रांची। हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड (HEC), रांची के पुनरुद्धार को लेकर शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में महत्वपूर्ण बैठक हुई। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से HEC के पुनरुद्धार के लिए गठित छह सदस्यीय केंद्रीय संसदीय उप-समिति के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। इस दौरान HEC की वर्तमान स्थिति और संस्थान को फिर से मजबूत करने को लेकर भविष्य की कार्ययोजनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल के साथ HEC की मौजूदा परिस्थितियों, संस्थान के सामने मौजूद चुनौतियों और इसके पुनरुद्धार की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया। बैठक में HEC को नई दिशा देने तथा उसके भविष्य को लेकर आवश्यक कदमों पर चर्चा हुई।
प्रतिनिधिमंडल में सांसद विजय हांसदा, केंद्रीय संसदीय उप-समिति के अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद तिरुची शिवा, राज्यसभा सांसद सुलता देव, सांसद कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी, सांसद हँसमुखभाई सोमाभाई पटेल तथा सांसद चंदन चौहान शामिल रहे।
HEC के भविष्य को लेकर अहम मानी जा रही मुलाकात
रांची स्थित HEC झारखंड ही नहीं, बल्कि देश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला सार्वजनिक क्षेत्र का प्रतिष्ठित संस्थान रहा है। ऐसे में इसके पुनरुद्धार को लेकर केंद्र और राज्य स्तर पर होने वाली पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
केंद्रीय संसदीय उप-समिति के प्रतिनिधिमंडल की मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद HEC के पुनरुद्धार से जुड़ी आगे की रणनीति को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। बैठक में हुई चर्चा को संस्थान के पुनरुद्धार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
रांची। झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों का आक्रोश शुक्रवार को एक बार फिर सड़क पर देखने को मिला। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला फूंकने के दौरान रांची में छात्रों और पुलिस के बीच झड़प की स्थिति बन गई। घटना के बाद मौके पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल रहा।
आंदोलनकारी छात्र मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ पुतला दहन करने अल्बर्ट एक्का चौक पहुंचे थे। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और झड़प हो गई। मिली जानकारी के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान एक युवक द्वारा पुतला दहन रोकने की कोशिश के बाद एक युवक द्वारा एक लड़की के साथ मारपीट कर दी जिसके बाद छात्रों का संगठन और पुलिसकर्मी आमने-सामने आ गए।
छात्र जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया तथा सीबीआई जांच समेत अपनी मांगों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। शुक्रवार को राज्य के विभिन्न जिलों में मुख्यमंत्री का पुतला दहन करने का आह्वान किया गया था।
इससे पहले भी रांची में आंदोलनकारी छात्रों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पुतले जलाकर सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश जताया था। छात्रों का आरोप है कि उन्हें लगातार आश्वासन दिए गए, लेकिन उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
घटना के बाद रांची में छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। वहीं, पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। फिलहाल आंदोलनकारी छात्रों की ओर से प्रदर्शन जारी रखने की बात कही गई है।
रांची। झारखंड रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (झारखंड रेरा) की ओर से रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 के प्रभावी क्रियान्वयन और इसके व्यावहारिक पहलुओं को लेकर 23 अगस्त 2026 को रांची में एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया जाएगा। सेमिनार का आयोजन रेडिसन ब्लू होटल, रांची में सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक होगा।
सेमिनार का उद्देश्य रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े विभिन्न हितधारकों को रेरा अधिनियम के प्रावधानों और नियामकीय प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराना है। कार्यक्रम में विशेषज्ञों द्वारा परियोजना पंजीकरण, प्रमोटर एवं आवंटियों के अधिकार और दायित्व, अनुपालन प्रक्रिया, वित्तीय प्रबंधन तथा शिकायत निवारण व्यवस्था समेत अधिनियम के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया जाएगा।
