बरहरवा (साहिबगंज): बरहरवा रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ और सामाजिक संस्था मंथन की संयुक्त कार्रवाई में चार नाबालिग बच्चों को सुरक्षित संरक्षण में लिया गया। सभी बच्चे बिना अभिभावकों को बताए घर से निकलकर मजदूरी के लिए उत्तर प्रदेश के लखनऊ जाने की तैयारी में थे।
जानकारी के अनुसार, 18 जून 2026 की रात इंस्पेक्टर आरपीएफ संजीव कुमार के पर्यवेक्षण में सहायक उपनिरीक्षक सुरेश पासवान एवं मंथन संस्था की प्रतिनिधि आराधना मंडल द्वारा मानव तस्करी, घर से भागे बच्चों (TOPB) तथा अन्य संबंधित अपराधों की रोकथाम के लिए बरहरवा रेलवे स्टेशन पर विशेष जांच एवं निगरानी अभियान चलाया जा रहा था।
रात्रि लगभग 8:30 बजे स्टेशन परिसर स्थित सिग्नल ऑफिस के पास चार नाबालिग बालक संदिग्ध परिस्थिति में घूमते हुए पाए गए। पूछताछ के दौरान बच्चों ने अपनी उम्र 13, 14, 14 और 16 वर्ष बताई तथा सभी ने पाकुड़ जिले का निवासी होना स्वीकार किया।
गहन पूछताछ में बच्चों ने बताया कि वे बिना अपने परिजनों को सूचना दिए घर से निकल आए थे और मुरारोई रेलवे स्टेशन से बरहरवा पहुंचे थे। उनका उद्देश्य मजदूरी करने के लिए लखनऊ जाना था।
बच्चों की स्थिति और गतिविधियां संदिग्ध प्रतीत होने पर आरपीएफ टीम उन्हें सुरक्षा की दृष्टि से आरपीएफ पोस्ट लेकर आई। इसके बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए चारों नाबालिगों को आगे की कार्रवाई, काउंसलिंग और पुनर्वास के लिए मंथन संस्था, साहिबगंज की प्रतिनिधि आराधना मंडल को सौंप दिया गया।
आरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि रेलवे स्टेशनों पर मानव तस्करी, बाल श्रम और घर से भागे बच्चों की पहचान एवं सुरक्षा को लेकर विशेष निगरानी अभियान लगातार चलाया जा रहा है। इस कार्रवाई से चार नाबालिग बच्चों को संभावित शोषण और जोखिमपूर्ण परिस्थितियों में फंसने से बचाया जा सका।