सिल्ली-मुरी। सिल्ली-मुरी और आसपास के ग्रामीण इलाकों में प्रकृति, आस्था और भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक करमा पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने करम डाल की पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, अच्छी फसल और परिवार की खुशहाली की कामना की। विभिन्न स्थानों पर करमा गीत, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।करमा झारखंड के प्रमुख प्रकृति-आधारित पर्वों में से एक है। यह पर्व प्रकृति, संस्कृति, आस्था, भाई-बहन के प्रेम और सामाजिक एकता से जुड़ा हुआ है। पर्व के दौरान करम देवता की पूजा की जाती है। मान्यता है कि करम देवता की आराधना से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।करमा पर्व झारखंड की समृद्ध लोकपरंपरा और सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके जरिए लोगों को पेड़-पौधों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश भी मिलता है। ग्रामीण क्षेत्रों में युवक-युवतियों और महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में करमा गीतों पर नृत्य कर उत्सव में भाग लिया।पर्व के अवसर पर लोगों ने झारखंडी संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखने के साथ-साथ प्रकृति एवं पर्यावरण की रक्षा का संकल्प लिया। श्रद्धालुओं ने करम देवता से क्षेत्र में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की।