रांची : सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) ने मानव संसाधन प्रबंधन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए मानव संसाधन (HR) अधिकारियों के लिए "मानव संसाधन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भूमिका" विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इस प्रशिक्षण में सीसीएल के विभिन्न क्षेत्रों और मुख्यालय से लगभग 50 मानव संसाधन अधिकारियों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन सीसीएल के निदेशक (तकनीकी/संचालन) सी.एस. तिवारी ने किया। इस अवसर पर कार्यक्रम के संकाय देशबंधु मिश्रा तथा महाप्रबंधक (एचआरडी) एम.एफ. हक भी उपस्थित रहे।
महाप्रबंधक (एचआरडी) एम.एफ. हक ने अपने संबोधन में कहा कि आज के बदलते कार्य परिवेश में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली उपकरण बन चुकी है। उन्होंने कहा कि मानव संसाधन अधिकारियों के लिए AI की कार्यप्रणाली को समझना और उसके प्रभावी उपयोग के लिए स्वयं को तैयार करना समय की आवश्यकता है।
वहीं, निदेशक (तकनीकी/संचालन) सी.एस. तिवारी ने कहा कि AI तकनीक मानव संसाधन प्रबंधन को अधिक दक्ष, तेज और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि AI के उपयोग के साथ जुड़े नैतिक पहलुओं, संभावित चुनौतियों और ग्रे-एरिया पर गंभीरता से विचार करना आवश्यक है, ताकि इसका उपयोग जिम्मेदारी और संतुलन के साथ किया जा सके।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने AI के विभिन्न आयामों, मानव संसाधन प्रबंधन में इसके व्यावहारिक उपयोग और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में शामिल अधिकारियों ने भी सक्रिय भागीदारी करते हुए अपने अनुभव, सुझाव और जिज्ञासाएं साझा कीं। सीसीएल का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम डिजिटल युग में मानव संसाधन प्रबंधन को तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
रांची : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में गुरुवार को मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में झारखंड राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद की बैठक संपन्न हुई। बैठक में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 79 कैदियों की रिहाई से जुड़े मामलों पर विस्तार से चर्चा की गई। गहन समीक्षा के बाद 26 कैदियों की रिहाई पर सहमति बनी।
बैठक में राज्य सजा पुनरीक्षण पर्षद द्वारा अनुशंसित 37 नए मामलों के साथ-साथ पिछली बैठकों में अस्वीकृत 42 मामलों पर भी विचार किया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ पात्रता, जेल में आचरण, सजा की अवधि, कानूनी प्रावधान, न्यायालय की टिप्पणियां, संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षक, जेल अधीक्षक एवं प्रोबेशन पदाधिकारियों की रिपोर्ट सहित सभी पहलुओं की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी प्रमंडलों में ओपन जेल स्थापित करने के लिए भूमि चिन्हित कर प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जेल से रिहा होने वाले व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है और उनके पुनर्वास तथा सम्मानजनक जीवन-यापन के लिए हरसंभव सहयोग सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार न्याय व्यवस्था के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं और सुधारात्मक दृष्टिकोण को भी समान महत्व दे रही है। उन्होंने मानसिक रूप से बीमार बंदियों का डाटाबेस तैयार कर उन्हें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिलाने का भी निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून और नियमों के अनुरूप रिहा हुए व्यक्तियों को समाज में नई शुरुआत का अवसर मिलना चाहिए, जिससे उनके पुनर्वास के साथ-साथ सामाजिक समरसता भी मजबूत होगी।
बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, डीजीपी तदाशा मिश्रा, प्रधान सचिव-सह-विधि परामर्शी नीरज कुमार श्रीवास्तव, महानिरीक्षक कारा एवं सुधारात्मक सेवाएं सुदर्शन प्रसाद मंडल, न्यायिक आयुक्त अनिल कुमार मिश्रा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
रांची: झारखंड की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने आज रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन में राज्य स्तरीय झारखंड इनक्यूबेटर प्रोग्राम का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने झारखंड इनक्यूबेटर प्रोग्राम की आधिकारिक वेबसाइट और ठाकुर गंगटी मँडरो सखी सिल्क हैंडलूम वीवर्स की वेबसाइट का भी लोकार्पण किया।
इस अवसर पर मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि अब तक झारखंड की पहचान मुख्य रूप से खनिज संपदा के लिए होती रही है, लेकिन राज्य की महिलाओं ने अपनी मेहनत, कौशल और आत्मविश्वास के बल पर यह साबित किया है कि वे सफल उद्यमी बनने की क्षमता रखती हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य इन महिलाओं की प्रतिभा को पहचान दिलाना, उन्हें आत्मनिर्भर बनाना और उनके उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना है।उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केवल 150 उद्यमों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका उद्देश्य पूरे राज्य में महिला उद्यमिता का मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की योजना आने वाले समय में और अधिक नॉलेज पार्टनर्स को जोड़कर इस पहल का विस्तार करने की है, ताकि JSLPS से जुड़े 1.54 लाख से अधिक उद्यमों को चरणबद्ध तरीके से बेहतर बाजार, तकनीक, प्रशिक्षण और वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराया जा सके।
मंत्री ने कहा कि "हमारा राज्य अभी केवल 25 वर्ष पुराना है। लंबे समय तक हमने बुनियादी आवश्यकताओं और विकास की चुनौतियों का सामना किया है। अब समय आ गया है कि झारखंड केवल खनिजों के लिए नहीं, बल्कि अपने नवाचार, महिला उद्यमिता और सफल ग्रामीण एंटरप्राइजेज के लिए भी देशभर में पहचाना जाए।" उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य में 10,000 से अधिक ऐसे उद्यम हैं जो उपलब्ध संसाधनों के साथ उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं। इन्हीं महिलाओं के प्रयासों से पलाश और आजीविका जैसे ब्रांड राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। सरकार इन सफल मॉडलों को और सशक्त बनाकर राज्य में लाखों महिलाओं को उद्यमिता से जोड़ना चाहती है।
दीपिका पांडेय सिंह ने विश्वास व्यक्त किया कि IIM कोलकाता इनोवेशन पार्क के तकनीकी सहयोग, JSLPS के मजबूत नेटवर्क तथा राज्य सरकार की प्रतिबद्धता से झारखंड महिला-नेतृत्व वाली ग्रामीण उद्यमिता और नवाचार के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी अलग पहचान बनाएगा।
झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) और IIM कलकत्ता इनोवेशन पार्क (IIMCIP) के सहयोग से संचालित यह तीन वर्षीय राज्यव्यापी कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा संचालित सूक्ष्म एवं नैनो उद्यमों को पहचान, प्रशिक्षण, मेंटोरिंग, वित्तीय सहायता, बाजार से जुड़ाव, ब्रांडिंग तथा औपचारिक स्वरूप प्रदान कर उन्हें प्रतिस्पर्धी एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। कार्यक्रम के प्रथम चरण में 150 महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों का चयन कर उन्हें तीन वर्षों तक व्यापक इनक्यूबेशन सहायता प्रदान की जाएगी। इसमें व्यवसाय का मूल्यांकन, मेंटोरिंग, क्षमता निर्माण, प्रमाणन, वित्तीय एवं बाजार से जुड़ाव, डिजिटल प्लेटफॉर्म, ई-कॉमर्स, ब्रांडिंग और व्यवसाय विस्तार जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। कार्यक्रम के तहत रांची में एक केंद्रीय हब तथा संभागीय स्तर पर पाँच क्षेत्रीय स्पोक स्थापित किए जाएंगे, जिससे पूरे राज्य में उद्यमियों तक अंतिम छोर (Last Mile) तक गुणवत्तापूर्ण सहायता पहुंचाई जा सके। इस मौके पर विभागीय सचिव मनोज कुमार, जेएसएलपीएस सीईओ अनन्य मित्तल, झारक्राफ्ट एमडी गरिमा सिंह, अटल इनोवेशन मिशन के डायरेक्टर हिमांशु जोशी सहित विभागीय अधिकारी और महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं मौजूद रही.
सखी सिल्क को लेकर मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा*
हमने सखी सिल्क का वेब पोर्टल लॉन्च किया है। इसके माध्यम से ठाकुरगंगटी के भगैया सिल्क बुनकरों और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हमारी दीदियों को एक मजबूत प्लेटफॉर्म मिलेगा। एफपीओ के माध्यम से उनके उत्पाद लिए जाएंगे, उनकी ब्रांडिंग सखी सिल्क के तहत की जाएगी और उन्हें पलाश एवं अदिवा स्टोर्स के माध्यम से भी बाजार उपलब्ध कराया जाएगा। यह हमारे लिए लंबे समय से एक सपना था कि झारखंड के सिल्क को उसकी वास्तविक पहचान मिले। अब तक भगैया सिल्क को लोग भागलपुर सिल्क के नाम से जानते थे, जबकि इसके असली बुनकर गोड्डा और दुमका के विभिन्न प्रखंडों में हैं। जीआई टैग मिलने के बाद अब इन बुनकरों और हमारी महिला दीदियों को उनकी मेहनत का उचित सम्मान और पहचान मिलेगी।मुझे पूरा विश्वास है कि यह पहल न केवल भगैया सिल्क को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाएगी, बल्कि हमारे बुनकर परिवारों और महिला उद्यमियों की आय बढ़ाने के साथ-साथ झारखंड की पारंपरिक हस्तशिल्प विरासत को भी नई पहचान दिलाएगी।
रांची। झारखंड की राजधानी रांची ने भारतीय फुटबॉल के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। पहली बार शहर में आयोजित 135वें इंडियन ऑयल डूरंड कप की शानदार ओपनिंग सेरेमनी ने न केवल खेल प्रेमियों का दिल जीता, बल्कि पूरे देश को झारखंड की समृद्ध संस्कृति और आयोजन क्षमता का भी परिचय कराया।
बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में आयोजित भव्य उद्घाटन समारोह में भारतीय सेना, झारखंड सरकार और खेल जगत की कई प्रमुख हस्तियों की मौजूदगी रही। सेना के बैंड की प्रस्तुति, झारखंड की पारंपरिक सांस्कृतिक झलकियों और रंगारंग कार्यक्रमों ने उद्घाटन समारोह को यादगार बना दिया। आदिवासी लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को झारखंड की सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया।
समारोह के दौरान डूरंड कप, प्रेसिडेंट्स कप और शिमला ट्रॉफी का भव्य प्रदर्शन किया गया। इसके साथ ही ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति के माध्यम से 138 वर्षों से भी अधिक पुराने डूरंड कप के गौरवशाली इतिहास और भारतीय फुटबॉल में उसके योगदान को दर्शाया गया। मैच से पहले दोनों टीमों का औपचारिक परिचय, किक-ऑफ और दर्शकों की जोरदार तालियों के बीच रांची ने फुटबॉल महाकुंभ का शानदार आगाज़ किया।
एशिया का सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट
डूरंड कप एशिया का सबसे पुराना और दुनिया का तीसरा सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट है। इसकी शुरुआत वर्ष 1888 में शिमला से हुई थी। भारतीय सेना की ईस्टर्न कमांड के नेतृत्व में आयोजित यह प्रतिष्ठित प्रतियोगिता आज भी भारतीय फुटबॉल की सबसे सम्मानजनक प्रतियोगिताओं में गिनी जाती है।
इस वर्ष डूरंड कप के मुकाबले कोलकाता, रांची, कोकराझार, इम्फाल और सिलिगुड़ी में खेले जा रहे हैं। टूर्नामेंट में 24 टीमें हिस्सा ले रही हैं और मैचों का सीधा प्रसारण Sony Sports Network तथा Sony LIV पर किया जा रहा है।
झारखंड के लिए बड़ी उपलब्धि
रांची को डूरंड कप की मेजबानी मिलना झारखंड के खेल इतिहास की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे राज्य में फुटबॉल को नई पहचान मिलेगी, युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलेगी और राष्ट्रीय स्तर पर झारखंड की छवि और मजबूत होगी। आयोजन से पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
हावड़ा/साहिबगंज। पूर्व रेलवे ने महाप्रबंधक मिलिंद देऊस्कर के नेतृत्व में यात्रियों की सुरक्षा, रेल परिचालन की गुणवत्ता और रेलवे परिसंपत्तियों की मजबूती सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मालदा टाउन से साहिबगंज रेलखंड तक व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया। इस दौरान पटरियों, पुलों, स्टेशनों तथा अन्य महत्वपूर्ण रेल परिसंपत्तियों का गहन निरीक्षण किया गया। इस अभियान का उद्देश्य सुरक्षित, विश्वसनीय और समयबद्ध रेल सेवा सुनिश्चित करना तथा भविष्य में रेल संचालन को और अधिक प्रभावी बनाना है।
निरीक्षण के दौरान महाप्रबंधक ने विशेष विंडो ट्रेलिंग निरीक्षण किया, जिसके तहत चलती ट्रेन के पिछले हिस्से से रेल पटरियों और परिचालन की वास्तविक स्थिति का बारीकी से अवलोकन किया गया। इस प्रक्रिया के माध्यम से पटरियों की गुणवत्ता, रखरखाव और सुरक्षा मानकों का मूल्यांकन किया गया। इसके साथ ही उन्होंने विभिन्न रेल पुलों की संरचनात्मक मजबूती का निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। स्टेशनों पर उपलब्ध यात्री सुविधाओं, साफ-सफाई, पेयजल, प्रतीक्षालय और सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की गई ताकि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
साहिबगंज रेलवे हाई स्कूल को मिला नया स्वरूप
निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान महाप्रबंधक मिलिंद देऊस्कर ने मालदा मंडल के मंडल रेल प्रबंधक मनीष कुमार गुप्ता के साथ साहिबगंज स्थित पूर्व रेलवे हाई स्कूल के नवीनीकृत भवन का उद्घाटन किया। उन्होंने विद्यालय परिसर का भ्रमण कर आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं का जायजा लिया तथा विद्यार्थियों और शिक्षकों से संवाद किया।
महाप्रबंधक ने छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन और निरंतर मेहनत के महत्व पर जोर देते हुए उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में उन्होंने भाग लिया तथा शैक्षणिक और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 15 मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया। विद्यालय परिसर में आयोजित वृक्षारोपण अभियान में भी उन्होंने हिस्सा लिया और पर्यावरण संरक्षण तथा हरित भविष्य का संदेश दिया।
रेलवे प्रशिक्षण व्यवस्था का हुआ आधुनिकीकरण
पूर्व रेलवे ने अपने कर्मचारियों को आधुनिक तकनीक और उच्च सुरक्षा मानकों के अनुरूप प्रशिक्षित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मालदा स्थित मल्टी-डिसिप्लिनरी डिविजनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (एमडीडीटीआई) में महाप्रबंधक ने नवीनीकृत शैक्षणिक भवन "विक्रमशिला" तथा आधुनिक छात्रावास "महानंदा" का उद्घाटन किया।
उन्होंने प्रशिक्षण संस्थान की कक्षाओं, प्रयोगशालाओं और छात्रावास का निरीक्षण किया तथा प्रशिक्षुओं और प्रशिक्षकों से संवाद करते हुए आधुनिक तकनीक के बेहतर उपयोग, निरंतर सीखने की संस्कृति और रेलवे संचालन में 'शून्य-समझौता सुरक्षा मानकों' का पालन करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित और दक्ष कर्मचारी ही सुरक्षित रेल संचालन की सबसे मजबूत कड़ी हैं।
जनसंपर्क और संवाद पर भी विशेष जोर
साहिबगंज प्रवास के दौरान महाप्रबंधक ने मीडिया प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों तथा अन्य गणमान्य लोगों से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने पूर्व रेलवे द्वारा चलाए जा रहे विकास कार्यों, यात्री सुविधाओं के विस्तार और जनसहभागिता को लेकर चर्चा की तथा रेलवे की पारदर्शी और जन-केंद्रित कार्यशैली को दोहराया।
पूर्व रेलवे PRO ने कहा
पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझि ने कहा कि महाप्रबंधक द्वारा किए जा रहे निरीक्षण अभियानों का उद्देश्य केवल रेल पटरियों और पुलों की जांच करना नहीं, बल्कि यात्रियों को अधिक सुरक्षित, तेज और आरामदायक यात्रा उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि रेलवे लगातार अपने प्रशिक्षण संस्थानों का आधुनिकीकरण कर कर्मचारियों को नई तकनीकों के अनुरूप तैयार कर रहा है। साथ ही शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से पूर्व रेलवे समाज और राष्ट्र की सेवा के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी पूर्व रेलवे यात्री सुरक्षा, आधुनिक अवसंरचना, तकनीकी नवाचार और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अपनी सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में कार्य करता रहेगा।
रांची: झारखंड की राजधानी रांची में हॉकी झारखंड के अध्यक्ष भोला सिंह और पूर्व हॉकी खिलाड़ी असुंता लकड़ा के बीच हुए विवाद अब बढ़ गया है मामले में पूर्व राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ियों, खेल प्रेमियों, आदिवासी-मूलवासी संगठनों और विभिन्न खेल संगठनों के प्रतिनिधियों ने शनिवार को हॉकी प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और खिलाड़ियों के सम्मान की मांग को लेकर रांची में शांतिपूर्ण विरोध मार्च निकाला।
जयपाल सिंह स्टेडियम से शुरू हुआ यह मार्च अल्बर्ट एक्का चौक तक पहुंचा। मार्च में बड़ी संख्या में वर्तमान और पूर्व खिलाड़ी, प्रशिक्षक, खेल प्रेमी एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने हॉकी से जुड़े हालिया विवादों और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर चिंता जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पूर्व भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान असुंता लकड़ा द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कराई जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और खिलाड़ियों का खेल व्यवस्था पर भरोसा कायम रहे। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों, विशेषकर महिला खिलाड़ियों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और उन्हें सुरक्षित एवं सम्मानजनक माहौल उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