व्यावहारिक समस्याओं पर होगी चर्चा
कार्यक्रम के दौरान इंटरैक्टिव सत्र का भी आयोजन किया जाएगा। इसमें प्रतिभागी रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े अपने व्यावहारिक सवाल और जिज्ञासाएं विशेषज्ञों के सामने रख सकेंगे। विशेषज्ञ इन सवालों का समाधान करते हुए रेरा अधिनियम के प्रावधानों और उनके अनुपालन से जुड़ी आवश्यक जानकारी देंगे।
बिल्डर से लेकर होमबायर्स तक की भागीदारी की अपील
झारखंड रेरा ने बिल्डरों, प्रमोटरों, भूमि स्वामियों, होमबायर्स, बैंकों एवं वित्तीय संस्थानों सहित रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारकों से सेमिनार में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।
प्राधिकरण का मानना है कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से रियल एस्टेट क्षेत्र में कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत करने में मदद मिलेगी।
झारखंड रेरा के अनुसार, रेरा अधिनियम के प्रावधानों की सही जानकारी और प्रभावी अनुपालन से रियल एस्टेट परियोजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा प्रमोटरों और आवंटियों के बीच उत्पन्न होने वाली समस्याओं के समाधान में भी मदद मिलेगी।
रांची। झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसके तहत JSSC-CGL और CDPO परीक्षा के परिणाम/नियुक्तियों को रद्द करने का आदेश दिया गया था। हाईकोर्ट के इस फैसले से इन परीक्षाओं के जरिए चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।
राज्य सरकार ने हाल ही में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और अनियमितताओं की जांच के आधार पर कई परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया था। इसी क्रम में JSSC-CGL परीक्षा और CDPO भर्ती भी रद्द करने का आदेश जारी किया गया था। सरकार के इस फैसले के बाद चयनित अभ्यर्थियों में भारी असंतोष था और वे अपनी नियुक्तियों को बचाने के लिए न्यायालय की शरण में पहुंचे थे।
हाईकोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक
शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार के रद्दीकरण संबंधी आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए चयनित अभ्यर्थियों को तत्काल राहत दी। अदालत ने सरकार से इस मामले में जवाब भी मांगा है। रिपोर्टों के अनुसार अगली सुनवाई 24 अगस्त को होने की बात सामने आई है।
अदालत की इस कार्रवाई का अहम पहलू यह है कि जिन अभ्यर्थियों ने परीक्षा पास कर नियुक्ति हासिल की थी, उनकी नियुक्ति को केवल व्यापक जांच के आधार पर समाप्त करने से पहले उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए। हाईकोर्ट की कार्यवाही में प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के सिद्धांत को महत्वपूर्ण माना गया है।
करीब दो हजार चयनित अभ्यर्थियों को राहत
JSSC-CGL को लेकर सरकार के रद्दीकरण आदेश के बाद करीब 2,000 चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य पर अनिश्चितता पैदा हो गई थी। अभ्यर्थियों का कहना था कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो दोषी व्यक्तियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन सभी सफल अभ्यर्थियों को एक साथ दोषी मानकर उनकी नौकरी खत्म करना उचित नहीं है।
वहीं CDPO भर्ती के चयनित अभ्यर्थियों को भी हाईकोर्ट के आदेश से राहत मिली है। एक रिपोर्ट के अनुसार JSSC-CGL और CDPO भर्ती के जरिए चयनित कुल 1,932 अभ्यर्थियों को इस न्यायिक हस्तक्षेप से तत्काल राहत मिली है।
सरकार के फैसले के बाद बढ़ा था विवाद
झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर व्यापक कार्रवाई का फैसला लिया था। सरकार ने JSSC-CGL समेत कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने और पुरानी परीक्षाओं की जांच कराने की घोषणा की थी। इसके बाद एक तरफ परीक्षा रद्द करने की मांग कर रहे आंदोलनकारी छात्रों में संतोष दिखा, तो दूसरी तरफ पहले से चयनित अभ्यर्थियों ने नौकरी बचाने के लिए आंदोलन और कानूनी लड़ाई शुरू कर दी।
अब हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद मामला पूरी तरह न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में आ गया है। सरकार को अदालत के सामने अपना पक्ष और रद्दीकरण के आधार स्पष्ट करने होंगे। अंतिम फैसला आने तक JSSC-CGL और CDPO से जुड़े चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।
छात्रों और चयनित अभ्यर्थियों के बीच फिर बढ़ सकता है टकराव
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद भर्ती परीक्षा विवाद का अगला चरण और महत्वपूर्ण हो गया है। एक ओर परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच और निष्पक्ष भर्ती की मांग करने वाले छात्र संगठन हैं, वहीं दूसरी ओर वर्षों की मेहनत के बाद चयनित होकर नौकरी पाने वाले अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
अब सभी की निगाहें अगली सुनवाई और सरकार के जवाब पर टिकी हैं। हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि JSSC-CGL और CDPO नियुक्तियों को लेकर आगे की कानूनी स्थिति क्या बनती है। फिलहाल इतना साफ है कि सरकार के रद्दीकरण आदेश पर लगी हाईकोर्ट की रोक ने हजारों चयनित अभ्यर्थियों को तत्काल बड़ी राहत दी है।
रांची। झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी विवाद के बीच 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा के चयनित अभ्यर्थियों को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। न्यायमूर्ति दीपक रौशन की अदालत ने 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्तियां रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। अदालत ने मामले में राज्य सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जवाब भी मांगा है।
नियुक्तियां रद्द किए जाने के खिलाफ दायर तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स और पीएएस पति ने पक्ष रखा।
342 चयनित अभ्यर्थियों को अंतरिम राहत
11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा, विज्ञापन संख्या 1/2024 के तहत 342 पदों पर अभ्यर्थियों का चयन किया गया था। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद कई अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र भी जारी किया गया और वे प्रशिक्षण एवं सेवा प्रक्रिया में शामिल हो चुके थे।
सरकार की ओर से 18 अगस्त 2026 को जारी अधिसूचना के बाद इन नियुक्तियों पर संकट खड़ा हो गया था। अब हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद चयनित अभ्यर्थियों को फिलहाल राहत मिली है।
दूसरी नौकरी छोड़कर झारखंड आई थीं सोनम कुमारी
याचिकाकर्ता सोनम कुमारी ने अदालत को बताया कि उन्होंने दूसरी जगह की नौकरी छोड़कर झारखंड में नियुक्ति स्वीकार की थी। उन्हें 24 नवंबर 2025 को नियुक्ति पत्र मिला था और उन्होंने प्रशिक्षण भी पूरा किया। इसके बाद 18 अगस्त 2026 की सरकारी अधिसूचना के जरिए उनकी नियुक्ति रद्द कर दी गई।
याचिका में कहा गया कि चयन प्रक्रिया पूरी होने और सेवा में शामिल होने के बाद अचानक नियुक्ति रद्द किए जाने से उनके करियर और भविष्य पर गंभीर असर पड़ा है।
फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्ति पर भी रोक
तीसरी याचिका सौरव सिंह एवं अन्य की ओर से दायर की गई थी। इसमें JPSC की विज्ञापन संख्या 18/2023 के तहत आयोजित फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा के आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के सरकार के फैसले को चुनौती दी गई।
हाईकोर्ट ने इस मामले में भी नियुक्तियां रद्द करने के आदेश पर अगले आदेश तक रोक लगाते हुए राज्य सरकार और JPSC को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
CID जांच के बाद सरकार ने लिया था नियुक्तियां रद्द करने का फैसला
JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राज्य सरकार ने जांच का फैसला लिया है। CID जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर सरकार ने उन परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया, जिनमें TDPL की भूमिका सामने आने की बात कही गई है।
इसके अलावा वर्ष 2014 से अब तक आयोजित भर्ती परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की भी जांच कराई जा रही है। कार्मिक विभाग की अधिसूचना के अनुसार कुल 45 परीक्षाओं को जांच एवं कार्रवाई के दायरे में रखा गया है। इनमें 22 परीक्षाएं रद्द, छह परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित और 17 परीक्षाओं को संभावित अनियमितताओं की जांच के दायरे में रखा गया है।
अब अगली सुनवाई पर टिकी नजर
सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच जरूरी है। वहीं चयनित अभ्यर्थियों का तर्क है कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, लेकिन पूरी चयन प्रक्रिया में सफल अभ्यर्थियों को सामूहिक रूप से प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।
फिलहाल हाईकोर्ट का आदेश अंतरिम है। नियुक्तियां रद्द करने के सरकार के फैसले पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। राज्य सरकार और JPSC को अपना जवाब दाखिल करना होगा। इसके बाद अदालत मामले के कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं पर आगे सुनवाई करेगी। ऐसे में चयनित अभ्यर्थियों के साथ-साथ पूरे राज्य की नजर अब हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी है।
चक्रधरपुर/जमशेदपुर। । पश्चिमी सिंहभूम जिले के बंदगांव थाना प्रभारी सह पुलिस अवर निरीक्षक मनीष कुमार को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी), जमशेदपुर की टीम ने 15 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई एसीबी जमशेदपुर थाना कांड संख्या 04/2026 के तहत की गई।
एसीबी के अनुसार, बंदगांव थाना क्षेत्र के निवासी बिजयराय मुंडू ने पुलिस अधीक्षक, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, जमशेदपुर को लिखित शिकायत देकर बताया था कि बंदगांव थाना कांड संख्या 07/2025, एनडीपीएस एक्ट के मामले में उनके बड़े भाई लाचो मुंडू उर्फ गुलज का नाम दर्ज है। शिकायतकर्ता के अनुसार, नाम हटाने के एवज में थाना प्रभारी मनीष कुमार द्वारा 20 हजार रुपये रिश्वत की मांग की गई थी।
शिकायत मिलने के बाद एसीबी अधिकारियों ने मामले का विधिवत सत्यापन कराया। सत्यापन के दौरान थाना प्रभारी द्वारा 15 हजार रुपये रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। इसके बाद शिकायत के आधार पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो जमशेदपुर थाना में कांड संख्या 04/2026 दर्ज कर धावा दल का गठन किया गया।
एसीबी की टीम ने बुधवार, 20 अगस्त 2026 को कार्रवाई करते हुए बंदगांव थाना प्रभारी मनीष कुमार को शिकायतकर्ता से 15 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी के विरुद्ध विधि-सम्मत अग्रतर कार्रवाई की जा रही है। एसीबी की इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग में भी हड़कंप मचा हुआ है।
मूरी : सिल्ली–बोकारो रेलखंड पर शनिवार देर रात श्रावणी मेला स्पेशल ट्रेन की एक बोगी बेपटरी हो जाने से बड़ा हादसा टल गया। श्रावणी मेला से लौट रहे कांवरियों को लेकर मधुपुर जा रही ट्रेन संख्या 08895 की इंजन से तीसरी बोगी अचानक पटरी से उतर गई। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी यात्री के घायल होने या किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं है।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह हादसा रात करीब 2:30 बजे पोल संख्या 354/SA4 के समीप हुआ, जब इंजन से तीसरी बोगी (कोच संख्या SEC 64776) पटरी से उतर गई। घटना के बाद यात्रियों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई और तेज झटके से लोग सहम गए।वरिष्ठ डीसीएम श्रेया सिंह ने बताया कि दुर्घटना में किसी भी यात्री को चोट नहीं आई। उन्होंने कहा कि यात्रियों को केवल हल्का झटका महसूस हुआ, लेकिन सभी सुरक्षित हैं। घटना के तुरंत बाद रेलवे ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की। प्रभावित रेलखंड पर परिचालन में आवश्यक बदलाव किए गए तथा यात्रियों को अन्य ट्रेनों के माध्यम से रवाना किया गया। बोकारो जाने वाले यात्रियों के लिए भी विशेष परिवहन व्यवस्था की गई।सूचना मिलते ही हटिया मंडल के डीआरएम, आरपीएफ, जीआरपी और रेलवे के तकनीकी अधिकारी मौके पर पहुंचे। तकनीकी टीम ने बेपटरी हुई बोगी को दोबारा पटरी पर लाने और रेल परिचालन सामान्य करने का कार्य शुरू कर दिया। यात्रियों ने रेलवे की त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि अधिकारियों ने समय रहते स्थिति संभाल ली, जिससे एक बड़ी दुर्घटना टल गई।रेलवे ने घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर तकनीकी खराबी की आशंका जताई जा रही है, हालांकि जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।
