साहेबगंज। झारखंड के सदियों पुरानी पारंपरिक कला को नया आयाम देते हुए साहेबगंज जिले के ग्रामीण एवं आदिवासी कारीगरों द्वारा निर्मित बाँस की टोकरी और अन्य उत्पाद अब अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बना रहे हैं। पहली बार जिले के विभिन्न प्रखण्डों में तैयार कुल 2752 बाँस की टोकरी (छोटी एवं बड़ी) की खेप वार्सीलोना, स्पेन के लिए रवाना की गई है। यह उपलब्धि जिले के कारीगरों की कला को वैश्विक मंच प्रदान करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
जिले के उपायुक्त हेमंत सती के दिशा-निर्देशन में साहेबगंज के सभी प्रखण्डों में फैले पारंपरिक बाँस कारीगरों की पहचान, कौशल-विकास एवं बाजार उपलब्धता पर विशेष कार्य किया जा रहा है। कारीगरों को मूल्य संवर्द्धन हेतु विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिसके बाद बाँस की टोकरी, पेपर बिन, लॉन्ड्री बिन एवं अन्य उपयोगी उत्पाद बड़े पैमाने पर तैयार किए जा रहे हैं।
साहेबगंज के कारीगरों को वैश्विक बाजार से जोड़ने में रीडकॉफ्ट एंड अपहोल्डअर्थ प्राइवेट लिमिटेड, रांची महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, जो जिले से तैयार सामानों का संग्रह कर उन्हें विदेश भेज रही है। इसके परिणामस्वरूप कारीगरों को न केवल बेहतर आय का अवसर मिलेगा, बल्कि उनका पारंपरिक हुनर भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह बनाएगा।
बाँस उत्पादों के साथ-साथ साहेबगंज जिला जलकुंभी से बनी वस्तुओं के निर्माण की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। घरेलू उपयोग की आकर्षक वस्तुओं का निर्माण कर इन्हें स्थानीय एवं बाहरी बाजारों में सफलतापूर्वक विक्री किया जा रहा है।
यह पहल न केवल साहेबगंज के कारीगरों के लिए रोजगार का नया द्वार खोलेगी, बल्कि जिले की पारंपरिक कला को वैश्विक पहचान दिलाने में भी मील का पत्थर साबित होगी। आने वाले समय में साहेबगंज के बाँस और जलकुंभी उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में अपनी अलग पहचान बनाएंगे और जिले का नाम रोशन करेंगे।