रांची। विश्व आदिवासी दिवस 9 अगस्त 2026 के अवसर पर सेक्टर-3, एन टाइप, धुर्वा में जनजाति सुरक्षा मंच की ओर से अपने पूर्वजों एवं विश्वभर के मूल निवासी जनजातीय समुदायों के साथ हुए अत्याचार और नरसंहार में मारे गए लोगों की स्मृति में दीप जलाकर श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर हक-अधिकार, अस्तित्व और अस्मिता की रक्षा के लिए संकल्प भी लिया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जनजाति सुरक्षा मंच के क्षेत्रीय संयोजक संदीप उरांव ने कहा कि 9 अगस्त के पीछे के इतिहास को जानने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि उनकी दृष्टि में 9 अगस्त को उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि शोक सभा के रूप में मनाया जाना चाहिए। उन्होंने अमेरिका के मूल निवासी जनजातीय समुदायों के साथ हुए ऐतिहासिक अत्याचारों और विस्थापन का उल्लेख करते हुए कहा कि इस इतिहास को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान ने पहले ही अनुसूचित जनजाति एवं आदिवासी समुदायों के अधिकारों, संरक्षण और सुरक्षा के लिए प्रावधान किए हैं। इसलिए अपने संवैधानिक अधिकारों के प्रति समाज को जागरूक रहना चाहिए।
मेघा उरांव ने कहा कि 9 अगस्त को लेकर यह सवाल उठता है कि इसे आदिवासी दिवस कहा जाए या मूल निवासी दिवस। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को इस विषय पर भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को गौरव दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए। भगवान बिरसा मुंडा ने जल, जंगल, जमीन, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए अपना जीवन बलिदान किया था।
जनजाति सुरक्षा मंच के मीडिया प्रभारी सोमा उरांव ने कहा कि समाज को विदेशी प्रभाव और कथित षड्यंत्रों से सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अमेरिका सहित अन्य देशों में अत्याचार और नरसंहार के शिकार हुए पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए मरांग बुरू एवं जाहेर ऐरा से प्रार्थना की गई।
उन्होंने कहा कि इस अवसर पर अपनी धर्म-संस्कृति, रीति-रिवाज, पूजा-पाठ, जल-जंगल-जमीन और अधिकारों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कृतसंकल्प होने का संकल्प लिया गया। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में डीलिस्टिंग की मांग को लेकर संघर्ष जारी रखा जाएगा।
कार्यक्रम में बिरसा भगत, कुमुदिनी लकड़ा, जय मंत्री उरांव, लुथुरु उरांव, माईसा उरांव, बबलू उरांव, लक्ष्मण उरांव, डॉ. बुटन महली सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे