रांची। झारखंड अभियंत्रण सेवा संघ (JESA) की ओर से रांची में 59वें इंजीनियर्स डे एवं भारत रत्न मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की 165वीं जयंती के अवसर पर समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में झारखंड की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल हुईं।
इस अवसर पर मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने महान अभियंता मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण में उनका योगदान अतुलनीय रहा है। उनके कार्य, दूरदृष्टि और तकनीकी दक्षता के कारण आज भी उन्हें पूरे सम्मान के साथ याद किया जाता है।
उन्होंने कहा कि इंजीनियर किसी भी राज्य के विकास की आधारशिला होते हैं। झारखंड में ऐसी संरचनाओं का निर्माण किया जाना चाहिए, जो जनता के लिए उपयोगी, मजबूत और टिकाऊ हों। निर्माण कार्य इस सोच और मजबूती के साथ किए जाने चाहिए कि उनकी चर्चा 100 वर्ष बाद भी हो।
मंत्री ने कहा कि झारखंड प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से अपेक्षाकृत सुरक्षित राज्य है। ऐसे में यहां निर्मित होने वाली संरचनाओं में गुणवत्ता और दीर्घकालिक उपयोगिता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने अभियंताओं से अनुशासन, गुणवत्ता और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि विकास योजनाएं निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरी हों और कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए। साथ ही, डीपीआर (DPR) में बार-बार संशोधन की आवश्यकता न पड़े, इसके लिए योजना निर्माण के स्तर पर ही तकनीकी पहलुओं का गंभीरता से अध्ययन किया जाना चाहिए।
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि झारखंड अभियंत्रण सेवा संघ द्वारा रखी गई मांगें जायज हैं। चाहे वह वाहनों की आवश्यकता का विषय हो अथवा तकनीकी प्रशिक्षण से संबंधित मांग, सरकार के स्तर पर इनके समाधान की दिशा में आवश्यक पहल की जाएगी।
उन्होंने कहा कि झारखंड के अभियंताओं में क्षमता और प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि उनकी तकनीकी दक्षता और अनुभव का बेहतर उपयोग करते हुए राज्य में ऐसी विशिष्ट एवं गुणवत्तापूर्ण संरचनाओं का निर्माण किया जाए, जिनकी चर्चा राष्ट्रीय स्तर पर हो और जिन्हें देखने के लिए देशभर से लोग झारखंड आएं।
मंत्री ने कहा कि मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की कार्य संस्कृति, अनुशासन, तकनीकी दक्षता और राष्ट्र निर्माण की भावना से प्रेरणा लेकर झारखंड के विकास को नई दिशा दी जा सकती है। समारोह के दौरान इंजीनियरिंग क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले अभियंताओं एवं तकनीकी कर्मियों के योगदान को भी सम्मानपूर्वक स्मरण किया गया।
कार्यक्रम में झारखंड सरकार के मंत्री योगेंद्र प्रसाद, मंत्री हफ़िज़ुल हसन, विभागीय सचिव, झारखंड अभियंत्रण सेवा संघ के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में अभियंता एवं तकनीकी कर्मी उपस्थित रहे।
रांची । सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) में स्वच्छता को लेकर व्यापक अभियान की शुरुआत की गई है। स्पेशल कैंपेन 6.0 के तहत मंगलवार को सीसीएल मुख्यालय, दरभंगा हाउस, रांची समेत कंपनी के सभी कोयला क्षेत्रों एवं इकाइयों में स्वच्छता शपथ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कंपनी के महाप्रबंधक, विभागाध्यक्ष, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया और स्वच्छ एवं व्यवस्थित कार्यस्थल के साथ-साथ स्वच्छ समाज के निर्माण का संकल्प लिया।
सीसीएल मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान महाप्रबंधक (CCMC) श्री वी.के. शुक्ला ने उपस्थित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्वच्छता की शपथ दिलाई। शपथ के दौरान सभी ने स्वच्छता को केवल कार्यालय अथवा कार्यस्थल तक सीमित नहीं रखने, बल्कि इसे अपने घर, गांव, मोहल्ले और पूरे समाज तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता जताई।
कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि स्वच्छता केवल किसी एक विभाग या व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक और प्रत्येक कर्मचारी की सामूहिक जिम्मेदारी है। अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने स्वच्छता को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाने तथा अपने आसपास के लोगों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक एवं प्रेरित करने का संकल्प लिया।