मार्च में शामिल पूर्व खिलाड़ियों ने हॉकी झारखंड में सदस्यता, चुनाव प्रक्रिया और प्रशासनिक कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की। उनका कहना था कि खेल संगठनों का संचालन खिलाड़ियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए होना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ व्यक्तिगत अभियान चलाना नहीं, बल्कि हॉकी में सुशासन, निष्पक्षता और खिलाड़ियों के सम्मान की रक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से सभी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने की मांग की।
सामाजिक कार्यकर्ता निरंजना हेरेंज टोप्पो ने कहा कि भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान असुंता लकड़ा का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने के बावजूद एक आदिवासी बेटी को इस तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
वहीं अजय टोप्पो ने हॉकी प्रशासन में पारदर्शिता लाने की मांग करते हुए भोला सिंह को तत्काल पद से हटाने की मांग की।
विरोध मार्च में सामाजिक संगठनों के बाहा लिंडा, राहुल तिर्की, आकाश तिर्की, प्रेम शाही मुंडा, पीसी मुर्मू, राकेश बड़ाईक, बृज किशोर बेदिया, संगीता कच्छप, क्रिस्टो कुजूर सहित राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के हॉकी खिलाड़ी मनोहर टोपनो, कमल सोरों, जोसफ लुगुन, मनोहर कुल्लू, जयंत केरकेट्टा, वीरेंद्र लकड़ा, पुष्पा लकड़ा, कांति लकड़ा, विनय मुंडा, तिलोसफर एक्का, सुमराई टेटे, शशि टोपनो समेत बड़ी संख्या में खिलाड़ी और खेल प्रेमी शामिल हुए।
देवघर/रांची । विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम में आयोजित होने वाले राजकीय श्रावणी मेला-2026 को लेकर झारखंड सरकार ने तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। आगामी 30 जुलाई से 28 अगस्त तक चलने वाले इस ऐतिहासिक मेले में करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए सरकार इस बार सुरक्षा, सुविधा और तकनीक के बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दे रही है। इसी क्रम में नगर विकास एवं आवास, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, पर्यटन, कला एवं संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के मंत्री सुदिव्य कुमार की अध्यक्षता में देवघर परिसदन में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें देवघर और दुमका जिला प्रशासन सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की।
बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री सुदिव्य कुमार ने स्पष्ट निर्देश दिया कि 28 जुलाई तक मेला क्षेत्र की सभी तैयारियां हर हाल में पूरी कर ली जाएं, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित तरीके से बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक कराने में किसी प्रकार की परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि बाबा की नगरी से श्रद्धालु अपने साथ मधुर अनुभव लेकर लौटें, यही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
VIP और VVIP दर्शन पर पूरी तरह रोक
बैठक का सबसे बड़ा निर्णय यह रहा कि श्रावणी मेला-2026 के दौरान आउट ऑफ टर्न (VIP और VVIP) दर्शन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। मंत्री ने कहा कि बाबा के दरबार में सभी श्रद्धालु समान हैं और किसी भी विशेष व्यवस्था के कारण आम श्रद्धालुओं को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। इस फैसले का उद्देश्य लंबी कतारों में लगे श्रद्धालुओं को राहत देना और दर्शन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं सुचारु बनाना है।
श्रद्धालुओं के लिए विशाल टेंट सिटी और बेहतर आवास व्यवस्था
इस बार मेला क्षेत्र में तीन स्थानों पर आधुनिक सुविधाओं से युक्त विशाल टेंट सिटी बनाई जा रही है। इन टेंट सिटी में पहले की तुलना में अधिक श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था होगी। स्वच्छ पेयजल, शौचालय, स्नानगृह, विश्राम स्थल, बिजली और सुरक्षा जैसी सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
गर्मी से राहत के लिए मिस्ट कूलिंग और इंद्र वर्षा सिस्टम
श्रावणी मेले के दौरान उमस और गर्मी को देखते हुए प्रशासन ने मिस्ट कूलिंग सिस्टम और इंद्र वर्षा (Artificial Rain System) की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है। इससे लंबी कतारों में खड़े श्रद्धालुओं को गर्मी से राहत मिलेगी। इसके अलावा स्वास्थ्य शिविरों और मेडिकल टीमों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी ताकि आपात स्थिति में तत्काल इलाज उपलब्ध कराया जा सके।
AI तकनीक से होगी पूरे मेले की निगरानी
श्रावणी मेला-2026 तकनीक के लिहाज से भी अत्याधुनिक होगा। पहली बार बड़े स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी व्यवस्था लागू की जाएगी। इसके तहत—
