रांची। श्रमिकों को गुलाम बनाने वाले चार लेबर कोड के खिलाफ 10 केंद्रीय श्रमिक संघों के आह्वान पर 26 नवंबर का देशव्यापी विरोध दिवस झारखंड में असरदार रहा. बुधवार सुबह से ही कोयला खनन के क्षेत्र समेत सभी कार्य स्थलों पर मजदूरों - कर्मचारियों ने काले बिल्ले लगाकर पीट मिटिंग, गेट मिटिंग कर जिला मुख्यालयों पर धरना - प्रदर्शन के माध्यम से चार श्रम संहिता को रद्द करने की मांग करते हुए राष्ट्रपति को संबोधित संयुक्त ज्ञापन जिले के उपायुक्तों को सौंपा. HEC में भी प्रदर्शन किया गया।
राजधानी रांची में जाकिर हुसैन पार्क से मजदूरों - कर्मचारियों का एक जुलूस निकाला गया जो अल्बर्ट एक्का चौक पर जाकर सभा में तब्दील हो गया. इस जुलूस में सीसीएल मुख्यालय और सीएमपीडीआई के कोयला मजदूर, डाक, बीमा, बैंक, राज्य और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के अलावा सेल्स रिप्रेजेंटेटिव, निर्माण, परिवहन और स्कीम वर्कर्स के युनियनों के प्रतिनिधि भी शामिल थे.
अल्बर्ट एक्का चौक पर चारों लेबर कोड की प्रति जलाई गई एवं सभा हुई जिसकी अध्यक्षता एटक के अशोक यादव ने की. इस सभा को एक्टू के शुभेंदु सेन, सीटू के प्रतीक मिश्र के अलावा बेफी के एम एल सिंह, एआइबीइए के शशिकांत भारती, ठेका कामगारों और परियोजना कर्मियों ने संबोधित किया. वक्ताओं ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी कि आज की यह विरोध कार्रवाई केवल शुरूआत है. गुलामी के इस दस्तावेज को मजदूर नहीं मांनेगें और किसान आंदोलन की तरह इसे वापस लिए जाने तक संघर्ष जारी रहेगा.
रैली में सीटू के एस के राय, रोहित कुमार, सुमीत कुमार, रूपेश बर्नवाल, शंभू सेन, कपिल महतो, बिगल उरांव; एक्टू के जगन्नाथ उरांव, भीम साहू, अनीता देवी, मंजू देवी, शेख शहदुल, रमेश रवि, मोहम्मद शमीम, गोपाल शरण सिंह, इनामुल हक; इंटक के संजीव सिंह; बेफी के कनक चौधरी; किसान सभा के अजय सिंह, खेत मजदूर यूनियन के बीरेंद्र कुमार, आदि शामिल रहे।