रांची (शुभेंदु कुमार पंडित)। देश में इन दिनों छात्र आंदोलन की आंधी चल पड़ी है, दिल्ली में जिस तरीके से छात्र आंदोलन हुए उसके बाद छात्र आंदोलन देश में फैल चुकी है। पूरे देश में भ्रष्टाचार का खोखला सिस्टम के विरुद्ध छात्र आंदोलन कर रहे है। लेकिन इस आंदोलन के बीच कई ऐसे नाम है जो की काफी चर्चा का विषय बना हुआ है,जब से सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के द्वारा आंदोलन में छात्रों को कॉकरोच कहा गया उसके बाद एक नया कॉकरोच जनता पार्टी का उदय हुआ , जो शिक्षा व्यवस्था भ्रष्टाचार, शिक्षा गुणवत्ता में सुधार को लेकर आंदोलन करते हुए नज़र आ रहे है। जैसे ही आंदोलन सक्सेस हुआ और सफलता की सीढ़ी चढ़ना स्टार्ट हुआ वैसे-वैसे देश के विभिन्न राज्यों में नौकरी की परीक्षा हो या अन्य परीक्षाएं जिससे की शैक्षणिक संस्थान में दाखिला मिलता हो उन सभी में भ्रष्टाचार के खोखले सिस्टम और व्यवस्था में सुधार को लेकर छात्र आंदोलन करते हुए दिखाई देने लगे, वर्तमान में दिल्ली के बाद बड़ा आंदोलन झारखंड में हुआ जहां 20 से अधिक दिनों तक चला और सरकार को झुकना पड़ा, लेकिन फिर आंदोलन के रूपरेखा छात्रों के द्वारा तय कर दी गई और अभी भी छात्र आंदोलन कर रहे हैं। वहीं बिहार में टीचर वैकेंसी को लेकर छात्र सड़कों पर नजर आ रहे हैं छात्र की जो मांग है, उस पर सरकार विचार कर रही लेकिन इस आंदोलन के बीच बीपीएससी परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह के द्वारा जब एक वाक्य कहा गया कि हाथी चले बाजार कुत्ता भूखे हजार और इस कुत्ता शब्द ने एक नई रूपरेखा को जन्म दे दिया अब बिहार की सड़कों पर एक महिला हाथों में पोस्टर लिए नजर आ रही है,और कह रही है ,अब कुत्ता जनता पार्टी बन चुका है अब कॉकरोच पार्टी को देखने के बाद और बिहार के आईएएस अधिकारी जो छात्रों को कुत्ता समझ रहे हैं अब बिहार के खोखला सिस्टम को कुत्ता काट खाएगा । अब सवाल यह उठता है कि किसी सीजेआइ के द्वारा कॉकरोच शब्द कहना और आईएएस अधिकारी के द्वारा कुत्ता कहना एक नई विचारधारा को जन्म दे दिया है? एक आंदोलन का नाम कहें या फिर अन्य संज्ञा अपने आप में दिया जा सकता है। लेकिन अब कॉकरोच जनता पार्टी जो प्रमुख रूप से देश भर में शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर आंदोलन कर रही है। वहीं बिहार जो आंदोलन की भूमि रही है अब एक नई व्यवस्था में सुधार को लेकर कुत्ता जनता पार्टी बन गई क्या वाकई में जो सफलता कॉकरोच को मिली वह कुत्ता को मिल पाएगा यह बड़ा सवाल है इस सवाल का जवाब आने वाले समय में मिलेगा।
हाथी चले बाजार, कुत्ता भौंके हजार’ बयान से नया विवाद
बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के परीक्षा नियंत्रक राजेश कुमार सिंह की ओर से छात्रों के आंदोलन के संदर्भ में कथित तौर पर दिए गए ‘हाथी चले बाजार, कुत्ता भौंके हजार’ वाले बयान ने विवाद को और हवा दे दी। इस बयान में इस्तेमाल किए गए ‘कुत्ता’ शब्द को लेकर छात्रों और आंदोलन से जुड़े लोगों में नाराजगी देखने को मिल रही है।अब इसी शब्द को आंदोलन के प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल करते हुए बिहार की सड़कों पर एक महिला हाथ में पोस्टर लेकर नजर आई, जिस पर ‘कुत्ता जनता पार्टी’ का उल्लेख किया गया। इसके बाद सोशल मीडिया और छात्र आंदोलनों से जुड़े हलकों में ‘कुत्ता जनता पार्टी’ नाम चर्चा में आ गया है।
कॉकरोच’ से ‘कुत्ता’ तक पहुंची आंदोलन की भाषा
छात्र आंदोलनों में इस्तेमाल हो रहे इन प्रतीकों ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या अधिकारियों या संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों द्वारा आंदोलनकारियों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले शब्द आगे चलकर आंदोलनों की पहचान और प्रतीक बन सकते हैं?
क्या ‘कुत्ता जनता पार्टी’ को भी मिलेगी सफलता?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस तरह ‘कॉकरोच’ शब्द को आंदोलनकारियों ने अपने विरोध और पहचान के प्रतीक में बदल दिया, क्या ‘कुत्ता’ शब्द भी बिहार के छात्र आंदोलन को उसी तरह नई पहचान दिला पाएगा?
बिहार लंबे समय से छात्र और युवा आंदोलनों की भूमि रहा है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था, भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को लेकर जारी आंदोलनों के बीच ‘कुत्ता जनता पार्टी’ नाम का यह नया प्रयोग आने वाले दिनों में कितना प्रभाव डालता है, यह देखना दिलचस्प होगा।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि छात्र आंदोलनों की आवाज अब केवल परीक्षा और नौकरी की मांग तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि व्यवस्था में सुधार और सम्मानजनक संवाद की मांग भी आंदोलन का हिस्सा बनती जा रही है। ‘कॉकरोच’ के बाद ‘कुत्ता’ शब्द का आंदोलन के प्रतीक में बदलना इसी बदलते दौर की एक नई तस्वीर पेश कर रहा है।