FOLLOW US ON
Breaking News झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी और जेएसएससी में भ्रष्टाचार को लेकर प्रदर्शन तेज | बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जबरदस्त जीत | संसद का मानसून सत्र शुरू, केंद्र सरकार के द्वारा कई बिल पेश होने की संभावना | जेपीएससी एवं जेएसएससी में भ्रष्टाचार को लेकर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों का प्रदर्शन जारी | बांकीपुर विधानसभा उप चुनाव में जन सुराज प्रशांत किशोर की जीत के बाद बिहार में बदल रहे हैं राजनीतिक समीकरण | राम मंदिर से चंदा चोरी का मामला देश भर में राजनीति गर्म | झारखंड,महिला सुपरवाइजर बहाली में भी गड़बड़ी की आशंका विभाग ने दिए जांच के आदेश | झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र 6 अगस्त से शुरू |
सुनीता विलियम्स के शरीर में हर सेकेंड 30 लाख लाल कोशिकाएं नष्ट, बेबी फीट और स्पेस एनीमिया जैसी समस्याएं, क्या ठीक हो पाएंगी?
March 20, 2025 | 550 Views
सुनीता विलियम्स के शरीर में हर सेकेंड 30 लाख लाल कोशिकाएं नष्ट, बेबी फीट और स्पेस एनीमिया जैसी समस्याएं, क्या ठीक हो पाएंगी?

रांची (ऋषभ राजा ) भारतीय मूल की अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स और उनके साथी एस्ट्रोनॉट बुच विल्मोर धरती पर आ गई है. सुनीता 8 दिन के मिशन पर स्पेस गई थी लेकिन 286 दिनों तक वहां फंसी रह गई, 9 महीने 14 दिन बाद उनकी वापसी हुई है . बुधवार सुबह एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के ड्रैगन यान से फ्लोरिडा के पास समंदर में उतरे .उनकी पहली लैंडिंग समंदर में हुई दुनिया भर में उनकी सुकुशल वापसी की खुशी मनाई जा रही है. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और एलन मस्क के स्पेसएक्स के अंतरिक्ष यान ड्रैगन से सुनीता विलियम्स, बुच विल्मोर, निक हेग और रूसी कॉस्मोनॉट अलेक्जेंडर गोर्बुनोव पृथ्वी पर लौटे. उनकी धरती पर वापसी के 17 घंटों का सफर बेहद कामयाबी के साथ खत्म हुआ. दरअसल, सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर 5 जून 2024 को परीक्षण यान स्टारलाइनर से अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए उड़ान भरी थी. वहां आठ दिन गुजारने के बाद उनकी वापसी थी, मगर यान में तकनीकी खामी के कारण यह अटक गई थी . इन 9 महीनों में दोनों की बॉडी में क्या बदलाव हुए और क्या दोनों के शरीर पहले जैसे हो पाएंगे? जानते हैं .

9 महीने में सुनीता की बॉडी कितनी बदल गई

इसरो के पूर्व साइंटिस्ट डॉ. विनोद कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, 2022 में नेचर मैगजीन में कनाडा की एक रिसर्च छपी . ओटावा यूनिवर्सिटी की इस स्टडी में कहा गया कि अंतरिक्ष में रहने के दौरान एस्ट्रोनॉट्स के शरीर की 50 फीसदी लाल रक्त कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं. और मिशन के चलने तक ऐसा होता रहता है . यानी शरीर में खून की कमी हो जाती है। इसे स्पेस एनीमिया कहा जाता है. ये लाल कोशिकाएं पूरे शरीर को ऑक्सीजन पहुंचाती हैं. 

चांद या मंगल पर यात्रा करना एस्ट्रोनॉट्स के लिए बड़ी चुनौती

इसी वजह से चांद, मंगल या उससे दूर की अंतरिक्ष यात्राएं करना एक बड़ी चुनौती हैं . हालांकि, ऐसा किस वजह से होता है, ये अब तक एक राज ही है . इसके अलावा, अंतरिक्ष में रहने के दौरान यात्रियों की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और हड्डियों में कैल्शियम की कमी हो जाती है. धरती पर लौटने के बाद अंतरिक्ष यात्री कमजोर और थका हुआ महसूस करते हैं .

सबसे ज्यादा दिन तक अंतरिक्ष में रहने वाली तीसरी हस्ती

सुनीता के अंतरिक्ष से धरती पर कदम रखने के साथ ही वह कुल 286 दिन अंतरिक्ष में बिताने वाली हस्ती बन गई हैं . इसके साथ ही वह एक यात्रा में तीसरी सबसे ज्यादा दिन तक आईएसएस पर बिताने वाली महिला वैज्ञानिक बन गई हैं . इस मामले में सबसे पहले नंबर पर 328 दिनों के साथ क्रिस्टीना कोच हैं .वहीं, पिग्गी वीटस्न 289 दिनों के साथ दूसरे नंबर पर हैं .आईएसएस में एक बार में सबसे ज्यादा 371 दिन अंतरिक्ष यात्री फ्रैंक रूबियो ने बिताए हैं. कुल मिलाकर सबसे ज्यादा दिन बिताने का रिकॉर्ड 675 दिनों के साथ पिग्गी वीटस्न के पास है.

 

 


March 20, 2025 | 551 Views
March 20, 2025 | 551 Views
March 20, 2025 | 551 Views
March 20, 2025 | 551 Views
March 20, 2025 | 551 Views
March 20, 2025 | 551 Views
March 20, 2025 | 551 Views
March 20, 2025 | 551 Views
March 20, 2025 | 551 Views