100 लोगों को स्वच्छता के लिए प्रेरित करने का संकल्प
स्वच्छता शपथ के दौरान सीसीएल कर्मियों ने अपने आसपास, गांव, मोहल्ले और कार्यस्थल को साफ-सुथरा रखने के साथ ही कम से कम 100 अन्य लोगों को स्वच्छता की शपथ दिलाने का संकल्प लिया। इसके साथ ही लोगों को प्रत्येक वर्ष 100 घंटे स्वच्छता के लिए समर्पित करने के लिए प्रेरित करने की बात कही गई।
कंपनी की ओर से माना जा रहा है कि इस तरह की गतिविधियों से स्वच्छता के प्रति व्यक्तिगत जिम्मेदारी की भावना मजबूत होगी और इसका सकारात्मक प्रभाव कार्यस्थल से निकलकर समाज के व्यापक स्तर तक पहुंचेगा।
तीन चरणों में चलेगा स्पेशल कैंपेन 6.0
स्पेशल कैंपेन 6.0 को इस वर्ष निर्धारित चरणों में संचालित किया जाएगा। अभियान का प्रिपरेटरी फेज 16 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। इस चरण में अभियान से जुड़ी तैयारियों, गतिविधियों और आवश्यक कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जाएगा।
इसके बाद 2 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर अभियान का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। इसके साथ ही अभियान का मुख्य इंप्लीमेंटेशन फेज 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगा।
इस दौरान सीसीएल के विभिन्न क्षेत्रों एवं इकाइयों में स्वच्छता से जुड़ी कई गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनमें कार्यस्थलों की साफ-सफाई, स्वच्छ वातावरण का निर्माण, लंबित मामलों का निस्तारण तथा कार्यालयों में स्वच्छ एवं व्यवस्थित कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
स्वच्छता को कार्यसंस्कृति से जोड़ने पर जोर
स्पेशल कैंपेन 6.0 के माध्यम से सीसीएल का उद्देश्य स्वच्छता को महज एक निर्धारित अवधि तक चलने वाला अभियान नहीं, बल्कि नियमित कार्यप्रणाली और व्यवहार का हिस्सा बनाना है। कार्यक्रम में कर्मचारियों ने यह संकल्प लिया कि स्वच्छता के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी को लगातार बनाए रखा जाएगा।
सीसीएल परिवार ने स्वच्छता, अनुशासन और बेहतर कार्य वातावरण को एक-दूसरे से जोड़ते हुए इसे कंपनी की कार्यसंस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। अधिकारियों और कर्मचारियों की भागीदारी से मुख्यालय से लेकर कोयला क्षेत्रों तक अभियान को व्यापक रूप देने की तैयारी की जा रही है।
हजारीबाग/चतरा। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB), प्रमंडलीय कार्यालय हजारीबाग की टीम ने मंगलवार को चतरा जिले में कार्रवाई करते हुए एक राजस्व कर्मचारी को 15,000 रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, तुलसी यादव (46 वर्ष), पिता झमन यादव, ग्राम न्याखाप, प्रखंड एवं थाना गिद्धौर, जिला चतरा ने शिकायत की थी कि उनकी पत्नी अंगी देवी के नाम से ग्राम असडीया में स्थित 20 डिसमिल जमीन (खाता संख्या-20, प्लॉट संख्या-459) के म्यूटेशन के लिए राजस्व कर्मचारी सतीश सिन्हा द्वारा 35,000 रु रिश्वत की मांग की जा रही है।
शिकायत के आधार पर ACB द्वारा तकनीकी माध्यम से सत्यापन कराया गया। सत्यापन में पहली किस्त के रूप में 15,000 रु रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। इसके बाद हजारीबाग ACB थाना कांड संख्या 09/2026, दिनांक 14 सितंबर 2026, दर्ज किया गया।
मंगलवार 15 सितंबर 2026 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, हजारीबाग की गठित ट्रैप टीम ने दंडाधिकारी एवं दो सरकारी गवाहों की मौजूदगी में कार्रवाई की। इस दौरान प्राथमिक अभियुक्त सतीश प्रसाद (57 वर्ष), पिता स्वर्गीय सुरेश प्रसाद, ग्राम गुली, पोस्ट पितीज, थाना इटखोरी, जिला चतरा को शिकायतकर्ता तुलसी यादव से 15,000 रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया.गिरफ्तारी के बाद आरोपी के विरुद्ध आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
साहिबगंज के बाढ़ प्रभावित स्कूल दो दिन रहेंगे बंद
साहिबगंज। जिले में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा निर्णय लिया है। गंगा नदी के किनारे स्थित और बाढ़ से प्रभावित सरकारी एवं निजी विद्यालयों को 9 और 10 सितंबर 2026 को बंद रखने का आदेश जारी किया गया है।
उपायुक्त-सह-अध्यक्ष, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, साहिबगंज की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि केंद्रीय जल आयोग, निचली गंगा मंडल-2, पटना की रिपोर्ट के अनुसार साहिबगंज जिले में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से लगभग 1.25 मीटर ऊपर बह रहा है। वहीं 9 सितंबर की सुबह 6 बजे तक जलस्तर में करीब 13 सेंटीमीटर और वृद्धि होने की संभावना जताई गई है।
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने गंगा नदी के किनारे स्थित उन विद्यालयों को बंद रखने का निर्णय लिया है, जो बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रशासन का कहना है कि यह कदम विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं तथा शिक्षक-शिक्षिकाओं की जान-माल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।
प्रधानाध्यापकों को आदेश का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश
जारी आदेश में सभी बाढ़ प्रभावित विद्यालयों के प्रधानाध्यापक एवं प्रभारी प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया गया है कि वे आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करें।
साथ ही आदेश की प्रतिलिपि संबंधित शिक्षा अधिकारियों, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी, अपर समाहर्ता एवं उप विकास आयुक्त सहित संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है।
गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच स्कूलों को दो दिनों के लिए बंद करने का यह फैसला प्रशासन की ओर से एहतियाती कदम माना जा रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
साहिबगंज। गंगा नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर और जिले में उत्पन्न बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को आवश्यक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनकी समस्याओं की लगातार निगरानी की जा रही है।
इसी क्रम में साहिबगंज के अनुमंडल पदाधिकारी अमर जॉन आईन्द एवं अंचलाधिकारी बासुकीनाथ टुडू ने बाढ़ प्रभावित बड़ा रामपुर दियारा, टोपरा दियारा, रामनगर दियारा एवं बलुआटोली दियारा का भ्रमण कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं और आवश्यकताओं की जानकारी ली तथा जरूरतमंद परिवारों के बीच खाद्य सामग्री का वितरण किया।
इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने लोगों को भरोसा दिलाया कि बाढ़ की चुनौतीपूर्ण स्थिति में जिला प्रशासन प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा है। लोगों की आवश्यकताओं के अनुरूप राहत सामग्री उपलब्ध कराने का प्रयास लगातार जारी रहेगा।
अनुमंडल पदाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मियों को निर्देश दिया कि राहत एवं बचाव कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही या शिथिलता नहीं होनी चाहिए। प्रभावित क्षेत्रों में नियमित भ्रमण कर स्थिति का आकलन करने और जरूरतमंद परिवारों तक समय पर खाद्य सामग्री एवं अन्य आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाने को कहा गया।
उन्होंने कहा कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन प्रभावित इलाकों की लगातार निगरानी कर रहा है। लोगों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। आवश्यकता पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
वहीं, प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से अपील की गई है कि वे प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल स्थानीय प्रशासन को सूचना दें।
अंचलाधिकारी बासुकीनाथ टुडू ने भी संबंधित कर्मियों को प्रभावित इलाकों में नियमित रूप से भ्रमण कर स्थिति की जानकारी लेने तथा जरूरतमंद परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाना सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
बाढ़ से जुड़ी किसी भी आपात स्थिति में साहिबगंज जिला नियंत्रण कक्ष के हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है:
???? 9006963963, 9631155933, 9065370630
☎️ 06436-356485, 06436-222101, 06436-222202
काले रंग की स्कॉर्पियो से पहुंचे थे कुछ लोग, मारपीट कर जबरन गाड़ी में बैठाने का आरोप; सूचना मिलते ही रांची पुलिस ने शहर में चलाया सघन एंटी क्राइम चेकिंग अभियान
रांची। राजधानी रांची में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब एमिटी यूनिवर्सिटी के गेट के सामने से चतरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक जनार्दन पासवान के बेटे सौरभ को कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से मारपीट कर जबरन गाड़ी में बैठाकर अपहरण करने का प्रयास करने की सूचना पुलिस को मिली। घटना की जानकारी मिलते ही रांची पुलिस तत्काल हरकत में आ गई और पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था को सक्रिय कर दिया गया।
पुलिस को 7 सितंबर 2026 को सूचना प्राप्त हुई कि कुछ व्यक्ति काले रंग की स्कॉर्पियो से एमिटी यूनिवर्सिटी के गेट के सामने पहुंचे। आरोप है कि इन लोगों ने विधायक के बेटे सौरभ के साथ मारपीट की और इसके बाद उन्हें जबरन अपनी गाड़ी में बैठाकर वहां से ले गए।
सूचना मिलते ही शहर में शुरू हुई नाकेबंदी
घटना की गंभीरता को देखते हुए रांची पुलिस ने बिना समय गंवाए शहर के विभिन्न हिस्सों में एंटी क्राइम चेकिंग शुरू कर दी। प्रमुख मार्गों और संभावित रास्तों पर पुलिस की गतिविधियां बढ़ा दी गईं। विभिन्न स्थानों पर वाहनों की जांच की गई और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी गई।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई के साथ स्थानीय विधानसभा थाना की टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और पूरे मामले की छानबीन शुरू कर दी।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई से सकुशल बरामद हुए सौरभ
रांची पुलिस के अनुसार, मामले की सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए अत्यल्प समय में विधायक जनार्दन पासवान के पुत्र सौरभ को सकुशल बरामद कर लिया।
सौरभ के सकुशल बरामद होने के बाद पुलिस ने राहत की सांस ली। हालांकि, उन्हें किन लोगों ने जबरन गाड़ी में बैठाया, घटना के पीछे क्या कारण था और मारपीट क्यों की गई—इन सवालों का जवाब पुलिस की आगे की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
आरोपियों की तलाश और पूछताछ पर नजर
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस द्वारा आगे की विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस घटनास्थल से मिले संभावित सुरागों, प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।
काले रंग की स्कॉर्पियो से पहुंचे लोगों की पहचान और घटना में उनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि सौरभ को कहां ले जाया गया था और इस पूरी घटना के पीछे वास्तविक वजह क्या थी।
त्वरित पुलिस कार्रवाई बनी चर्चा का विषय
राजधानी में विधायक के बेटे को कथित रूप से जबरन ले जाने की सूचना ने पुलिस महकमे में भी तत्काल सक्रियता बढ़ा दी। सूचना मिलते ही शहर में चेकिंग अभियान शुरू करना और बेहद कम समय में सौरभ को सकुशल बरामद कर लेना रांची पुलिस की त्वरित कार्रवाई को दर्शाता है।
अब पूरे मामले में पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह घटना वास्तव में अपहरण थी या इसके पीछे कोई अन्य विवाद अथवा कारण था। फिलहाल पुलिस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है और विधि-सम्मत कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
पटवर टोला में 56 वर्षीय जीछु राम की डूबने से मौत, कृष्ण प्रसाद दियारा में कंचन कुमारी की तलाश जारी; आयुष्मान आरोग्य मंदिर में स्वास्थ्यकर्मियों की कमी पर ग्रामीणों में आक्रोश
साहिबगंज। जिले में गंगा के लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ की स्थिति लगातार विकराल होती जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ अब शहरी इलाकों में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। बड़ी कोदरजन्ना में बाढ़ ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। पिछले 24 घंटे में बाढ़ के पानी में डूबने की दो घटनाओं ने इलाके में दहशत पैदा कर दी है। एक घटना में 56 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दूसरी घटना में छह वर्षीय बच्ची लापता है।
पटवर टोला में 56 वर्षीय व्यक्ति की मौत
सदर प्रखंड के बड़ी कोदरजन्ना स्थित पटवर टोला में सोमवार सुबह 56 वर्षीय जीछु राम, पिता धन्नी राम, की बाढ़ के पानी में डूबने से मौत हो गई। परिजनों के अनुसार गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण घर के चारों ओर पानी भर गया था। परिवार के सदस्य घर का सामान सुरक्षित स्थान पर निकालने में जुटे थे। इसके बाद जीछु राम देर शाम घर में सोने चले गए।
