रांची। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को मज़बूत करने और इसके अधिकार-आधारित स्वरूप की रक्षा के उद्देश्य से मंगलवार को रांची में कांग्रेस और विभिन्न सामाजिक संगठनों की एक अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में सिविल सोसायटी संगठनों ने मनरेगा के सामाजिक और आर्थिक योगदान को रेखांकित करते हुए इसे बचाने के लिए कांग्रेस द्वारा चलाए जा रहे अभियान को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की।
बैठक में झारखंड की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू, सह-प्रभारी भूपेंद्र मरावी, रचनात्मक कांग्रेस के नेशनल चेयरमैन एवं मनरेगा कोऑर्डिनेशन कमेटी के सदस्य संदीप दीक्षित, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, कांग्रेस विधायक दल के उप नेता राजेश कच्छप, प्रख्यात अर्थशास्त्री प्रो. ज्यां द्रेज, झारखंड नरेगा मंच से जेम्स हेरेंज, मनरेगा वॉच से बलराम, सहित अनेक सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और कांग्रेस पदाधिकारी मौजूद रहे।
बैठक के दौरान झारखंड में मनरेगा की उपलब्धियों, परिसंपत्ति निर्माण, सतत आजीविका और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास में इसकी भूमिका पर विस्तार से चर्चा हुई। सामाजिक संगठनों ने अपने ज़मीनी अनुभव साझा करते हुए कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोज़गार, समय पर मजदूरी और श्रमिकों को सम्मान प्रदान किया है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिली है।
सामाजिक संगठनों ने मांग की कि ग्राम सभा की अनुमति के बिना जॉब कार्ड डिलीट न किए जाएं, काम मांगने पर काम की गारंटी सुनिश्चित हो, मजदूरी का समय पर भुगतान किया जाए, मस्टर रोल पंचायत स्तर पर जारी हों और ‘काम मांगो अभियान’ के तहत सोशल ऑडिट को और सशक्त बनाया जाए।
बैठक में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई कि प्रस्तावित VB GRAM G जैसे प्रावधान मनरेगा के अधिकार-आधारित स्वरूप को कमजोर कर सकते हैं। इस मुद्दे पर कांग्रेस और सिविल सोसायटी संगठनों के बीच मनरेगा को यथावत बनाए रखने, नए कानून को रद्द कराने और संगठित एवं रणनीतिक समन्वय के साथ आगे बढ़ने पर सहमति बनी।
मनरेगा वॉच से जुड़े जेम्स हेरेंज ने ‘काम मांगो अभियान’ को और अधिक सक्रिय रूप से चलाने पर ज़ोर देते हुए कहा कि इससे गांवों में अधिक रोजगार सृजित होगा और इसका सीधा लाभ ग्रामीणों को मिलेगा। सामाजिक कार्यकर्ता दयामणि बारला ने कहा कि केंद्र सरकार को VB GRAM G वापस लेना होगा और मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल करना होगा।
रचनात्मक कांग्रेस के नेशनल चेयरमैन संदीप दीक्षित ने कहा कि मनरेगा ने देश में मजदूरी का न्यूनतम मानक स्थापित किया है और करोड़ों श्रमिकों को सम्मानजनक रोजगार दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस अधिकार-आधारित योजना को कमजोर करना श्रमिकों के संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला होगा।
मजदूर किसान शक्ति संगठन के को-फाउंडर एवं सामाजिक कार्यकर्ता निखिल डे ने कहा कि मनरेगा के कारण गरीब और हाशिए पर खड़े ग्रामीण लोग दासता जैसी परिस्थितियों और कर्ज़-बंधन से बाहर निकल सके हैं। इससे शोषणकारी जमींदार और ठेकेदार आधारित व्यवस्था को चुनौती देने की उनकी क्षमता बढ़ी है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अब ज़रूरत है ज़मीन पर उतरकर मज़दूरों के साथ खड़े होने, काम की मांग दर्ज कराने, समय पर भुगतान सुनिश्चित करने और सभी हितधारकों की स्पष्ट जिम्मेदारी तय करने की।
झारखंड कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने घोषणा की कि राज्य के प्रत्येक विधायक अपने क्षेत्र में ‘काम मांगो अभियान’ के तहत मॉडल अभियान चलाएंगे। उन्होंने बताया कि राज्य स्तर पर मनरेगा टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा और हर जिले में मनरेगा कोऑर्डिनेटर नियुक्त किए जाएंगे। साथ ही प्रशिक्षण कार्यक्रम, ब्लॉक संवाद, सोशल ऑडिट प्रणाली को सक्रिय करने और स्वयं सहायता समूहों को अभियान से जोड़ने का निर्णय लिया गया।
ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने जानकारी दी कि 2 से 5 फरवरी 2026 के बीच राज्य की 4,080 पंचायतों में आयोजित ‘काम मांगो अभियान’ में 1,74,245 लोगों ने भाग लिया, जिनमें 1,03,158 लोगों ने काम की मांग दर्ज कराई। इस दौरान 17,914 नए जॉब कार्ड बनाए गए, 40,602 श्रमिकों का ई-केवाईसी, 39,593 नई योजनाओं के आवेदन प्राप्त हुए और 14,899 श्रमिकों को सम्मानित किया गया। उन्होंने बताया कि मनरेगा के तहत अब तक 1017.65 लाख मानव-दिवस सृजित हुए हैं और 52 प्रतिशत जॉब कार्ड महिलाओं के नाम हैं।
बैठक के अंत में सामाजिक संगठनों ने स्पष्ट किया कि वे मनरेगा को बचाने और इसे अधिकार-आधारित तथा जनभागीदारी वाली योजना के रूप में बनाए रखने के लिए कांग्रेस के साथ मिलकर निरंतर संघर्ष और समन्वय करते रहेंगे।