगरानी विभाग ने खुद इस मामले में दो अलग-अलग चिट्ठी अपर सचिव अखिलेश कुमार सिंह को भेजी है, जिसमें शपथ पत्र लगे होने का जिक्र है। मतलब साफ है - मामला अब सरकारी फाइलों में दौड़ रहा है।
अब सबकी निगाहें ACB पर टिकी हैं - क्या होगा अगला एक्शन? क्या होगी छापेमारी? क्या खुलेगा संपत्ति के काले-सफेद का हिसाब?
रांची। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी देर रात बिना किसी प्रोटोकॉल और सुरक्षा घेरे के सदर अस्पताल पहुंचे। वे बिना बॉडीगार्ड के अस्पताल पहुंचे, जिसके कारण वहां मौजूद कई लोग उन्हें पहचान भी नहीं पाए। बाद में जब लोगों को जानकारी हुई कि स्वयं स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल पहुंचे हैं, तो अस्पताल प्रशासन भी सक्रिय हो गया।
सदर अस्पताल पहुंचने के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने आंदोलनकारी देवेंद्र नाथ महतो समेत अन्य युवाओं से मुलाकात की और उनकी स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली। अनशन के कारण देवेंद्र नाथ महतो की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी जांच कर रही है। उनकी निगरानी और आवश्यक उपचार के लिए मेडिकल बोर्ड का भी गठन किया गया है। चिकित्सकों के अनुसार फिलहाल उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है।
इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री ने सदर अस्पताल के विभिन्न वार्डों का निरीक्षण किया। उन्होंने मरीजों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और अस्पताल में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, दवा, जांच और इलाज की व्यवस्था के बारे में जानकारी ली। कई मरीजों ने मंत्री को अपनी समस्याओं और इलाज से जुड़े अनुभवों से भी अवगत कराया।
मरीजों से बातचीत के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। बेहतर चिकित्सा सुविधा और मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं को देखकर उन्होंने संतोष व्यक्त किया तथा चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की सराहना की। उन्होंने अस्पताल कर्मियों को मरीजों के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने और इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने का निर्देश दिया।
स्वास्थ्य मंत्री का यह दौरा ऐसे समय में हुआ, जब रांची में छात्र आंदोलन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस बल की तैनाती चर्चा में है। ऐसे माहौल के बीच डॉ. इरफान अंसारी का बिना सुरक्षा घेरे के सदर अस्पताल पहुंचना, आंदोलनकारी युवाओं से मिलकर उनकी स्वास्थ्य स्थिति जानना और फिर अस्पताल के विभिन्न वार्डों में जाकर मरीजों की समस्याएं सुनना लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
अस्पताल परिसर में मौजूद लोगों ने मंत्री के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि जब प्रोटोकॉल से ऊपर उठकर सीधे मरीजों और आम लोगों के बीच पहुंचते हैं, तो इससे जनता के बीच भरोसा मजबूत होता है। लोगों के बीच यह चर्चा भी रही कि स्वास्थ्य मंत्री ने इस दौरे के दौरान प्रोटोकॉल से अधिक मरीजों की सेवा और मानवीय संवेदना को प्राथमिकता दी।
रांची। माटी कला बोर्ड के पुनर्गठन समेत विभिन्न मांगों को लेकर मंगलवार को कुम्हार महासभा के बैनर तले बड़ी संख्या में कुम्हार समाज के लोग झारखंड विधानसभा के समक्ष पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से माटी कला बोर्ड का जल्द से जल्द पुनर्गठन करने और कुम्हार समाज से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से पहल करने की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में समाज के लोग हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते नजर आए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कुम्हार समाज की पारंपरिक माटी कला और उससे जुड़े रोजगार को संरक्षण और बढ़ावा देने के लिए माटी कला बोर्ड की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन बोर्ड के पुनर्गठन में हो रही देरी से समाज में नाराजगी बढ़ रही है।
कुम्हार महासभा के नेताओं ने कहा कि मिट्टी के बर्तन, दीये, मूर्तियां और अन्य माटी कला उत्पाद बनाने वाले कारीगरों के सामने आर्थिक और रोजगार से जुड़ी कई चुनौतियां हैं। आधुनिक बाजार में प्रतिस्पर्धा के बीच पारंपरिक कारीगरों को सरकारी सहयोग, प्रशिक्षण, बाजार उपलब्ध कराने और आर्थिक सहायता की जरूरत है।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से माटी कला बोर्ड का तत्काल पुनर्गठन, कुम्हार समाज के पारंपरिक व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए ठोस नीति बनाने, कारीगरों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने और माटी कला उत्पादों के लिए बाजार की बेहतर व्यवस्था करने की मांग की।
मौके पर साहेबगंज जिला कुम्हार महासंघ के जिलाध्यक्ष पिंटू पंडित, जिला महामंत्री ओमप्रकाश पंडित, रामा पंडित,प्रकाश कुमार पंडित ने कहा प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर सरकार तक आवाज पहुंचाने की कोशिश की और कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। इस अवसर पर सैकड़ों की संख्या में समाज के लोग उपस्थित थे।
साहेबगंज। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् साहिबगंज विभाग संयोजक संजय दत्ता ने कहा कि जेपीएससी व जेएसएससी जैसी महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताएँ झारखंड के हजारों विद्यार्थियों के भविष्य पर गंभीर प्रभाव डाल रही हैं। ऐसे संवेदनशील और जीवन-निर्णायक विषयों पर समस्या के शांतिपूर्ण प्रदर्शन और संवाद के जरिए समाधान की कोशिश करने के बजाय राज्य द्वारा बलप्रयोग करना न सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण बल्कि अस्वीकार्य भी है।
इस प्रकार की कार्रवाई स्पष्ट रूप से प्रदेश सरकार के विद्यार्थी-विरोधी रुख को उजागर करती है। वहीं, छात्र-हितों का संरक्षण करने वाली राजनीतिक पार्टियों द्वारा मौन रहना, जबकि वे राज्य सरकार का भागीदार हैं, उनके द्वैध चरित्र को भी दिखाता है। हम सरकार से दो बातों की तत्काल माँग करते हैं:
दमन की नीति को छोड़कर विद्यार्थियों से सार्थक संवाद शुरू किया जाए,
JPSC ओर JSSC के संदिग्ध परीक्षाओं को तत्काल रद्द कर सी बी आई के द्वारा निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करायी जाए, तथा परीक्षा व्यवस्था में आवश्यक तकनीकी, प्रशासनिक और संस्थागत सुधार लागू किए जाएँ।
विद्यार्थी परिषद शान्तिपूर्ण आंदोलन के अधिकार की रक्षा और विद्यार्थियों के भविष्य के संरक्षण के लिए लगातार आवाज़ उठाते रहेंगे। छात्रों के साथ हुई इस अमानवीय कार्रवाई के लिए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए।