ब्यूरो। आसनसोल से अजीब मामला सामने आया है जहां आस्था जब राजनीति से जुड़ जाती है, तो नजारे कुछ अलग ही देखने को मिलते हैं। ऐसा ही एक अनोखा दृश्य पश्चिम बंगाल के आसनसोल दक्षिण में देखने को मिला, जहां स्थानीय निवासी सोमू भंडारी इन दिनों चर्चा का केंद्र बने हुए हैं।
9 मई को सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद सोमू भंडारी ने अपनी वर्षों पुरानी मन्नत पूरी करने के लिए करीब 2 किलोमीटर तक दंडवत प्रणाम करते हुए घाघर बूढ़ी काली मंदिर तक यात्रा की और मां काली के चरणों में माथा टेककर आशीर्वाद लिया।
क्या थी सोमू भंडारी की मन्नत?
सोमू भंडारी ने बताया कि राज्य में बढ़ती हिंसा, भ्रष्टाचार और दबंगई से वे बेहद परेशान थे। उन्होंने कहा,
"कुछ समय पहले मैं बाराबनी में अपने रिश्तेदार के घर गया था। वहां का माहौल देखकर मन काफी आहत हुआ। तभी मैंने ठान लिया कि बंगाल में बदलाव जरूरी है।"
इसके बाद उन्होंने घाघर बूढ़ी काली मंदिर पहुंचकर मां से चार शर्तों वाली मन्नत मांगी थी—
- बंगाल में सत्ता परिवर्तन हो
- बीजेपी की सरकार बने
- सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बनें
- बाराबनी से अर्जित राय बीजेपी विधायक बनें
4 मई को पूरी हुई मन्नत
4 मई को आए चुनाव परिणामों में बीजेपी को 207 सीटें मिलीं। सुवेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बने और बाराबनी सीट से अर्जित राय ने जीत दर्ज की।
चारों शर्तें पूरी होते ही सोमू भंडारी ने अपना प्रण निभाने की तैयारी शुरू कर दी।
2 किलोमीटर की दंडवत यात्रा
रविवार सुबह सोमू भंडारी अपने घर से दंडवत यात्रा पर निकले। करीब 2 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए वे घाघर बूढ़ी काली मंदिर पहुंचे। इस दौरान रास्ते में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी उनके साथ जुड़ते गए।
मंदिर पहुंचकर उन्होंने विशेष पूजा-अर्चना की और मां काली का आशीर्वाद लिया।
"यह आस्था और विश्वास की जीत है"
सोमू भंडारी ने कहा,
"यह सिर्फ राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास की जीत है। मां काली ने मेरी पुकार सुन ली। अब बंगाल बदलेगा।"
मंदिर के पुजारी ने भी कहा कि इतनी लंबी दंडवत यात्रा उन्होंने वर्षों बाद देखी है।
चर्चा का विषय बना संकल्प
सोमू भंडारी की श्रद्धा और संकल्प अब आसनसोल से लेकर बाराबनी तक चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोग इसे आस्था, राजनीति और व्यक्तिगत विश्वास का अनोखा संगम बता रहे हैं।