सुबह तक जब वह बाहर नहीं निकले तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान उनका शव पानी में मिला। घटना की सूचना मिलने पर मुफस्सिल थाना प्रभारी अनीश कुमार पाण्डेय, एएसआई उमाकांत ओझा और एएसआई केशव मालाकार मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मृतक अपने पीछे दो पुत्र और एक पुत्री छोड़ गए हैं।
नहाने के दौरान छह वर्षीय बच्ची बाढ़ के पानी में डूबी
वहीं, मुफस्सिल थाना क्षेत्र के कृष्ण प्रसाद दियारा में रविवार को नहाने के दौरान छह वर्षीय कंचन कुमारी बाढ़ के पानी में डूब गई। हादसे के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने बच्ची की काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका।
सोमवार पूर्वाह्न करीब 10 बजे तक गोताखोरों और मुफस्सिल थाना पुलिस की टीम बाढ़ के पानी में बच्ची की तलाश में जुटी रही। बच्ची के लापता होने के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
बाढ़ के बीच स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
बड़ी कोदरजन्ना में बाढ़ की स्थिति गंभीर होने के बावजूद स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव का आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्वास्थ्यकर्मियों की कमी से जूझ रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक केंद्र में सीएचओ नियमित रूप से उपलब्ध नहीं हैं और एएनएम की भी पर्याप्त मौजूदगी नहीं है। ग्रामीणों का दावा है कि यहां पदस्थापित सीएचओ को सदर अस्पताल में प्रतिनियुक्त किया गया है। वहीं, सूत्रों के हवाले से यह भी बताया जा रहा है कि बड़ी कोदरजन्ना में पदस्थापित छह एएनएम को जिला मुख्यालय में कार्य लिया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस समय पूरा गांव बाढ़ की चपेट में है और लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं की सबसे अधिक जरूरत है, उस समय स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में पर्याप्त स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है।
बीमारी फैलने का बढ़ा खतरा
बाढ़ के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया, डेंगू, डायरिया, टाइफाइड और त्वचा संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी स्थिति में स्वास्थ्यकर्मियों की अनुपस्थिति लोगों की परेशानी को और बढ़ा सकती है।
ग्रामीणों, वार्ड सदस्य और मुखिया की ओर से स्वास्थ्य व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग को लेकर उपायुक्त और सिविल सर्जन को लिखित आवेदन दिए जाने की बात कही गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि आवेदन दिए जाने के बावजूद अब तक पर्याप्त स्वास्थ्यकर्मियों की व्यवस्था नहीं की गई है।
ग्रामीणों ने तत्काल मेडिकल टीम भेजने की मांग की
ग्रामीणों ने बड़ी कोदरजन्ना आयुष्मान आरोग्य मंदिर में तत्काल सीएचओ और एएनएम की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही बाढ़ प्रभावित इलाकों में विशेष मेडिकल टीम भेजने, पर्याप्त दवाइयां उपलब्ध कराने और आवश्यक स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था करने की मांग की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ के कारण जब लोगों के सामने जीवन बचाने की चुनौती है और बीमारी फैलने का खतरा लगातार बढ़ रहा है, तब स्वास्थ्य केंद्र में कर्मियों की कमी दूर करना प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए।
बड़ी कोदरजन्ना में बाढ़ के पानी में डूबने से हुई मौत और बच्ची के लापता होने की घटना ने राहत एवं बचाव व्यवस्था के सामने भी गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। अब ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की त्वरित कार्रवाई पर है।
नई दिल्ली/रांची। खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर देशभर में चर्चा के बीच राजनीतिक रूप से बहस छिड़ी हुई है साथ ही राज्यों के अधिकार, खनिज राजस्व और जमीन के नियंत्रण को लेकर कई सवाल और भ्रांतियां सामने आ रही हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह संशोधन खनिज क्षेत्र में कराधान और नियमन से जुड़े प्रावधानों को अधिक स्पष्ट, पारदर्शी और एकरूप बनाने पर केंद्रित है। दस्तावेज के अनुसार, 13 अगस्त 2026 को संसद ने MMDR संशोधन विधेयक, 2026 को पारित किया।
क्या राज्यों के अधिकार खत्म हो जाएंगे?
सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या इस संशोधन के बाद खनिज संपदा से जुड़े राज्यों के अधिकार कम हो जाएंगे। दस्तावेज के अनुसार ऐसा नहीं है। राज्यों की जमीन पर उनका अधिकार बना रहेगा और खनन से प्राप्त राजस्व में राज्यों का हिस्सा भी जारी रहेगा। इसके अलावा गौण खनिजों के नियमन और नियंत्रण की जिम्मेदारी भी राज्यों के पास ही रहेगी।
विधेयक के सेक्शन 9(घ) के तहत खनिज अधिकारों या खनिज-युक्त भूमि पर कर, उपकर अथवा अन्य शुल्क लगाने का अधिकार राज्यों के पास रहेगा। हालांकि, ऐसे कराधान को केंद्र सरकार द्वारा विनियमित किया जा सकता है।
राज्यों के राजस्व में कटौती नहीं
खनिज क्षेत्र से राज्यों को मिलने वाले राजस्व को लेकर भी महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया गया है। दस्तावेज में कहा गया है कि संशोधन का उद्देश्य राज्यों की आय कम करना नहीं है। इसमें राज्यों का हिस्सा लगभग 90 प्रतिशत के स्तर पर बनाए रखने की बात कही गई है।
इसका अर्थ यह है कि खनिज क्षेत्र में कराधान और नियमन की व्यवस्था को स्पष्ट करने के साथ राज्यों के आर्थिक हितों को सुरक्षित रखने का प्रयास किया गया है।
राज्यों की जमीन पर नहीं होगा कोई असर?
खनिज-युक्त जमीन को लेकर भी कई तरह की आशंकाएं सामने आती रही हैं। दस्तावेज के मुताबिक MMDR संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य जमीन के मालिकाना हक को बदलना नहीं है।
जिस जमीन पर राज्य का अधिकार है, वह अधिकार इस संशोधन के कारण समाप्त नहीं होता। विधेयक का संबंध मुख्य रूप से खनिज-युक्त भूमि पर कराधान से जुड़े विषयों को स्पष्ट और व्यवस्थित करने से है।
यानी जमीन का मालिकाना हक और खनिज से संबंधित कराधान दो अलग-अलग विषय हैं। इन्हें एक-दूसरे से जोड़कर देखना सही नहीं होगा।
रेत, बजरी, बोल्डर और मोरम पर राज्यों का नियंत्रण बरकरार
गौण खनिजों यानी Minor Minerals को लेकर भी विधेयक में राज्यों की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है। दस्तावेज के अनुसार करीब 50 गौण खनिज राज्यों के नियंत्रण में ही रहेंगे।
रेत, बजरी, बोल्डर और मोरम जैसे खनिजों के नियमन एवं प्रशासन में राज्यों की भूमिका पहले की तरह बनी रहेगी। इन खनिजों का सीधा संबंध स्थानीय निर्माण कार्यों, सड़क, मकान और बुनियादी ढांचे से है। इसलिए इनके प्रशासन में राज्यों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है।
रॉयल्टी से लेकर DMF और GST तक राज्यों का हिस्सा सुरक्षित
खनन से राज्यों को कई माध्यमों से राजस्व प्राप्त होता है। इनमें रॉयल्टी, ऑक्शन प्रीमियम, जिला खनिज फाउंडेशन यानी DMF और GST में राज्यों का हिस्सा प्रमुख हैं।
दस्तावेज में स्पष्ट किया गया है कि इन राजस्व स्रोतों में राज्यों के हिस्से को सुरक्षित रखा गया है। रॉयल्टी से मिलने वाला राजस्व जारी रहेगा, ऑक्शन प्रीमियम से राज्यों को मिलने वाला हिस्सा बना रहेगा और DMF के माध्यम से मिलने वाले लाभ भी जारी रहेंगे। इसके अलावा GST में राज्यों का हिस्सा भी सुरक्षित बताया गया है।
आखिर संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी?
अब सवाल यह है कि यदि राज्यों के अधिकार और राजस्व में कटौती नहीं की जा रही है तो फिर MMDR कानून में संशोधन की आवश्यकता क्यों महसूस हुई?
दस्तावेज के अनुसार खनिज क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उद्योग, निर्माण, ऊर्जा, सड़क, रेलवे और बुनियादी ढांचे की अनेक परियोजनाएं खनिज संसाधनों पर निर्भर हैं। समय के साथ इस क्षेत्र में नई परिस्थितियां और चुनौतियां सामने आई हैं। ऐसे में कराधान और नियमन से जुड़े नियमों में स्पष्टता और एकरूपता की आवश्यकता महसूस हुई।
14 तरह की मौजूदा लेवी से व्यवस्था हुई जटिल
खनिज क्षेत्र में अलग-अलग स्तरों पर कई प्रकार के कर और शुल्क पहले से लागू रहे हैं। दस्तावेज के अनुसार राज्यों की ओर से 14 मौजूदा लेवी लगाए जाने की स्थिति में कराधान की व्यवस्था कई बार जटिल हो सकती है।
इसी वजह से स्पष्ट और समान कर व्यवस्था की जरूरत बताई गई है, ताकि सरकार, उद्योग और अन्य हितधारकों के बीच नियमों को लेकर भ्रम की स्थिति कम हो और सभी पक्ष अपने अधिकारों एवं दायित्वों को बेहतर तरीके से समझ सकें।
MMDR संशोधन विधेयक के पीछे एक महत्वपूर्ण तर्क यह है कि खनिज क्षेत्र में विकास, निवेश और बेहतर व्यवस्था के साथ राज्यों के अधिकार एवं राजस्व भी सुरक्षित रहें।
दस्तावेज में कहा गया है कि राज्यों के अधिकार बने रहें, उनका राजस्व बना रहे और साथ ही खनिज क्षेत्र में सुधार हो—इसी संतुलन को इस व्यवस्था की महत्वपूर्ण विशेषता के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
झारखंड जैसे खनिज संपन्न राज्यों के लिए मुद्दा अहम
खनिज संसाधनों से जुड़े राज्यों के लिए यह विषय विशेष महत्व रखता है, क्योंकि खनन से प्राप्त राजस्व राज्य की आर्थिक गतिविधियों और स्थानीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दस्तावेज में स्पष्ट किया गया है कि राज्यों की जमीन नहीं ली जा रही है, गौण खनिज राज्यों के नियंत्रण में रहेंगे और खनन क्षेत्र से मिलने वाले राजस्व में राज्यों का हिस्सा सुरक्षित रहेगा।
लगभग 90 प्रतिशत खनन क्षेत्र के राजस्व हिस्से को राज्यों के पास बनाए रखने तथा रॉयल्टी, ऑक्शन प्रीमियम, DMF और GST जैसे स्रोतों में राज्यों के हिस्से को सुरक्षित रखने की बात कही गई है।
विकास की रफ्तार बढ़ने से राज्यों को भी लाभ
देश में एक्सप्रेस-वे, रेलवे लाइन, उद्योग, आवास और ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार हो रहा है। इन सभी के लिए बड़ी मात्रा में खनिज संसाधनों की आवश्यकता होती है।
यदि खनिज क्षेत्र में नियम सरल और स्पष्ट होते हैं, निवेश का वातावरण बेहतर होता है और परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ती हैं, तो इसका लाभ केवल केंद्र तक सीमित नहीं रहेगा। दस्तावेज के अनुसार इससे रोजगार, स्थानीय कारोबार और राज्यों के लिए आर्थिक अवसर बढ़ सकते हैं।
MMRD का क्या है निष्कर्ष
MMDR संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि राज्यों की जमीन का मालिकाना हक समाप्त नहीं किया जा रहा है, गौण खनिजों पर राज्यों का नियंत्रण बरकरार है और खनन से जुड़े प्रमुख राजस्व स्रोतों में राज्यों के हिस्से को सुरक्षित रखने की बात कही गई है।
ऐसे में इस संशोधन को केवल केंद्र बनाम राज्य के नजरिए से देखने के बजाय खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता, स्पष्ट कर व्यवस्था, निवेश, विकास और राज्यों के आर्थिक हितों के बीच संतुलन के रूप में समझने की जरूरत है।
दस्तावेज में केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच सहयोग और समन्वय बनाए रखते हुए ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश भी दिया गया है।
साहिबगंज। झारखंड सरकार के मंत्री एवं गिरिडीह विधायक स्वर्गीय सुदिव्य कुमार के असामयिक निधन पर साहिबगंज जिला प्रशासन की ओर से समाहरणालय सभागार में शोक सभा आयोजित की गई। इस दौरान जिला प्रशासन के अधिकारियों एवं समाहरणालय कर्मियों ने दिवंगत मंत्री के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी और उनके निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त की।
शोक सभा में उपायुक्त दीपक कुमार दूबे, पुलिस अधीक्षक अमित कुमार सिंह, वन प्रमंडल पदाधिकारी प्रबल गर्ग, उप विकास आयुक्त सतीश चंद्रा, अपर समाहर्ता विजय कुमार, मुख्यालय डीएसपी सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारी एवं समाहरणालय के कर्मी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने स्वर्गीय सुदिव्य कुमार के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। इसके बाद सभी उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
जनसेवा और विकास में योगदान को किया याद
शोक सभा में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि स्वर्गीय सुदिव्य कुमार का असामयिक निधन झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने जनसेवा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई तथा राज्य के विकास से जुड़े विभिन्न कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके निधन से राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में एक बड़ी क्षति हुई है।