रांची : झारखंड की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने रांची स्थित प्रोजेक्ट भवन में ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर विभागीय योजनाओं एवं कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान विभिन्न योजनाओं की प्रगति, बजटीय प्रावधान के विरुद्ध व्यय, भुगतान की स्थिति और योजनाओं के प्रभावी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक में मनरेगा एवं जेएसएलपीएस कर्मियों के लंबित वेतन का भुगतान 15 दिनों के भीतर सुनिश्चित करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भविष्य में प्रत्येक माह के वेतन का बिल 25 तारीख तक ट्रेजरी में अनिवार्य रूप से भेज दिया जाए, ताकि सभी कर्मियों को प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह में वेतन का भुगतान सुनिश्चित किया जा सके।
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने मनरेगा में लेबर एवं मटेरियल भुगतान में आ रही तकनीकी समस्याओं को भारत सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर यथाशीघ्र दूर करने का निर्देश दिया, ताकि श्रमिकों एवं संबंधित एजेंसियों का भुगतान निर्धारित समय-सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने मनरेगा के अंतर्गत नवाचार आधारित योजनाओं को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। इसी क्रम में ड्राई बोरवेल को सीपेज वाटर टैंक के रूप में विकसित करने की योजना को मनरेगा से जोड़ने की दिशा में कार्य करने का निर्देश दिया गया, ताकि जल संरक्षण एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जल संचयन को बढ़ावा मिल सके।
साथ ही मनरेगा के अंतर्गत ग्रामीण सड़कों का निर्माण नई तकनीक के माध्यम से कार्य शुरू करने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया। मंत्री ने कहा कि मनरेगा की योजनाओं में ऐसे नवाचारों को प्राथमिकता दी जाए, जिनसे रोजगार सृजन के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में टिकाऊ एवं उपयोगी परिसंपत्तियों का निर्माण हो।
बैठक में जेएसएलपीएस के अंतर्गत संचालित आजीविका एवं ग्रामीण महिलाओं से जुड़ी योजनाओं की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने जोहार -2 एवं जायका जैसी योजनाओं को जल्द शुरू करने के लिए आवश्यक प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के अवसरों को और मजबूत किया जा सके तथा स्वयं सहायता समूहों एवं ग्रामीण परिवारों को इन योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके।
बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना एवं अबुआ आवास योजना की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि दोनों आवास योजनाओं के लाभुकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए तथा योजनाओं की नियमित समीक्षा करते हुए निर्माण कार्यों की प्रगति पर लगातार निगरानी रखी जाए। पेसा कानून के धरातलीय क्रियान्वयन को लेकर मंत्री ने पारंपरिक ग्राम सभाओं के गठन की प्रक्रिया यथाशीघ्र पूर्ण करने का निर्देश दिया। साथ ही पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित अन्य विभागों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने को कहा गया।
ग्रामीण कार्य विभाग की समीक्षा के दौरान नई योजनाओं की स्वीकृति की प्रक्रिया यथाशीघ्र पूरी करने और पूर्व से चल रही निविदाओं का निष्पादन इसी माह के भीतर पूर्ण करने का निर्देश दिया गया। बैठक में विभाग के अंतर्गत प्राप्त बजटीय प्रावधानों के विरुद्ध हुए व्यय की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को योजनाओं के क्रियान्वयन में गति लाने, वित्तीय अनुशासन बनाए रखने तथा जनता से जुड़ी योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से लाभुकों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।
इस दौरान ग्रामीण विकास विभाग के सचिव मनोज कुमार, पंचायती राज निदेशक बी. राजेश्वरी, मनरेगा आयुक्त मृत्युंजय वर्णवाल, जेएसएलपीएस के सीईओ श्री अनन्य मित्तल, अभियंता प्रमुख सहित विभाग के वरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच के बीच CID ने सोमवार को JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई उस समय हुई है, जब रांची में JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का आंदोलन तेज है।
रिपोर्टों के अनुसार, CID की जांच में परीक्षा संचालन से जुड़ी TDPL कंपनी को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आए हैं। आरोप है कि ब्लैकलिस्टेड कंपनी को नियमों को दरकिनार कर परीक्षा संचालन का काम दिया गया था। CID ने खियांग्ते से पहले कई चरणों में पूछताछ भी की थी।
छात्रों के आंदोलन के बीच बड़ा एक्शन
खियांग्ते की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब सोमवार को JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर हजारों छात्र विधानसभा घेराव के लिए रांची पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच टकराव की स्थिति बनी और पुलिस ने वाटर कैनन तथा आंसू गैस का इस्तेमाल किया।
यानी एक तरफ विधानसभा के बाहर छात्रों का उग्र प्रदर्शन और दूसरी तरफ JPSC के पूर्व अध्यक्ष की गिरफ्तारी—झारखंड में परीक्षा विवाद ने अब बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक रूप ले लिया है।
क्या लगा है आरोप
जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांगते पर टेंडर देने के नाम पर 2 करोड़ रु लेने एवं 20 प्रतिशत कमीशन की बात सामने आई है।
रांची । मोरहाबादी मैदान में आयोजित दो दिवसीय झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026 के उद्घाटन समारोह में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने सभी राज्यवासियों को विश्व आदिवासी दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए जोहार से अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस को हम सभी जानते हैं। पूरे आदिवासी समाज को आज के इस दिवस को यादगार बनाने के का इंतजार रहता है। धरती पर आदिवासी समाज की अलग पहचान है। इसे अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए इस आदिवासी महोत्सव की शुरुआत हुई है। उन्होंने महोत्सव के लिये सभी लोगों के सहयोग व आशीर्वाद प्राप्त होने का आभार जताया। मुख्यमंत्री ने राज्य के माननीय राज्यपाल श्री संतोष कुमार गंगवार जी की गरिमामयी उपस्थिति को समारोह की विशेष गरिमा और आदिवासी समाज के गौरव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि हमारे लिए राज्यपाल महोदय केवल राज्य के राज्यपाल ही नहीं, बल्कि आदिवासी समुदाय के मार्गदर्शक और सर्वमान्य नेतृत्वकर्ता के रूप में हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल (टीएसी) राज्यपाल महोदय की छत्रछाया और मार्गदर्शन में कार्य करती है। टीएसी के माध्यम से आदिवासी समुदाय के हितों की रक्षा, उनके समग्र विकास और कल्याण से जुड़े विषयों पर चर्चा की जाती है। साथ ही, आदिवासी समाज के विकास के साथ-साथ पूरे समाज की प्रगति और भविष्य की दिशा तय करने में भी टीएसी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा एवं जीवनशैली को सामने लाने का प्रयास*
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के आदिवासी दिवस को पूरे देश और दुनिया में आदिवासी समाज अपने-अपने तरीके से यादगार बनाने में जुटा हुआ है। झारखंड में भी पिछले कुछ वर्षों से इस अवसर पर छोटे-बड़े विभिन्न कार्यक्रमों को आयोजित करके आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली को सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज मोरहाबादी के पूरे मैदान में देश और राज्य के विभिन्न हिस्सों में निवास करने वाले आदिवासी समुदायों की विविधता और सांस्कृतिक झलक देखने को मिल रही है। आयोजन स्थल पर पंडाल लगाए गए हैं, जहां हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग अपनी जीवनशैली, कला, संस्कृति, परंपरा और आजीविका के साधनों को प्रदर्शित कर रहे हैं। यह आयोजन हमें यह भी दिखाता है कि किस तरह आदिवासी समाज अपनी पारंपरिक पहचान को संजोते हुए विकास और बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस आयोजन में केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से भी आदिवासी समुदाय के लोग शामिल हुए हैं। कलाकारों, कारीगरों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों की सहभागिता ने इस आयोजन को और भी अधिक व्यापक स्वरूप प्रदान किया है। उनके हुनर, परंपरा और अनुभवों के माध्यम से एक मजबूत और बेहतर रास्ते की तलाश में आगे बढ़ते आदिवासी समाज की तस्वीर यहां देखने को मिल रही है। इस अवसर पर राज्य में विभिन्न गतिविधियों और कार्यक्रमों के माध्यम से आदिवासी समाज की समृद्ध विरासत को सम्मान और सशक्तिकरण का प्रदर्शन हो रहा है।
*झारखंड की सवा तीन करोड़ जनता के प्रति राज्य सरकार संवेदनशील*
