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एचईसी की ज़मीन पर निदेशक (कार्मिक) की बुरी नज़र? कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के नाम पर भ्रष्टाचार की आशंका -रमा शंकर प्रसाद
December 17, 2025 | 202 Views
एचईसी की ज़मीन पर निदेशक (कार्मिक) की बुरी नज़र? कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के नाम पर भ्रष्टाचार की आशंका -रमा शंकर प्रसाद

रांची। एचईसी मजदूर संघ के महामंत्री रमा शंकर प्रसाद ने एचईसी प्रबंधन, विशेषकर निदेशक (कार्मिक) की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एचईसी की बहुमूल्य ज़मीन पर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और मॉल विकसित करने की पहल खास लोगों को लाभ पहुंचाने की नीयत से की जा रही है, जिसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की पूरी संभावना है।

रमा शंकर प्रसाद ने कहा कि पूर्व में भी एचईसी की ज़मीन औने-पौने दाम पर झारखंड सरकार को दी गई, जिससे एचईसी को 746 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। यदि इस राशि का सही उपयोग किया जाता, तो एचईसी का पुनरुद्धार संभव था। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण रूप से उस समय के तत्कालीन सीएमडी द्वारा इस राशि को अन्य मदों में खर्च कर दिया गया, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला। उन्होंने दावा किया कि 746 करोड़ रुपये में से अब तक केवल 446 करोड़ रुपये का ही हिसाब सामने आया है, जबकि शेष लगभग 300 करोड़ रुपये का कोई अता-पता नहीं है। इस गंभीर वित्तीय अनियमितता की जांच की मांग पहले ही भारी उद्योग मंत्रालय से की जा चुकी है।

उत्पादन छोड़ मॉल पर ध्यान—किसके हित में?

महामंत्री ने सवाल उठाया कि एचईसी के निदेशकों का काम वर्क ऑर्डर लाना, उत्पादन बढ़ाना और कंपनी को आत्मनिर्भर बनाना होना चाहिए, न कि मॉल और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाने की योजनाएँ तैयार करना ।उन्होंने आशंका जताई कि जिस तरह पुराने निदेशक पैसों की बंदरबांट कर गए, उसी रास्ते पर मौजूदा निदेशक भी चल रहे हैं। यदि यही सिलसिला जारी रहा, तो एचईसी की बची-खुची ज़मीन भी खत्म हो जाएगी और कंपनी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।

*ज़मीन बेचनी ही है तो उद्योग लगे, मॉल नहीं...*

रमा शंकर प्रसाद ने स्पष्ट कहा कि यदि केंद्र सरकार किसी भी प्रकार की अनुमति देती है, तो ज़मीन उद्योग और कारखाने लगाने के लिए दी जाए , इससे प्राप्त राशि से एचईसी का पुनरुद्धार किया जाए , स्थानीय लोगों को रोजगार मिले , क्षेत्र में बढ़ती बेरोजगारी पर अंकुश लगे । संघ के महामंत्री ने केंद्र सरकार से मांग की कि एचईसी की ज़मीन से जुड़ा कोई भी निर्णय लेने से पहले एक उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच समिति गठित की जाए , पूर्व में हुए भूमि सौदों और 746 करोड़ रुपये के उपयोग की संपूर्ण जांच कराई जाए , मजदूर संघ और स्थानीय प्रतिनिधियों को भी प्रक्रिया में शामिल किया जाए , उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एचईसी की ज़मीन को निजी हितों की भेंट चढ़ाने की कोशिश की गई, तो मजदूर संघ कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।


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