अधिकारियों ने कहा कि स्वर्गीय सुदिव्य कुमार के कार्यों और जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को लंबे समय तक याद किया जाएगा। उनके निधन से उनके सहयोगियों, समर्थकों और आम लोगों में गहरा शोक है।
परिवार के प्रति जताई संवेदना
शोक सभा के दौरान जिला प्रशासन के पदाधिकारियों एवं कर्मियों ने दिवंगत मंत्री के शोक-संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। सभी ने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को शांति मिले तथा परिजनों को इस कठिन और दुखद घड़ी में अपार दुःख सहन करने की शक्ति और संबल प्राप्त हो।
गिरिडीह। झारखंड सरकार के दिवंगत मंत्री एवं गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का रविवार को गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। हरसिंहरायडीह स्थित उनके आवास से निकली अंतिम यात्रा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने दिवंगत मंत्री के पार्थिव शरीर को कंधा दिया और श्मशान घाट तक पहुंचकर उन्हें अंतिम विदाई दी। राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रविवार को हरसिंहरायडीह स्थित स्वर्गीय सुदिव्य कुमार सोनू के आवास पहुंचे। यहां उन्होंने पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने शोक-संतप्त परिजनों से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति तथा परिजनों को इस अपार दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।
अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
दिवंगत मंत्री की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े। मंत्रिमंडल के सदस्य, विधायक, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक और आम नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। लोगों ने नम आंखों से अपने लोकप्रिय जनप्रतिनिधि को अंतिम विदाई दी।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी अंतिम यात्रा में पैदल शामिल हुए और पार्थिव शरीर को कंधा देकर श्मशान घाट तक पहुंचे। इस दौरान पूरा माहौल गमगीन रहा। बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर शोक व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने कहा—झारखंड ने खोया कर्मठ जनप्रतिनिधि
मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि देर रात हृदयाघात के कारण सुदिव्य कुमार सोनू का आकस्मिक निधन हो गया। यह सरकार और पूरे झारखंड के लिए अत्यंत दुखद और पीड़ादायक घटना है। उन्होंने कहा कि सुदिव्य कुमार सोनू राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे और गंभीरता एवं परिपक्वता के साथ उन्होंने विकास कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुदिव्य कुमार का इतनी कम उम्र में असमय चले जाना बेहद पीड़ादायक है। उनके निधन से राज्य ने एक कर्मठ जनप्रतिनिधि, समर्पित मंत्री और युवा नेतृत्व को खो दिया है। उन्होंने कहा कि सुदिव्य कुमार के योगदान को झारखंड हमेशा याद रखेगा।
सरकार परिवार के साथ खड़ी—हेमंत सोरेन
मुख्यमंत्री ने कहा कि दुख की इस घड़ी में राज्य सरकार दिवंगत मंत्री के परिवार के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। सरकार की ओर से परिवार को हर संभव सहयोग और संबल दिया जाएगा। उन्होंने ईश्वर से शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में धैर्य और शक्ति प्रदान करने की कामना की।
कल्पना सोरेन ने भी दी श्रद्धांजलि
विधायक कल्पना सोरेन ने भी दिवंगत सुदिव्य कुमार सोनू के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात की और अपनी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
सुदिव्य कुमार सोनू का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया। अंतिम यात्रा में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, राज्य सरकार के वरिष्ठ पदाधिकारी, गिरिडीह जिला प्रशासन के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, मंत्रिमंडल के सदस्य और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
अंतिम यात्रा के दौरान लोगों में अपने प्रिय नेता को खोने का गहरा दुख दिखाई दिया। हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय रहने वाले सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से पूरे गिरिडीह सहित झारखंड के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर है।
दिवंगत मंत्री के निधन को मुख्यमंत्री ने झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि उनका योगदान और जनसेवा के प्रति समर्पण हमेशा याद किया जाएगा।