- AI आधारित इंटीग्रेटेड मेला कंट्रोल रूम
- AI कैमरे और फेस रिकग्निशन सिस्टम
- AI ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम
- AI ड्रोन से निगरानी
- ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरे
- हेड काउंटिंग सिस्टम
- डिजिटल पवेलियन
- लोकेशन आधारित अटेंडेंस सिस्टम
का उपयोग किया जाएगा। इन तकनीकों की मदद से भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
QR कोड से दर्ज होगी शिकायत, तुरंत होगा समाधान
मेला क्षेत्र में जगह-जगह QR कोड आधारित फीडबैक एवं शिकायत प्रणाली विकसित की गई है। श्रद्धालु QR कोड स्कैन कर अपनी शिकायत या सुझाव सीधे जिला प्रशासन तक पहुंचा सकेंगे। शिकायत मिलते ही संबंधित विभाग तत्काल कार्रवाई कर समस्या का समाधान करेगा।
सुरक्षा और सुविधाओं पर विशेष जोर
बैठक में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी व्यापक चर्चा हुई। मेला क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल, ट्रैफिक ओपी, स्वास्थ्य केंद्र, सूचना एवं सहायता केंद्र, विद्युत केंद्र, पर्यटन सहायता केंद्र और मातृत्व विश्राम गृह स्थापित किए जाएंगे। साथ ही पूरे मेला क्षेत्र में साफ-सफाई, कूड़ा प्रबंधन, पर्याप्त रोशनी, आकर्षक सजावट, तोरण द्वार और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
देवघर-बासुकीनाथ मार्ग होगा पूरी तरह व्यवस्थित
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि देवघर से बासुकीनाथ तक श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम बनाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और जिला प्रशासन आपसी समन्वय के साथ सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूरी करें, ताकि यात्रा के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो।
29 जुलाई को होगी अंतिम समीक्षा
मंत्री सुदिव्य कुमार ने बताया कि 29 जुलाई को एक बार फिर देवघर और दुमका में तैयारियों की अंतिम समीक्षा की जाएगी। उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिया कि तय समय सीमा के भीतर सभी कार्य गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं।
सरकार का लक्ष्य—श्रद्धालुओं को मिले सुरक्षित, सुगम और यादगार अनुभव
बैठक के अंत में मंत्री श्रावणी मेला 2026.मंत्री सुदिव्य कुमार ने उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कहा कि विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला झारखंड की पहचान है। इसलिए सरकार का प्रयास है कि बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु सुरक्षित वातावरण, बेहतर सुविधाओं और सुव्यवस्थित व्यवस्था के साथ जलार्पण कर संतोष और सुखद अनुभव लेकर अपने घर लौटे। इस उद्देश्य से सभी विभाग समन्वय के साथ युद्धस्तर पर कार्य कर रहे हैं।
SRFTI कोलकाता के सहयोग से युवाओं को मिलेगा विश्वस्तरीय फिल्म और मीडिया प्रशिक्षण
रांची। झारखंड में फिल्म, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। राज्य सरकार ने झारखंड फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (JFTI) की स्थापना की दिशा में ठोस कदम बढ़ा दिए हैं। प्रारंभिक चरण में यह संस्थान रांची स्थित सूचना भवन से संचालित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मौजूदगी में 22 जुलाई को झारखंड फिल्म एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और सत्यजीत रे फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट (SRFTI), कोलकाता के बीच हुए एमओयू के बाद संस्थान की स्थापना की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी क्रम में SRFTI के कुलपति समीरन दत्ता अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ सूचना भवन पहुंचे और अधिकारियों के साथ बैठक कर उपलब्ध संसाधनों एवं भवन का निरीक्षण किया।
पहले चरण में शुरू होंगे शॉर्ट टर्म कोर्स
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के संयुक्त निदेशक आनंद ने बताया कि संस्थान के शुरुआती चरण में विद्यार्थियों और कामकाजी युवाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एक, दो, तीन और छह महीने की अवधि वाले शॉर्ट-टर्म कोर्स शुरू किए जाएंगे। इन कोर्सों को पार्ट-टाइम, फुल-टाइम और ईवनिंग क्लास के रूप में संचालित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि SRFTI के तकनीकी सहयोग से विभाग के उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करते हुए जल्द ही प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी की जा रही है।
इन विषयों में मिलेगा आधुनिक प्रशिक्षण
JFTI में फिल्म और मीडिया उद्योग से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें शामिल हैं—
- साउंड डिजाइनिंग
- फिल्म एडिटिंग
- एनीमेशन
- स्क्रिप्ट एवं स्क्रीनप्ले राइटिंग
- सिनेमैटोग्राफी
- फिल्म डायरेक्शन
- फिल्म प्रोडक्शन