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि आज राज्य विश्व आदिवासी दिवस धूमधाम से मना रही है, वहीं हमारे कुछ युवा, नौजवान और छात्र-छात्राएं अपनी कुछ मांगों और अधिकारों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार खुले मन से उनकी बातें सुन रही है और उनकी समस्याओं को गंभीरता से समझने का प्रयास कर रही है। हर समस्या का समाधान संवाद से संभव है। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि इतनी बड़ी व्यवस्था का संचालन करते हुए भी सरकार की मंशा राज्य के सवा तीन करोड़ लोगों के प्रति पूरी संवेदनशीलता के साथ काम करने की है। गांव में रहने वाला व्यक्ति हो या शहर में रहने वाला, किसान हो या मजदूर, महिला हो या पुरुष, पढ़ा-लिखा नौजवान हो या कम पढ़ा-लिखा अथवा अशिक्षित व्यक्ति—सरकार सभी की चिंता करती है और सबके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जिस विषय को लेकर राज्य के नौजवान अपने अधिकार की आवाज उठा रहे हैं, वह उनकी जागरूकता और अपने हक के लिए खड़े होने के साहस को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि नौजवानों ने हिम्मत इसलिए जुटाई है, क्योंकि उन्हें विश्वास है कि उनके साथ न्याय होगा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि मेरे संज्ञान में गड़बड़ी सामने आई है, उसकी जांच होगी, नौजवानों को न्याय मिलेगा और जिन लोगों ने गड़बड़ी की है, उन्हें कठोर से कठोर सजा दी जाएगी। उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए धरती पुत्र की भांति कहा कि आप विश्वास रखिए, हम इसी मिट्टी में जन्मे हैं और इसी मिट्टी में दफन भी होंगे। इसलिए हम आपके साथ गलत नहीं होने देंगे।
*संवाद से हर समस्या का समाधान संभव, दिग्भ्रमित नहीं हों युवा*
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि इस पूरे विषय को राजनीतिक रूप से देखने की आवश्यकता नहीं है, और न ही युवाओं को किसी राजनीतिक छत्रछाया की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग बड़ी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं पालते हैं और राजनीतिक दलों का इस्तेमाल कर युवा पीढ़ी को अपने हित में इस्तेमाल करने का रास्ता अख्तियार करते हैं।
उन्होंने विशेष रूप से नौजवानों से कहा कि वे विद्यार्थी हैं, उनका अपना अधिकार है और उन्हें उनका अधिकार एवं न्याय मिलना चाहिए। यह जिम्मेदारी सरकार की है और सरकार इसे पूरा करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पूरे देश में अलग-अलग तरीके से राजनीतिक दलों की नजर युवा पीढ़ी पर है। किस तरह युवाओं को सही और गलत तथ्यों के बीच दिग्भ्रमित किया जाए, इसके लिए बड़े पैमाने पर प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसमें केवल सामान्य लोग ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े विद्वान, पढ़े-लिखे और ज्ञानी लोग भी शामिल हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी बात सरकार के समक्ष पूरी स्पष्टता और निर्भीकता के साथ रखें। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अब केवल आंदोलन और धरना-प्रदर्शन के माध्यम से ही8 युवाओं की बातें सुनने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन युवाओं तक भी पहुंचने का प्रयास कर रही है, जो घर बैठे अपनी समस्याओं और अपेक्षाओं को लेकर चिंतित हैं। इसके लिए सरकार ने संवाद का माध्यम भी बनाया है।
*व्यक्ति अमीर हो या गरीब, संविधान सभी को बराबरी का अधिकार देता है*
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने देश को जो संविधान दिया है, वह देश में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को समान अधिकार प्रदान करता है। व्यक्ति अमीर हो या गरीब, संविधान सभी को बराबरी का अधिकार देता है, लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजादी के 75 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद समाज में असमानता पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी है। आने वाले वर्षों में देश आजादी की शताब्दी की ओर बढ़ेगा, लेकिन आज भी समाज के विभिन्न वर्गों के बीच बड़ी असमानताएं मौजूद हैं। समाज, राज्य और देश में आर्थिक एवं सामाजिक असमानताएं जितनी बढ़ेंगी, तनाव भी उतना ही बढ़ेगा। इसलिए इन असमानताओं को दूर करना और सभी वर्गों को समान अवसर उपलब्ध कराना समय की बड़ी आवश्यकता है।
*झारखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि वीरों की भूमि है*
