कोलकाता : रेल पटरियों पर होने वाले आंदोलनों और रेल रोको कार्यक्रमों के कारण आम यात्रियों को होने वाली परेशानियों को लेकर पूर्व रेलवे ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। रेलवे प्रशासन ने कहा है कि ऐसे आंदोलन केवल ट्रेनों की आवाजाही को प्रभावित नहीं करते, बल्कि कई लोगों के जीवन, करियर और भविष्य पर भी गहरा असर डालते हैं। इसी संदेश को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए पूर्व रेलवे ने एक मार्मिक उदाहरण साझा किया है, जो बताता है कि कुछ घंटों का रेल अवरोध किसी व्यक्ति के सपनों को कैसे चकनाचूर कर सकता है।
पूर्व रेलवे के अनुसार, कुछ महीने पहले श्यामनगर की 24 वर्षीय लीना दास (परिवर्तित नाम) अपने जीवन के पहले नौकरी साक्षात्कार में शामिल होने के लिए सियालदह जा रही थीं। पिता के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उन पर और उनकी मां पर आ गई थी। ऐसे में यह नौकरी उनके लिए केवल एक रोजगार का अवसर नहीं, बल्कि परिवार के बेहतर भविष्य और आर्थिक सुरक्षा की उम्मीद थी।
लेकिन रास्ते में अचानक हुए रेल रोको आंदोलन के कारण उनकी ट्रेन तीन घंटे से अधिक समय तक प्रभावित रही। नतीजतन लीना समय पर इंटरव्यू स्थल तक नहीं पहुंच सकीं। जब तक वे वहां पहुंचीं, साक्षात्कार प्रक्रिया समाप्त हो चुकी थी और उनके हाथ से नौकरी का अवसर निकल गया। रेलवे का कहना है कि यह घटना केवल एक उदाहरण है, जबकि हर दिन लाखों यात्री विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यों के लिए रेल यात्रा करते हैं।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, ट्रेनों के बाधित होने से सबसे अधिक नुकसान उन लोगों को होता है जो किसी आपात स्थिति में अस्पताल जा रहे होते हैं, प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने जा रहे छात्र होते हैं, नौकरी के साक्षात्कार के लिए यात्रा कर रहे युवा होते हैं या फिर अन्य जरूरी कार्यों के लिए सफर कर रहे होते हैं। ऐसे लोगों के लिए कुछ घंटों की देरी भी जीवन बदल देने वाली साबित हो सकती है।
पूर्व रेलवे द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच उसके विभिन्न मंडलों में कुल 29 रेल रोको आंदोलन दर्ज किए गए। इनमें सबसे अधिक 22 घटनाएं सियालदह मंडल में हुईं। इसके अलावा मालदा मंडल में 4, हावड़ा में 2 और आसनसोल में 1 रेल अवरोध की घटना सामने आई। इसी अवधि में विभिन्न ट्रेड यूनियनों द्वारा 20 आम हड़तालें भी की गईं, जिनमें सियालदह में 12 और हावड़ा में 8 मामले दर्ज हुए। वहीं मालदा मंडल में एक राजनीतिक दल द्वारा चक्का जाम का मामला भी सामने आया।
रेलवे ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में भी यह समस्या बनी हुई है। अप्रैल 2026 से मई 2026 के बीच मात्र दो महीनों में ही दो नए रेल अवरोध के मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें सियालदह और हावड़ा मंडल में एक-एक घटना शामिल है।
पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक मिलिंद देऊस्कर के नेतृत्व में रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों और आम जनता की समस्याओं को सुनने तथा उनका समाधान करने के लिए वह पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रशासन का कहना है कि अपनी मांगों और शिकायतों को रखने के लिए कई वैधानिक और शांतिपूर्ण माध्यम उपलब्ध हैं, इसलिए रेल सेवाओं को बाधित करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं माना जा सकता।
रेलवे ने यह भी याद दिलाया कि भारतीय रेल अधिनियम, 1989 की धारा 174 के तहत ट्रेन संचालन में जानबूझकर बाधा पहुंचाना दंडनीय अपराध है। रेल पटरियों पर बैठकर ट्रेनों को रोकना, सिग्नलिंग प्रणाली को नुकसान पहुंचाना या अन्य किसी प्रकार से रेल संचालन में व्यवधान पैदा करना कानून का उल्लंघन है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर अधिकतम दो वर्ष तक की जेल, जुर्माना अथवा दोनों प्रकार की सजा का प्रावधान है।
पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझि ने आम जनता से अपील करते हुए कहा कि रेलवे परिवार का हर यात्री उनके लिए महत्वपूर्ण है और प्रशासन संवाद के माध्यम से हर समस्या का समाधान करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि आंदोलन का एक घंटा कुछ लोगों को मामूली विरोध लग सकता है, लेकिन यह किसी छात्र की परीक्षा, किसी मरीज के इलाज, किसी युवा के रोजगार और किसी परिवार की उम्मीदों को हमेशा के लिए प्रभावित कर सकता है। इसलिए लोगों को रेल अवरोध जैसे गैरकानूनी कदमों से बचते हुए अपनी मांगों को वैधानिक और शांतिपूर्ण तरीकों से उठाना चाहिए, ताकि किसी और लीना दास के सपने रेलवे पटरियों पर अधूरे न रह जाएं।