इन पाठ्यक्रमों का उद्देश्य झारखंड के युवाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के तकनीकी कौशल से लैस करना है।
SRFTI देगा हर स्तर पर तकनीकी सहयोग
SRFTI के कुलपति समीरन दत्ता ने कहा कि झारखंड में फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान की स्थापना राज्य के युवाओं के लिए नए अवसर लेकर आएगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि संस्थान के ब्लूप्रिंट तैयार करने, क्लासरूम डिजाइन, तकनीकी ढांचा विकसित करने और गेस्ट फैकल्टी की व्यवस्था तक हर स्तर पर SRFTI सहयोग करेगा।
उन्होंने सुझाव दिया कि संस्थान के पूरी तरह शुरू होने के बाद राज्य के मीडियाकर्मियों के लिए भी शॉर्ट-टर्म प्रोफेशनल ट्रेनिंग आयोजित की जाए, ताकि वे आधुनिक फिल्म और मीडिया तकनीकों का प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें। साथ ही उन्होंने शुरुआत फिल्म एप्रिशिएशन कोर्स से करने की भी सलाह दी।
झारखंड की प्रतिभाओं को मिलेगा नया मंच
राज्य सरकार का मानना है कि JFTI की स्थापना से झारखंड की स्थानीय प्रतिभाओं को फिल्म, टेलीविजन और डिजिटल मीडिया उद्योग में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। इससे राज्य में फिल्म निर्माण को भी बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
बैठक में ये रहे मौजूद
बैठक में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सहायक निदेशक शाहिद आलम, राशिद अख्तर, बीरू कुशवाहा, सुनीता धान, अभय कुमार तथा SRFTI के एसोसिएट प्रो. नीलाजन बनर्जी एवं प्रो. इंद्रनील मुखर्जी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
रांची। झारखंड की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने रांची में JCI Ranchi Udaan द्वारा आयोजित Glitz & Glam Exhibition का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने महिला उद्यमियों द्वारा लगाए गए विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया तथा उनसे संवाद कर उनके उत्पादों, नवाचारों और उद्यमिता के अनुभवों की जानकारी ली।
मंत्री ने कहा कि यह प्रदर्शनी महिला उद्यमिता, स्थानीय प्रतिभाओं और स्वरोज़गार को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायी पहल है। ऐसे आयोजन महिलाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, उत्पादों के लिए नए बाज़ार उपलब्ध कराने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का सशक्त अवसर प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा, "Glitz & Glam Exhibition एक बेहद प्रतिष्ठित और लंबे समय से आयोजित होने वाला आयोजन है। JCI Ranchi Udaan की महिलाओं द्वारा इसका सफल आयोजन किया जाता है। इस प्रदर्शनी में महिला उद्यमिता की प्रेरणादायक झलक देखने को मिलती है, जहाँ महिलाएँ अपने स्टार्टअप और नवाचारों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं। चाहे ज्वेलरी हो, गारमेंट्स हों या होम डेकोर से जुड़े उत्पाद यहाँ महिलाओं की प्रतिभा, रचनात्मकता और उद्यमशीलता का उत्कृष्ट प्रदर्शन देखने को मिलता है। हर वर्ष लोग इस प्रदर्शनी का बेसब्री से इंतजार करते हैं। ऐसे आयोजन न केवल स्थानीय महिला उद्यमियों को एक सशक्त मंच प्रदान करते हैं, बल्कि उन्हें अपने व्यवसाय का विस्तार करने और अधिक लोगों तक पहुँच बनाने का अवसर भी देते हैं।"
दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, स्वरोज़गार के अवसर बढ़ाने तथा उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। स्वयं सहायता समूहों, ग्रामीण आजीविका मिशन और विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी पहल की जा रही है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के आयोजन भविष्य में और अधिक महिलाओं को अपने सपनों को साकार करने, नए उद्यम स्थापित करने तथा झारखंड की अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास में सक्रिय भागीदारी निभाने के लिए प्रेरित करेंगे। उन्होंने JCI Ranchi Udaan की पूरी टीम को इस सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि ऐसी पहल आत्मनिर्भर झारखंड के निर्माण को और अधिक मजबूती प्रदान करेंगी।
इस अवसर पर JCI Ranchi Udaan की प्रेसिडेंट जेएफ़एम डॉ. प्रिया लखोटिया, सेक्रेटरी पूजा बुधिया, फाउंडर प्रेसिडेंट जीएफएस राखी जैन सहित संस्था के अन्य पदाधिकारी एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहें।
शिवनारायणपुर। (मालदा) भारतीय रेल के आधुनिकीकरण की दिशा में शुक्रवार को एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पंजाब के जालंधर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत देश के 20 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के 75 पुनर्विकसित रेलवे स्टेशनों को राष्ट्र को समर्पित किया। लगभग 1,570 करोड़ रुपये की लागत से विकसित इन स्टेशनों का उद्देश्य यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराना और भारतीय रेलवे को आधुनिक स्वरूप देना है।