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि आज लोकतंत्र की मूल भावना को चुनौती देने के लिए भी एक बड़ा समूह पूरी ताकत और शिद्दत के साथ प्रयासरत है। हालांकि, झारखंड केवल एक राज्य नहीं, बल्कि वीरों की भूमि है। यह वह धरती है, जहां देश के बड़े हिस्से में आजादी का सपना देखने की शुरुआत भी नहीं हुई थी, उस समय से झारखंड के वीर पूर्वज अपने अधिकार, अस्मिता और स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते रहे हैं। संघर्ष की यह परंपरा आज भी जारी है। उन्होंने कहा कि झारखंड को अलग राज्य बने 25 वर्ष हो चुके हैं और इन वर्षों में राज्य ने अपने पैरों पर खड़े होने तथा अपनी अलग पहचान स्थापित करने की दिशा में लगातार प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी था, जब झारखंड को केवल संसाधनों के दोहन के लिए एक चारागाह की तरह देखा गया, लेकिन आज जब यह राज्य अपनी ताकत और क्षमता के साथ आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा है, तो यह बात कई लोगों को स्वीकार नहीं हो रही है।
*युवाओं को सजग रहने की आवश्यकता*
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि राज्य की प्रगति और उसकी बढ़ती ताकत को रोकने के लिए कभी चेहरा छिपाकर, कभी चेहरा बदलकर और कभी पर्दे के पीछे से गलत संदेश देने तथा लोगों को दिग्भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे प्रयासों के प्रति समाज और विशेषकर युवाओं को सजग रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हर समस्या का समाधान बातचीत और लोकतांत्रिक तरीके से निकाला जा सकता है। सीमाओं पर देश के दुश्मनों से मुकाबला अलग विषय है, लेकिन देश के भीतर रहने वाले अपने ही लोगों के साथ लाठी-डंडे के बल पर किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता।
*युवाओं, विद्यार्थियों का पारदर्शिता के साथ होगा न्याय*
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से युवाओं, विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि वे स्वयं को युवाओं से अलग नहीं मानते। आपकी भावनाएं और सभी की चिंताएं उनकी चिंताएं हैं। उन्होंने कहा कि आज संवैधानिक जिम्मेदारी के स्थान पर रहते हुए वे युवाओं को आश्वस्त करना चाहते हैं कि उनके साथ पूरी पारदर्शिता के साथ न्याय होगा और न्याय केवल होगा ही नहीं, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देगा।
*आदिवासी महोत्सव गौरवशाली विरासत, संघर्ष और पहचान को याद करने का अवसर*
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का यह महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि अपनी गौरवशाली विरासत, संघर्ष और पहचान को याद करने का अवसर है। उन्होंने कामना की कि यह महोत्सव यादगार और प्रेरणादायक बने तथा आदिवासी समाज अपने गौरव और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे ऐसे वीर सपूतों के वंशज हैं, जिन्होंने अपने हक-अधिकार और जल, जंगल, जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष किया। जल, जंगल और जमीन केवल उनके जीवन के संसाधन नहीं, बल्कि उनके जीवन की शुरुआत से लेकर अंत तक उनकी संस्कृति और अस्तित्व से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि आज उन्हें गर्व है कि वे आदिवासी हैं।
*मुख्यमंत्री ने जताया आभार*
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने आदिवासी महोत्सव में सशरीर एवं अन्य माध्यमों से उपस्थित सभी लोगों के प्रति आभार जताया।
*इनकी रही उपस्थिति..*
इस अवसर पर राज्य के मंत्री श्री राधा कृष्ण किशोर, सांसद राज्यसभा श्रीमती महुआ माजी, विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन, विधायक श्री अमित महतो, मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, विकास आयुक्त श्री अजय कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव श्रीमती वंदना दादेल, अपर मुख्य सचिव श्री नितिन मदन कुलकर्णी सहित अन्य गणमान्य अतिथिगण, राज्य सरकार के पदाधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे लोग उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने आदिवासी महोत्सव में सशरीर एवं अन्य माध्यमों से उपस्थित सभी लोगों के प्रति आभार जताया।
इनकी रही उपस्थिति..
इस अवसर पर राज्य के मंत्री राधा कृष्ण किशोर, सांसद राज्यसभा महुआ माजी, विधायक कल्पना सोरेन, विधायक अमित महतो, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, अपर मुख्य सचिव वंदना दादेल, अपर मुख्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी सहित अन्य गणमान्य अतिथिगण, राज्य सरकार के पदाधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे लोग उपस्थित थे।