नाहातु : महातीर्थ स्थल स्वर्णरेखा नदी के तट पर स्थित घुरती सती घाट पर इस बार आयोजित टुसू मेला में दूर-दूर से सैकड़ों लोग पहुंचे। यह मेला शाल में दो बार आयोजित किया जाता है, जिसमें से पहला मेला 15 जनवरी को हुआ था, जबकि दूसरा मेला इस बार 15 फरवरी को आयोजित किया गया। इस मेले का आयोजन हर साल बड़ी धूमधाम से होता है, जो स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को जीवित रखने का एक महत्वपूर्ण आयोजन बन चुका है।
इस मेले के दौरान, रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें अंचल के प्रसिद्ध कलाकार अमीन डोमन अहिर ने अपनी लोकभाषा में प्रस्तुति दी। इसके अलावा, स्थानीय लोग और पर्यटक मस्ती में झूमते हुए कार्यक्रमों का आनंद लेते दिखाई दिए। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ ही खेल, झूले और अन्य मनोरंजन गतिविधियां भी मेले की शोभा बढ़ा रही थीं।
स्वर्णरेखा नदी के तट पर स्थित यह घाट उड़ीसा, बंगाल और झारखंड के संगम स्थल के रूप में महत्वपूर्ण है, और इस मेला के दौरान तीनों राज्य के लोग एक साथ यहां जमा होते हैं। मेला स्थल पर वातावरण में एक खास उत्साह का माहौल था, जहां हर आयु वर्ग के लोग मेले का आनंद ले रहे थे। लोग यहां अपने पारंपरिक नृत्य, गीत और खेलों का आयोजन करते हैं, जिससे इस मेले का सांस्कृतिक महत्व और भी बढ़ जाता है।
मेला में आए लोगों ने विशेष रूप से सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भरपूर आनंद लिया और उनकी उत्साही भागीदारी ने मेला को और भी जीवंत बना दिया। मेले के आयोजकों ने इस बार मेले के आयोजन में और भी बेहतर सुविधाएं प्रदान की थीं, जिससे यहां आने वाले दर्शकों को ज्यादा आरामदायक अनुभव हुआ।
इस प्रकार, घुरती सती घाट पर हुआ यह मेला न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय समुदायों के बीच एकता और मेलजोल का प्रतीक भी बन चुका है।