ब्यूरो। बिहार में अपराध और अपराधियों के बढ़ते मनोबल को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। राज्य सरकार लगातार कानून व्यवस्था मजबूत होने का दावा करती रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपने भाषणों में अपराध नियंत्रण और सुशासन की बात करते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इन दावों पर सवाल खड़े कर देती है।
ताजा मामला पटना जिले के मोकामा क्षेत्र से सामने आया है, जहां जलालपुर नौरंगा गांव निवासी बाहुबली छवि वाले सोनू-मोनू गैंग से जुड़े ठिकाने पर जांच के लिए घर पहुंची पुलिस टीम खुद सवालों के घेरे में आ गई। आरोप है कि पुलिस जांच करने पहुंची थी, लेकिन वहां मौजूद लोगों ने पहले पुलिसकर्मियों की ही “जांच” शुरू कर दी। पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद बिहार पुलिस की जमकर फजीहत हुई।
वीडियो में जिस तरह पुलिसकर्मी दबाव में नजर आए, उसने यह सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर अपराधियों के भीतर कानून का डर क्यों खत्म होता जा रहा है? क्या स्थानीय स्तर पर राजनीतिक संरक्षण, बाहुबल और कमजोर पुलिसिंग अपराधियों के हौसले बढ़ा रही है?
मामले के तूल पकड़ने के बाद पटना एसएसपी एस कार्तिकेयन ने बाद 1 अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर दोनों संबंधित थाना अध्यक्ष को निलंबित कर दिया जिसमें हाथीदह थाना प्रभारी रंजन कुमार और पंचमाहला थाना प्रभारी कुंदन कुमार है। कार्रवाई तो हुई, लेकिन इससे बड़ा सवाल अब भी कायम है कि क्या केवल निलंबन से अपराधी डर जायेंगे ?
मोकामा का यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि यह सिर्फ एक वायरल वीडियो नहीं, बल्कि पुलिस के इकबाल पर सीधा सवाल है। जब अपराधी या उनके समर्थक पुलिस टीम को ही घेरने लगें और पुलिस असहाय नजर आए, तो आम लोगों के मन में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
राजनीतिक गलियारों में भी इस घटना को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष सरकार पर हमला बोलते हुए कह रहा है कि बिहार में अपराधियों का मनोबल चरम पर है, जबकि सरकार इसे अलग-थलग घटना बताकर कार्रवाई की बात कर रही है।