इसी कड़ी में पूर्व रेलवे के मालदा मंडल अंतर्गत शिवनारायणपुर रेलवे स्टेशन को भी पुनर्विकसित कर "अमृत स्टेशन" के रूप में राष्ट्र को समर्पित किया गया। लगभग 17.94 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह स्टेशन अब आधुनिक सुविधाओं, आकर्षक वास्तुकला और स्थानीय सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम बनकर उभरा है।
उद्घाटन समारोह में उमड़ा जनसैलाब
शिवनारायणपुर रेलवे स्टेशन परिसर में आयोजित भव्य समारोह में भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल, कहलगांव के विधायक शभानंद मुकेश, मालदा मंडल के अपर मंडल रेल प्रबंधक अमरेंद्र कुमार मौर्य, रेल अधिकारियों, जिला प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, विद्यार्थियों, मीडिया प्रतिनिधियों, रेल यात्रियों तथा बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत स्कूली बच्चों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई। इसके बाद अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत शिवनारायणपुर स्टेशन के पुनर्विकास पर आधारित एक विशेष प्रस्तुति दिखाई गई। मालदा मंडल की ओर से आयोजित निबंध, चित्रकला और वक्तृत्व प्रतियोगिताओं के विजेताओं को मंच से सम्मानित किया गया।
इसके उपरांत उपस्थित लोगों ने प्रधानमंत्री के कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखा, जिसमें शिवनारायणपुर स्टेशन को राष्ट्र को समर्पित किया गया। इस अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े और इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।
आधुनिक सुविधाओं से लैस हुआ शिवनारायणपुर स्टेशन
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत स्टेशन का कायाकल्प किया गया है। यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा और सुगमता को ध्यान में रखते हुए कई अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं।
नई सुविधाओं में शामिल हैं—
- आकर्षक एवं आधुनिक स्टेशन भवन और भव्य फ़ासाद।
- विशाल कॉनकोर्स और उन्नत टिकट बुकिंग काउंटर।
- आधुनिक प्रतीक्षालय, आरक्षित लाउंज एवं स्वच्छ शौचालय।
- नए सर्कुलेटिंग एरिया एवं समर्पित पार्किंग सुविधा।
- अत्याधुनिक यात्री सूचना प्रणाली और दिशा-सूचक संकेतक।
- स्टेशन परिसर एवं बाहरी क्षेत्र में आकर्षक प्रकाश व्यवस्था।
- यात्रियों की सुविधा के लिए दो आधुनिक लिफ्ट।
- दिव्यांग यात्रियों के लिए बाधारहित आवागमन की विशेष व्यवस्था।
- मधुबनी कला, विक्रमशिला महाविहार और भागलपुर की सांस्कृतिक विरासत से प्रेरित आकर्षक आंतरिक सज्जा।
विरासत और आधुनिकता का अद्भुत संगम
राष्ट्रीय राजमार्ग-80 के समीप तथा ऐतिहासिक विक्रमशिला महाविहार के नजदीक स्थित शिवनारायणपुर स्टेशन को इस तरह विकसित किया गया है कि यहां आने वाला प्रत्येक यात्री बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान का अनुभव कर सके।
स्टेशन के डिज़ाइन में मधुबनी पेंटिंग, भागलपुर क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत और स्थानीय स्थापत्य कला को विशेष स्थान दिया गया है। आधुनिक तकनीक और पारंपरिक कला के इस मेल ने स्टेशन को केवल एक परिवहन केंद्र नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बना दिया है।
क्षेत्रीय विकास को मिलेगा नया आयाम
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, स्टेशन के पुनर्विकास से यात्रियों को पहले से अधिक आरामदायक, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा अनुभव मिलेगा। इसके साथ ही—
- क्षेत्रीय रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
- पर्यटन को नया प्रोत्साहन मिलेगा।
- स्थानीय व्यापार और कृषि गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
- रोजगार एवं आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा होंगे।
- आसपास के क्षेत्रों का सामाजिक एवं आर्थिक विकास तेज होगा।
विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत देशभर में रेलवे स्टेशनों का आधुनिकीकरण केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य यात्रियों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना, स्थानीय संस्कृति को संरक्षित रखना और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप रेलवे अवसंरचना विकसित करना है।
शिवनारायणपुर रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास इसी सोच का उदाहरण है, जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ बिहार की सांस्कृतिक विरासत को भी पूरी गरिमा के साथ संरक्षित किया गया है। यह स्टेशन अब न केवल यात्रियों के लिए सुविधाजनक बनेगा, बल्कि क्षेत्र की पहचान, पर्यटन और आर्थिक प्रगति का भी नया केंद्र बनने की ओर अग्रसर है।