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सीएम द्वारा जनगणना में सरना कोड शामिल करने की मांग पत्र पर जनजाति सुरक्षा मंच ने उठाया सवाल
May 4, 2026 | 360 Views
सीएम द्वारा जनगणना में सरना कोड शामिल करने की मांग पत्र पर जनजाति सुरक्षा मंच ने उठाया सवाल

रांची। जनजाति सुरक्षा मंच के मीडिया प्रभारी सोमा उरांव ने प्रेस बयान जारी कर  मुख्यमंत्री  हेमंत सोरेन जी से पूछा कि क्या सरना धर्म कोड मिलने से आदिवासियों को संविधान में लिखा 26 अनुच्छेदों में जो हक अधिकार प्राप्त है वह बरकरार रहेगा इस बाबत आप कैबिनेट से एक चिट्ठी निर्गत करें कि सरना धर्मकोड मिलने से 26 अनुच्छेदों से मिलने वाले हक अधिकार मिलते रहेंगे  चूंकि सरना धर्म कोड की मांग चर्च की मांग है जिस दिन यह कोड मिल जाता है सभी जनजाति अल्पसंख्यक हो जाएंगे और 26 अनुच्छेदों का हक अधिकार छिन जाएगा। सन 1945 में चाईबासा की जगन्नाथपुर धर्म सम्मेलन में सर्वप्रथम सरना की बात आई वहीं से धीरे-धीरे सरना का प्रचलन हुआ, लोगों की मांग को देखते हुए सन 2013 में माननीय पूर्व सांसद सुदर्शन भगत जी ने सरना धर्म कोड की मांग की l केंद्र से जवाब आया यह संभव नहीं है। 2015 में पूर्व विधायक एवं मंत्री माननीय देव कुमार धान जी ने भी सरना धर्म कोड की मांग की, केंद्र से जवाब आया यह संभव नहीं है क्योंकि 105 छोटे-छोटे पथ अलग-अलग कोड की मांग कर रहे हैं यदि सभी को अलग-अलग कोड दिया जाए तो भारत टुकड़े-टुकड़े में बट जाएगा और इसी प्रकार समय बिता गया और वर्ष 2020 में चर्च की मांग पर विशेष सत्र बुलाकर आनन फानन में विधानसभा से सरना धर्मकोड आदिवासी/ धर्मकोड को पारित कर बिना महामहिम के हस्ताक्षर कराए सीधे दिल्ली भेज देना संविधान को हनन करते हुए लोगों के साथ छल करना और यह कहना कि आप सरना कोड मांग किया हमने पारित कर केंद्र भेजा ,अब केंद्र नहीं माना तो मैं क्या करूं पुनः लोगों को 2025 में यह कहना कि सरना धर्मकोड को पास कर राज्यपाल से हस्ताक्षर कराकर केंद्र भेजेंगे फिर वही छल की हम सरना धर्म कोड के लिए महामहिम एवं राज्यपाल को चिट्ठी लिखे हैं कि जनगणना में अलग सरना धर्म तालिका होना चाहिए जबकि भारत की सभी जनजातियों के लिए हिंदू धर्म के अभिन्न अंग या श्रेणी में होने का कारण हिंदू धर्म के अंतर्गत रखा है और सभी जनजाति हिंदू है जो भारत के संविधान के अनुच्छेद 13, 17 ,25 ,340, 341 342,  में हिंदू कहा गया है जिसके अंतर्गत निम्नलिखित कानून बनाए गए हैं 1. सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम1955
2 हिंदू विवाह अधिनियम 1955
3 हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956
4. हिंदू आप प्राप्त व्याप्त एवं संरक्षता अधिनियम 1956
5. हिंदू दत्तक पुत्र एवं भरण पोषण अधिनियम 1956
6. अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989
7. पंचायत उपबंध अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार अधिनियम 1996
8. राष्ट्रपति द्वारा अधिसूचित बीपी मंडल आयोग प्रतिवेदन अधिनियम 1990
9. झारखंड पंचायती राज अधिनियम 2001
जो सभी जनजाति हिंदू होते हुए भी अपनी अपनी रीति रिवाज कस्टम रूढ़ि प्रथा से फॉलो होते हैं ।क्योंकि संविधान में सरना, आदिवासी ,आदि, एवं सनातन धर्म अंकित नहीं है इसलिए जनगणना हो रहा है कॉलम में धर्म के स्थान पर ईसाई मुस्लिम को छोड़कर सभी लोगों से हिंदू लिखने का आग्रह किया विशेष कर जनजाति समाज से आग्रह करते हुए कहा कि अपना अपना हक अधिकार एवं बच्चों के भविष्य नौकरी को देखते हुए हिंदू ही लिखे अन्य दूसरा कोई नहीं लिखे ।  
 


May 4, 2026 | 361 Views
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