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खनिज वहन भूमि उपकर ( JMBL Cess) एवं प्रस्तावित MMDR संशोधन विधेयक 2026 पर मंत्री दीपिका पांडेय सिंह का बयान,संशोधन विधेयक झारखंड के लिए आर्थिक चोट , हर स्तर पर होगा विरोध :
August 13, 2026 | 227 Views
खनिज वहन भूमि उपकर ( JMBL Cess) एवं प्रस्तावित MMDR संशोधन विधेयक 2026 पर  मंत्री दीपिका पांडेय सिंह का बयान,संशोधन विधेयक झारखंड के लिए आर्थिक चोट , हर स्तर पर होगा विरोध :

रांची। झारखंड की ग्रामीण विकास , ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने खनिज वहन भूमि उपकर ( JMBL Cess) एवं प्रस्तावित MMDR संशोधन विधेयक 2026 को राज्यों के अधिकार को खत्म करने की साजिश करार दिया है । उन्होंने कहा है कि इस संशोधन से झारखंड जैसे राज्य खनिज युक्त भूमि पर किसी प्रकार का कर  ,  उपकर या अन्य लेवी केंद्र सरकार के निर्धारित शर्तों के बिना नहीं लगा सकेंगी । ये राज्यों के वित्तीय क्षमता को कम करने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है । मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि झारखंड जैसे राज्य जिसके गर्भ में प्रचुर खनिज संपदा मौजूद है , ऐसे प्रदेश राजस्व पर केंद्र सरकार की लगाम लगाना कहीं से भी जायज नहीं है । खनिज वहन भूमि उपकर कोई नई रॉयल्टी नहीं है और ना ही यह खनिज उत्पादन पर लगाया गया अतिरिक्त रॉयल्टी शुल्क है । यह उस भूमि पर लगाया गया उपकर है जिसके भीतर खनिज मौजूद है और जिनका खनन किया जा रहा है । 

मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि जुलाई 2024 में सर्वोच्च न्यायालय की 9 न्यायाधीशों की संविधान पीठ मिनरल एरिया डेवलपमेंट ऑथोरिटी बनाम स्टील ऑथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड मामले में निर्णय दे चुकी है । इस निर्णय के बाद झारखंड विधानसभा ने झारखंड मिनरल बेयरिंग के लैंड सेस अधिनियम 2024 पारित किया था । खनिज के मामले में राज्य की समृद्धि ही राज्यवासियों के लिए कई तरह की परेशानियों से भी जुड़ा है । विस्थापन , भूमि से बेदखल , पर्यावरण क्षति , जल एवं वायु प्रदूषण , वन क्षेत्र पर दवाब के साथ सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिवर्तन का दंश भी झेल रहा है । राज्य सरकार ने इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ही खनिज संपदाओं से प्राप्त आर्थिक लाभ का एक हिस्सा खनन प्रभावित क्षेत्रों एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों में लगाने का निर्णय लिया । वर्ष 2024 - 25 में 1 , 379 करोड़ , 2025 - 26 में 7 , 488 करोड़ एवं 2026 - 27 में अनुमानित 13 , 215 करोड़ की राशि इस बात का प्रमाण है कि JMBL सेस बहुत कम समय में प्रमुख राजस्व स्रोतों में शामिल है । मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा खनिज संपदाओं पर सेस से प्राप्त राशि स्वास्थ्य सेवाओं , शिक्षा , सामाजिक सुरक्षा , ग्रामीण विकास , पेयजल एवं स्वच्छता , कृषि एवं आजीविका , आधारभूत संरचना के साथ अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं पर खर्च की जा रही है । JMBL सेस झारखंड के लिए केवल एक राजस्व का श्रोत नहीं है बल्कि ये खनिज क्षेत्र के विकास का महत्वपूर्ण वित्तीय आधार भी है । झारखंड के हितों के मद्देनजर केंद्र सरकार को विचार करने की जरूरत है । हम झारखंड राज्य के साथ हो रही हकमारी पर चुपचाप बैठने वाले नहीं है । कांग्रेस और गठबंधन सरकार केंद्र सरकार के इस संशोधन विधेयक पर हर स्तर पर विरोध करेगी ।


August 13, 2026 | 228 Views
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